# अनुच्छेद 370 निरसन के 7 साल बाद इंफ्रास्ट्रक्चर और रिकॉर्ड पर्यटन के दम पर तेजी से बदला जम्मू-कश्मीर

> संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के 7 साल बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थितियों में सुधार के साथ बुनियादी ढांचे और पर्यटन क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। रिकॉर्ड 2.35 करोड़ से अधिक पर्यटकों के आगमन और प्रमुख रेल-सड़क परियोजनाओं ने केंद्र शासित प्रदेश के आर्थिक विकास को नई गति दी है।

**Type:** article · **Category:** जम्मू-कश्मीर · **Published:** 2026-08-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jammu-kashmir/anuchchheda-370-nirasana-ke-7-sala-bada-inphrastrakchara-aura-rikorda-paryatana-ke-dama-para-teji-se-badala-jammu-kashmir-14084 · **Language:** Hindi
**Tags:** जम्मू-कश्मीर, अनुच्छेद 370, चेनाब रेलवे ब्रिज, जम्मू-कश्मीर पर्यटन, स्मार्ट सिटी परियोजना, जोजिला टनल, सुरक्षा व्यवस्था, औद्योगिक नीति

केंद्र सरकार द्वारा 5 अगस्त 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को प्रदान किए गए विशेष दर्जे को समाप्त करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया था। इस संवैधानिक फैसले के साथ ही राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों, जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख में विभाजित कर दिया गया था। दशकों से चली आ रही पुरानी व्यवस्था के स्थान पर पूर्ण प्रशासनिक एकीकरण लागू करने का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में पनप रहे अलगाववाद को जड़ से खत्म करना, भारतीय संविधान के सभी कानूनों को समान रूप से प्रभावी बनाना और बुनियादी विकास के रास्ते खोलना था। इस ऐतिहासिक निर्णय के 7 साल पूरे होने पर जमीनी धरातल पर हुए वास्तविक बदलावों, सुरक्षा व्यवस्था के नए समीकरणों, इंफ्रास्ट्रक्चर की बड़ी छलांग और आर्थिक प्रगति का गहन विश्लेषण सामने आया है।

## सुरक्षा परिदृश्य में बदलाव: पत्थरबाजी पर लगाम और आतंकी घटनाओं में भारी कमी
जम्मू-कश्मीर में किसी भी प्रकार के व्यापक विकास और औद्योगिक निवेश के लिए पहली अनिवार्य शर्त शांति और कानून व्यवस्था की बहाली थी। अनुच्छेद 370 हटने के बाद सबसे प्रत्यक्ष और निर्णायक बदलाव सुरक्षा के मोर्चे पर दिखाई दिया। वर्ष 2019 से पहले के दौर में कश्मीर घाटी में हर साल हड़ताल, बंद और संगठित पत्थरबाजी की सैकड़ों घटनाएं दर्ज की जाती थीं, जिनसे आम जनजीवन और व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह ठप हो जाती थीं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में पत्थरबाजी की घटनाएं घटकर लगभग शून्य के स्तर पर पहुंच चुकी हैं। गृह मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़े यह भी स्पष्ट करते हैं कि आतंकी वारदातों और आम नागरिकों की मौतों में 60 फीसदी से 70 फीसदी तक की अभूतपूर्व कमी आई है। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां आज भी सीमा पार से होने वाली घुसपैठ की कोशिशों और टार्गेटेड किलिंग्स जैसी चुनौतियों का मुस्तैदी से सामना कर रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर भय का माहौल काफी हद तक खत्म हुआ है।

## श्रीनगर में नाइटलाइफ की वापसी और सामाजिक जीवन में नया उत्साह
शांति की बहाली ने स्थानीय नागरिकों के सामाजिक जीवन और मनोरंजन के साधनों को पुनः जीवित कर दिया है। श्रीनगर में करीब तीन दशकों के लंबे अंतराल के बाद एक अत्याधुनिक मल्टीप्लेक्स सिनेमा हॉल खोला गया, जहां स्थानीय युवाओं और परिवारों ने देर रात तक फिल्मों का आनंद लेना शुरू किया। इसके अतिरिक्त श्रीनगर का प्रसिद्ध लाल चौक, जो कभी हड़ताल और तनाव का मुख्य केंद्र माना जाता था, अब देर रात तक रोशनी से गुलजार रहता है। जिस स्थान पर कभी राष्ट्रीय ध्वज लहराना एक गंभीर चुनौती माना जाता था, आज वहां पूरी शान और सम्मान के साथ तिरंगा फहरा रहा है। यह बदलाव घाटी में सामान्य होते जनजीवन और सुरक्षा तंत्र पर जनता के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।

