# विश्व बैंक और IMF लोन का सच: जवाहर सरकार के दावे के बाद भारत और पाकिस्तान के विदेशी कर्ज की पूरी हकीकत

> पूर्व आईएएस अधिकारी जवाहर सरकार की एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद भारत और पाकिस्तान के विदेशी कर्ज को लेकर चर्चा छिड़ गई है। जानिए वर्ल्ड बैंक और आईएमएफ के आंकड़ों के साथ दोनों देशों की आर्थिक स्थिति का असली सच।

**Type:** article · **Category:** पड़ताल · **Published:** 2026-08-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/investigations/world-bank-aura-imf-karja-tulana-jawhar-sircar-ke-posta-ke-bada-india-aura-pakistan-ke-videshi-karja-ka-pura-sacha-16185 · **Language:** Hindi
**Tags:** भारत का विदेशी कर्ज, पाकिस्तान का कर्ज, विश्व बैंक, आईएमएफ, जवाहर सरकार, भारतीय अर्थव्यवस्था, जीडीपी तुलना, विदेशी मुद्रा भंडार

पूर्व आईएएस अधिकारी और पूर्व राज्यसभा सांसद जवाहर सरकार की हालिया एक्स (ट्विटर) पोस्ट ने देश भर में एक नई आर्थिक बहस छेड़ दी है। उनकी इस पोस्ट को 15 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। जवाहर सरकार ने अपनी पोस्ट में उल्लेख किया था कि भारत पर विश्व बैंक का बकाया कर्ज लगभग 3.3 लाख करोड़ रुपये है, जबकि पाकिस्तान पर अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का कर्ज लगभग 85,000 करोड़ रुपये है। पहली नज़र में देखने पर भारत का यह आंकड़ा पाकिस्तान की तुलना में काफी बड़ा नजर आता है, जिसके कारण सोशल मीडिया पर यह सवाल तेजी से वायरल होने लगा कि क्या भारत की आर्थिक स्थिति पाकिस्तान से अधिक चिंताजनक है।

## सोशल मीडिया पोस्ट का दावा और आंकड़ों की वास्तविक स्थिति
एकल ऋण आंकड़े को देखकर यह निष्कर्ष निकालना कि भारत पर पाकिस्तान से अधिक विदेशी कर्ज का बोझ है, आर्थिक रूप से पूरी तरह सही नहीं है। आईएमएफ के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत पर आईएमएफ का कोई भी आपातकालीन बकाया ऋण नहीं है और उसकी क्रेडिट राशि व्यावहारिक रूप से शून्य है। इसके विपरीत, पाकिस्तान पर केवल आईएमएफ ही नहीं, बल्कि विश्व बैंक का भी भारी कर्ज बकाया है। वैश्विक तुलना की बात करें तो अर्जेंटीना पर आईएमएफ का 42 अरब अमेरिकी डॉलर यानी 3.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज बकाया है, जो पाकिस्तान के कुल आईएमएफ ऋण से कई गुना अधिक है। इसके अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम जैसी दुनिया की बड़ी विकसित अर्थव्यवस्थाओं पर भी भारत की तुलना में बहुत अधिक कुल सार्वजनिक कर्ज है, लेकिन उन्हें केवल किसी एक ऋण संख्या के आधार पर संकटग्रस्त नहीं माना जाता। अर्थशास्त्री किसी देश की कर्ज स्थिति का मूल्यांकन उसकी कुल अर्थव्यवस्था, जीडीपी के अनुपात, विदेशी मुद्रा भंडार और ब्याज चुकाने की क्षमता के आधार पर करते हैं।

## भारत आखिर क्यों लेता है विश्व बैंक से कर्ज?
भारत जैसी तेजी से बढ़ती और बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए भी एक ही साल के टैक्स कलेक्शन से दीर्घकालिक सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का निर्माण करना संभव नहीं होता। इसी कारण भारत विश्व बैंक जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से दीर्घकालिक विकास ऋण लेता है। उदाहरण के लिए, विश्व बैंक के आकलन के अनुसार भारत के शहरी जल क्षेत्र को ही अगले 15 वर्षों में लगभग 12 से 13 लाख करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता होगी। इसके अतिरिक्त, विश्व बैंक भारत के बांध सुरक्षा कार्यक्रम का समर्थन कर रहा है, जो 500 से अधिक बांधों की सुरक्षा सुधार और 6,200 से अधिक बांधों से जुड़े व्यापक तंत्र को कवर करता है। हालिया परियोजनाओं पर नजर डालें तो 2026 में राजस्थान के लिए राजमार्गों, सड़क सुरक्षा और आर्थिक गलियारों के विकास हेतु वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई थी, जिससे 30 लाख से अधिक लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। इसी तरह हरियाणा में नहरों के जीर्णोद्धार और सूक्ष्म सिंचाई के लिए लगभग 5,700 करोड़ रुपये का कार्यक्रम चल रहा है, जबकि उत्तर प्रदेश और हरियाणा में स्वच्छ हवा से जुड़ी पहलों का लक्ष्य 27 करोड़ लोगों के वायु गुणवत्ता सुधार में योगदान देना है।

