# मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न देकर राष्ट्रपति बना दें: उमर अब्दुल्ला का भाजपा पर तीखा तंज

> जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मुख्य चुनाव आयुक्त के लिए पद्म पुरस्कार की चर्चा पर भाजपा पर तंज कसा और चुनाव आयोग को आत्म-मंथन करने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने चीन और पड़ोसियों के साथ कूटनीतिक रिश्तों पर भी अपनी बात रखी।

**Type:** article · **Category:** जम्मू-कश्मीर · **Published:** 2026-10-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jammu-kashmir/mukhya-chunava-ayukta-gyanesh-kumar-ko-bharat-ratna-dekara-rashtrapati-bana-den-omar-abdullah-ka-bjp-para-tikha-tnja-41014 · **Language:** Hindi
**Tags:** उमर अब्दुल्ला, ज्ञानेश कुमार, निर्वाचन आयोग, भारतीय जनता पार्टी, श्रीनगर, एस जयशंकर, भारत चीन संबंध

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद्म पुरस्कार देने के सुझाव पर कड़ा ऐतराज जताते हुए भारतीय जनता पार्टी पर तीखा व्यंग्य किया है। श्रीनगर में आयोजित क्रेता-विक्रेता सम्मेलन के मौके पर संवाददाताओं से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जिस अधिकारी ने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक लाभ पहुंचाया हो, उसके लिए केवल पद्म भूषण की बात करना नाइंसाफी जैसा है। उनके अनुसार यदि सम्मान देना ही है तो सीधा देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलना चाहिए।

## सम्मान की चर्चा पर राजनीतिक तंज
उमर अब्दुल्ला ने व्यंग्यात्मक लहजे में अपनी बात रखते हुए कहा कि केवल पद्म भूषण तक सीमित रहने की क्या जरूरत है, उन्हें भारत रत्न से नवाजा जाना चाहिए। उन्होंने आगे जोड़ते हुए कहा कि जब राष्ट्रपति पद के चुनाव में एक-दो साल का समय शेष है, तो उन्हें देश का अगला राष्ट्रपति ही बना दिया जाए। मुख्यमंत्री का आरोप था कि संबंधित अधिकारी ने पश्चिम बंगाल को एक तरह से तोहफे में सौंपने का काम किया है, इसलिए पद्म भूषण का प्रस्ताव उनके कथित योगदान के सामने बहुत छोटा लगता है।

## निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता और कार्यप्रणाली
संस्थान की साख पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग को अपनी मौजूदा कार्यशैली पर गंभीरता से आत्म-मंथन करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आज अगर समूचा विपक्ष चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठा रहा है, तो उसके पीछे कोई ठोस आधार जरूर है। विपक्ष पर पक्षपात का आरोप मढ़ने के बजाय आयोग को यह समझना होगा कि गड़बड़ियों के तथ्य किसी राजनीतिक दल द्वारा नहीं गढ़े गए, बल्कि एक समाचार पत्र की गहन जांच के जरिए जनता के सामने आए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि विवादों पर पर्दा डालने की जगह व्यवस्था में पारदर्शी सुधार किए जाने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे संगीन आरोपों की पुनरावृत्ति न हो।

## विधानसभा चुनाव और अंतरराष्ट्रीय संबंध
केंद्र शासित प्रदेश में वर्ष 2029 के विधानसभा चुनावों को लेकर पूछे गए सवाल को उमर अब्दुल्ला ने वक्त से पहले की चर्चा करार दिया। उनका कहना था कि 2029 आने में लंबा वक्त बाकी है, इसलिए पहले 2026, 2027 और 2028 का दौर बीतने का इंतजार करना चाहिए, उसके बाद ही भावी चुनावी समीकरणों पर विमर्श ठीक रहेगा।

इसी बातचीत के दौरान उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के चीन संबंधी बयान पर अपनी सहमति दर्ज कराई। मुख्यमंत्री ने गलवान घाटी की घटना के बाद के तनावपूर्ण दौर को याद करते हुए कहा कि उस समय हालात इतने बिगड़ चुके थे कि लोग अपने घरों की बालकनी से चीनी टेलीविजन फेंकने लगे थे। आज कम से कम दोनों देशों के बीच संवाद की बहाली हुई है और उच्च स्तर पर सार्थक मुलाकातें हो रही हैं, जो कूटनीति के लिहाज से सही दिशा है। उन्होंने रेखांकित किया कि उनकी पार्टी हमेशा से पड़ोसी मुल्कों के साथ शांतिपूर्ण और स्थिर संबंधों की पक्षधर रही है क्योंकि यह सीधे तौर पर देश के हित में है। पड़ोस के बिगड़ते समीकरणों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बांग्लादेश की स्थिति की तरफ इशारा किया और कहा कि ऐसे कई अन्य देश भी हैं जिनके साथ रिश्तों को संभालना जरूरी है।

