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  "type": "article",
  "title": "नार्को-टेरर पर जम्मू-कश्मीर पुलिस का कड़ा प्रहार, हजारों तस्कर गिरफ्तार और सैकड़ों संपत्तियां कुर्क",
  "summary": "जम्मू-कश्मीर पुलिस ने नार्को-टेरर नेटवर्क पर देशव्यापी कार्रवाई में नया रिकॉर्ड बनाते हुए 4,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया और 288 अचल संपत्तियों को जब्त किया है।",
  "content": "जम्मू-कश्मीर में नशीले पदार्थों और आतंकवाद के गठजोड़ पर सुरक्षाबलों ने चौतरफा कानूनी शिकंजा कस दिया है। गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के कड़े कानूनी प्रावधानों का सहारा लेते हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इस क्षेत्र में फैले अवैध तंत्र की कमर तोड़ने में बड़ी कामयाबी पाई है। महज छह महीनों के भीतर चलाए गए सघन अभियान के दौरान सक्रिय और फरार आतंकवादियों के साथ-साथ ड्रग सिंडिकेट से जुड़े लोगों की अचल संपत्तियों को आतंकवाद से अर्जित आय घोषित कर कानूनी तौर पर जब्त कर लिया गया है। इस निर्णायक कदम के साथ केंद्र शासित प्रदेश की पुलिस अवैध संपत्तियों की जब्ती और मामलों के त्वरित निस्तारण के मामले में पूरे देश में शीर्ष पर पहुंच गई है।\n\nडीजीपी नलिन प्रभात ने साझा किए व्यापक कार्रवाई के आंकड़े\nजम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात ने आतंकवाद और नशीले पदार्थों के खिलाफ चल रही इस व्यापक मुहिम का ब्योरा सामने रखा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पुलिस बल ने अब तक ₹138 करोड़ से अधिक मूल्य की कुल 288 संपत्तियों को कुर्क किया है। इस तरह के वित्तीय और बुनियादी ढांचे पर प्रहार के मामलों में जम्मू-कश्मीर का स्थान देश में पहला है। नार्को-टेरर गठजोड़ को जड़ से उखाड़ने के लिए दर्ज किए गए 3,257 मामलों में 4,000 से ज्यादा आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। इसके साथ ही सुरक्षा एजेंसियों ने सीमा पार पाकिस्तान से ड्रोन के माध्यम से नशीली खेप गिराने वाले अत्याधुनिक मॉड्यूल का भी पर्दाफाश किया है और उसमें शामिल मुख्य गुर्गों को हिरासत में लिया है।\n\nछह महीनों के रिकॉर्ड अभियान में त्वरित निपटारा और दोषसिद्धि\nपिछले छह महीनों के दौरान दर्ज अपराधों के विस्तृत विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि पुलिस ने न सिर्फ नए मामले दर्ज किए, बल्कि जांच प्रक्रिया को भी बेहद तेज गति से आगे बढ़ाया। कुल 3,257 दर्ज मामलों में से 2,500 से अधिक मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण कर दिया गया है। इन ठोस कानूनी कार्यवाहियों के चलते अब तक 170 आरोपियों को अदालत द्वारा दोषी भी ठहराया जा चुका है।\n\nसंपत्ति जब्ती के मोर्चे पर पुलिस की कार्रवाई बेहद सख्त रही है, जिसमें ₹178 करोड़ से अधिक मूल्य की कुल 288 अचल संपत्तियां कुर्क की गई हैं। इसके अलावा विभिन्न छापों और तलाशी अभियानों के दौरान ₹80 लाख से अधिक की नकदी भी बरामद की गई है। नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी की रोकथाम से जुड़े विशेष कानून, यानी PIT-NDPS एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन में भी यह बल देश के अन्य राज्यों से काफी आगे निकल चुका है, जिसके तहत 144 कुख्यात तस्करों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।