लेह में शराब व्यापारियों ने सोनम वांगचुक के रुख पर उठाए सवाल, पारिवारिक रिसॉर्ट और पारंपरिक पेय पर लगाए दोहरे मापदंड के आरोप लद्दाख के लाइसेंस प्राप्त शराब और होटल व्यापारियों ने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। संघ का कहना है कि एक तरफ वे शराबबंदी का समर्थन करते हैं और दूसरी तरफ अपने रिसॉर्ट में बिना लाइसेंस वाली वाइन और पारंपरिक शराब को बढ़ावा देते हैं। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में शराब के कारोबार और प्रस्तावित शराबबंदी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। लेह शहर में होटल और शराब व्यापार से जुड़े संगठित व्यवसायियों ने पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक के सार्वजनिक बयानों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। व्यापारियों का स्पष्ट कहना है कि शराब नीति को लेकर समाज में जो विमर्श गढ़ा जा रहा है, उसमें नियमों का पालन करने वाले वैध व्यापारियों को जानबूझकर आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जबकि गैर-लाइसेंसी गतिविधियों को अनदेखा किया जा रहा है। व्यापारियों की प्रेस कॉन्फ्रेंस और दोहरे मापदंड का मुद्दा लेह में 'ऑल लद्दाख होटल्स एंड बार्स एसोसिएशन' तथा 'ऑल लद्दाख लिकर ट्रेडर्स एसोसिएशन' के प्रतिनिधियों ने 31 अक्टूबर को एक संयुक्त प्रेस वार्ता आयोजित की। इस महत्वपूर्ण बैठक में संघ के सभी 60 सदस्य व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहे। व्यापारियों ने सोनम वांगचुक की हालिया गतिविधियों और बयानों पर गहरी आपत्ति जताई। संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि वांगचुक एक ओर तो पूर्ण शराबबंदी की मांग करने वाले मंचों पर बैठते हैं, लेकिन दूसरी ओर स्थानीय पारंपरिक पेय पदार्थों को बढ़ावा देने की वकालत करते हैं। व्यापारियों ने इस रुख को स्पष्ट पाखंड करार दिया है। व्यापारियों ने उल्लेख किया कि 28 अक्टूबर को सोनम वांगचुक लेह स्थित एनडीएस मेमोरियल पार्क में धरने पर बैठी महिलाओं के साथ शामिल हुए थे। यह धरना धार्मिक संगठनों से जुड़ी महिलाओं द्वारा लद्दाख को पूर्ण रूप से शराब-मुक्त यानी ड्राई लद्दाख घोषित कराने के लिए 3 से 4 दिनों से चलाया जा रहा था। इसी प्रदर्शन में भाग लेते हुए वांगचुक ने लद्दाख की सदियों पुरानी पारंपरिक शराब 'चांग' का बचाव किया और उसे स्थानीय विरासत का अभिन्न हिस्सा बताया। उन्होंने इसे बाजार में बिकने वाली शराब की तुलना में अधिक बेहतर और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प के रूप में पेश किया। माइक्रोब्रूअरीज और टैक्स छूट की मांग पर टकराव धरने के दौरान वांगचुक ने प्रशासन के समक्ष यह प्रस्ताव रखा था कि लद्दाख के स्थानीय युवाओं को गेहूं से पारंपरिक शराब तैयार करने वाली आधुनिक छोटी ब्रूअरीज या माइक्रोब्रूअरीज लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने इन स्थानीय ब्रूअरीज को टैक्स छूट देने की वकालत भी की। इसके साथ ही उन्होंने दुकानों पर मिलने वाली वाणिज्यिक शराब पर अत्यधिक कर लगाने का सुझाव दिया, ताकि ऊंची कीमतों के कारण आम लोग उसे खरीदने से कतराने लगें। लाइसेंस