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  "type": "article",
  "title": "जम्मू के खेरी गांव में धंसी जमीन से बेघर हुए 8 से अधिक परिवार, टेंटों में मंडराया सांप-बिच्छुओं का खौफ",
  "summary": "जम्मू शहर से 12 किमी दूर खेरी गांव में जमीन धंसने से 8 से अधिक घर तबाह हो गए हैं। प्रभावित परिवारों को प्रशासन द्वारा दिए गए टेंटों में अब सांपों और बिच्छुओं का खौफ सता रहा है।",
  "content": "जम्मू शहर से मात्र 12 किलोमीटर दूर स्थित खेरी इलाके में हाल ही में जमीन खिसकने और धंसने की वजह से भीषण तबाही मच गई है। तेज बारिश के बाद शुरू हुए इस सिलसिले ने पूरे गांव के लोगों को गहरे डर और दहशत के साए में ला दिया है। जमीन धंसने की इस प्राकृतिक आपदा से 8 से अधिक मकान पूरी तरह से या आंशिक रूप से प्रभावित हो चुके हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि कई लोगों के घर ताश के पत्तों की तरह ढहकर मलबे का ढेर बन गए हैं, जबकि कुछ मकान जमीन खिसकने के बाद खतरनाक तरीके से हवा में लटके नजर आ रहे हैं। इस संकट ने दर्जनों लोगों को बेघर कर दिया है और पूरा गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित हो चुका है।\n\nखेरी गांव में तबाही और जमींदोज होते मकान\nखेरी गांव में जमीन धंसने का घटनाक्रम इतनी तेजी से हुआ कि स्थानीय लोगों को अपने मकानों से सामान निकालने का मौका तक नहीं मिला। बारिश के पानी के कारण पहाड़ों के नीचे की जमीन लगातार खिसकती चली गई और देखते ही देखते कई परिवारों की जीवन भर की कमाई मलबे में बदल गई। मौके पर देखा जाए तो दो घर पूरी तरह से जमींदोज हो चुके हैं और मलबे में तब्दील हो चुके हैं। इनमें से एक मकान जमीन के खिसकने के कारण लगभग 18 से 20 फुट गहराई में समा गया है। इसके अलावा दो अन्य मकान जमीन खिसकने के चलते आधी हवा में लटके दिखाई दे रहे हैं, जो कभी भी नीचे गिर सकते हैं। कई अन्य मकानों की दीवारों और नींव में बड़ी-बड़ी गहरी दरारें आ चुकी हैं। ग्रामीण इस बात से बेहद भयभीत हैं कि यदि क्षेत्र में दोबारा बारिश हुई, तो उनके बचे हुए घर भी पूरी तरह जमीन में समा जाएंगे।\n\nराहत टेंटों में बढ़ा सांप और बिच्छुओं का खतरा\nबेघर हुए परिवारों को तत्काल आश्रय देने के लिए प्रशासन की ओर से खेरी में फिलहाल तीन राहत टेंट उपलब्ध करवाए गए हैं। हालांकि, इन अस्थाई टेंटों में जीवन बिताना ग्रामीणों के लिए एक नई मुसीबत बन गया है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि टेंटों के आसपास झाड़ियों और मलबे के कारण सांपों तथा बिच्छुओं का खतरा हर समय बना रहता है। यह जहरीले जीव अक्सर टेंटों के भीतर घुस जाते हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। रात के समय ग्रामीणों को डर के मारे नींद नहीं आती, क्योंकि उन्हें हर पल सांप या बिच्छू के काटने का भय सताता रहता है। बारिश की तबाही के बाद अब इस नए खतरे ने लोगों का जीना और मुश्किल कर दिया है।\n\nभूवैज्ञानिक सर्वेक्षण टीम भी कारण तलाशने में नाकाम\nखेरी में लगातार धंस रही जमीन की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने इसकी जांच के आदेश दिए थे। इसके तहत जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) यानी भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की एक विशेषज्ञ टीम ने प्रभावित इलाके का दौरा किया। भूवैज्ञानिकों की टीम ने जमीनी स्तर पर व्यापक छानबीन की और मिट्टी तथा चट्टानों के नमूनों का अध्ययन किया। हालांकि, काफी मशक्कत और तकनीकी जांच के बावजूद टीम इस बात का स्पष्ट कारण नहीं खोज सकी कि यहां जमीन लगातार क्यों खिसक रही और धंस रही है। भूवैज्ञानिकों की स्पष्ट रिपोर्ट न आने से प्रशासन और स्थानीय ग्रामीणों दोनों की चिंताएं बढ़ गई हैं, क्योंकि बिना कारण जाने इस भूधंसाव को रोकना संभव नहीं दिख रहा है।