{
  "type": "article",
  "title": "मजालता के घने जंगलों में सुरक्षा बलों की घेराबंदी सख्त, तीसरे आतंकी की तलाश में पांच जिलों में चौकसी",
  "summary": "जम्मू संभाग के मजालता इलाके में जैश के दो आतंकियों को ढेर करने के बाद सुरक्षा बलों ने तीसरे आतंकी की धरपकड़ के लिए पांच जिलों में व्यापक सर्च ऑपरेशन छेड़ रखा है।",
  "content": "जम्मू संभाग के पांच प्रमुख जिलों में सुरक्षा एजेंसियां चौबीसों घंटे कड़ा पहरा दे रही हैं, जहां जंगलों के दुर्गम रास्तों पर संदिग्ध गतिविधियों को रोकने के लिए व्यापक तलाशी अभियान छेड़ा गया है। कठुआ, सांबा, उधमपुर, डोडा और किश्तवाड़ में यह हाई अलर्ट मजालता के वन क्षेत्र में हुई हालिया मुठभेड़ के बाद लागू किया गया है। रविवार को भी इस घने जंगल में ‘ऑपरेशन सोहन’ के तहत तलाशी का दायरा लगातार बढ़ाया गया, ताकि छिपे हुए तत्वों को बाहर निकलने का कोई अवसर न मिल सके।\n\nमजालता के जंगलों में तीन दिनों से जारी कार्रवाई\nबर्तल, सोहन और खुब्बन के बीहड़ जंगलों में यह बड़ा सैन्य अभियान 16 सितंबर की रात को शुरू किया गया था। कार्रवाई के अगले दिन, यानी 17 सितंबर की सुबह सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच सीधा मुकाबला हुआ। इस आमने-सामने की गोलीबारी में सुरक्षा बलों ने जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े दो पाकिस्तानी आतंकवादियों को मौके पर ही ढेर कर दिया। हालांकि, इस मुठभेड़ के दौरान एक तीसरा आतंकी जख्मी हुआ था, जिसके अब भी इलाके की किसी गुफा या प्राकृतिक ओट में छिपे होने की पूरी आशंका जताई जा रही है। इसी तीसरे हमलावर को पकड़ने के लिए यह अभियान तीसरे दिन भी पूरी ताकत से जारी रहा।\n\nघुसपैठ के पारंपरिक रूट पर पहरा\nयह पूरा तलाशी अभियान सेना की व्हाइट नाइट कॉर्प्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की साझा रणनीति के तहत आगे बढ़ रहा है। मजालता का यह भौगोलिक इलाका सुरक्षा रणनीति के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि यह घुसपैठ के एक पुराने और पारंपरिक रास्ते का अहम हिस्सा रहा है। यह गुप्त मार्ग कठुआ और सांबा के सीमावर्ती इलाकों से शुरू होकर मजालता, बसंतगढ़ और रामनगर से गुजरता है। इसके बाद यह डोडा, भद्रवाह और किश्तवाड़ की पहाड़ियों को छूते हुए सीधे दक्षिण कश्मीर की घाटियों तक पहुंचता है। इसी रणनीतिक रूट को पूरी तरह सील करने के मकसद से सुरक्षा घेरा अब मजालता से आगे दूरदराज के इलाकों तक फैला दिया गया है।\n\nड्रोन, खोजी कुत्ते और आधुनिक निगरानी उपकरण तैनात\nजंगलों के भीतर सुरक्षा बल चप्पे-चप्पे को खंगालने के लिए स्निफर डॉग्स, मानवरहित ड्रोन कैमरों और थर्मल इमेजिंग तकनीक से लैस हेलीकॉप्टरों की मदद ले रहे हैं। मारे गए पाकिस्तानी आतंकियों के पास से बरामद मोबाइल फोन और अन्य निजी सामान को तकनीकी व फॉरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित भेजा गया है, जिससे उनके स्थानीय संपर्कों और सक्रिय मददगारों की पहचान की जा सके। इसके साथ ही फॉरेंसिक विशेषज्ञ उस रास्ते पर मिले खून के कतरों और अन्य भौतिक निशानों का विश्लेषण कर रहे हैं, जिससे घायल आतंकी के भागने की सही दिशा का सटीक सुराग मिल सके।\n\nमददगारों पर शिकंजा और हाईवे पर सघन चेकिंग\nजमीनी नेटवर्क को तोड़ने के लिए सुरक्षा बलों ने एक संदिग्ध ओवर-ग्राउंड वर्कर को हिरासत में लिया है। इस व्यक्ति पर आतंकियों के समूह को पनाह देने और राशन व जरूरी रसद का सामान पहुंचाने के आरोप हैं, जिसको लेकर विस्तृत पूछताछ चल रही है। हिरासत में लिए गए व्यक्ति से मिले सुरागों के आधार पर अन्य ठिकानों पर भी त्वरित छापेमारी की जा रही है। मुख्य राजमार्गों, विशेषकर जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर अतिरिक्त नाके लगाए गए हैं। साथ ही मजालता, रामनगर, बसंतगढ़, बिल्लावर और रामकोट के लिंक रास्तों पर वाहनों और संदिग्ध यात्रियों की कड़ी तलाशी ली जा रही है। नॉर्दर्न आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन के दौरान व्हाइट नाइट कॉर्प्स की त्वरित कार्रवाई और तीनों सुरक्षा बलों के उत्कृष्ट आपसी समन्वय की सराहना की है।\n\nइसका आप पर असर\nजम्मू संभाग के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा जांच और नाकाबंदी बढ़ाए जाने से स्थानीय निवासियों और यात्रियों की दैनिक आवाजाही प्रभावित हो रही है।