प्राप्त व्यापारियों ने इस मांग पर कड़ा रोष जताया है। उनका कहना है कि यदि शराब का सेवन स्वास्थ्य और समाज के लिए बुरा है, तो फिर स्थानीय स्तर पर बनने वाली शराब को 'स्वास्थ्यप्रद' बताकर बढ़ावा देना पूरी तरह अतार्किक है। व्यापारियों ने सवाल किया कि क्या स्थानीय स्तर पर बनाई जाने वाली मदिरा से सामाजिक या शारीरिक प्रभाव अलग हो जाते हैं। एक ओर सख्त निषेध की वकालत करना और दूसरी ओर अपनी पसंद की शराब के लिए टैक्स माफी मांगना किसी भी तरह से न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता। पारिवारिक रिसॉर्ट और बिना लाइसेंस वाइन बिक्री के आरोप शराब व्यापारियों ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीधे तौर पर सोनम वांगचुक के पैतृक गांव और उनके पारिवारिक व्यवसाय को लेकर गंभीर आरोप लगाए। व्यापारियों ने सिंधु नदी के तट पर बसे उलेतोकपो गांव का विवरण देते हुए कहा कि यह वांगचुक का जन्मस्थान है, जहां उनका परिवार 'उले एथनिक रिसॉर्ट' संचालित करता है। व्यापारियों का दावा है कि इस रिसॉर्ट में 'उले तोकपो एप्पल होममेड वाइन' और फलों से बनी अन्य मदिरा बिना किसी वैध वाणिज्यिक आबकारी लाइसेंस के खुले तौर पर बनाई और परोसी जाती है। व्यापारियों ने सबूत पेश करने का दावा करते हुए आरोप लगाया कि वांगचुक के भाई द्वारा संचालित इस रिसॉर्ट में तैयार होने वाले 'उले' ब्रांड के पेय पर आबकारी विभाग का कोई विनियामक नियंत्रण नहीं है। उन्होंने कहा कि आम शराब विक्रेताओं को कड़े नियमों, भारी लाइसेंस शुल्क और सख्त जांच प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है, जबकि इस पारिवारिक संपत्ति पर बिना लाइसेंस के काम चल रहा है। व्यापारियों ने केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन पर भी सवाल दागे कि अब तक इस अवैध गतिविधि के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। आर्थिक नुकसान और राजस्व का गणित होटल और बार एसोसिएशन ने अपने व्यवसाय के आर्थिक योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उनके सदस्य सरकार के खजाने में सालाना 112 से 115 करोड़ रुपये का भारी-भरकम टैक्स जमा करते हैं। यह राजस्व लद्दाख के सार्वजनिक विकास और बुनियादी ढांचे में काम आता है। व्यापारियों ने आरोप लगाया कि सोनम वांगचुक केवल जनसमर्थन और राजनीतिक लाभ हासिल करने के उद्देश्य से एक वैध आर्थिक क्षेत्र को निशाना बना रहे हैं। संघ ने स्पष्ट किया कि लद्दाख में शराब का कारोबार किसी एक जाति या धर्म का नहीं है। इसमें मुस्लिम, बौद्ध, ईसाई और हिंदू, चारों प्रमुख समुदायों के लोग कानूनी अनुमतियों के साथ काम कर रहे हैं। इसे किसी संकीर्ण पहचान से जोड़ना गलत है। कई कारोबारियों ने हाल ही में लाइसेंस शुल्क, दुकानों के परिसर और शराब के स्टॉक पर लाखों रुपये का निवेश किया है। कई व्यापारियों को अपनी दुकानें खोले एक महीने से भी कम समय हुआ है। ऐसे में अचानक प्रतिबंध या मनमाने विरोध से वे गंभीर आर्थिक संकट में फंस सकते हैं। चुनिंदा सक्रियता और अन्य नशीले पदार्थों का सवाल व्यापारियों ने वांगचुक के पर्यावरणवादी दृष्टिकोण पर सवाल उठाते हुए इसे चुनिंदा सक्रियता करार दिया। उन्होंने