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  "type": "article",
  "title": "बारामूला में सरकारी जमीन पर चला बुलडोजर, अफजल गुरु के ससुराल वालों का अवैध ढांचा ढहाया",
  "summary": "उत्तरी कश्मीर के बारामूला में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अफजल गुरु के ससुराल पक्ष के कब्जे वाली करोड़ों की सरकारी जमीन खाली कराई और अवैध शेड को ढहा दिया।",
  "content": "उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले में प्रशासनिक अधिकारियों ने सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने की दिशा में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। गुलनार पार्क के पास स्थित करोड़ों रुपये मूल्य की प्राइम स्टेट लैंड पर किए गए गैर-कानूनी निर्माण पर प्रशासन का बुलडोजर चला। इस मुहिम के दौरान संसद हमले के दोषी अफजल गुरु के ससुराल वालों के नियंत्रण वाले हिस्से पर बने अवैध शेड को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया और पूरी जमीन को दोबारा सरकारी नियंत्रण में ले लिया गया।\n\nगुलनार पार्क के पास प्राइम लोकेशन पर थी जमीन\nप्रशासन की यह बेदखली कार्रवाई बारामूला के प्रमुख इलाके में स्थित बाढ़ नियंत्रण से जुड़ी जमीन पर केंद्रित थी। यह भूखंड गुलनार पार्क के बेहद करीब स्थित है और बाजार मूल्य के हिसाब से इसकी कीमत कई करोड़ रुपये आंकी गई है। कई कनाल में फैली इस बेशकीमती भूमि पर बिना किसी वैधानिक अनुमति के कब्जा जमाया गया था और वहां अनधिकृत शेड खड़ा कर दिया गया था। अभियान के तहत संबंधित अधिकारियों के दल ने मौके पर पहुंचकर अवैध ढांचे को गिराया और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की।\n\nकब्जा करने वालों में शामिल नाम\nप्रशासनिक विवरण के मुताबिक, इस प्राइम स्टेट लैंड पर अनधिकृत कब्जा करने वालों में संसद हमले के दोषी अफजल गुरु के ससुराल से जुड़े लोग शामिल हैं। चिह्नित किए गए अतिक्रमणकारियों में मुख्य रूप से सज्जाद अहमद बुहारू, तारिक अहमद बुहारू, तबस्सुम गुरुरू, मंजूर अहमद बुहारू और अन्य व्यक्तियों के नाम दर्ज किए गए हैं। इन सभी के कब्जे से जमीन को मुक्त कराकर राजस्व और संबंधित प्रशासनिक विभाग ने अपनी कस्टडी में दर्ज कर लिया है।\n\nजिले भर में जारी रहेगा अतिक्रमण रोधी अभियान\nप्रशासन ने इस सख्त कार्रवाई के बाद स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी संपत्तियों पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने दोहराया कि गैर-कानूनी अतिक्रमण में लिप्त पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानूनों के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। पूरे बारामूला जिले में सुनियोजित तरीके से ऐसे सभी अवैध कब्जों को चिह्नित किया जा रहा है और आने वाले दिनों में यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।\n\nसार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा पर कड़ा रुख\nजम्मू-कश्मीर सहित पूरे क्षेत्र में सरकारी जमीनों के अनाधिकृत उपयोग और अतिक्रमण पर रोक लगाने के लिए नीतिगत सख्ती बरती जा रही है। प्रशासन का साफ रुख है कि नियमों की अनदेखी करने वालों और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। लगातार चलने वाले इस अभियान के तहत चिन्हित भूमाफियाओं और अवैध कब्जाधारकों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं ताकि सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जा सके।\n\nइसका आप पर असर\nसार्वजनिक संपत्तियों और बाढ़ नियंत्रण वाली जमीनों से अवैध कब्जे हटने से नागरिक सुरक्षा और विकास परियोजनाओं को गति मिलती है।