## इसका आप पर असर
मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली पर विपक्षी दलों के सवालों और संवैधानिक सुधार की मांग से चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सीधा असर पड़ता है।

- **भारत में:** निर्वाचन आयोग की कार्यशैली पर उठ रहे सवालों से पूरे देश के मतदाताओं के बीच चुनावी निष्पक्षता को लेकर विमर्श तेज होगा। यदि सुधार प्रक्रिया अपनाई जाती है तो आने वाले चुनावों में मतगणना और संचालन प्रणाली और अधिक पारदर्शी हो सकती है।
- **जम्मू-कश्मीर में:** केंद्र शासित प्रदेश में भविष्य के चुनावों की रणनीति और क्षेत्रीय दलों के राजनीतिक रुख पर मुख्यमंत्री का यह बयान स्पष्ट संदेश देता है। स्थानीय प्रशासन और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए स्पष्ट हुआ है कि मौजूदा ध्यान तुरंत 2029 के चुनावों पर नहीं बल्कि प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर है।
- **कूटनीतिक समझ:** चीन और पड़ोसियों के साथ सामान्य होते कारोबारी और कूटनीतिक रिश्तों से सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव घट सकता है। दोनों देशों के बीच बातचीत बहाल रहने से क्षेत्रीय व्यापार और सीमाओं पर शांति को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
- **संस्थागत पारदर्शिता:** किसी अखबार की जांच के बाद संस्थाओं पर सवाल उठने से नागरिक निगरानी और खोजी पत्रकारिता का महत्व बढ़ता है। सामान्य नागरिकों को यह भरोसा मिलता है कि सार्वजनिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सार्वजनिक मंचों पर जवाबदेही तय हो रही है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह राजनीतिक विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त के लिए नागरिक सम्मान का प्रस्ताव सामने आने और विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने के बाद पैदा हुआ। चुनाव परिणामों और आयोग की भूमिका पर पहले से चल रही तनातनी ने इस बयान को जन्म दिया।

- **पद्म पुरस्कार का सुझाव:** मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के लिए नागरिक सम्मान का सुझाव सामने आने पर विपक्षी खेमे में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली, जिसे मुख्यमंत्री ने कटाक्ष का आधार बनाया।
- **अखबार की खोजी जांच:** चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और कथित अनियमितताओं को लेकर एक समाचार पत्र द्वारा प्रकाशित जांच रिपोर्ट ने विपक्षी दलों को औपचारिक रूप से सवाल उठाने का आधार दिया।
- **सीमा विवाद का संदर्भ:** विदेश मंत्री एस. जयशंकर के हालिया बयान के बाद भारत और चीन के बीच गलवान घटना के बाद बने कड़वे माहौल और वर्तमान वार्ता की तुलना पर चर्चा की पृष्ठभूमि तैयार हुई।

## सवाल-जवाब

### 1. उमर अब्दुल्ला ने मुख्य चुनाव आयुक्त के लिए क्या तंज कसा?
उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार को सिर्फ पद्म भूषण नहीं बल्कि भारत रत्न मिलना चाहिए और उन्हें देश का अगला राष्ट्रपति बना देना चाहिए।

### 2. उमर अब्दुल्ला ने चुनाव आयोग पर लगे आरोपों का क्या आधार बताया?
उन्होंने कहा कि आयोग पर आरोप किसी राजनीतिक दल की मनगढ़ंत बातें नहीं हैं, बल्कि ये एक अखबार की खोजी जांच में सामने आए सबूतों पर आधारित हैं।

### 3. 2029 के जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव पर मुख्यमंत्री का क्या रुख था?
उन्होंने कहा कि 2029 अभी बहुत दूर है, इसलिए पहले 2026, 2027 और 2028 का समय बीतने देना चाहिए उसके बाद ही चुनाव की बात होनी चाहिए।

### 4. चीन के साथ रिश्तों पर उमर अब्दुल्ला ने विदेश मंत्री के बयान पर क्या कहा?
उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर की बात का समर्थन करते हुए कहा कि गलवान के बाद के कड़वे दौर की तुलना में आज दोनों देशों का मिलना और बात करना सही दिशा है।

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