डोडा में पाकिस्तानी नंबरों से जुड़े संदिग्ध अल्ताफ को सेना ने पकड़ा, राजौरी के जंगलों में तीन आतंकियों की तलाश तेज जम्मू और कश्मीर के डोडा में आर्मी इंटेलिजेंस ने तकनीकी निगरानी के बाद अल्ताफ को तीन फोन और पाकिस्तानी संपर्कों के साथ हिरासत में लेकर पुलिस को सौंपा, वहीं राजौरी में एक नागरिक के अपहरण के बाद तलाशी अभियान जारी है। जम्मू और कश्मीर में सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने और सीमा पार सूचनाएं लीक करने वाले नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए सुरक्षा बल लगातार सक्रिय हैं। सीमा पार बैठे तत्वों को संवेदनशील जानकारियां पहुंचाने वाले संपर्कों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। इसी क्रम में भारतीय सेना ने डोडा जिले के भद्रवाह क्षेत्र में निगरानी का एक व्यापक जाल बिछाया था। इस तकनीकी सर्विलांस के दौरान आर्मी इंटेलिजेंस ने एक ऐसे व्यक्ति की गतिविधियों को चिन्हित किया, जो लगातार सीमा पार मौजूद संपर्कों के साथ संवाद बनाए हुए था। पुख्ता तकनीकी सुराग मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने संदिग्ध की सटीक लोकेशन की पहचान की और उसे हिरासत में ले लिया। भद्रवाह से अल्ताफ की गिरफ्तारी और फोन बरामदगी हिरासत में लिए गए व्यक्ति की पहचान डोडा जिले के भद्रवाह क्षेत्र के निवासी अल्ताफ के रूप में हुई है। सुरक्षा कर्मियों द्वारा ली गई तलाशी के दौरान उसके पास से कुल तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए। इन उपकरणों में एक आधुनिक स्मार्टफोन शामिल है, जबकि बाकी दो सामान्य बेसिक मोबाइल फोन हैं। जांच में सामने आया कि आरोपी के फोन में कई ऐसे संपर्क दर्ज थे, जो पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय कंट्री कोड +92 से शुरू होते हैं। इन्हीं नंबरों के माध्यम से वह सीमा पार बैठे व्यक्तियों से लगातार संपर्क बनाए हुए था। जम्मू और कश्मीर पुलिस को सौंपा गया आरोपी, जांच के अहम बिंदु शुरुआती कार्रवाई पूरी करने के बाद आर्मी इंटेलिजेंस ने आरोपी अल्ताफ को आगे की कानूनी कार्रवाई और विस्तृत छानबीन के लिए जम्मू और कश्मीर पुलिस को सौंप दिया है। पुलिस अब इस पूरे मामले के विभिन्न पहलुओं की गहराई से पड़ताल कर रही है। • पाकिस्तानी संपर्कों की पहचान: पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि फोन से मिले +92 कोड वाले नंबर वास्तव में सीमा पार किन व्यक्तियों या नेटवर्क से जुड़े हैं। • साझा की गई जानकारियां: जांचकर्ता इस बात का विश्लेषण कर रहे हैं कि आरोपी ने अब तक किस तरह की जानकारियां सीमा पार भेजी हैं और उनकी प्रकृति क्या थी। • स्थानीय संपर्कों की पड़ताल: इस बात की भी जांच की जा रही है कि भारत के भीतर इस आरोपी के साथ कौन-कौन से सहयोगी या मददगार जुड़े हुए हैं। • साजिश की आशंका: सुरक्षा एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि क्या सीमा पार से इन संपर्कों के जरिए जम्मू और कश्मीर में किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की तैयारी की जा रही थी। राजौरी के सुंदरबनी में सघन तलाशी अभियान जारी दूसरी ओर, राजौरी जिले के सुंदरबनी इलाके में सुरक्षा बलों का संयुक्त तलाशी अभियान लगातार चल रहा है। यहां तीन संदिग्ध आतंकवादियों की धरपकड़ के लिए भारतीय सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी) की टीमें तैनात हैं। इन तीनों संदिग्ध आतंकवादियों ने लाड़िया गांव से अनिल कुमार नाम के एक नागरिक का अपहरण कर लिया था और उसे अपने साथ दुआ खड्ड के जंगलों में ले गए थे। इसके बाद देर रात करीब 3:15 बजे संदिग्ध आतंकवादियों ने अनिल कुमार को जंगल के बीच में छोड़ दिया और स्वयं घने जंगल के भीतर फरार हो गए। इस घटना की जानकारी मिलते ही भारतीय सेना के नेतृत्व में इलाके में एक संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया गया। घने जंगली इलाकों और दुर्गम रास्तों पर तीनों संदिग्ध आतंकियों का सुराग लगाने के लिए सुरक्षा बलों का अभियान लगातार जारी है। इसका आप पर असर सुरक्षा बलों द्वारा सीमा पार सूचना भेजने वाले संपर्कों पर