नेपाल के बाद कारगिल में फटा बादल, कीचड़ और मलबे का सैलाब आने से मची अफरा-तफरी लद्दाख के कारगिल जिले में बादल फटने से अचानक बाढ़ आ गई और मलबे का तेज बहाव शुरू हो गया। हालांकि, प्रशासन के पहले उठाए गए कदमों के कारण किसी प्रकार के बड़े नुकसान या जनहानि की खबर नहीं है। नेपाल में हाल ही में मची भीषण तबाही का असर पूरी तरह से थमा भी नहीं था कि अब लद्दाख के कारगिल क्षेत्र में भी प्रकृति का एक बार फिर से रौद्र रूप देखने को मिला है। कारगिल के एक पहाड़ी हिस्से में अचानक बादल फटने से भारी सैलाब आ गया, जिससे स्थानीय निवासियों में अफरा-तफरी और डर का माहौल बन गया। हालांकि गनीमत यह रही कि इस प्राकृतिक आपदा में किसी भी तरह के जानमाल के बड़े नुकसान की कोई आधिकारिक सूचना सामने नहीं आई है, जिससे स्थानीय प्रशासन और लोगों ने बड़ी राहत की सांस ली है। स्टाकपा-सांकू इलाके में रात के वक्त आई आपदा घटना लद्दाख के कारगिल जिले के अंतर्गत आने वाले स्टाकपा-सांकू इलाके की है। यहाँ 30 और 31 अगस्त की दरमियानी रात को अचानक मौसम ने खतरनाक करवट ली और बादल फट पड़े। बादल फटने की इस घटना के तुरंत बाद स्थानीय नाले में भारी उफान आ गया। पानी का बहाव इतना तीव्र था कि वह अपने साथ बड़ी मात्रा में कीचड़, बड़े-बड़े पत्थर और पहाड़ी मलबा लेकर तेजी से नीचे की ओर बहने लगा। पानी और मलबे के इस भयावह वेग को देखकर आसपास के इलाकों में कुछ समय के लिए गंभीर स्थिति बन गई और लोग अपनी सुरक्षा को लेकर सतर्क हो गए। प्रशासनिक सतर्कता से टला बड़ा हादसा इस संकट के बीच सबसे सकारात्मक पहलू यह रहा कि जिला प्रशासन द्वारा पहले ही उठाए गए एहतियाती कदमों ने किसी बड़ी तबाही को होने से रोक लिया। प्रशासन की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, स्टाकपा-सांकू क्षेत्र में संभावित खतरों को भांपते हुए पहले ही विशेष तैयारियां की गई थीं। एसडीएम सांकू और डीसी कारगिल के कुशल मार्गदर्शन में संवेदनशील नालों और जलधाराओं की समय रहते सफाई कराई गई थी, साथ ही उनकी जलधारण क्षमता को भी बढ़ाया गया था। इसी दूरदर्शिता के परिणामस्वूप बादल फटने के बाद आया पानी और कीचड़ का तेज बहाव एक नियंत्रित मार्ग से आगे निकल गया। जलधाराओं की क्षमता बेहतर होने की वजह से पूरा मलबा और पानी किसी भी रिहाइशी बस्ती या बड़े बुनियादी ढाँचे को तबाह किए बिना सीधे सिंधु नदी की तरफ सुरक्षित रूप से निकल गया। पहाड़ी इलाकों की भौगोलिक स्थिति और मार्ग प्रभावित क्षेत्र स्टाकपा-सांकू मुख्य कारगिल शहर से लगभग 44 किलोमीटर की दूरी पर दक्षिण दिशा में स्थित एक सुंदर पहाड़ी गाँव है। यह महत्वपूर्ण गाँव सुरू घाटी रोड पर स्थित है, और यही मार्ग आगे की तरफ आगे बढ़कर प्रसिद्ध जांस्कर घाटी की ओर जाता है। हिमालयी और पहाड़ी इलाकों में पिछले कुछ दिनों से लगातार जारी बारिश के कारण फ्लैश फ्लड और अचानक बाढ़ आने का खतरा हर समय बना हुआ है। इसे देखते हुए स्थानीय प्रशासन किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद और अलर्ट मोड पर काम कर रहा है। रियासी में सलाल बांध के खोले गए द्वार कारगिल की घटना के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले से भी भारी बारिश से जुड़े हालात सामने आए हैं। यहाँ के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के कारण जलाशयों में पानी का स्तर तेजी से बढ़ गया। इस बढ़ते हुए दबाव और जलस्तर को सुरक्षित रूप से नियंत्रित करने के लिए अधिकारियों को सलाल बांध के कई गेट खोलने पड़े। बांध के अधिकारियों का कहना है कि जलाशय के भीतर पानी के स्तर पर लगातार पैनी नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी तरह की बाढ़ जैसी आपात स्थिति से समय रहते प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। हिमालयी क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते भूस्खलन और अचानक बाढ़ का यह खतरा अभी भी बना हुआ है, जिस पर सुरक्षा एजेंसियां नजर रख रही हैं। इसका आप पर असर कारगिल और जम्मु-कश्मीर में हुई इन घटनाओं से पहाड़ी इलाकों की यात्रा करने वाले लोगों और स्थानीय निवासियों के लिए सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रभाव सामने आए हैं। • भारत भर में: देश के हिमालयी और पहाड़ी राज्यों में लगातार हो रही बारिश से यात्रा जोखिम बढ़ गया है, इसलिए पर्यटकों को मौसम की चेतावनी देखकर ही पहाड़ी रास्तों पर निकलना चाहिए। • कारगिल और लद्दाख में: स्टाकपा-सांकू और सुरू घाटी क्षेत्र के स्थानीय लोगों को नदियों और नालों के पास जाने से बचना चाहिए क्योंकि अचानक जलस्तर बढ़ने का खतरा अभी भी बना हुआ है। • रियासी और जम्मू-कश्मीर में: सलाल बांध के गेट खोले जाने के बाद निचले इलाकों और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है ताकि जलस्तर बढ़ने से कोई नुकसान न हो। • यात्रा और परिवहन: पहाड़ी मार्गों और जांस्कर घाटी की ओर जाने वाले रास्तों पर भूस्खलन या अचानक कीचड़ आने से यातायात बाधित हो सकता है, इसलिए सफर पर निकलने से पहले सड़क की स्थिति जरूर जाँच लें। • प्रशासनिक तैयारी: स्थानीय नागरिकों को आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर अपने पास रखने चाहिए और मौसम विभाग की चेतावनियों पर लगातार नजर रखनी चाहिए। सवाल-जवाब 1. कारगिल में बादल फटने की घटना कब हुई? कारगिल जिले के स्टाकपा-सांकू इलाके में बादल फटने की यह घटना 30 और 31 अगस्त की दरमियानी रात को हुई। 2. इस घटना में क्या किसी तरह का जानमाल का नुकसान हुआ? प्रशासन के अनुसार इस घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि या बड़े नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है। 3. स्टाकपा-सांकू क्षेत्र कारगिल से कितनी दूर है? स्टाकपा-सांकू कारगिल से लगभग 44 किलोमीटर दक्षिण में स्थित एक पहाड़ी गाँव है जो सुरू घाटी रोड पर पड़ता है। 4. बड़ा नुकसान टलने का मुख्य कारण क्या था? प्रशासन द्वारा पहले ही नालों की सफाई करके उनकी जलधारण क्षमता बढ़ाने के कारण मलबा और पानी बिना किसी बस्ती को नुकसान पहुँचाए निकल गया। 5. रियासी में सलाल बांध के गेट क्यों खोले गए? ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के कारण जलाशय में पानी का स्तर अचानक बढ़ने और दबाव नियंत्रित करने के लिए गेट खोले गए। https://trendkia.com/jammu-kashmir/cloudburst-triggers-flash-floods-in-kargil-after-nepal-disaster-mud-and-debris-rush-down-slopes-24963 TrendKia — Har trend, sabse pehle.