# जम्मू-कश्मीर विधानसभा में गूंजा शेख अब्दुल्ला की जयंती पर अवकाश बहाली का मुद्दा

> नेशनल कॉन्फ्रेंस ने विधानसभा सत्र के दौरान 5 दिसंबर और 13 जुलाई की आधिकारिक छुट्टियों को कैलेंडर में दोबारा शामिल करने की पुरजोर मांग उठाई है।

**Type:** article · **Category:** जम्मू-कश्मीर · **Published:** 2026-09-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jammu-kashmir/jammu-and-kashmir-assembly-mein-sheikh-abdullah-ki-jayanti-par-avkash-bahali-ka-mudda-36346 · **Language:** Hindi
**Tags:** जम्मू कश्मीर, नेशनल कॉन्फ्रेंस, शेख मोहम्मद अब्दुल्ला, मुबारक गुल, सार्वजनिक अवकाश, विधानसभा

जम्मू-कश्मीर विधानसभा के जारी सत्र के दौरान मंगलवार को सत्ताधारी दल नेशनल कॉन्फ्रेंस ने एक अहम राजनीतिक मांग सदन के पटल पर रखी। पार्टी विधायकों ने मांग की कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती के अवसर पर मिलने वाले सार्वजनिक अवकाश को सरकारी स्तर पर पुनः बहाल किया जाए। सदन में चर्चा के दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस के सदस्यों ने जोर देकर कहा कि शेख अब्दुल्ला ने क्षेत्र के विकास और आधुनिक ढांचे के निर्माण के लिए ऐतिहासिक कार्य किए हैं, लिहाजा उनके इस योगदान को कभी भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

## शेख अब्दुल्ला के योगदान को श्रद्धांजलि देने की वकालत
सदन की कार्यवाही के दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेता मुबारक गुल ने इस विषय पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि 5 दिसंबर को शेर-ए-कश्मीर शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती पर सार्वजनिक छुट्टी बहाल करना उनके ऐतिहासिक योगदान के प्रति एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी। नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रतिनिधियों का कहना था कि आधुनिक जम्मू-कश्मीर की नींव रखने में उनका योगदान असाधारण रहा है, इसलिए आधिकारिक कैलेंडर में इस दिन को सार्वजनिक अवकाश के रूप में बनाए रखा जाना बेहद जरूरी है।

## सरकारी कैलेंडर से दो प्रमुख छुट्टियों को हटाने का मामला
नेशनल कॉन्फ्रेंस के सदस्यों ने सदन को याद दिलाया कि पहले आधिकारिक कैलेंडर में दो खास छुट्टियां शामिल थीं, जिन्हें बाद में हटा दिया गया। इनमें पहली छुट्टी 13 जुलाई को मनाया जाने वाला शहीद दिवस और दूसरी 5 दिसंबर को शेर-ए-कश्मीर शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती थी। विधायकों ने आपत्ति दर्ज कराई कि इन दोनों ऐतिहासिक दिनों को सरकारी अवकाश सूची से बाहर कर दिया गया, जिससे लोगों की सामूहिक भावनाएं आहत हुई हैं।

## इतिहास और सामूहिक यादों के सम्मान की दलील
विधानसभा चर्चा में हिस्सा लेते हुए मुबारक गुल ने कहा कि "हम दशकों तक सत्ता में रहे, लेकिन हमने कभी कोई छुट्टी नहीं हटाई।" उन्होंने सदन में तर्क दिया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कई सालों तक शासन किया, लेकिन कभी किसी छुट्टी या किसी जरूरी दिन में फेरबदल नहीं किया। गुल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर भारतीय जनता पार्टी या किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी के नेता से जुड़ी कोई छुट्टी होती, तो भी उसे कभी नहीं हटाया जाता क्योंकि ऐसी छुट्टियां लोगों की सामूहिक यादों का प्रतिनिधित्व करती हैं। पार्टी ने इन ऐतिहासिक दिवसों के सम्मान की रक्षा के लिए दोनों अवकाशों को फिर से शुरू करने पर बल दिया।

## इसका आप पर असर
विधानसभा में उठी इस मांग का सीधा असर जम्मू-कश्मीर के आधिकारिक अवकाश कैलेंडर और स्थानीय प्रशासन पर पड़ सकता है।

- **भारत में:** राष्ट्रीय स्तर पर यह मुद्दा केंद्र शासित प्रदेश की राजनीतिक दिशा और ऐतिहासिक निर्णयों की समीक्षा को दर्शाता है। इससे पता चलता है कि स्थानीय चुनी हुई सरकार अपने ऐतिहासिक प्रतीकों को पुनर्स्थापित करने की दिशा में बढ़ रही है।
- **जम्मू-कश्मीर में:** यदि सरकार 5 दिसंबर और 13 जुलाई के अवकाश को दोबारा मान्यता देती है, तो सरकारी कार्यालयों और शिक्षण संस्थानों में कैलेंडर बदल जाएगा। स्थानीय कर्मचारियों और नागरिकों के लिए ये दो दिन दोबारा सार्वजनिक अवकाश के रूप में दर्ज हो सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
जम्मू-कश्मीर के आधिकारिक कैलेंडर से 5 दिसंबर और 13 जुलाई के अवकाश हटा दिए गए थे, जिसे लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस ने विधानसभा में ऐतिहासिक सम्मान और सामूहिक स्मृति का हवाला दिया है।

- **सीधा कारण:** नेशनल कॉन्फ्रेंस के अनुसार, 5 दिसंबर को शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती और 13 जुलाई को शहीद दिवस का अवकाश पहले आधिकारिक सूची से हटा दिया गया था। पार्टी का तर्क है कि आधुनिक जम्मू-कश्मीर के निर्माण में संस्थापक के योगदान को सम्मानित करने के लिए इस निर्णय को पलटना जरूरी है।
- **राजनीतिक पृष्ठभूमि:** नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता मुबारक गुल ने सदन में दलील दी कि पार्टी ने दशकों तक शासन किया लेकिन कभी किसी अन्य दल के महापुरुष की छुट्टी को नहीं हटाया। उनका कहना है कि सरकारी छुट्टियां समाज की सामूहिक यादों को दर्शाती हैं, इसलिए इतिहास के साथ बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।
- **आगामी कदम:** विधानसभा सत्र में यह मुद्दा उठाए जाने के बाद अब सरकार और प्रशासन पर यह निर्भर करता है कि वह अवकाश सूची की समीक्षा कर इसे दोबारा शामिल करती है या नहीं।

## सवाल-जवाब

### 1. नेशनल कॉन्फ्रेंस ने विधानसभा में किस अवकाश को बहाल करने की मांग की?
पार्टी ने पार्टी संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती यानी 5 दिसंबर को सार्वजनिक अवकाश के रूप में बहाल करने की मांग की है।

### 2. सदन में किन दो प्रमुख छुट्टियों के हटने का जिक्र किया गया?
13 जुलाई को शहीद दिवस और 5 दिसंबर को शेर-ए-कश्मीर शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती की छुट्टियों का जिक्र किया गया।

### 3. नेशनल कॉन्फ्रेंस के किस वरिष्ठ नेता ने इस मुद्दे पर प्रमुखता से बात रखी?
नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता मुबारक गुल ने विधानसभा में चर्चा के दौरान इस विषय पर प्रमुखता से तर्क दिए।

### 4. मुबारक गुल ने छुट्टियों को लेकर अपने कार्यकाल के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि पार्टी दशकों तक सत्ता में रही लेकिन उसने कभी किसी छुट्टी को नहीं हटाया और न ही इतिहास के साथ खिलवाड़ किया।

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