धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्ष ने क्यों बदला निशाना, क्या अमित शाह के खिलाफ रणनीति लाएगी रंग धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ने के बाद विपक्ष ने अपनी रणनीति बदलते हुए गृह मंत्री अमित शाह को निशाना बनाया है। संसद से लेकर सड़क तक हंगामे के बीच यह देखना अहम है कि क्या यह दांव सफल होगा या उल्टा पड़ेगा। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के तुरंत बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने अपना आंदोलन समाप्त कर लिया, लेकिन विपक्ष ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए अपना नया निशाना गृह मंत्री अमित शाह को बना लिया है। राहुल गांधी के सवाल और तीखे आरोप रणनीति में इस बदलाव का पहला संकेत 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मिला। धर्मेंद्र प्रधान को घेरने के बजाय राहुल गांधी ने सीधे अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों के हाथ टूटे, तो कुछ की पसलियों और टांगों में फ्रैक्चर हुआ। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया और कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जिसके लिए सीधे तौर पर गृह मंत्री अमित शाह जिम्मेदार हैं। राहुल गांधी ने अमित शाह के सामने दो मुख्य सवाल रखे। पहला सवाल यह था कि गृह मंत्री के तौर पर क्या उन्होंने छात्रों पर पैलेट गन चलाने का आदेश दिया था और अगर नहीं, तो फिर यह आदेश किसने दिया। दूसरा सवाल यह उठाया गया कि छात्रों पर हमला करने वाले सादे कपड़ों में मौजूद लोग पुलिसकर्मी थे या फिर पार्टी के स्वयंसेवक और उन्हें किसने तैनात किया था। कांग्रेस पार्टी को लंबे समय से कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार आदेश रावल का कहना है कि राहुल गांधी गृह मंत्री अमित शाह की जवाबदेही तय कर रहे हैं और उनका आरोप है कि गृह मंत्री के निर्देशों पर ही छात्रों पर लाठियों और पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। संसद के भीतर और बाहर विपक्षी दलों की संयुक्त रणनीति गृह मंत्री अमित शाह को घेरना अब विपक्ष की साझा रणनीति बन चुकी है। 27 जुलाई को छह ऐसे घटनाक्रम सामने आए जो इसी रणनीति की ओर इशारा करते हैं। जब सुबह 11 बजे सदन की बैठक शुरू हुई तो विपक्ष ने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज पर चर्चा की मांग को लेकर भारी हंगामा किया। लोकसभा अध्यक्ष को चार बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी और एक विधेयक पेश किए जाने के अलावा कोई अन्य विधाई कामकाज नहीं हो सका। दोनों सदनों में स्थगन प्रस्ताव दिए गए। लोकसभा में कांग्रेस के नेताओं के.सी. वेणुगोपाल और हिबी ईडन ने स्थगन नोटिस दिए, जबकि राज्यसभा में रेणुका चौधरी ने भी इस मुद्दे पर चर्चा की मांग उठाई। इसके अलावा संसद के बाहर कांग्रेस सांसदों ने प्रदर्शन मार्च निकाला और अमित शाह जवाब दो के नारे लगाए। सोशल मीडिया पर भी विपक्षी दल आक्रामक नजर आए। ऑल इंडिया महिला कांग्रेस ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि अमित शाह जवाब दें और लाठीचार्ज के बारे में स्पष्टीकरण दें। टीएमसी सांसद महुआ मोत्रा ने कहा कि दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ की आरएएफ दोनों सीधे तौर पर अमित शाह के अधीन आती हैं, इसलिए या तो उन्होंने आदेश दिए थे या फिर उन्हें बताना होगा कि आदेश किसने दिए थे। संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले 27 जुलाई को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे के कमरे में विपक्षी नेताओं की एक बैठक हुई, जिसमें यह तय किया गया कि सदन की कार्यवाही को बाधित किया जाएगा और गृह मंत्री से जवाब मांगा जाएगा। ध्यातव्य है कि 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान तैनात की गई दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ की रैपिड एक्शन फोर्स यानी आरएएफ दोनों ही केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत आती हैं। राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई का मानना है कि नीट पेपर लीक के मुद्दे से अब कांग्रेस को हासिल करने के लिए ज्यादा कुछ नहीं बचा है, इसलिए वह लाठीचार्ज को लेकर छात्रों के गुस्से को अमित शाह की तरफ मोड़ने की कोशिश कर रही है। वरिष्ठ पत्रकार नीरज चौधरी के अनुसार, विपक्ष सरकार पर पहले से बन रहे दबाव को और बढ़ाना चाहता है और उसकी जवाबदेही तय करना चाहता है। सरकार का पलटवार और जवाबी रणनीतिक कदम विपक्ष के हमलों का जवाब देने के लिए सरकार ने तीन चरणों में अपनी रणनीति को आगे बढ़ाया है। परीक्षा सुधारों के लिए 26 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक उच्च स्तरीय कार्यबल के गठन का ऐलान किया। इस पैनल के प्रमुख इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी हैं और इसमें आईबी के पूर्व प्रमुख तपन डेका, इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ, आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटी, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अमृत लाल मीणा को शामिल किया गया है। इसके अलावा सरकार ने 27 