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  "type": "article",
  "title": "शराब निर्माताओं पर FSSAI का शिकंजा, व्हिस्की और रम में फ्लेवर मिलाने पर जारी हुए नोटिस",
  "summary": "भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने व्हिस्की, रम और बीयर जैसी शराब में बाहरी फ्लेवर मिलाने को लेकर शराब कंपनियों को नोटिस भेजा है। इसके अलावा, लेबल पर उम्र संबंधी दावों की सत्यता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।",
  "content": "भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने शराब निर्माताओं के खिलाफ एक सख्त कदम उठाते हुए कई कंपनियों को नोटिस जारी किए हैं। यह कार्रवाई मुख्य रूप से उन उत्पादों पर केंद्रित है जिनमें व्हिस्की, रम, ब्रांडी, जिन, वाइन और बीयर शामिल हैं। नियामक का आरोप है कि इन पेय पदार्थों में अतिरिक्त फ्लेवरिंग पदार्थों का उपयोग किया गया है, जो नियमों के दायरे से बाहर हो सकता है। मौजूदा नियमों के अनुसार, इन पारंपरिक शराबों को उनके प्राकृतिक स्वाद प्रोफाइल को बनाए रखना अनिवार्य है, जबकि नियामक का मानना है कि इन एडिटिव्स का उपयोग करके स्वाद और सुगंध की नकल की जा रही है।\n\nभारत के बदलते शराब बाजार की हकीकत\nभारत में शराब का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है और इसमें फ्लेवर-युक्त पेय पदार्थों की मांग काफी अधिक है। लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया भर में 2025 में 73% 'जेन जी' (Gen Z) वयस्कों ने शराब का सेवन किया, जो दो साल पहले 66% था। भारत में भी युवा पीढ़ी अब ऐसे उत्पादों की ओर आकर्षित हो रही है जो स्वाद और प्रीमियम अनुभव पर आधारित हैं। ब्रांड्स युवाओं को लुभाने के लिए आम, जामुन और ठंडाई जैसे फ्लेवर वाली वोदका बाजार में उतार रहे हैं। इसके अलावा, दक्षिण कोरियाई संस्कृति के प्रभाव से 'सोजू' (Soju) की मांग भी तेजी से बढ़ी है। 'सो गुड सोजू' और 'जिनरो चामिसुल' जैसे नाम अब भारत में फल-आधारित कम अल्कोहल वाले विकल्पों के साथ अपनी पहुंच बढ़ा रहे हैं। रेडी-टू-ड्रिंक कॉकटेल और हार्ड सेल्टजर भी इस दौर के बड़े खिलाड़ी हैं, जिनमें साल-दर-साल 11% की वृद्धि देखी गई है।\n\nनियामक की कार्रवाई के पीछे के कारण\nFSSAI का मुख्य तर्क यह है कि शराब कंपनियां 'खाद्य सुरक्षा और मानक (अल्कोहलिक बेवरेजेस) विनियम, 2018' का उल्लंघन कर रही हैं। केवल फ्लेवर का मामला ही नहीं, बल्कि नियामक ने उत्पादों पर की जाने वाली उम्र संबंधी गलत घोषणाओं को भी चिह्नित किया है। कंपनियों से पूछा गया है कि क्यों न उन पर 'खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006' के तहत कार्रवाई की जाए। दूसरी ओर, 'कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज' (CIABC) ने दावा किया है कि उनके सदस्य FSSAI के सभी दिशानिर्देशों का पूरी तरह से पालन कर रहे हैं। नियामक का मानना है कि उपभोक्ताओं को यह पता होना चाहिए कि वे असल में क्या खरीद रहे हैं। यदि व्हिस्की या रम के नाम पर बेचे जा रहे उत्पाद में बाहरी स्वाद जोड़ा गया है, तो यह ग्राहक के साथ भ्रामक व्यवहार है।\n\nआर्थिक परिदृश्य और राज्य-स्तरीय कानून\nभारत का शराब उद्योग एक विशाल बाजार है, जिसका मूल्य 2025 में ₹5.3 लाख करोड़ होने का अनुमान है। यह क्षेत्र भारत की जीडीपी में लगभग 2% का योगदान देता है। 'इंटरनेशनल स्पिरिट्स एंड वाइन्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया' (ISWAI) का अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में यह आंकड़ा ₹6.21 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। इसके अलावा, यह क्षेत्र 80 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देता है और राज्यों के कर राजस्व में 24.6% का योगदान देता है। हालांकि, भारत में शराब के लिए कोई एक केंद्रीय कानून नहीं है। गुजरात, बिहार, नागालैंड और मिजोरम में पूर्ण शराबबंदी है, जबकि कर दरें राज्य दर राज्य बदलती रहती हैं। कर्नाटक में यह कर MRP के 83% तक हो सकता है, जबकि गोवा और हरियाणा में यह 47-49% के आसपास रहता है। केंद्र सरकार केवल आयातित शराब पर लगने वाले सीमा शुल्क को नियंत्रित करती है, बाकी अधिकार राज्यों के पास हैं। वर्तमान में, कंपनियों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का मौका दिया गया है, जिसके बाद लेबलिंग या उत्पाद विवरण में बदलाव जैसे सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: यदि आप प्रीमियम या फ्लेवर वाली शराब खरीदते हैं, तो भविष्य में लेबलिंग नियमों के कड़े होने के कारण उत्पादों की उपलब्धता या ब्रांडिंग में बदलाव देखने को मिल सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. FSSAI ने शराब कंपनियों को नोटिस क्यों भेजा है?\nFSSAI ने व्हिस्की, रम और बीयर जैसे पेय पदार्थों में अतिरिक्त फ्लेवर मिलाने और उम्र संबंधी भ्रामक लेबलिंग के दावों को लेकर कंपनियों को नोटिस भेजा है।\n\n2. शराब के मामले में राज्यों की क्या भूमिका है?\nभारत में शराब एक राज्य का विषय है, इसलिए हर राज्य के अपने उत्पाद शुल्क (excise) कानून, कर की दरें और नियम होते हैं।\n\n3. भारत का शराब बाजार कितना बड़ा है?\n2025 में भारतीय शराब उद्योग का अनुमानित मूल्य ₹5.3 लाख करोड़ है, जो देश की जीडीपी में लगभग 2% का योगदान देता है।\n\n4. क्या इन नोटिसों के बाद शराब पर प्रतिबंध लग जाएगा?\nनहीं, ये नोटिस स्पष्टीकरण मांगने के लिए हैं। कंपनियों को नियमों का अनुपालन साबित करना होगा, जिसके बाद लेबल में बदलाव जैसे निर्देश दिए जा सकते हैं।",
  "url": "https://trendkia.com/investigations/sharaba-nirmataon-para-fssai-ka-shiknja-vhiski-aura-rama-men-phlevara-milane-para-jari-hue-notisa-6959",
  "category": "पड़ताल",
  "publishedAt": "2026-07-12",
  "tags": [
    "शराब",
    "FSSAI",
    "व्हिस्की",
    "खाद्य-सुरक्षा",
    "बाजार-रुझान"
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  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
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