\n\n2025 के वादे और 2026 की नई तबाही\nगांव के बुजुर्गों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब खेरी गांव ने इस तरह की प्राकृतिक त्रासदी का सामना किया है। इससे पहले साल 2025 में भी भारी बारिश और बाढ़ के कारण इस इलाके में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था। उस समय प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्रभावित परिवारों का सर्वे किया था और उन्हें हर संभव मदद तथा सुरक्षित स्थानों पर पुनर्वास का भरोसा दिलाया था। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि कागजी कार्रवाई और आश्वासन के अलावा उन्हें कोई वास्तविक मदद नहीं मिली। इसके बाद साल 2026 की बारिश ने बचे-खुचे मकानों और बुनियादी ढांचे को भी पूरी तरह तबाह कर दिया। मेहनत से जोड़े गए पैसों से बनाए गए पक्के मकान आज मिट्टी में मिल चुके हैं।\n\nबुनियादी सुविधाओं का संकट और अनिश्चित भविष्य\nआपदा के बाद से ही खेरी गांव में बुनियादी ढांचे की स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है। पूरे इलाके में पेयजल आपूर्ति की पाइप लाइनें टूट जाने से पानी की सप्लाई पूरी तरह ठप है। इसके साथ ही बिजली के खंभे और तार गिर जाने की वजह से पूरे क्षेत्र में बिजली गुल है। स्थानीय निवासी मोहम्मद आसिफ ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए बताया कि उनके पास न तो पीने का पानी है, न बिजली है और न ही रहने के लिए सुरक्षित छत बची है। उन्होंने बताया कि एक साल पहले आई बाढ़ के बाद भी अधिकारियों ने सिर्फ उनके नाम लिखे थे और लोग सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन कोई ठोस सहायता राशि या राहत नहीं मिली। आज जब सब कुछ खत्म हो चुका है, तो ग्रामीण केवल सरकार से स्थायी पुनर्वास और सुरक्षित आशियाने की गुहार लगा रहे हैं।\n\nइसका आप पर असर\n• जम्मू और कश्मीर में: खेरी गांव के प्रभावित परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरण, बुनियादी बिजली-पानी बहाली और पक्के पुनर्वास की जरूरत है।\n• भारत में: पहाड़ी और भूस्खलन-संभावित क्षेत्रों में भूधंसाव के कारणों की त्वरित जांच और पूर्व चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. यह घटना जम्मू में कहां हुई है?\nयह भूधंसाव की घटना जम्मू शहर से केवल 12 किलोमीटर दूर स्थित खेरी गांव में हुई है।\n\n2. जमीन धंसने से कितना नुकसान हुआ है?\n8 से ज्यादा मकान प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 2 घर पूरी तरह जमींदोज हो गए हैं और एक घर 18 से 20 फुट नीचे धंस गया है।\n\n3. टेंट में रह रहे लोगों को किस नई समस्या का सामना करना पड़ रहा है?\nप्रशासन द्वारा दिए गए 3 राहत टेंटों में सांप और बिच्छू घुस रहे हैं, जिससे बेघर हुए लोगों में भारी भय व्याप्त है।\n\n4. जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) की जांच में क्या सामने आया?\nGSI टीम द्वारा मौके की जांच करने के बावजूद अभी तक जमीन लगातार धंसने के असली कारण का पता नहीं चल पाया है।\n\n5. क्या खेरी गांव में पहले भी ऐसी आपदा आई थी?\nहां, साल 2025 में भी भारी बारिश और बाढ़ से इलाके में बड़ा नुकसान हुआ था, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें कोई ठोस प्रशासनिक राहत नहीं मिली थी।",
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  "category": "जम्मू-कश्मीर",
  "publishedAt": "2026-08-18",
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    "जम्मू",
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    "जमीन धंसना",
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