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  "type": "article",
  "title": "कश्मीर घाटी में अक्टूबर की तपिश से टूटे दशकों पुराने रिकॉर्ड, सेब की खेती पर भारी मार",
  "summary": "कश्मीर में सामान्य ठंड के बजाय रविवार को रिकॉर्ड तोड़ गर्मी दर्ज की गई, जहां काजीगुंड और कोकरनाग में इतिहास का सबसे गर्म अक्टूबर दिन रहा और सेब बागानों को 300 से 400 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।",
  "content": "अक्टूबर की शुरुआत के साथ कश्मीर घाटी में आमतौर पर गुलाबी ठंड की दस्तक हो जाती है, मगर इस दफा घाटी के मौसम ने बिल्कुल उलटा रुख अपना लिया है। रविवार के रोज कश्मीर के अलग-अलग मौसम केंद्रों पर तापमान में अप्रत्याशित उछाल दर्ज किया गया, जिसने कई सालों और दशकों पुराने आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया। श्रीनगर के मैदानी इलाकों से लेकर ऊंचाई पर बसे गुलमर्ग और दक्षिण कश्मीर के काजीगुंड व कोकरनाग तक पारा सामान्य स्तर से कई डिग्री ऊपर पहुंच गया। मौसम का यह तीखा तेवर स्थानीय निवासियों के साथ-साथ घूमने पहुंचे सैलानियों को भी चकित कर रहा है।\n\nश्रीनगर में अठारह साल बाद अक्टूबर में इतनी प्रचंड धूप\nश्रीनगर के मौसम केंद्र पर रविवार को अधिकतम तापमान 31.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 5.7 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। अक्टूबर के महीने में श्रीनगर के इतिहास का यह दूसरा सबसे अधिक तापमान है। इससे पूर्व 2 अक्टूबर 2008 को श्रीनगर में 31.1 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया था, जिसे इस नए आंकड़े ने पार कर दिया। श्रीनगर में अक्टूबर माह का सर्वकालिक सर्वोच्च तापमान 33.9 डिग्री सेल्सियस है, जो करीब 95 साल पहले 2 अक्टूबर 1931 को दर्ज किया गया था। इस बार पारा सामान्य से काफी ऊपर बने रहने के कारण मैदानी क्षेत्रों में दोपहर के वक्त चिलचिलाती धूप का असर देखा गया।\n\nकाजीगुंड और कोकरनाग में टूटे सर्वकालिक गर्मी के रिकॉर्ड\nदक्षिण कश्मीर के काजीगुंड स्टेशन पर गर्मी ने अपने पिछले तमाम आंकड़े ध्वस्त कर दिए। काजीगुंड में अधिकतम तापमान 31.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो सामान्य से 7.3 डिग्री सेल्सियस ज्यादा है। इसके साथ ही काजीगुंड में 1 अक्टूबर 1985 को दर्ज किए गए 31.2 डिग्री सेल्सियस के सर्वकालिक रिकॉर्ड को तोड़ते हुए इतिहास का सबसे गर्म अक्टूबर दिन दर्ज हुआ।\n\nइसी तरह कोकरनाग में भी तापमान ने नया कीर्तिमान स्थापित किया। कोकरनाग स्टेशन पर अधिकतम तापमान 29.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो औसत तापमान से 5.8 डिग्री सेल्सियस अधिक था। इस आंकड़े ने 4 अक्टूबर 2008 को दर्ज 29.2 डिग्री सेल्सियस के पुराने ऑल-टाइम रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। इस बढ़ोतरी से कोकरनाग में भी अक्टूबर माह का अब तक का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया।\n\nगुलमर्ग के ऊंचे पहाड़ों पर भी चढ़ा पारा\nघाटी के मशहूर पर्वतीय पर्यटन स्थल गुलमर्ग में भी असामान्य गर्मी का प्रभाव साफ नजर आया। अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित होने के बावजूद इस रिसॉर्ट में रविवार को 23.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। यह स्तर सामान्य से 6.7 डिग्री सेल्सियस अधिक था। गुलमर्ग के लिए यह इतिहास का दूसरा सबसे गर्म अक्टूबर दिन साबित हुआ। दो दिन पहले 3 अक्टूबर 2026 को यहां 23.0 डिग्री सेल्सियस तापमान मापा गया था, जो रविवार को और बढ़ गया। गुलमर्ग का अब तक का सर्वकालिक अक्टूबर रिकॉर्ड 23.4 डिग्री सेल्सियस है, जो 1 अक्टूबर 2009 को दर्ज किया गया था।\n\nबागवानी संकट और सेब की फसल को भारी नुकसान\nआमतौर पर अक्टूबर के दौरान घाटी में तापमान क्रमिक रूप से नीचे गिरता है, जिससे बागवानी और विशेष रूप से सेब की तुड़ाई और गुणवत्ता के लिए अनुकूल माहौल बनता है। इस बार मैदानी और पहाड़ी दोनों इलाकों में असामान्य तपिश ने हालात बिगाड़ दिए हैं। प्रतिकूल मौसम और तापमान की इस अप्रत्याशित बढ़त की वजह से कश्मीर में सेब के बागानों को गंभीर नुकसान उठाना पड़ा है। सेब की चमक और गुणवत्ता प्रभावित होने से उत्पादकों को लगभग 300 से 400 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। इस मौसमी बदलाव ने घाटी के किसानों और विशेषज्ञों के बीच जलवायु अस्थिरता को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है।