\n\nश्रीनगर में अंतर-राज्यीय सिंडिकेट पर चोट और करोड़ों की संपत्ति अटैच\nश्रीनगर पुलिस ने संगठित अपराध के खिलाफ अपनी मुहिम को आगे बढ़ाते हुए एक अंतर-राज्यीय नार्को-टेरर नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस विशेष अभियान के तहत ₹7.11 करोड़ की चार प्रमुख अचल संपत्तियों को सील करने की कार्रवाई पूरी की गई। राजधानी श्रीनगर में पुलिस की यह रणनीति उन सभी वित्तीय माध्यमों, लॉजिस्टिक सपोर्ट और बुनियादी ढांचे को ध्वस्त करने पर केंद्रित है, जिनके जरिए ड्रग्स के काले कारोबार का पैसा देश विरोधी गतिविधियों तक पहुंचता है।\n\nश्रीनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जीवी संदीप इस संपूर्ण अभियान की कमान संभाल रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, \"हम उन आरोपियों की पहचान करेंगे और उन्हें पकड़ेंगे जो बाहर से ड्रग्स लाकर यहां जमा करते हैं, और हम उन्हें जल्द से जल्द आपके और कोर्ट के सामने पेश करेंगे। इसके अलावा, ऐसे लोगों के खिलाफ न सिर्फ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, बल्कि उनकी संपत्तियाँ भी जब्त की जाएंगी।\"\n\nउप-राज्यपाल मनोज सिन्हा के नशा-मुक्ति अभियान को जनसमर्थन\nजम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा शुरू की गई नशा-मुक्ति मुहिम को अब पूरे क्षेत्र में व्यापक जनभागीदारी मिल रही है। आम नागरिकों, स्कूली छात्रों, महाविद्यालयों के युवाओं और स्थानीय धर्मगुरुओं ने इस सामाजिक व सुरक्षा पहल में सक्रिय भागीदारी निभाई है। घाटी से लेकर जम्मू संभाग तक नशीले पदार्थों के प्रसार को रोकने के लिए एक साझा संकल्प दिखाई दे रहा है, जिसके जमीनी परिणाम भी सामने आ रहे हैं। उप-राज्यपाल के नेतृत्व में चल रही इस व्यापक प्रशासनिक व पुलिस कार्रवाई की समाज के हर तबके में सराहना हो रही है।\n\nराजनीतिक सहमति और सीमावर्ती निगरानी बढ़ाने की मांग\nइस निर्णायक कानूनी प्रहार का जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों ने भी खुला स्वागत किया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) दोनों ने ही जम्मू-कश्मीर पुलिस तथा उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा के इस कड़े रुख का समर्थन किया है। राजनीतिक नेतृत्व ने ड्रग माफिया के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई पर संतोष जताया है, लेकिन साथ ही जोर देकर कहा है कि आतंकवाद और ड्रग्स के इस गठजोड़ को पूरी तरह समाप्त करने के लिए निरंतर कड़े कदम उठाने की जरूरत है। ड्रग्स के अवैध व्यापार से होने वाले मुनाफे का सीधा इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के वित्तपोषण में होता है, और इसे पूरी तरह रोके बिना क्षेत्र को नशा-मुक्त नहीं बनाया जा सकता।\n\nदूसरी ओर, सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक रैलियों और विद्यार्थियों की भागीदारी के साथ-साथ समाज में जागरूकता फैलाने का सबसे बड़ा दायित्व धार्मिक विद्वानों पर भी है। विशेषज्ञों ने भौगोलिक स्थिति को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर में नशीले पदार्थों का स्थानीय उत्पादन नहीं होता, बल्कि इनकी सारी आपूर्ति पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा से होती है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर सतत निगरानी को और अधिक मजबूत करना ही इस संकट के स्थाई समाधान की मुख्य कुंजी है।\n\nइसका आप पर असर\nजम्मू-कश्मीर में नार्को-टेरर पर हुई इस बड़ी कार्रवाई से नशीले पदार्थों की अवैध आपूर्ति श्रृंखला और आतंकी फंडिंग पर सीधा असर पड़ेगा।\n\n• पूरे भारत में: सीमा पार से आने वाले नशीले पदार्थों के अंतर-राज्यीय वितरण नेटवर्क पर भारी चोट पड़ी है। इससे देश के अन्य राज्यों के शहरों में ड्रग्स की अवैध सप्लाई लाइन कमजोर होगी और युवाओं की सुरक्षा बढ़ेगी।