कहा कि लद्दाख में केवल शराब ही सामाजिक या सांस्कृतिक बहस का विषय नहीं हो सकती। ड्रग्स, सिगरेट और मांस भी पारंपरिक लद्दाखी संस्कृति का हिस्सा नहीं रहे हैं, और मांस उद्योग का स्थानीय पर्यावरण पर भारी प्रभाव पड़ता है, लेकिन उस पर पर्यावरणविद् पूरी तरह खामोश रहते हैं। एसोसिएशन ने चुनौती दी कि यदि प्रशासन समाज सुधार के नाम पर प्रतिबंध लगाना चाहता है, तो उसे निष्पक्षता दिखानी चाहिए। यदि सिगरेट, सभी प्रकार के नशीले पदार्थों और पर्यावरण को प्रभावित करने वाले मांस उद्योग पर भी समान रूप से पूर्ण पाबंदी लगाई जाती है, तो वैध व्यापारी भी शराब पर पूर्ण प्रतिबंध का स्वागत करने को तैयार हैं। लेकिन केवल कुछ व्यापारियों की आजीविका को नैतिक आधार पर निशाना बनाना पूरी तरह अनुचित है। आबकारी नीति पर पूर्व का घटनाक्रम और प्रशासन का पक्ष लद्दाख में शराब नीति को लेकर टकराव पहले से चल रहा था। सोनम वांगचुक ने 22 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित लद्दाख भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया था कि प्रशासन रिहायशी बस्तियों और शिक्षण संस्थानों के पास नए बार खोलकर शराब संस्कृति को बढ़ावा दे रहा है। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना के प्रशासन पर तंज कसते हुए आरोप लगाया था कि नशा मुक्ति के नाम पर लद्दाख में शराब की बौछार की जा रही है। प्रशासन ने उस समय इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और भ्रामक जानकारी बताया था। आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि पूरे केंद्र शासित प्रदेश में शराब की केवल एक ही आधिकारिक दुकान कार्यरत है। इसके अतिरिक्त, स्थानीय नागरिकों के एक प्रतिनिधिमंडल द्वारा उपराज्यपाल सक्सेना से भेंट करने के उपरांत प्रशासन ने 26 अगस्त को ही वर्ष 2026-27 के लिए तैयार की गई आबकारी नीति को वापस ले लिया था। इसके बावजूद धरने और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी रहा, जिसके जवाब में अब संगठित व्यापारी खुलकर सामने आ गए हैं और उन्होंने वांगचुक को टैक्स चुकाने वाले नागरिकों की आजीविका में अड़चन न डालने की अंतिम चेतावनी दी है। इसका आप पर असर यह विवाद लद्दाख में होटल व्यवसाय, पर्यटन सेवाओं और आबकारी राजस्व से जुड़े नियमों को सीधे प्रभावित करता है। • भारत में: लद्दाख घूमने जाने वाले पर्यटकों और आतिथ्य सेवाओं पर स्थानीय आबकारी नियमों और बार संचालन के विवाद का सीधा असर देखने को मिल सकता है। पर्यटन सीजन के दौरान होटल सेवाओं की लागत और उपलब्धता में उतार-चढ़ाव आ सकता है। • लद्दाख में: 60 से अधिक लाइसेंस प्राप्त बार और होटल संचालकों की आजीविका और उनके द्वारा चुकाए जाने वाले 112 से 115 करोड़ रुपये के राजस्व पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। नए लाइसेंस धारकों के लिए लाखों रुपये का निवेश खतरे में पड़ सकता है। • रोजगार और व्यापार: स्थानीय स्तर पर काम करने वाले सभी समुदायों के कर्मचारियों और छोटे उद्यमियों के रोजगार पर सीधा दबाव बन सकता है। नीतिगत स्पष्टता न होने पर नए निवेश रुकने की आशंका है। • स्थानीय उत्पादकों के लिए: पारंपरिक शराब और होममेड वाइन