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  "type": "article",
  "title": "घाटी में आतंकियों को पनाह देने वालों पर कड़ा प्रहार, बारामूला में दो मंजिला मकान कुर्क",
  "summary": "जम्मू और कश्मीर पुलिस ने आतंकियों को शरण और लॉजिस्टिक सहायता देने के आरोप में बारामूला में स्थित एक रिहायशी मकान को यूएपीए के तहत कुर्क किया है.",
  "content": "जम्मू और कश्मीर में आतंकवादी नेटवर्क को सहायता देने वालों और उनके मददगारों के खिलाफ कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है. सुरक्षा तंत्र ने साफ कर दिया है कि राष्ट्रविरोधी साजिशों में शामिल तत्वों के विरुद्ध केवल गिरफ्तारी तक ही कदम सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उनकी अचल संपत्तियों पर भी निर्णायक कानूनी प्रहार किया जाएगा. इस मुहिम के तहत बारामूला में एक दो मंजिला रिहायशी ढांचे को कुर्क करने का आधिकारिक आदेश जारी हुआ है. यह कदम गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के प्रावधानों के अंतर्गत उठाया गया है, ताकि आतंकी बुनियादी ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके.\n\nनाका चेकिंग के दौरान संदिग्ध की धरपकड़\nइस पूरे मामले की शुरुआत एक साझा सुरक्षा अभियान के दौरान हुई थी. 1 अगस्त 2026 को बारामूला पुलिस, राष्ट्रीय राइफल्स, सीआरपीएफ और बीएसएफ की एक संयुक्त टीम ने शीरी के झांडफर्न (गोरिवान क्रॉसिंग) के पास विशेष नाकाबंदी कर रखी थी. इस सघन जांच के बीच नामब्लान गोरिवान की ओर से शीरी की तरफ पैदल बढ़ रहा एक व्यक्ति सुरक्षा बलों को देखते ही उल्टे पांव भागने लगा. सतर्क जवानों ने घेराबंदी करते हुए उस संदिग्ध को मौके पर ही दबोच लिया. पूछताछ और पहचान की प्रक्रिया में आरोपी का नाम एजाज अहमद गनी सामने आया.\n\nतलाशी अभियान के दौरान आरोपी के कब्जे से घातक हथियार और संचार उपकरण बरामद किए गए. उसके पास से एक पिस्तौल, एक मैगजीन, 9 एमएम के 10 जिंदा कारतूस, एक मोबाइल फोन तथा दो सक्रिय सिम कार्ड जब्त किए गए. इस बरामदगी के तुरंत बाद शीरी थाने में आर्म्स एक्ट के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई और मामले की गहन तफ्तीश शुरू हुई.\n\nआतंकी साजिश और हथियारों का जखीरा\nहिरासत में पूछताछ के दौरान आरोपी ने कई गंभीर और संवेदनशील खुलासे किए. उसने स्वीकार किया कि अगस्त 2024 में नामब्लान के घने जंगलों में छिपे आतंकवादियों से उसे पिस्तौल और दो हैंड ग्रेनेड हासिल हुए थे. आरोपी आतंकी आकाओं के सीधे संपर्क में था और उनके निर्देशों पर शीरी इलाके में तैनात पुलिसकर्मियों तथा गैर-स्थानीय लोगों को निशाना बनाकर सुनियोजित हमला करने की साजिश रच रहा था.\n\nजांच अधिकारियों ने जब जांच का दायरा बढ़ाया, तो आरोपी के घर की तलाशी के दौरान दो और हैंड ग्रेनेड बरामद किए गए. जांच में यह तथ्य भी प्रमाणित हुआ कि आरोपी ने साल 2024 में अपने दो मंजिला रिहायशी मकान में सक्रिय आतंकवादियों को गुप्त रूप से ठहराया था, उन्हें लॉजिस्टिक सहायता पहुंचाई थी और पूरे ठिकाने को आतंकी साजिशों के संचालन केंद्र के रूप में इस्तेमाल होने दिया था.\n\nयूएपीए की धारा 25 के तहत कुर्की का आदेश\nजांच में यह स्पष्ट रूप से रेखांकित हुआ कि यह आवासीय ढांचा बार-बार आतंकी गतिविधियों को पनाह देने और आगे बढ़ाने के लिए इस्तेमाल में लाया गया था. विधिक परिभाषा के अनुसार, ऐसा निर्माण आतंकवाद से प्राप्त आय और आतंक को बढ़ावा देने वाले साधन के दायरे में आता है. इसी विधिक निष्कर्ष के आधार पर पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात ने यूएपीए की धारा 25 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए इस दो मंजिला मकान की कुर्की का आदेश पारित किया. इस कठोर कदम का उद्देश्य यह स्पष्ट संदेश देना है कि आतंकी तंत्र को फलने-फूलने में मदद करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा.\n\nइसका आप पर असर\nआतंकी गतिविधियों में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सहयोग देने वाले लोगों की संपत्तियों पर सीधे कानूनी वार से समाज में अवैध गतिविधियों के खिलाफ कड़ा संदेश गया है.\n\n• भारत में: देश भर में राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आतंकी नेटवर्क को आश्रय और सहायता देने वाले ठिकानों के वित्तीय और बुनियादी ढांचे को ध्वस्त किया जा रहा है. इससे अलगाववादी व विध्वंसक गतिविधियों में लिप्त तत्वों की संपत्ति जब्ती के कड़े कानूनी प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होता है.\n• बारामूला में: स्थानीय स्तर पर ऐसे मकानों और संपत्तियों की कुर्की से संदिग्ध व्यक्तियों को शरण देने वालों पर व्यापक दबाव बनेगा. इसके प्रभाव से आम नागरिक किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल सूचना सुरक्षा एजेंसियों को देने के लिए अधिक सतर्क और प्रेरित होंगे.\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह कठोर कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि जांच में साबित हुआ कि संबंधित दो मंजिला रिहायशी मकान का इस्तेमाल हथियारों के भंडारण और आतंकियों को पनाह देने के लिए किया जा रहा था.\n\n• प्रत्यक्ष कारण: गिरफ्तार आरोपी एजाज अहमद गनी ने अपने दो मंजिला मकान में आतंकियों को सुरक्षित ठिकाना और रसद दी थी, जिसके बाद वहां से दो हैंड ग्रेनेड भी बरामद हुए. इस आधार पर मकान को अपराध में प्रयुक्त बुनियादी ढांचा माना गया.\n• कानूनी आधार: यूएपीए की धारा 25 के तहत जांच एजेंसियों को आतंकवाद में मददगार संपत्तियों को अपराध की श्रेणी में मानकर जब्त या कुर्क करने का स्पष्ट वैधानिक अधिकार प्राप्त है. डीजीपी नलिन प्रभात ने इसी अधिकार का प्रयोग करते हुए यह आदेश दिया.\n• रणनीतिक पृष्ठभूमि: सुरक्षा बल पहले भी आतंकियों के मददगारों के ठिकानों पर कड़े कदम उठाते रहे हैं, ताकि छिपने की सुरक्षित जगहों को समाप्त कर आतंकी नेटवर्क की कमर तोड़ी जा सके. आगे भी ऐसे मददगारों की पहचान कर संपत्तियों पर कार्रवाई जारी रहने की बात कही गई है.\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बारामूला में किस आरोपी का मकान कुर्क किया गया है?\nसुरक्षा बलों की जांच के बाद एजाज अहमद गनी के दो मंजिला रिहायशी मकान को कुर्क करने का आदेश दिया गया है.\n\n2. संपत्ति कुर्की का यह आदेश किस कानून के तहत दिया गया?\nयह कानूनी आदेश गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए की धारा 25 के तहत पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात द्वारा जारी किया गया है.\n\n3. आरोपी को कब और किस स्थान से गिरफ्तार किया गया था?\nआरोपी को 1 अगस्त 2026 को बारामूला के शीरी स्थित झांडफर्न (गोरिवान क्रॉसिंग) के पास एक संयुक्त नाके पर पकड़ा गया था.\n\n4. आरोपी के कब्जे और उसके घर से क्या बरामद हुआ?\nआरोपी के पास से एक पिस्तौल, मैगजीन, 10 जिंदा कारतूस, एक फोन और दो सिम कार्ड मिले थे, जबकि बाद में उसके घर से दो अतिरिक्त हैंड ग्रेनेड बरामद हुए.",
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  "category": "जम्मू-कश्मीर",
  "publishedAt": "2026-09-23",
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    "जम्मू कश्मीर पुलिस",
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