\n\n• कठुआ, सांबा, उधमपुर, डोडा और किश्तवाड़ में: इन पांचों जिलों में मुख्य मार्गों और जंगलों के आसपास अतिरिक्त संयुक्त सुरक्षा नाके स्थापित कर दिए गए हैं। स्थानीय ग्रामीणों और यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा के दौरान वैध पहचान पत्र साथ रखें और सघन चेकिंग के कारण संभावित देरी के लिए पहले से तैयार रहें।\n• जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर: हाईवे और उससे जुड़े लिंक मार्गों पर वाहनों की लगातार तलाशी ली जा रही है। रामनगर, बसंतगढ़, बिल्लावर और रामकोट के रास्तों पर चलने वाले चालकों को अतिरिक्त समय लेकर चलने की सलाह दी गई है।\n• जंगल से सटे सीमावर्ती गांवों में: घने जंगलों में सर्च ऑपरेशन जारी रहने के कारण बाहरी व अज्ञात व्यक्तियों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। सुरक्षा बलों ने संदिग्ध गतिविधियों या अज्ञात व्यक्तियों की मौजूदगी की जानकारी तुरंत नजदीकी पुलिस थाने को देने की अपील की है।\n• स्थानीय रसद और सहायता निगरानी: संदिग्ध ओवर-ग्राउंड वर्करों पर निगरानी सख्त होने से स्थानीय स्तर पर पहचान सत्यापन के नियम कड़े कर दिए गए हैं। किरायेदारों और नए कामगारों के विवरण स्थानीय पुलिस में अनिवार्य रूप से दर्ज कराने पर जोर दिया जा रहा है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह बड़ा तलाशी अभियान 17 सितंबर को मजालता के जंगलों में जैश-ए-मोहम्मद के दो पाकिस्तानी आतंकवादियों के मारे जाने और एक घायल आतंकी के जंगल में छिपे होने की पुष्टि के बाद शुरू किया गया।\n\n• मुठभेड़ और घायल आतंकी का पलायन: 16 सितंबर की रात बर्तल, सोहन और खुब्बन के जंगलों में शुरू हुए ऑपरेशन में दो आतंकी मारे गए, जबकि तीसरा घायल होकर घने जंगल में छिप गया। सुरक्षा बल उस घायल हमलावर को स्थानीय मदद मिलने या बाहर भागने से पहले निष्क्रिय करना चाहते हैं।\n• ऐतिहासिक घुसपैठ मार्ग की संवेदनशीलता: यह इलाका कठुआ-सांबा सीमा से शुरू होकर मजालता, बसंतगढ़, रामनगर, डोडा, भद्रवाह और किश्तवाड़ होते हुए दक्षिण कश्मीर तक जाने वाले पुराने घुसपैठ मार्ग पर स्थित है। इस मार्ग पर आतंकियों की आवाजाही रोकने के लिए पांचों जिलों में एक साथ सुरक्षा घेरा कड़ा किया गया है।\n• स्थानीय नेटवर्क और रसद सहायता का खुलासा: एक संदिग्ध ओवर-ग्राउंड वर्कर को आतंकियों को पनाह और रसद देने के आरोप में हिरासत में लिया गया है। उससे मिली जानकारी के आधार पर पूरे सपोर्ट नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए अन्य संभावित ठिकानों पर भी छापे मारे जा रहे हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ऑपरेशन सोहन कब और कहां शुरू हुआ था?\nयह अभियान 16 सितंबर की रात को मजालता के बर्तल, सोहन और खुब्बन के घने वन क्षेत्रों में शुरू किया गया था।\n\n2. 17 सितंबर की मुठभेड़ में क्या नतीजा निकला?\nसुरक्षा बलों ने जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े दो पाकिस्तानी आतंकवादियों को मार गिराया, जबकि एक तीसरा आतंकी घायल होकर जंगल में छिप गया।\n\n3. किन पांच जिलों में हाई अलर्ट जारी किया गया है?\nकठुआ, सांबा, उधमपुर, डोडा और किश्तवाड़ जिलों में सुरक्षा बलों ने हाई अलर्ट जारी किया है।\n\n4. मजालता का इलाका सुरक्षा दृष्टि से इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है?\nयह क्षेत्र कठुआ-सांबा सीमा से लेकर बसंतगढ़, रामनगर, डोडा, भद्रवाह और किश्तवाड़ होते हुए दक्षिण कश्मीर तक जाने वाले पुराने घुसपैठ मार्ग से जुड़ा है।\n\n5. जंगल में छिपे आतंकी की तलाश के लिए किन तकनीकों का उपयोग हो रहा है?\nसर्च ऑपरेशन में स्निफर डॉग, निगरानी ड्रोन और थर्मल सर्विलांस कैमरों से लैस हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है।\n\n6. इस मामले में क्या कोई गिरफ्तारी या हिरासत हुई है?\nहां, आतंकियों को रसद और पनाह देने के आरोप में एक संदिग्ध ओवर-ग्राउंड वर्कर को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।",
  "url": "https://trendkia.com/jammu-kashmir/majalta-ke-ghane-jngalon-men-suraksha-balon-ki-gherabndi-sakhta-tisare-atnki-ki-talasha-men-pancha-jilon-men-chaukasi-35307",
  "category": "जम्मू-कश्मीर",
  "publishedAt": "2026-09-20",
  "tags": [
    "ऑपरेशन सोहन",
    "मजालता मुठभेड़",
    "जैश-ए-मोहम्मद",
    "जम्मू कश्मीर पुलिस",
    "व्हाइट नाइट कॉर्प्स",
    "कठुआ सांबा अलर्ट"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}