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  "title": "सिया गोयल और चेतन चौधरी को न्यायिक हिरासत, चैट में मिले कोड वर्ड्स ने उलझाई जांच",
  "summary": "पुणे के केतन अग्रवाल हत्याकांड में आरोपी सिया गोयल के घर से मिले पुराने मोबाइल और चैट में मिले कोड वर्ड्स ने जांच को नया मोड़ दे दिया है। अदालत ने पुलिस हिरासत बढ़ाने की मांग ठुकराकर दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।",
  "content": "पुणे के व्यवसायी केतन अग्रवाल हत्याकांड में आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी को अदालत में पेश किया गया, जहां सरकारी पक्ष ने आगे की जांच के लिए दोनों की पुलिस हिरासत बढ़ाने की मांग रखी। जेएमएफसी ए. एम. विभूते की अदालत में हुई सुनवाई में सरकारी वकील अधिवक्ता राजश्री वीरकुड ने दलील दी कि जांच के दौरान सिया गोयल के घर से करीब एक साल पुराना एक मोबाइल फोन बरामद हुआ है।\n\nफोन से मिले डिजिटल सबूत\nअभियोजन पक्ष के मुताबिक आरोपी के मौजूदा मोबाइल फोन से डिलीट किया गया डेटा भी रिकवर कर लिया गया है। हालांकि इन बरामद चैट में कथित तौर पर कई जगह कोड वर्ड और निकनेम इस्तेमाल किए गए हैं, जिनका मतलब समझने के लिए गहन जांच और आरोपियों से विस्तृत पूछताछ बेहद जरूरी बताई गई है। जांच एजेंसी का कहना है कि इन कोडेड बातचीत के पीछे छिपे मकसद को समझे बिना जांच पूरी नहीं हो सकती।\n\nपुलिस के पांच आधार\nसरकारी वकील अधिवक्ता विपुल दुशिंग ने अदालत को बताया कि पुलिस ने हिरासत बढ़ाने की मांग के समर्थन में कुल पांच आधार पेश किए हैं। अभियोजन पक्ष का कहना था कि आरोपियों के बीच कथित कोड भाषा में हुई बातचीत का अर्थ समझने और उनसे बरामद डिजिटल सबूतों के आधार पर पूछताछ करने से जांच को आगे बढ़ाने में सीधी मदद मिलेगी।\n\nबचाव पक्ष ने बताया फिशिंग इन्क्वायरी\nवहीं बचाव पक्ष ने पुलिस की इस मांग का कड़ा विरोध किया। बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत में कहा कि जांच एजेंसी केवल नए सबूत तलाशने की उम्मीद में एक फिशिंग इन्क्वायरी कर रही है। दलील दी गई कि 12 दिनों की पुलिस हिरासत पूरी होने के बाद अब बिना किसी ठोस और विशेष आधार के आगे की रिमांड नहीं मांगी जा सकती। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि चैट में मिले कथित कोड नेम और निकनेम के आधार पर आरोपियों से ऐसा स्पष्टीकरण मांगना जो उन्हें खुद के खिलाफ बयान देने पर मजबूर करे, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 20 के तहत मिली सुरक्षा के खिलाफ है।\n\nअदालत ने भेजा न्यायिक हिरासत में\nअभियोजन पक्ष ने अपनी दलील दोहराते हुए कहा कि आगे की पुलिस हिरासत जांच में सीधे तौर पर सहायक साबित होगी और लंबित जांच पूरी करने के लिए यह बेहद जरूरी है। दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनने के बाद अदालत ने सिया गोयल और चेतन चौधरी दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।\n\nक्या है पूरा मामला\nदरअसल पुणे के व्यवसायी केतन अग्रवाल की हत्या लोहागढ़ किले में की गई थी। इस हत्याकांड में आरोप उनकी मंगेतर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन पर लगा है। पुलिस लगातार दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है और फिलहाल दोनों न्यायिक हिरासत में हैं।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: यह मामला दिखाता है कि हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में पुलिस मोबाइल डेटा और चैट के जरिए सबूत कैसे जुटाती है, और आरोपियों के संवैधानिक अधिकारों (अनुच्छेद 20) को लेकर अदालत में क्या दलीलें दी जाती हैं।\n• पुणे में: लोहागढ़ किले से जुड़े इस चर्चित मामले पर पुणेवासियों की नजर बनी हुई है, क्योंकि दोनों आरोपी अब न्यायिक हिरासत में हैं और आगे की सुनवाई पर लोगों की दिलचस्पी बरकरार रहेगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. केतन अग्रवाल की हत्या कहां हुई थी?\nपुणे के व्यवसायी केतन अग्रवाल की हत्या लोहागढ़ किले में की गई थी।\n\n2. इस मामले में मुख्य आरोपी कौन हैं?\nकेतन अग्रवाल की मंगेतर सिया गोयल और उसका प्रेमी चेतन चौधरी इस मामले में मुख्य आरोपी हैं।\n\n3. सिया गोयल के घर से पुलिस को क्या बरामद हुआ?\nपुलिस को सिया गोयल के घर से करीब एक साल पुराना एक मोबाइल फोन बरामद हुआ है, और मौजूदा मोबाइल से डिलीट किया गया डेटा भी रिकवर किया गया है।\n\n4. बरामद चैट में क्या खास बात सामने आई?\nचैट में कथित तौर पर कोड वर्ड और निकनेम इस्तेमाल किए गए हैं, जिनका मतलब समझने के लिए गहन जांच जरूरी बताई गई है।\n\n5. पुलिस ने हिरासत बढ़ाने के लिए अदालत में कितने आधार पेश किए?\nसरकारी वकील अधिवक्ता विपुल दुशिंग ने अदालत में कुल पांच आधार पेश किए।\n\n6. बचाव पक्ष ने पुलिस हिरासत बढ़ाने की मांग का विरोध क्यों किया?\nबचाव पक्ष ने कहा कि यह सिर्फ फिशिंग इन्क्वायरी है, 12 दिन की हिरासत के बाद बिना ठोस आधार रिमांड नहीं मांगी जा सकती, और यह अनुच्छेद 20 के तहत मिले अधिकारों का उल्लंघन है।\n\n7. अदालत ने आखिर में क्या फैसला सुनाया?\nदोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सिया गोयल और चेतन चौधरी दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।",
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  "category": "पड़ताल",
  "publishedAt": "2026-07-03",
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    "केतन अग्रवाल हत्याकांड",
    "सिया गोयल",
    "चेतन चौधरी",
    "लोहागढ़ किला",
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    "पुलिस हिरासत"
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