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  "title": "ब्रिक्स सम्मेलन में पहलगाम हमले की निंदा पर गरमाई सियासत, बीजेपी और विपक्ष आमने-सामने",
  "summary": "ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा को लेकर जम्मू-कश्मीर की राजनीति में उबाल आ गया है। जहाँ बीजेपी इसे बड़ी कूटनीतिक जीत बता रही है, वहीं कांग्रेस और पीडीपी ने इस मामले पर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।",
  "content": "श्रीनगर में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान सामने आए बयानों और घोषणापत्र को लेकर राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है। सम्मेलन में पहलगाम आतंकी हमले की खुले तौर पर निंदा किए जाने के बाद से विभिन्न दलों की ओर से प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। इस घटनाक्रम को देश की कूटनीति की एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के अपने-अपने राजनीतिक नजरिए सामने आ रहे हैं।\n\nबीजेपी ने इसे बताया विदेश नीति की बड़ी उपलब्धि\nजम्मू-कश्मीर की राज्य बीजेपी इकाई ने रविवार को स्पष्ट किया कि ब्रिक्स मंच पर पहलगाम आतंकी हमले की निंदा होना भारत के लिए एक बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत है। पार्टी के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने इस पूरे घटनाक्रम को देश की विदेश नीति की एक ऐतिहासिक सफलता करार दिया है। उनका कहना है कि ब्रिक्स देशों द्वारा इस तरह से सीमा पार आतंकवाद और पहलगाम हमले की भर्त्सना करना इस बात का सबूत है कि भारत का कूटनीतिक कद वैश्विक स्तर पर लगातार मजबूत हो रहा है।\n\nपाकिस्तान के दुष्प्रचार को मिला करारा जवाब\nअल्ताफ ठाकुर ने आगे जोर देकर कहा कि ब्रिक्स का यह सामूहिक और कड़ा रुख इस बात का प्रतीक है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के मुद्दे को उजागर करने के लिए भारत की तरफ से जो निरंतर प्रयास किए गए थे, उन्हें अब वैश्विक मान्यता मिलने लगी है। उनके अनुसार, यह फैसला पड़ोसी देश पाकिस्तान के दुष्प्रचार की करारी हार है और उन ताकतों के लिए एक सख्त चेतावनी भी है जो आतंकवाद को अपनी राज्य नीति का हिस्सा बनाने की भूल करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया अब आतंकवाद के मामले में किसी भी तरह के दोहरे मानदंडों को और अधिक सहन करने के मूड में नहीं है।\n\nप्रधानमंत्री के वैश्विक दृष्टिकोण को मिल रही स्वीकृति\nबीजेपी प्रवक्ता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके द्वारा पेश किए गए अधिक सुरक्षित, मजबूत और सहयोगी ग्लोबल साउथ के दृष्टिकोण को अब पूरी दुनिया में स्वीकार किया जा रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि ब्रिक्स के भीतर भारत को सबसे भरोसेमंद विकल्प के रूप में देखना देश के बढ़ते रणनीतिक प्रभाव को दर्शाता है। देश की मजबूत अर्थव्यवस्था, लोकतांत्रिक साख और रणनीतिक महत्व ने मिलकर समूह के भविष्य की दिशा तय करने में भारत को सबसे केंद्रीय भूमिका में ला खड़ा किया है।\n\nकांग्रेस नेता गुलाम अहमद मीर की प्रतिक्रिया\nदूसरी तरफ, इस मामले पर विपक्षी दलों के विचार कुछ अलग नजर आए। जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के प्रमुख नेता गुलाम अहमद मीर ने रविवार को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के घोषणापत्र में पहलगाम हमले की निंदा किए जाने के कदम का स्वागत तो किया, लेकिन साथ ही केंद्र सरकार को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ तो वे कूटनीति की बात करते हैं, तो दूसरी तरफ चीन के लिए रेड कारपेट बिछाते नजर आते हैं। मीर ने इस बात का भी जिक्र किया कि चीन ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान खुलकर पाकिस्तान का साथ दिया था। उनका कहना था कि इतने लंबे समय के बाद इस तरह के हमलों की सामूहिक निंदा किया जाना स्वागत योग्य तो है, लेकिन इसके साथ ही देश की कूटनीति से जुड़े कई अन्य पहलू भी विचारणीय हैं।