## विश्व के सबसे ऊंचे चेनाब रेलवे ब्रिज और जोजिला टनल से नई कनेक्टिविटी
घाटी को देश के अन्य भागों से हर मौसम में निर्बाध रूप से जोड़ने के लिए बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस दिशा में चेनाब रेलवे ब्रिज का निर्माण एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में सामने आया है। फ्रांस के एफिल टॉवर से भी 35 मीटर ऊंचा यह रेलवे पुल दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे ब्रिज है, जो उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) प्रोजेक्ट का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह इंजीनियरिंग चमत्कार कश्मीर घाटी को सीधे राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ता है। इसके अलावा लद्दाख और सोनमर्ग के इलाकों को भारी बर्फबारी के बावजूद पूरे साल चालू रखने के लिए एशिया की सबसे लंबी सुरंगों में से एक, जोजिला टनल का निर्माण कार्य अंतिम चरण में प्रवेश कर चुका है। वहीं जेड-मोड़ टनल का निर्माण पूरा होकर यातायात के लिए पहले ही शुरू किया जा चुका है।

## NH-44 का चौड़ीकरण और शहरों में स्मार्ट सिटी परियोजनाओं की रफ्तार
सड़क कनेक्टिविटी के क्षेत्र में जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) को फोर-लेन में परिवर्तित कर दिया गया है। इस राजमार्ग के सुदृढ़ीकरण से जम्मू और श्रीनगर के बीच यात्रा का समय पहले लगने वाले 10 से 12 घंटे से घटकर मात्र 5 से 6 घंटे रह गया है। यात्रा समय में इस बड़ी कटौती से माल ढुलाई और यात्रियों के आवागमन में लगने वाला समय व खर्च दोनों घटे हैं। इसके साथ ही श्रीनगर और जम्मू दोनों प्रमुख शहरों में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स के तहत रिवरफ्रंट विकास, शहरी स्थानों के सौंदर्यीकरण और बुनियादी सुविधाओं के कायाकल्प का कार्य तेजी से पूरा किया गया है।

## पर्यटन क्षेत्र में ऐतिहासिक उछाल और G20 सम्मेलन का वैश्विक प्रभाव
अनुच्छेद 370 हटने के बाद जिस क्षेत्र ने सबसे तीव्र गति से प्रगति की है, वह पर्यटन उद्योग है। वर्ष 2023 और 2024 के दौरान जम्मू-कश्मीर में 2.35 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया, जो इस क्षेत्र के ज्ञात इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। पर्यटन में आई इस भारी वृद्धि में मई 2023 में श्रीनगर में आयोजित G20 वर्किंग ग्रुप की बैठक की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अंतर्राष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन ने वैश्विक मंच पर यह मजबूत संदेश दिया कि कश्मीर अब पूरी तरह सुरक्षित है और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन तथा विदेशी निवेश के लिए तैयार है।

## लाइन ऑफ कंट्रोल के सीमावर्ती इलाकों में बॉडर टूरिज्म को बढ़ावा
एक अन्य महत्वपूर्ण पहल के तहत पहली बार लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के बिल्कुल करीब स्थित सीमावर्ती गांवों को आम पर्यटकों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया है। केरन, गुरेज और तंगधार जैसे दूरदराज के सुरम्य गांवों में अब पर्यटक आसानी से पहुंच पा रहे हैं। इस बॉडर टूरिज्म के कारण स्थानीय निवासियों के लिए होमस्टे, गाइड सेवाओं और स्थानीय परिवहन से जुड़े स्वरोजगार के नए और बेहतरीन साधन उपलब्ध हुए हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिला है।

## नई औद्योगिक नीति से 28,400 करोड़ रुपये का निवेश और भूमि अधिकारों में बदलाव
संवैधानिक बदलावों से पहले बाहर के व्यक्तियों या कंपनियों के लिए जम्मू-कश्मीर में अचल संपत्ति खरीदने अथवा बड़ा औद्योगिक निवेश करने पर कानूनी प्रतिबंध थे। अनुच्छेद 370 के समाप्त होने से यह विधिक बाधा दूर हो गई। सरकार द्वारा घोषित 28 हजार 400 करोड़ रुपये की नई औद्योगिक नीति के अंतर्गत केंद्र शासित प्रदेश को देश-विदेश से हजारों करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। कई नए इंडस्ट्रियल एस्टेट्स के निर्माण और कारखानों की स्थापना पर काम जारी है, जिससे जम्मू-कश्मीर अब 2.45 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विशाल अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

## उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र: 2 AIIMS, IIT, IIM और 2 NIT का गौरव
शिक्षा के क्षेत्र में बुनियादी ढांचे का विस्तार अभूतपूर्व रहा है। आज जम्मू-कश्मीर देश का एकमात्र ऐसा राज्य या केंद्र शासित प्रदेश बन चुका है, जहां 2 AIIMS (एक जम्मू में और दूसरा अवंतीपोरा में), 1 IIT, 1 IIM और 2 राष्ट्रीय स्तर के NIT जैसे शीर्ष शैक्षणिक और तकनीकी संस्थान संचालित हो रहे हैं। इन संस्थानों के अस्तित्व में आने से स्थानीय युवाओं को उच्च स्तरीय चिकित्सा, इंजीनियरिंग और प्रबंधन शिक्षा के लिए राज्य से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं रह गई है।

