# किश्तवाड़ में पीडीपी नेता अब्दुल कबीर पुलिस हिरासत में, आतंकी बुरहान वानी पर बयान से मचा सियासी बवाल

> हिज्बुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी को शहीद बताने वाले पीडीपी नेता अब्दुल कबीर को किश्तवाड़ पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया है। अपने भाषण में उन्होंने गठबंधन सरकार और अनुच्छेद 370 का भी जिक्र किया था।

**Type:** article · **Category:** जम्मू-कश्मीर · **Published:** 2026-10-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jammu-kashmir/kishtwar-men-pdp-neta-abdul-kabir-pulisa-hirasata-men-atnki-burhan-wani-para-bayana-se-macha-siyasi-bavala-45356 · **Language:** Hindi
**Tags:** अब्दुल कबीर, किश्तवाड़ पुलिस, बुरहान वानी, पीडीपी, महबूबा मुफ्ती, जम्मू कश्मीर राजनीति, अनुच्छेद 370, भाजपा

जम्मू संभाग के किश्तवाड़ जिले में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी यानी पीडीपी के नेता अब्दुल कबीर को पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। यह पूरी कार्रवाई पार्टी के एक हालिया सम्मेलन में उनके दिए गए विवादित भाषण के बाद सामने आई है। उस जलसे में उन्होंने हिज्बुल मुजाहिदीन के मारे गए कमांडर बुरहान वानी का उल्लेख करते हुए उसे शहीद का दर्जा दे दिया था। इस टिप्पणी के बाद कानून व्यवस्था से जुड़े हलकों और स्थानीय राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं, जिसके तुरंत बाद स्थानीय पुलिस ने उन्हें थाने तलब कर लिया।

## हिरासत और पुलिस की जांच प्रक्रिया
अब्दुल कबीर द्वारा दिए गए बयानों की गूंज फैलते ही किश्तवाड़ पुलिस स्टेशन ने संज्ञान लिया और उन्हें तत्काल पूछताछ के लिए थाने में रोक लिया। गुरुवार के दिन आयोजित दलगत सम्मेलन के बाद जब संवाददाताओं ने उनसे इस मुद्दे पर सवाल किए, तो उन्होंने सफाई देने का प्रयास किया। उनका तर्क था कि उन्होंने किसी खास तरीके से वानी के साथ हुए बर्ताव का ब्योरा सामने नहीं रखा था। सुरक्षा एजेंसियों का रिकॉर्ड दर्शाता है कि घाटी के अलगाववादी हिंसक दौर का मुख्य चेहरा रहा बुरहान वानी 8 जुलाई, 2016 की तारीख को दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले स्थित कोकरनाग इलाके में सुरक्षा बलों के हाथों एक मुठभेड़ में मारा गया था।

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## व्यक्तिगत दृष्टिकोण और लोकतांत्रिक अधिकारों का दावा
जब पत्रकारों ने कबीर से सीधे तौर पर पूछा कि क्या किसी दहशतगर्द को इस तरह सम्मानजनक संबोधन देना न्यायसंगत माना जा सकता है, तो उन्होंने शब्दों के चयन को अलग संदर्भ बताया। उनका कहना था कि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था के नागरिक होने के नाते हर व्यक्ति को अपने विचार रखने की पूरी आजादी हासिल है। पत्रकारों ने जब यह सवाल दोहराया कि क्या बुरहान को शहीद करार देना उनकी अपनी व्यक्तिगत राय है, तो पीडीपी नेता ने साफ तौर पर स्वीकार किया कि यह उनका अपना निजी नजरिया है।

## भाजपा के साथ पुराने गठबंधन का इतिहास
अपने संबोधन के दौरान कबीर ने केवल वानी पर ही बात नहीं की, बल्कि वर्ष 2014 के दौर में भाजपा और पीडीपी की संयुक्त हुकूमत के दौर को भी विस्तार से याद किया। उन्होंने दावा किया कि जब दोनों दल मिलकर राज्य की बागडोर संभाल रहे थे, तब उनकी पार्टी ने भाजपा की नीतियों पर मजबूत पहरा बैठा रखा था। उनका कहना था कि उस दौरान महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने साझीदार को प्रशासन के फैसलों में मनमानी करने की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी थी। उन्होंने पुरानी बिजली परियोजनाओं की बिक्री का संदर्भ देते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस पर भी निशाना साधा और कहा कि उस वक्त उन मामलों पर कोई उंगली तक नहीं उठा सका था।