\n\n• भारत में: देश भर में सरकारी और संवेदनशील जलभराव वाली जमीनों से अतिक्रमण हटाने के सख्त दिशानिर्देश लागू किए जा रहे हैं। इससे सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और पर्यावरण संरक्षण के लिए जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित होती है।\n• बारामूला में: गुलनार पार्क के आसपास खाली कराई गई करोड़ों की जमीन अब बाढ़ नियंत्रण और नगर विकास के काम आ सकेगी। स्थानीय निवासियों के लिए पार्क के आसपास की सार्वजनिक व्यवस्था और जल निकासी सुरक्षा बेहतर होगी।\n• संपत्ति खरीदारों के लिए: किसी भी भूखंड की खरीद या निर्माण से पहले उसके वैधानिक दस्तावेजों और सरकारी लैंड रिकॉर्ड की जांच अनिवार्य रूप से कर लें। बिना अनुमति या सरकारी जमीन पर किए गए निर्माण को प्रशासन कभी भी ध्वस्त कर सकता है।\n• अतिक्रमणकारियों के लिए: अनधिकृत शेड या बाउंड्री बनाने वालों के खिलाफ जिला प्रशासन कानूनी कार्रवाई और जब्ती की प्रक्रिया तेज कर रहा है। सरकारी भूमि पर कब्जा करने वालों को अब भारी वित्तीय नुकसान और कानूनी मुकदमों का सामना करना पड़ेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह कार्रवाई सरकारी जमीन को अनधिकृत कब्जों से मुक्त कराने और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रशासनिक अभियान के तहत की गई है।\n\n• सीधा कारण: गुलनार पार्क के निकट स्थित कई कनाल सरकारी बाढ़ नियंत्रण भूमि पर बिना किसी वैधानिक अनुमति के अवैध शेड का निर्माण किया गया था। प्रशासन ने जांच में निर्माण को गैर-कानूनी पाया और उसे ढहाने का आदेश दिया।\n• पृष्ठभूमि: चिन्हित भूखंड की कीमत कई करोड़ रुपये आंकी गई थी, जिस पर लंबे समय से अफजल गुरु के ससुराल पक्ष से जुड़े सज्जाद अहमद बुहारू, तारिक अहमद बुहारू और अन्य लोगों का कब्जा बना हुआ था। सरकारी रिकॉर्ड में यह जमीन स्पष्ट रूप से प्राइम स्टेट लैंड के रूप में दर्ज थी।\n• प्रशासनिक नीति: जम्मू-कश्मीर में सरकारी जमीनों के दुरुपयोग को रोकने और कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए व्यापक स्तर पर अतिक्रमण रोधी अभियान संचालित किया जा रहा है। इसी निरंतर जांच प्रक्रिया के तहत इस कब्जे को चिन्हित कर कार्रवाई की गई।\n• आगामी कदम: जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच और सीमांकन की यह प्रक्रिया पूरे बारामूला जिले में जारी रहेगी ताकि बाकी बची सभी अनधिकृत जमीनों को भी वापस लिया जा सके।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बारामूला में प्रशासन ने किस जगह पर अतिक्रमण हटाया?\nप्रशासन ने उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले में गुलनार पार्क के पास स्थित कई कनाल प्राइम स्टेट लैंड से अवैध अतिक्रमण हटाया।\n\n2. कार्रवाई के दौरान किस प्रकार का ढांचा गिराया गया?\nबाढ़ नियंत्रण से जुड़ी सरकारी जमीन पर बिना अनुमति के बनाए गए एक अवैध शेड को बुलडोजर से ढहा दिया गया।\n\n3. इस जमीन पर कब्जा करने वालों में कौन-कौन शामिल थे?\nसंसद हमले के दोषी अफजल गुरु के ससुराल पक्ष से जुड़े सज्जाद अहमद बुहारू, तारिक अहमद बुहारू, तबस्सुम गुरुरू, मंजूर अहमद बुहारू और अन्य लोग इस पर काबिज थे।\n\n4. प्रशासन द्वारा वापस ली गई जमीन की कीमत कितनी बताई गई है?\nप्राइम लोकेशन पर स्थित इस कई कनाल सरकारी जमीन की बाजार कीमत करोड़ों रुपये आंकी गई है।\n\n5. अतिक्रमण को लेकर जिला प्रशासन का क्या रुख है?\nप्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी और यह अभियान पूरे जिले में जारी रहेगा।",
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  "category": "जम्मू-कश्मीर",
  "publishedAt": "2026-10-06",
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    "जम्मू कश्मीर",
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