## सरकारी कर्ज का भुगतान कौन करता है और कैसे चुकाई जाती है रकम?
जब भी कोई अंतरराष्ट्रीय ऋण लिया जाता है, तो वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा लिया जाता है। कानूनी रूप से इसे चुकाने का दायित्व सरकार का होता है, न कि किसी व्यक्तिगत नागरिक का। हालांकि, इस कर्ज को चुकाने के लिए जिस धन का उपयोग किया जाता है, वह अंततः सार्वजनिक खजाने से ही आता है। सरकार अपने वार्षिक बजट के माध्यम से इन ऋणों का पुनर्भुगतान करती है। बजट का मुख्य स्रोत वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी), आयकर, सीमा शुल्क और आबकारी शुल्क जैसे विभिन्न कर संग्रह होते हैं। यदि किसी वर्ष राजस्व कम रहता है, तो सरकार को अन्य स्रोतों से उधारी लेनी पड़ती है या अन्य मदों में खर्च कटौती करनी पड़ती है। भारत के केंद्रीय बजट का एक बड़ा हिस्सा हर साल पहले से चले आ रहे कर्जों के ब्याज भुगतान में खर्च होता है। जब सरकारें विकास परियोजनाओं के लिए कर्ज लेती हैं, तो उनका उद्देश्य यह होता है कि परियोजना से देश की आर्थिक वृद्धि, रोजगार और जनसुविधाओं में इतना सुधार हो जो भविष्य में कर्ज चुकाने की लागत को सही ठहरा सके।

## पाकिस्तान क्यों बार-बार जाता है आईएमएफ के पास?
पाकिस्तान के आर्थिक इतिहास को देखें तो वह अपने विदेशी मुद्रा भंडार और भुगतान संतुलन के संकट के कारण बार-बार आईएमएफ की शरण में जाने के लिए मजबूर हुआ है। जब किसी देश का विदेशी मुद्रा भंडार गिरने लगता है, तो उसके लिए ईंधन, खाद्य सामग्री और आवश्यक मशीनों जैसी बुनियादी वस्तुओं का आयात करना बेहद कठिन हो जाता है। 1980 के दशक के उत्तरार्ध से लेकर अब तक पाकिस्तान 20 से अधिक बार आईएमएफ के बेलआउट कार्यक्रमों में शामिल हो चुका है, जिनमें 2008, 2013, 2019 और 2024 के प्रमुख वित्तीय समझौते शामिल हैं। आईएमएफ का हर बेलआउट पैकेज कड़ी शर्तों के साथ आता है, जिनमें राजकोषीय सख्ती, सब्सिडी में कटौती और टैक्स सुधार शामिल होते हैं। पाकिस्तानी सरकारों को सलाह दे चुके जाने-माने अर्थशास्त्री डॉ. कैसर बंगाली ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान खुद को एक ऐसे चक्र में फंसा चुका है, जहां वह दीर्घकालिक रणनीतियों के बजाय केवल विदेशी सहायता, ऋण और बेलआउट जैसे अल्पकालिक राहत उपायों पर पूरी तरह निर्भर हो गया है।

## अर्थव्यवस्था का आकार और कर्ज चुकाने की क्षमता
जेएनयू के अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ डॉ. राजन कुमार के अनुसार, यदि किसी देश की अर्थव्यवस्था का आकार बहुत बड़ा है, तो केवल कर्ज का आंकड़ा बड़ा होना संकट का संकेत नहीं होता। भारत की जीडीपी वर्तमान में 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है, जबकि पाकिस्तान की जीडीपी लगभग 400 से 450 अरब अमेरिकी डॉलर के बीच है। इसका सीधा अर्थ यह है कि भारत की अर्थव्यवस्था पाकिस्तान से लगभग 10 गुना बड़ी है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पिछले कई वर्षों से लगातार दबाव में रही है। एफएटीएफ से जुड़ी चिंताओं के कारण कई अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों ने पाकिस्तान को कर्ज देने में सतर्कता बरती है, और पाकिस्तान को समय पर अपने पुराने कर्जों का भुगतान करने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। पाकिस्तान ने सऊदी अरब और चीन जैसे मित्र देशों की वित्तीय मदद पर भरोसा किया है, जबकि चीन ने भी अपने बकाया कर्जों की वापसी के लिए दबाव बनाया है। इसलिए पाकिस्तान की ओर से भारत के कर्ज आंकड़े से तुलना करना भ्रामक है, क्योंकि भारत पर वर्तमान में कर्ज न चुका पाने का कोई जोखिम नहीं है।