जुलाई को संसद में सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक पेश किया। इस नए कानून के तहत पेपर लीक में शामिल लोगों के लिए 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है, साथ ही केंद्र सरकार को एक विशेष कार्यबल गठित करने का अधिकार भी दिया गया है। जब 27 जुलाई की सुबह धर्मेंद्र प्रधान संसद पहुंचे तो एनडीए के सांसदों ने शॉल ओढ़ाकर और मिथिला पगड़ी पहनाकर उनका स्वागत किया और धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद के नारे लगाए। राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई का कहना है कि सरकार चाहती है कि संसद सुचारू रूप से चले क्योंकि चर्चाओं से बीजेपी को फायदा मिलता है। उनका मानना है कि विपक्ष सदन की कार्यवाही में बाधा डाल सकता है, लेकिन सरकार के पास उसका मुकाबला करने के लिए पर्याप्त मजबूत वक्ता मौजूद हैं। वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी का कहना है कि सरकार ऐसा बिल्कुल नहीं दिखाना चाहेगी कि वह विपक्ष के सामने झुक गई है और वह इस गतिरोध को खत्म करने के रास्ते तलाशेगी। बीजेपी सांसद राहुल सिन्हा का कहना है कि छात्रों ने प्रधानमंत्री के फैसलों को स्वीकार कर लिया है और कांग्रेस केवल इसलिए इस मुद्दे को जिंदा रखना चाहती है क्योंकि उसे इस विधेयक पर चर्चा होने का डर सता रहा है। क्या विपक्ष का यह दांव उल्टा पड़ सकता है अमित शाह के खिलाफ अपनाई गई इस रणनीति की सफलता पूरी तरह से जनता के मूड पर निर्भर करती है। चूंकि संसद में सरकार के पास बहुमत है, इसलिए विपक्ष सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक को रोक नहीं सकता। ऐसे में संसद की कार्यवाही में बाधा डालना ही उसके पास मुख्य विकल्प बचता है। राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई का कहना है कि चूंकि विपक्ष इस विधेयक का खुलकर विरोध नहीं कर सकता, इसलिए वह दूसरे मुद्दों को उठा रहा है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जब बीजेपी विपक्ष में हुआ करती थी, तो उसने भी इसी तरह की रणनीति अपनाई थी। दूसरी तरफ सरकार का तर्क है कि छात्र आंदोलन समाप्त हो चुका है और यह मामला पूरी तरह सुलझ चुका है। सरकार विपक्षी दलों पर राजनीतिक फायदों के लिए संसद को ठप करने का आरोप लगा रही है, बजाय इसके कि वे परीक्षा संशोधन विधेयक पर स्वस्थ चर्चा में हिस्सा लें। आखिरकार इसका परिणाम जनभावनाओं पर ही टिकेगा। अगर छात्रों के खिलाफ हुई कार्रवाई पर जनता का गुस्सा अभी भी बरकरार है, तो अमित शाह को निशाना बनाने से विपक्ष को राजनीतिक लाभ मिल सकता है। लेकिन अगर जनता को यह विश्वास हो गया कि इस मामले का समाधान निकाला जा चुका है, तो यह रणनीति विपक्ष पर भारी भी पड़ सकती है। कॉकरोच जनता पार्टी का रुख और आगे की स्थिति इस पूरे घटनाक्रम के बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने न तो छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से कोई सवाल किया है और न ही विपक्ष की इस नई रणनीति का समर्थन किया है। इस पार्टी ने लगातार अपने इस आंदोलन को गैर-राजनीतिक करार दिया है और कहा है कि इसमें बीजेपी समर्थकों समेत कोई भी व्यक्ति समर्थन देने के लिए आ सकता है। इस पूरे प्रकरण के दौरान राहुल गांधी ने भी अपनी किसी भी बात में कॉकरोच जनता पार्टी या अभिजीत दिपके का कोई जिक्र नहीं किया। 26 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा था कि सरकार को अपने उस वादे का सम्मान करना चाहिए जिसके तहत उसने कहा था कि विरोध प्रदर्शन में शामिल होने वाले किसी भी छात्र के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी और उनके ऊपर दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएंगे। इसका आप पर असर भारत में: संसद में जारी गतिरोध और विधाई कार्यों के बाधित होने से नीतिगत फैसलों और नए विधेयकों पर चर्चा में देरी हो सकती है। राजनीतिक स्तर पर: छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक दलों के बीच टकराव बढ़ने से आम जनता और प्रशासनिक व्यवस्था पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है। सवाल-जवाब 1. विपक्ष ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अपना नया निशाना किसे बनाया है? विपक्ष ने अपनी रणनीति बदलते हुए गृह मंत्री अमित शाह को अपना नया निशाना बनाया है। 2. राहुल गांधी ने अमित शाह से कौन से मुख्य सवाल पूछे हैं? राहुल गांधी ने पूछा है कि क्या गृह मंत्री ने छात्रों पर पैलेट गन चलाने का आदेश दिया था और प्रदर्शनकारियों पर हमला करने वाले सादे कपड़ों के लोग कौन थे। 3. सरकार ने परीक्षा सुधारों के लिए किस पैनल का गठन किया है? सरकार ने इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कार्यबल का गठन किया है। 4. सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक में क्या सजा का प्रावधान है? इस विधेयक में पेपर लीक में शामिल लोगों के लिए 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है। https://trendkia.com/investigations/why-the-opposition-shifted-target-to-amit-shah-after-pradhan-s-exit-and-will-this-gamble-work-11138 TrendKia — Har trend, sabse pehle.