\n\nइसका आप पर असर\nकश्मीर में अचानक बढ़े तापमान और फसल क्षति का सीधा असर बागवानों और बाजार में सेब की आपूर्ति पर पड़ रहा है।\n\n• भारत में: कश्मीर में सेब की फसल खराब होने से देश के अन्य राज्यों के थोक और खुदरा बाजारों में बढ़िया गुणवत्ता वाले सेब की आवक प्रभावित हो सकती है। आने वाले हफ्तों में बेहतर किस्म के कश्मीरी सेब की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है।\n• कश्मीर में: घाटी के बागवानों और व्यापारियों को सेब की चमक फीकी पड़ने से 300 से 400 करोड़ रुपये का भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। असामान्य गर्मी के कारण स्थानीय किसानों को फसल प्रबंधन और कटाई की रणनीतियों में तुरंत बदलाव करने की जरूरत है।\n• सैलानियों के लिए: गुलमर्ग और श्रीनगर जाने वाले पर्यटकों को अक्टूबर की शुरुआत में सामान्य से कहीं ज्यादा गर्म मौसम का सामना करना पड़ रहा है। इस समय घाटी की यात्रा करने वालों को भारी ऊनी कपड़ों के बजाय हल्के कपड़ों की जरूरत पड़ रही है।\n• पर्यावरण निगरानी: मौसम के सामान्य चक्र में इस तरह के तेज भटकाव से कृषि और जल संसाधनों से जुड़े विभागों की सतर्कता बढ़ गई है। स्थानीय कृषि विशेषज्ञों को बागवानी की सुरक्षा के लिए नई सिफारिशें जारी करनी पड़ रही हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nघाटी में अक्टूबर की इस असामान्य गर्मी का कारण लंबे समय से बने शुष्क मौसम और सामान्य तापमान में भारी विचलन से जुड़ा हुआ है।\n\n• तापमान में भारी उछाल: कई मौसम केंद्रों पर अधिकतम तापमान सामान्य औसत से 5.7 से 7.3 डिग्री सेल्सियस तक ऊपर चला गया। इस भारी बढ़त ने दशकों पुराने और सर्वकालिक रिकॉर्ड को एक ही दिन में तोड़ दिया।\n• शुष्क और खुला मौसम: शुरुआती अक्टूबर में सामान्य मौसमी ठंडक का अभाव रहने और लगातार तेज धूप बने रहने से मैदानी व पहाड़ी दोनों इलाकों में गर्मी का असर गहरा गया। गुलमर्ग जैसी ऊंचाई वाली जगहों पर भी पारा 23.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।\n• फसल पर सीधा प्रभाव: अत्यधिक तापमान और प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण सेब के बागों में फलों की चमक कम हो गई, जिससे 300 से 400 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इस तरह के अचानक मौसमी उतार-चढ़ाव पहले भी देखे गए हैं, मगर रिकॉर्ड स्तर पर तापमान पहुंचना असामान्य माना जा रहा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. श्रीनगर में रविवार को कितना तापमान दर्ज किया गया?\nश्रीनगर में अधिकतम तापमान 31.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 5.7 डिग्री सेल्सियस अधिक था।\n\n2. काजीगुंड में गर्मी का कौन सा पुराना रिकॉर्ड टूटा?\nकाजीगुंड में पारा 31.4 डिग्री सेल्सियस पहुंचा, जिसने 1 अक्टूबर 1985 को दर्ज 31.2 डिग्री सेल्सियस के सर्वकालिक रिकॉर्ड को तोड़ दिया।\n\n3. कोकरनाग में अधिकतम तापमान कितना रहा?\nकोकरनाग में अधिकतम तापमान 29.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसने 4 अक्टूबर 2008 के 29.2 डिग्री सेल्सियस के रिकॉर्ड को पार कर लिया।\n\n4. गुलमर्ग में दर्ज तापमान की स्थिति क्या रही?\nगुलमर्ग में 23.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ, जो सामान्य से 6.7 डिग्री सेल्सियस अधिक और वहां का दूसरा सबसे गर्म अक्टूबर दिन रहा।\n\n5. खराब मौसम से कश्मीर के सेब उद्योग को कितना नुकसान हुआ है?\nप्रतिकूल मौसम और गर्मी की वजह से सेब के बागानों को लगभग 300 से 400 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है।",
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  "category": "जम्मू-कश्मीर",
  "publishedAt": "2026-10-05",
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