## महिलाओं के संपत्ति अधिकार और SC/ST वर्गों को पहली बार आरक्षण का लाभ
सामाजिक न्याय के धरातल पर अनुच्छेद 370 हटने का सबसे बड़ा लाभ उन समुदायों को प्राप्त हुआ जो दशकों से अपने मौलिक अधिकारों से वंचित थे। राज्य की महिलाओं को यह अधिकार वापस मिला कि वे राज्य से बाहर किसी व्यक्ति से विवाह करने के बावजूद अपनी पैतृक संपत्ति पर अपना हक बनाए रख सकती हैं। इसके साथ ही अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और पहाड़ी भाषी समुदायों को पहली बार जम्मू-कश्मीर विधानसभा और सरकारी नौकरियों में सीधा आरक्षण का लाभ प्रदान किया गया है।

## विधानसभा चुनाव में 63.88% रिकॉर्ड मतदान और युवाओं की मुख्यधारा में वापसी
राजनीतिक स्थिरता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बहाली का सबसे बड़ा प्रमाण वर्ष 2024 में आयोजित जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों में देखने को मिला। इन चुनावों में जनता ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए 63.88 प्रतिशत का रिकॉर्ड मतदान दर्ज कराया, जो पिछले तीन दशकों में सबसे अधिक वोटिंग प्रतिशत था। यह मतदान हिंसा पर लोकतंत्र की जीत का प्रतीक बना। वहीं खेल संस्कृति को बढ़ावा देने वाली 'खेलो इंडिया' पहल के अंतर्गत घाटी के 60 लाख से अधिक युवाओं ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खेल आयोजनों में भाग लिया। जिन हाथों में कभी भटकाव के कारण पत्थर हुआ करते थे, आज उन हाथों में बैडमिंटन, क्रिकेट और स्कीइंग के उपकरण दिखाई दे रहे हैं।

## कश्मीरी पंडितों की वापसी की भावनाएं और राजनीतिक घटनाक्रम
इन सभी सकारात्मक बदलावों के बीच कई मानवीय और सुरक्षा संबंधी पहलू भी जुड़े हुए हैं। करीब साढ़े तीन दशकों के लंबे अंतराल के बाद जब कश्मीरी पंडित अपनी जन्मभूमि पर वापस लौटे, तो अपने पुराने पैतृक घरों को मूल स्थिति में न पाकर वे अत्यधिक भावुक हो गए। दूसरी ओर राजनीतिक हलकों में भी गतिविधियां जारी हैं, जहां एक प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय ध्वज को उल्टा पकड़ने के मामले में जम्मू-कश्मीर की पूर्व CM महबूबा मुफ्ती की मुश्किलें बढ़ने से जुड़ा घटनाक्रम भी चर्चा में रहा। इन छिटपुट चुनौतियों के बावजूद जम्मू-कश्मीर अब भय और बंद के दौर से बाहर निकलकर विकास, शांति और वैश्विक पर्यटन की मुख्यधारा में मजबूती से स्थापित हो रहा है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** जम्मू-कश्मीर में शांति और सुरक्षा की स्थिति मजबूत होने से देश के अन्य राज्यों के नागरिक बिना किसी डर के घाटी में यात्रा कर पा रहे हैं, जिससे राष्ट्रीय एकीकरण और पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है।

**जम्मू-कश्मीर में:** रिकॉर्ड पर्यटन, 28,400 करोड़ रुपये की नई औद्योगिक नीति और बेहतर रेल-सड़क कनेक्टिविटी से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, होमस्टे और कारोबार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. अनुच्छेद 370 को कब निरस्त किया गया था?
केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को प्राप्त विशेष दर्जा समाप्त कर दिया था।

### 2. चेनाब रेलवे ब्रिज की प्रमुख विशेषता क्या है?
यह दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे ब्रिज है, जो एफिल टॉवर से 35 मीटर ऊंचा है और कश्मीर घाटी को सीधे भारतीय रेल नेटवर्क से जोड़ता है।

### 3. पिछले वर्षों में जम्मू-कश्मीर में पर्यटन के क्या आंकड़े रहे?
वर्ष 2023 और 2024 के दौरान जम्मू-कश्मीर में 2.35 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन हुआ, जो इस क्षेत्र का सर्वकालिक रिकॉर्ड है।

### 4. 2024 के जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में कितना मतदान दर्ज किया गया?
2024 में आयोजित विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड 63.88 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो पिछले तीन दशकों में सबसे अधिक है।

### 5. अनुच्छेद 370 हटने के बाद सुरक्षा मोर्चे पर क्या सुधार हुए?
पत्थरबाजी की घटनाएं घटकर लगभग शून्य हो गई हैं, जबकि आतंकी वारदातों और आम नागरिकों की मौतों में 60 से 70 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है।

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