\n• जम्मू-कश्मीर में: स्थानीय स्तर पर ड्रग माफिया और उनके मददगारों के खिलाफ बड़े पैमाने पर संपत्तियों की जब्ती की गई है। परिवारों और समाज को सुरक्षित माहौल मिलेगा और अवैध वित्तीय नेटवर्क ध्वस्त होने से आतंकी गतिविधियों पर लगाम लगेगी।\n• युवाओं और छात्रों के लिए: शैक्षणिक संस्थानों और समाज में शुरू हुए नशा-मुक्ति अभियान से जागरूकता का दायरा बढ़ा है। छात्र और युवा नशीले पदार्थों के चंगुल में फंसने से बच सकेंगे और स्वस्थ जीवनशैली अपना सकेंगे।\n• कानूनी कार्रवाई के संदर्भ में: PIT-NDPS और UAPA जैसे कड़े कानूनों के तहत 144 तस्करों पर रोकथाम की कार्रवाई की गई है। आम नागरिकों को किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को देकर सहयोग करने का सीधा अवसर मिलता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nजम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमाओं से आने वाले नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार का इस्तेमाल लंबे समय से आतंकी गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए किया जाता रहा है। सीमा पार से ड्रोन तकनीक के बढ़ते उपयोग और स्थानीय स्तर पर नशीले पदार्थों के फैलाव ने सुरक्षा एजेंसियों को एक समन्वित वित्तीय व कानूनी प्रहार करने के लिए बाध्य किया।\n\n• आतंकी फंडिंग की रोकथाम: ड्रग्स की तस्करी से होने वाली काली कमाई का सीधा उपयोग आतंकी तंत्र को चालू रखने में किया जा रहा था। इस वित्तीय स्रोत को बंद करना आतंकवाद को समाप्त करने के लिए सबसे अनिवार्य आवश्यकता बन गया था।\n• ड्रोन से तस्करी की नई रणनीति: सीमा पार से ड्रोन के जरिए हथियारों और नशीले पदार्थों की खेप गिराने की घटनाएं लगातार बढ़ रही थीं। तकनीक आधारित इन नए मॉड्यूल का खात्मा करने के लिए पुलिस ने खुफिया तंत्र और कानूनी छापों को तेज किया।\n• कड़े कानूनों का सख्त उपयोग: सामान्य मुकदमों के बजाय UAPA और PIT-NDPS एक्ट जैसी कठोर धाराओं के तहत संपत्तियों को सीधे कुर्क करने का निर्णय लिया गया। इससे अपराधियों के आर्थिक तंत्र को नष्ट करने में पहली बार इतनी व्यापक सफलता मिली।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. जम्मू-कश्मीर पुलिस ने नार्को-टेरर मामलों में कितनी संपत्तियां जब्त की हैं?\nजम्मू-कश्मीर पुलिस ने अब तक कुल 288 अचल संपत्तियां जब्त की हैं, जिनकी अनुमानित कीमत ₹138 करोड़ से ₹178 करोड़ के बीच है।\n\n2. पिछले छह महीनों में इस अभियान के तहत कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया है?\nइस सघन अभियान के दौरान 4,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 170 आरोपियों को अदालत द्वारा दोषी ठहराया जा चुका है।\n\n3. श्रीनगर में पुलिस ने कितने मूल्य की संपत्तियों को अटैच किया है?\nश्रीनगर पुलिस ने अंतर-राज्यीय मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए ₹7.11 करोड़ की चार अचल संपत्तियों को कानूनी तौर पर अटैच किया है।\n\n4. जम्मू-कश्मीर में नशा-मुक्ति अभियान की शुरुआत किसने की?\nइस नशा-मुक्ति अभियान की शुरुआत जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने की है, जिसे समाज और राजनीतिक दलों का व्यापक समर्थन मिल रहा है।\n\n5. PIT-NDPS एक्ट के तहत कितने लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है?\nनशीले पदार्थों की तस्करी की रोकथाम के लिए बने PIT-NDPS एक्ट के तहत 144 लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की गई है।",
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  "category": "जम्मू-कश्मीर",
  "publishedAt": "2026-10-06",
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