कश्मीर घाटी में सेवारत कश्मीरी पंडितों को मिले 936 सुरक्षित ट्रांजिट आवास श्रीनगर के ज़ेवन समेत कई इलाकों में तैयार फ्लैटों की चाबियां पीएम पैकेज के तहत कार्यरत कर्मचारियों को सौंप दी गई हैं। सुरक्षित क्लस्टर हाउसिंग से कर्मचारियों का मनोबल और सुरक्षा भरोसा मजबूत हुआ है। घाटी में विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के लिए सुरक्षित आवासीय व्यवस्था की दिशा में एक अहम पड़ाव हासिल किया गया है। श्रीनगर के ज़ेवन इलाके में विशेष रूप से निर्मित 936 ट्रांजिट फ्लैटों की चाबियां पात्र कर्मचारियों को औपचारिक रूप से सौंप दी गई हैं। त्योहार के अवसर पर मिला यह सुरक्षित ठिकाना उन कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो लंबे समय से अलग-अलग असुरक्षित किराए के मकानों में रहने को मजबूर थे। ज़ेवन परिसर की बनावट और आवासीय सुविधाएं श्रीनगर के ज़ेवन में कर्मचारियों के लिए 39 आवासीय ब्लॉक तैयार किए गए हैं। प्रत्येक ब्लॉक में भूतल के अलावा 5 मंजिलें बनाई गई हैं, और हर तल पर 4 फ्लैट मौजूद हैं। इस व्यवस्था के अनुसार प्रति ब्लॉक 24 फ्लैट तैयार किए गए हैं। आवासों को कर्मचारियों की जरूरत के अनुरूप व्यवस्थित किया गया है, जिसमें 2 कमरे, एक रसोईघर, स्नानागार और बालकनी शामिल है। बहुमंजिला इमारतों में आवाजाही को सुगम बनाने के लिए सभी ब्लॉकों में आधुनिक लिफ्ट की सुविधा भी स्थापित की गई है। अन्य जिलों में भी आवासीय बुनियादी ढांचे का विस्तार ज़ेवन में सौंपे गए 936 आवासों के अतिरिक्त, घाटी के अन्य प्रमुख जिलों में भी आवासीय सुविधाओं का उद्घाटन किया गया है। कुपवाड़ा, बडगाम और कुलगाम के बाग क्षेत्र में 69 ब्लॉकों में निर्मित 480 फ्लैटों का औपचारिक उद्घाटन उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा रविवार को संपन्न किया गया था। इस नए बुनियादी ढांचे से घाटी के अलग-अलग जिलों में सेवारत कर्मचारियों के लिए अपने कार्यस्थलों के समीप रहना संभव हो सकेगा। एकल क्लस्टर आवास की मांग और सुरक्षा संदर्भ कश्मीर घाटी में इस समय विभिन्न प्रशासनिक विभागों के भीतर लगभग 6 हजार कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से अधिकांश कर्मचारी श्रीनगर और बडगाम जिलों में केंद्रित हैं। अब तक ये कर्मी बिखरे हुए इलाकों में निजी किराए के मकानों में रहने को विवश थे। वर्ष 2020 में कर्मचारी राहुल पंडित की लक्षित हत्या के बाद, कर्मचारियों ने सुरक्षा चिंताओं को उठाते हुए एक ही सुरक्षित परिसर में रहने की मांग को लेकर निरंतर प्रदर्शन किए थे। कर्मचारियों का मानना है कि क्लस्टर में एक साथ रहने से आपसी सुरक्षा की भावना सुदृढ़ होगी और लक्षित हिंसा के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। मिशन मोड प्रोजेक्ट की वर्तमान प्रगति कर्मचारियों के लिए सुरक्षित ट्रांजिट हाउसिंग परियोजना को वर्ष 2020 के बाद से मिशन मोड में आगे बढ़ाया जा रहा है। इस पूरी योजना के अंतर्गत कश्मीर संभाग के 10 जिलों में 20 विभिन्न स्थानों पर कुल 342 ब्लॉक बनाए जाने का लक्ष्य है, जिससे 6,000 फ्लैटों की समग्र उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इस विशाल परियोजना में अब तक 5,200 से अधिक फ्लैटों का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है, जबकि 3,800 से ज्यादा फ्लैट पहले ही आवंटित किए जा चुके हैं। प्रशासन की इस निरंतर पहल से कर्मियों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित हो रहा है। इसका आप पर असर कश्मीर घाटी में काम कर रहे विस्थापित कर्मचारियों को अब असुरक्षित किराए के मकानों के बजाय सुरक्षित क्लस्टर में स्थायी सरकारी ट्रांजिट आवास मिलेगा। • भारत में: विस्थापित कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास और उनकी प्रशासनिक भागीदारी के लिए केंद्र सरकार की दीर्घकालिक योजनाओं की गति तेज हुई है। यह देश भर के विस्थापित समाज में सुरक्षा और विश्वास का माहौल पैदा करता है। • कश्मीर घाटी में: लगभग 6,000 कर्मचारियों को विभिन्न जिलों में अपनी तैनाती के करीब सुरक्षित और संगठित कॉलोनियों में रहने की सुविधा मिलेगी। एक ही स्थान पर सामूहिक रूप से रहने से लक्षित हमलों का खतरा घटेगा और कर्मचारियों का व्यक्तिगत मनोबल बढ़ेगा। • आवास लाभार्थियों के लिए: 936 कर्मचारियों को 2 कमरे, किचन, बालकनी और लिफ्ट से लैस आधुनिक फ्लैट तुरंत रहने के लिए मिल गए हैं। इससे निजी मकान मालिकों पर उनकी निर्भरता और किराए के खर्च का बोझ पूरी तरह खत्म हो जाएगा। • शेष आवेदकों के लिए: 5,200 से अधिक पूरे हो चुके और कुल 6,000 नियोजित आवासों के साथ बाकी बचे कर्मचारियों को भी अगले चरणों में आवास मिलेंगे। संबंधित कर्मी अपनी बारी और तैनाती जिले के आधार पर आगामी आवंटन सूची का इंतजार कर सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ घाटी में काम कर रहे कर्मचारियों की लगातार सुरक्षा मांगों और पूर्व में हुई लक्षित हिंसा की घटनाओं के समाधान के लिए इन ट्रांजिट आवासों का निर्माण किया गया है। • सुरक्षा संकट और आंदोलन: वर्ष 2020 में सेवारत कर्मचारी राहुल पंडित की लक्षित हत्या के बाद कर्मियों ने अलग-अलग बिखरे किराए के मकानों में रहने से साफ इनकार कर दिया था। कर्मचारियों ने सड़कों पर उतरकर सामूहिक रूप से सुरक्षित एकल परिसरों के निर्माण की मांग की थी। • मिशन मोड परियोजना का संकल्प: कर्मियों के बढ़ते आक्रोश और सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए प्रशासन ने 2020 से ट्रांजिट हाउसिंग योजना को मिशन मोड में तेजी से पूरा करने का निर्णय लिया। इस योजना का मकसद 10 जिलों में 6,000 फ्लैट बनाकर सभी कर्मचारियों को एक सुरक्षित छत्रछाया देना था। • बुनियादी ढांचे का तेज क्रियान्वयन: हाल ही में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा 480 अतिरिक्त फ्लैटों के उद्घाटन के बाद ज़ेवन परिसर का निर्माण पूरा कर आवंटन प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी गई। इसके चलते त्योहारी सीजन से ठीक पहले 936 फ्लैटों की चाबियां कर्मचारियों के सुपुर्द की गईं। सवाल-जवाब 1. श्रीनगर के ज़ेवन में कुल कितने ट्रांजिट फ्लैटों की चाबियां सौंपी गई हैं? ज़ेवन इलाके में कर्मचारियों को कुल 936 ट्रांजिट फ्लैटों की चाबियां सौंपी गई हैं। 2. ज़ेवन आवासीय परिसर के प्रत्येक ब्लॉक की संरचना कैसी है? प्रत्येक ब्लॉक में ग्राउंड फ्लोर के अतिरिक्त 5 मंजिलें हैं और हर तल पर 4 फ्लैट हैं, यानी एक ब्लॉक में कुल 24 फ्लैट और लिफ्ट मौजूद हैं। 3. ज़ेवन के अलावा किन अन्य जिलों में नए फ्लैटों का उद्घाटन किया गया? कुपवाड़ा, बडगाम और कुलगाम के बाग इलाके में 69 ब्लॉकों में बने 480 फ्लैटों का उद्घाटन उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा किया गया। 4. कश्मीर घाटी में कर्मचारियों के लिए सामूहिक क्लस्टर आवास की मांग क्यों तेज हुई थी? वर्ष 2020 में कर्मचारी राहुल पंडित की लक्षित हत्या के बाद कर्मचारियों ने किराए के बिखरे मकानों के बजाय सुरक्षित सामूहिक आवास की मांग को लेकर प्रदर्शन किए थे। 5. घाटी में पीएम पैकेज के तहत कुल कितने ट्रांजिट फ्लैट बनाने का लक्ष्य है? 10 जिलों के 20 स्थानों पर 342 ब्लॉकों में कुल 6,000 फ्लैट बनाने की योजना है, जिनमें से 5,200 से अधिक बन चुके हैं और 3,800 से ज्यादा आवंटित किए जा चुके हैं। https://trendkia.com/jammu-kashmir/kashmir-ghati-men-sevarata-kashmiri-pandit-karmachariyon-ko-mile-936-surakshita-tranjita-avasa-55061 TrendKia — Har trend, sabse pehle.