को लेकर विनियामक नियमों में बदलाव हो सकता है, जिससे बिना लाइसेंस काम कर रहे उत्पादकों पर निगरानी बढ़ाई जा सकती है। भविष्य में होममेड पेय पदार्थों के लिए स्पष्ट नियम तय हो सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ यह गतिरोध तब पैदा हुआ जब सोनम वांगचुक ने पूर्ण शराबबंदी की मांग का समर्थन करते हुए स्थानीय पारंपरिक शराब को टैक्स छूट देने की वकालत की। इस पर वैध लाइसेंस धारकों ने इसे अपनी आजीविका पर दोहरा हमला मानते हुए उनके पारिवारिक रिसॉर्ट के संचालन पर सवाल उठा दिए। • सीधा कारण: 28 अक्टूबर को सोनम वांगचुक ने लेह में महिलाओं के शराबबंदी धरने में बैठकर पारंपरिक शराब चांग का बचाव किया और सूक्ष्म ब्रूअरीज के लिए टैक्स छूट की मांग की। वैध व्यापारियों ने इसे खुला विरोधाभास और अपने कारोबार पर हमला माना। • पारिवारिक रिसॉर्ट का मुद्दा: शराब व्यापारी संघ ने आरोप लगाया कि वांगचुक के पैतृक गांव उलेतोकपो में उनका पारिवारिक रिसॉर्ट बिना किसी वैध आबकारी लाइसेंस के घरेलू सेब वाइन बेचता है। इस वजह से व्यापारियों ने उन पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप मढ़ दिया। • आबकारी नीति का तनाव: वांगचुक ने 22 अक्टूबर को दिल्ली में प्रशासन पर रिहायशी इलाकों में बार खोलने और शराब को बढ़ावा देने के आरोप लगाए थे। प्रशासन ने इन दावों को गलत बताते हुए स्पष्ट किया कि 2026-27 की नीति 26 अगस्त को ही वापस ली जा चुकी थी। सवाल-जवाब 1. लद्दाख के शराब व्यापारियों ने किस पर आरोप लगाए हैं? लद्दाख के शराब व्यापारियों और होटल संघ ने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पर शराब नीति को लेकर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। 2. व्यापारियों की प्रेस कॉन्फ्रेंस कब और कहां आयोजित हुई? यह प्रेस कॉन्फ्रेंस 31 अक्टूबर को लेह में आयोजित हुई, जिसमें 'ऑल लद्दाख होटल्स एंड बार्स एसोसिएशन' के सभी 60 सदस्य शामिल हुए। 3. सोनम वांगचुक पर पारिवारिक रिसॉर्ट को लेकर क्या आरोप है? व्यापारियों का आरोप है कि उलेतोकपो स्थित उनके पारिवारिक रिसॉर्ट में बिना वैध लाइसेंस के 'उले तोकपो एप्पल होममेड वाइन' तैयार कर बेची जाती है। 4. वांगचुक ने धरने के दौरान पारंपरिक शराब को लेकर क्या कहा था? उन्होंने पारंपरिक पेय चांग को लद्दाख की विरासत और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प बताते हुए स्थानीय माइक्रोब्रूअरीज को टैक्स छूट देने की वकालत की थी। 5. लद्दाख में लाइसेंस प्राप्त शराब कारोबारी सरकार को कितना टैक्स देते हैं? व्यापारी संघ के अनुसार, लाइसेंस प्राप्त होटल और बार संचालक सरकार को सालाना 112 से 115 करोड़ रुपये का टैक्स चुकाते हैं। 6. प्रशासन ने शराब की दुकानों और आबकारी नीति पर क्या स्पष्टीकरण दिया है? प्रशासन ने कहा है कि पूरे लद्दाख में केवल एक शराब की दुकान है और 2026-27 की आबकारी नीति को 26 अगस्त को ही वापस ले लिया गया था। https://trendkia.com/jammu-kashmir/leh-men-sharaba-vyapariyon-ne-sonam-wangchuk-ke-rukha-para-uthae-savala-parivarika-risorta-aura-parnparika-peya-para-lagae-dohare--54404 TrendKia — Har trend, sabse pehle.