## अनुच्छेद 370 और गठबंधन टूटने के आरोप
भाषण के अगले हिस्से में कबीर ने तत्कालीन मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के रुख की चर्चा करते हुए कहा कि उनके रहते अनुच्छेद 370 को समाप्त करना तो दूर, उस प्रावधान पर बहस तक की इजाजत नहीं दी गई थी। उन्होंने आरोप मढ़ा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस को भी इस संवेदनशील संवैधानिक मुद्दे पर बोलने से पूरी तरह रोक कर रखा गया था, क्योंकि किसी में भी पीडीपी के चुनावी वादों के खिलाफ जाने का साहस नहीं था। अपनी बात के आखिर में उन्होंने भाजपा पर गंभीर इल्जाम लगाते हुए कहा कि उसने पीडीपी की पीठ में खंजर घोंपकर सत्ता की साझेदारी खत्म कर दी थी। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे सभी मुश्किलों का सामना एकजुट होकर करें और अपने हकों की इस लड़ाई को मिलकर आगे बढ़ाते रहें।

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## इसका आप पर असर
इस घटनाक्रम का प्रत्यक्ष प्रभाव जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक बयानबाजी और कानून व्यवस्था की निगरानी पर पड़ता है।

- **भारत में:** आतंकवाद या उग्रवादियों को महिमामंडित करने वाले बयानों के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती का यह सीधा संकेत है। सार्वजनिक मंचों से विवादित भाषा बोलने वाले नेताओं पर कानूनी कार्रवाई की नजीर पेश होती है।
- **किश्तवाड़ में:** स्थानीय स्तर पर संवेदनशील बयानों के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और पुलिस हर गतिविधि पर नजर रख रही है। क्षेत्र के नागरिकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को किसी भी तरह के भड़काऊ जमावड़े से दूर रहने की हिदायत दी जाती है।
- **कानूनी पहलू:** पुलिस हिरासत में पूछताछ के बाद संबंधित धाराओं के तहत औपचारिक मामला दर्ज करने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे मामलों में शामिल व्यक्तियों को लंबी अदालती और कानूनी प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ता है।
- **राजनीतिक असर:** दलों के बीच चुनावी और वैचारिक ध्रुवीकरण और गहरा होने के आसार बन जाते हैं। स्थानीय राजनीतिक संगठन अब अपने सार्वजनिक कार्यक्रमों और भाषणों के दौरान अधिक सतर्कता बरतेंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
यह घटना एक राजनीतिक रैली में की गई विवादास्पद टिप्पणी और उस पर पुलिस के त्वरित कानूनी एक्शन के चलते सामने आई।

- **सीधा कारण:** पीडीपी नेता अब्दुल कबीर ने एक पार्टी सम्मेलन के मंच से मारे गए हिज्बुल कमांडर बुरहान वानी को शहीद कह दिया था। इस भाषण के सार्वजनिक होते ही पुलिस ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उन्हें हिरासत में ले लिया।
- **पृष्ठभूमि और संदर्भ:** बुरहान वानी वर्ष 2016 में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया था और उसके नाम से जुड़ा महिमामंडन हमेशा से कानूनन संवेदनशील विषय रहा है। कबीर ने मीडिया के सामने इसे अपना निजी विचार बताते हुए अपना बचाव करने की कोशिश की।
- **पुरानी सियासी खींचतान:** कबीर अपने भाषण में 2014 के पीडीपी-भाजपा गठबंधन, अनुच्छेद 370 और सरकार गिरने की घटनाओं पर बोल रहे थे। उसी क्रम में अपने दल का प्रभाव दिखाने के दौरान उन्होंने यह विवादास्पद संदर्भ जोड़ दिया।
- **आगामी प्रक्रिया:** हिरासत में औपचारिक पूछताछ के बाद पुलिस यह तय करेगी कि बयानों के आधार पर नियमित प्राथमिकी दर्ज की जाए या कोई निवारक कदम उठाया जाए।

## सवाल-जवाब

### 1. पीडीपी नेता अब्दुल कबीर को पुलिस ने हिरासत में क्यों लिया?
उन्होंने पार्टी के एक कार्यक्रम में हिज्बुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी को शहीद कहा था, जिसके बाद किश्तवाड़ पुलिस ने उन्हें पूछताछ के लिए हिरासत में लिया।

### 2. यह घटना जम्मू-कश्मीर के किस इलाके की है?
यह घटना जम्मू संभाग के किश्तवाड़ जिले की है, जहां के पुलिस स्टेशन में उनसे पूछताछ की जा रही है।

### 3. पत्रकारों के सवाल पर अब्दुल कबीर ने क्या सफाई दी?
उन्होंने कहा कि बुरहान वानी को शहीद कहना उनकी निजी राय है और लोकतांत्रिक देश में हर नागरिक को बोलने की आजादी है।

### 4. बुरहान वानी कब और कहां मारा गया था?
बुरहान वानी 8 जुलाई, 2016 को दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के कोकरनाग इलाके में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया था।

### 5. अब्दुल कबीर ने 2014 की सरकार और भाजपा के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि 2014 के गठबंधन में महबूबा मुफ्ती ने भाजपा को ढील नहीं दी थी और बाद में भाजपा ने गठबंधन तोड़कर पीडीपी की पीठ में छुरा घोंपा।

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