अनुच्छेद 370 पर नेशनल कॉन्फ्रेंस से मतभेद के बाद सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने दिया इस्तीफे का ऐलान श्रीनगर से नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने अनुच्छेद 370 और पार्टी की नीतियों से मतभेद के बाद लोकसभा तथा पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा की है। जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बड़ा मोड़ देखने को मिला है, जहाँ श्रीनगर लोकसभा सीट से नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने घोषणा की है कि वह आने वाले दिनों में संसद सदस्य के पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता दोनों से इस्तीफा दे देंगे। उनका यह कदम पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ लंबे समय से चले आ रहे वैचारिक मतभेदों का परिणाम है। रुहुल्लाह मेहदी ने स्पष्ट किया है कि वह नेशनल कॉन्फ्रेंस की बुनियादी नीतियों और चुनावी घोषणापत्र के वादों से भटकाव के कारण यह कठोर कदम उठाने के लिए बाध्य हुए हैं। अनुच्छेद 370 की बहाली और चुनावी वादों पर खड़ा हुआ विवाद सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी और नेशनल कॉन्फ्रेंस के शीर्ष नेतृत्व के बीच जारी खींचतान का सबसे मुख्य कारण 2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान जनता से किए गए वादे हैं। रुहुल्लाह मेहदी का आरोप है कि पार्टी ने चुनाव प्रचार और अपने आधिकारिक घोषणापत्र में जम्मू-कश्मीर को अगस्त 2019 से पहले प्राप्त संवैधानिक अधिकारों, विशेषकर अनुच्छेद 370 और 35A की बहाली के लिए पूर्ण प्रयास करने का स्पष्ट वादा किया था। हालांकि, चुनाव संपन्न होने और सरकार बनने के बाद पार्टी का ध्यान केवल पूर्ण राज्य का दर्जा वापस पाने तक सीमित हो गया है। मेहदी ने पार्टी के इस बदले हुए रुख पर कड़ा एतराज व्यक्त करते हुए कहा है कि केवल राज्य का दर्जा बहाल कर देना अगस्त 2019 में छीने गए ऐतिहासिक और संवैधानिक संरक्षणों का विकल्प कभी नहीं बन सकता। उन्होंने नेतृत्व की नीयत पर सवाल उठाते हुए यह भी पूछा कि यदि पार्टी को पहले से ही लगता था कि अनुच्छेद 370 की वापसी संभव नहीं है, तो फिर 2024 के घोषणापत्र में जनता के सामने इस मुद्दे को प्रमुखता से शामिल ही क्यों किया गया था। उनका मानना है कि जनता के साथ किए गए वादों से पीछे हटना राजनीतिक ईमानदारी के खिलाफ है। फारूक अब्दुल्ला की चुनौती और मेहदी का तीखा पत्र इस पूरे मामले ने तब और अधिक तूल पकड़ लिया जब नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने रुहुल्लाह मेहदी को खुलकर चुनौती दी थी कि यदि वह पार्टी की नीतियों से असहमत हैं तो उन्हें अपने पद से त्यागपत्र देकर नए सिरे से जनता के बीच जाना चाहिए और नया जनादेश हासिल करना चाहिए। इस चुनौती का संज्ञान लेते हुए मेहदी ने फारूक अब्दुल्ला को एक पत्र लिखा और अपने फैसले से अवगत कराया। अपने पत्र में मेहदी ने लिखा कि वह जल्द ही इस्तीफा सौंप देंगे और फारूक अब्दुल्ला को इसके लिए बेफिक्र रहना चाहिए। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि पार्टी अध्यक्ष के कहे बिना भी यह त्यागपत्र आता, लेकिन इस्तीफा देने की प्रक्रिया पूरी होने से पहले पार्टी के भीतर जनता के प्रति जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है। दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक रूप से हुआ यह पत्राचार बडगाम विधानसभा उपचुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस को मिली पराजय के बाद से उपजे आंतरिक तनाव का सीधा परिणाम है। जनसरोकार, प्राकृतिक संसाधन और क्षेत्रीय अधिकार के मुद्दे केवल अनुच्छेद 370 ही नहीं, बल्कि आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने जम्मू-कश्मीर के कई अन्य मूलभूत और ज्वलंत मुद्दों पर भी अपनी चिंता जताई है। उन्होंने प्रदेश में तेजी से बढ़ती बेरोजगारी, स्थानीय निवासियों की जमीन और प्राकृतिक संसाधनों पर खतरे, धार्मिक अधिकारों के संरक्षण, सांस्कृतिक परंपराओं, क्षेत्रीय भाषाओं और पर्यावरण को हो रहे नुकसान का मुद्दा भी मजबूती से उठाया है। मेहदी ने नेतृत्व से सवाल किया कि एक केंद्र शासित प्रदेश के नागरिकों के लिए उनके संवैधानिक अधिकारों और सुरक्षा गारंटी की मांग करना आखिर आपत्तिजनक या गलत कैसे माना जा सकता है। उनके अनुसार, स्थानीय आबादी के अधिकारों की रक्षा करना ही जनप्रतिनिधि का पहला कर्तव्य है और इस विषय पर चुप्पी साधना जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ करने के समान है। ऐतिहासिक स्वायत्तता प्रस्ताव और शहादत की विरासत का स्मरण पार्टी नेतृत्व को अतीत की याद दिलाते हुए मेहदी ने उल्लेख किया