नकेल कसने और जंगलों में तलाशी अभियान चलाने से क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा किया गया है। • भारत में: सीमा पार खुफिया नेटवर्क को तोड़े जाने से देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती है। इससे संवेदनशील क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार निगरानी बनाए रखने की अहमियत रेखांकित होती है। • जम्मू और कश्मीर में: डोडा और राजौरी जैसे जिलों में सुरक्षा बलों की कड़ी चौकसी से स्थानीय सुरक्षा का दायरा बढ़ता है। जंगलों और संवेदनशील मार्गों पर चलने वाले सर्च ऑपरेशन के दौरान नागरिकों को सतर्क रहने और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने में सहयोग मिलता है। • स्थानीय निवासियों के लिए: भद्रवाह और सुंदरबनी जैसे इलाकों में सघन चेकिंग के कारण आवाजाही के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ सकती है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या अनजान व्यक्ति की मौजूदगी पर तुरंत नजदीकी पुलिस या सेना चौकी को सूचित करना जरूरी है। • डिजिटल सुरक्षा और सतर्कता: अवांछित अंतरराष्ट्रीय फोन कॉल्स और संदिग्ध संपर्कों की पहचान कर स्थानीय स्तर पर सूचना सुरक्षा को सुदृढ़ किया जाता है। इससे सीमांत इलाकों में असामाजिक तत्वों द्वारा फैलाए जाने वाले नेटवर्क को समय रहते विफल करने में मदद मिलती है। ऐसा क्यों हुआ यह कार्रवाई भारतीय सेना की तकनीकी निगरानी में सीमा पार लगातार हो रही संदिग्ध फोन कॉल्स के सामने आने और राजौरी में एक नागरिक के अपहरण की घटना के बाद शुरू की गई। • तकनीकी सर्विलांस का सुराग: आर्मी इंटेलिजेंस ने डोडा के भद्रवाह में नियमित इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग के दौरान पाया कि एक स्थानीय व्यक्ति लंबे समय से पाकिस्तान के +92 कंट्री कोड वाले नंबरों से संपर्क में था। इसी तकनीकी ट्रैकिंग के आधार पर अल्ताफ को जीरो इन कर हिरासत में लिया गया। • गोपनीय सूचनाओं के रिसाव की आशंका: सीमा पार बैठे तत्वों द्वारा स्थानीय मददगारों के जरिए संवेदनशील जानकारियां हासिल करने के प्रयासों को नाकाम करने के लिए यह कार्रवाई की गई, ताकि किसी भी साजिश को समय रहते विफल किया जा सके। • नागरिक का अपहरण: राजौरी के लाड़िया गांव से तीन संदिग्ध आतंकियों ने अनिल कुमार का अपहरण किया और दुआ खड्ड के जंगलों की ओर ले गए। रात करीब 3:15 बजे उसे छोड़कर आतंकी घने जंगलों में भाग गए, जिसके तुरंत बाद सेना, सीआरपीएफ और एसओजी ने संयुक्त कॉम्बिंग ऑपरेशन शुरू किया। सवाल-जवाब 1. डोडा से किस संदिग्ध को हिरासत में लिया गया है? आर्मी इंटेलिजेंस ने डोडा के भद्रवाह निवासी अल्ताफ को हिरासत में लिया है। 2. आरोपी अल्ताफ के पास से कौन से उपकरण बरामद हुए हैं? उसके पास से कुल तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं, जिनमें एक स्मार्टफोन और दो बेसिक फोन शामिल हैं। 3. बरामद मोबाइलों में किस देश के नंबर पाए गए? आरोपी के मोबाइल फोन में पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय कंट्री कोड +92 से शुरू होने वाले कई नंबर मिले हैं। 4. आरोपी अल्ताफ से अब कौन पूछताछ कर रहा है? आर्मी इंटेलिजेंस ने आगे की विस्तृत कानूनी जांच और पूछताछ के लिए आरोपी को जम्मू और कश्मीर पुलिस के हवाले कर दिया है। 5. राजौरी के सुंदरबनी में क्या घटना हुई थी? तीन संदिग्ध आतंकवादियों ने लाड़िया गांव से अनिल कुमार नाम के व्यक्ति का अपहरण किया था और उसे दुआ खड्ड के जंगलों में ले गए थे। 6. अपहृत व्यक्ति को कब और कहां छोड़ा गया? संदिग्ध आतंकियों ने अनिल कुमार को रात करीब 3:15 बजे बीच जंगल में छोड़ दिया और स्वयं घने जंगल में चले गए। 7. राजौरी में सर्च ऑपरेशन में कौन-कौन से सुरक्षा बल शामिल हैं? वहां भारतीय सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी) की संयुक्त टीमें अभियान चला रही हैं। https://trendkia.com/jammu-kashmir/doda-men-pakistani-nnbaron-se-jure-sndigdha-altaf-ko-sena-ne-pakara-rajouri-ke-jngalon-men-tina-atnkiyon-ki-talasha-teja-44812 TrendKia — Har trend, sabse pehle.