\n\nपीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने साधा निशाना\nपीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। रविवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मंच का उपयोग करके वैश्विक स्तर पर मानवाधिकारों के सबसे बड़े पैरोकार के रूप में भारत की पारंपरिक और मजबूत भूमिका को दुनिया के सामने पुरजोर तरीके से रखने का एक सुनहरा अवसर पूरी तरह से गंवा दिया। महबूबा के मुताबिक, जिस आत्मविश्वास और आक्रामकता के साथ देश के प्रधानमंत्री को ब्रिक्स के एक प्रमुख मेजबान और अध्यक्ष के तौर पर अपनी बात रखनी चाहिए थी, वे उस स्तर से पीछे हटते हुए नजर आए और उन्होंने बहुत ही नपले-तुले शब्दों का इस्तेमाल किया।\n\nइसका आप पर असर\nब्रिक्स सम्मेलन में हुए इन बयानों और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सीधा असर कूटनीति, सुरक्षा नीति और देश की आंतरिक राजनीति पर पड़ता है।\n\n• भारत में: नागरिकों और राजनीतिक हलकों में आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को लेकर चर्चा तेज हो गई है, जिसका असर देश की सुरक्षा प्राथमिकताओं पर दिखता है।\n• श्रीनगर और जम्मू-कश्मीर में: क्षेत्रीय स्तर पर राजनीतिक दलों के बीच बयानों का दौर शुरू होने से घाटी की राजनीति में नए समीकरणों और बहसों को बढ़ावा मिला है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा और उसके बाद उपजे राजनीतिक विवाद के पीछे के कारण अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और घरेलू राजनीतिक समीकरणों से जुड़े हैं।\n\n• कूटनीतिक प्रयास: भारत द्वारा लगातार वैश्विक मंचों पर सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट करने के प्रयासों के कारण यह जिच संभव हो पाई।\n• क्षेत्रीय राजनीति: जम्मू-कश्मीर में विभिन्न राजनीतिक दल अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं के तहत केंद्र सरकार के कूटनीतिक कदमों का अपने-अपने दृष्टिकोण से मूल्यांकन कर रहे हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में किस आतंकी हमले की निंदा की गई है?\nसम्मेलन में पहलगाम आतंकी हमले और सीमा पार आतंकवाद की कड़ी निंदा की गई है।\n\n2. बीजेपी ने इस घटना को क्या बताया है?\nबीजेपी ने इसे भारत की विदेश नीति की बड़ी कूटनीतिक जीत और आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों के लिए झटका बताया है।\n\n3. अल्ताफ ठाकुर कौन हैं?\nअल्ताफ ठाकुर जम्मू-कश्मीर राज्य बीजेपी के प्रवक्ता हैं।\n\n4. कांग्रेस नेता गुलाम अहमद मीर ने क्या कहा?\nगुलाम अहमद मीर ने हमले की निंदा का स्वागत किया, लेकिन प्रधानमंत्री पर चीन के लिए रेड कारपेट बिछाने का आरोप भी लगाया।\n\n5. महबूबा मुफ्ती ने सम्मेलन को लेकर क्या प्रतिक्रिया दी?\nमहबूबा मुफ्ती ने कहा कि प्रधानमंत्री ने मानवाधिकारों के समर्थन में भारत की भूमिका को मजबूती से रखने का अवसर गंवा दिया।",
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  "category": "जम्मू-कश्मीर",
  "publishedAt": "2026-09-13",
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