कि जब जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने राज्य की स्वायत्तता का ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया था, उस समय फारूक अब्दुल्ला ही प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में सरकार की अगुवाई कर रहे थे। ऐसे में पार्टी को अपने स्वयं के ऐतिहासिक स्टैंड से पीछे नहीं हटना चाहिए। इसके अलावा, फारूक अब्दुल्ला द्वारा मेहदी की राजनीतिक पृष्ठभूमि पर की गई टिप्पणियों का जवाब देते हुए सांसद ने कहा कि उन्हें अपनी पारिवारिक विरासत पर गर्व है। मेहदी ने स्वाभिमान के साथ कहा कि वह एक शहीद के गौरवान्वित पुत्र हैं और उनके परिवार में शहादत देने की एक लंबी और सम्मानित परंपरा रही है, इसलिए वह अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करेंगे। नेशनल कॉन्फ्रेंस के भावी राजनीतिक परिदृश्य पर प्रभाव आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी के इस त्यागपत्र के फैसले से नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांगठनिक और विधायी गणित पर गहरा असर पड़ेगा। वर्तमान में लोकसभा में नेशनल कॉन्फ्रेंस के कुल दो सांसद हैं, जिनमें से एक रुहुल्लाह मेहदी हैं। यदि वह अपने पद से अधिकृत रूप से इस्तीफा दे देते हैं, तो संसद के निचले सदन में पार्टी की सदस्य संख्या घटकर केवल एक रह जाएगी, जो तब तक बनी रहेगी जब तक उस सीट पर उपचुनाव आयोजित कर पार्टी पुनः जीत दर्ज नहीं कर लेती। संसदीय आंकड़ों से इतर, मेहदी द्वारा पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का निर्णय नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर एक वैचारिक मंथन की शुरुआत कर सकता है। अनुच्छेद 370, 35A, राज्य के दर्जे की प्राथमिकता और चुनावी घोषणापत्र के प्रति पार्टी की निष्ठा को लेकर उठ रहे सवालों के कारण पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भी व्यापक चर्चा छिड़ गई है। इसका आप पर असर श्रीनगर सांसद के इस्तीफे के ऐलान से जम्मू-कश्मीर की राजनीति में बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक बदलाव देखने को मिलेगा। • भारत में: संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में नेशनल कॉन्फ्रेंस का प्रतिनिधित्व घटकर आधा रह जाएगा। इससे राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष के गठबंधन और केंद्र शासित प्रदेश से जुड़ी बहसों पर सीधा असर पड़ेगा। • जम्मू-कश्मीर में: श्रीनगर लोकसभा क्षेत्र के निवासियों को आगामी उपचुनाव तक अपने संसदीय प्रतिनिधित्व के लिए प्रतीक्षा करनी होगी। इसके चलते स्थानीय प्रशासनिक समस्याओं और विकास योजनाओं की केंद्र में पैरवी अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है। • वैचारिक बहस: अनुच्छेद 370 और राज्य के दर्जे पर राजनीतिक दलों की जवाबदेही को लेकर जनता में जागरूकता बढ़ेगी। आम मतदाता चुनावी घोषणापत्रों में किए गए वादों के प्रति अधिक सतर्क रहेंगे। • उपचुनाव का माहौल: श्रीनगर सीट खाली होने के बाद चुनाव आयोग द्वारा उपचुनाव की तारीखों का ऐलान किया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर राजनीतिक गतिविधियाँ और चुनावी सरगर्मियाँ अचानक तेज हो जाएँगी। सवाल-जवाब 1. आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने क्या ऐलान किया है? उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस की प्राथमिक सदस्यता और श्रीनगर लोकसभा सीट दोनों से इस्तीफा देने का फैसला किया है। 2. मेहदी और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच मुख्य विवाद क्या है? विवाद 2024 के घोषणापत्र में किए गए अनुच्छेद 370 और 35A की बहाली के वादे से हटने और केवल राज्य के दर्जे पर ध्यान केंद्रित करने को लेकर है। 3. फारूक अब्दुल्ला ने रुहुल्लाह मेहदी को क्या चुनौती दी थी? फारूक अब्दुल्ला ने मेहदी को सांसद पद से इस्तीफा देकर जनता के बीच से नया जनादेश हासिल करने की चुनौती दी थी। 4. इस इस्तीफे का नेशनल कॉन्फ्रेंस पर क्या असर पड़ेगा? लोकसभा में नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसदों की संख्या दो से घटकर एक रह जाएगी, जिससे श्रीनगर सीट पर उपचुनाव की स्थिति बनेगी। 5. मेहदी ने अनुच्छेद 370 के अलावा किन अन्य मुद्दों पर सवाल उठाए? उन्होंने जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी, प्राकृतिक संसाधनों, स्थानीय जमीन, धार्मिक अधिकारों, भाषा और पर्यावरण को हो रहे नुकसान के मुद्दे उठाए। https://trendkia.com/jammu-kashmir/anuchchheda-370-para-national-conference-se-matabheda-ke-bada-sansada-aga-syed-ruhullah-mehdi-ne-diya-istiphe-ka-ailana-23887 TrendKia — Har trend, sabse pehle.