## 1991 बनाम आज का भारत: क्या दोबारा आ सकता है संकट?
प्रख्यात अर्थशास्त्री और विश्व बैंक के पूर्व अधिकारी डॉ. इशरत हुसैन ने भारत और पाकिस्तान के आर्थिक रास्तों के अलग होने पर काफी विस्तार से लिखा है। उनके अनुसार, 1980 के दशक में पाकिस्तान की प्रति व्यक्ति जीडीपी भारत से आगे थी, लेकिन पाकिस्तान की ढांचागत विफलताओं, राजनीतिक अस्थिरता, लगभग 15 प्रतिशत की कम निवेश दर और गहरे आर्थिक सुधारों के अभाव के कारण वह काफी पीछे छूट गया। इसके विपरीत भारत ने एक विविधतापूर्ण और आंतरिक रूप से मजबूत अर्थव्यवस्था का निर्माण किया है जो विदेशी बेलआउट पर निर्भर नहीं है। आज के भारत की स्थिति 1991 के संकट काल से पूरी तरह भिन्न है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार वर्तमान में लगभग 700 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 58 लाख करोड़ रुपये) के स्तर पर है, जो कई महीनों के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है। यदि वैश्विक मंदी, तेल की कीमतों में अत्यधिक उछाल और निर्यात में भारी गिरावट जैसे कई बड़े आर्थिक झटके एक साथ न लगें, तो भारत के लिए आईएमएफ से तत्काल बेलआउट लेने जैसी स्थिति बनने की संभावना बेहद कम है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** विश्व बैंक से मिलने वाले कर्ज का बड़ा हिस्सा सड़कों, जल प्रबंधन और स्वच्छ हवा जैसे दीर्घकालिक बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में इस्तेमाल होता है, जिससे आम नागरिकों की जनसुविधाओं में सुधार आता है।

**टैक्सपेयर्स के लिए:** सरकारी कर्ज का भुगतान अंततः जीएसटी, आयकर और अन्य राजस्व के जरिए बजट से किया जाता है, जिसके लिए केंद्र सरकार हर साल ब्याज भुगतान पर भारी राशि खर्च करती है।

## सवाल-जवाब

### 1. पूर्व आईएएस जवाहर सरकार ने भारत और पाकिस्तान के कर्ज को लेकर क्या आंकड़े पोस्ट किए थे?
जवाहर सरकार ने पोस्ट में बताया था कि भारत पर विश्व बैंक का कर्ज लगभग 3.3 लाख करोड़ रुपये है, जबकि पाकिस्तान पर आईएमएफ का कर्ज लगभग 85,000 करोड़ रुपये है।

### 2. क्या भारत पर पाकिस्तान से अधिक विदेशी कर्ज का संकट है?
नहीं, केवल एक बैंक के कर्ज आंकड़े से तुलना करना भ्रामक है। भारत की अर्थव्यवस्था पाकिस्तान से 10 गुना बड़ी (4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक) है और भारत पर आईएमएफ का कोई आपातकालीन कर्ज बकाया नहीं है।

### 3. भारत विश्व बैंक से कर्ज क्यों लेता है?
भारत दीर्घकालिक बुनियादी ढांचा विकास जैसे बांध सुरक्षा, सडकों के निर्माण, नहर जीर्णोद्धार और वायु गुणवत्ता सुधार जैसी बड़े बजट की परियोजनाओं को पूरा करने के लिए विश्व बैंक से विकास ऋण लेता है।

### 4. पाकिस्तान बार-बार आईएमएफ बेलआउट क्यों लेता है?
पाकिस्तान घटते विदेशी मुद्रा भंडार और भुगतान संतुलन के संकट के कारण 1980 के दशक से अब तक 20 से अधिक बार आईएमएफ के बेलआउट कार्यक्रमों में जा चुका है।

### 5. भारत का विदेशी मुद्रा भंडार कितना है?
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार वर्तमान में लगभग 700 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 58 लाख करोड़ रुपये) के स्तर पर है, जो कई महीनों के आयात के लिए पर्याप्त है।

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