नेशनल कॉन्फ्रेंस छोड़कर आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने संसद सदस्यता छोड़ी, चुनावी वादों पर उठाए सवाल श्रीनगर से सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी और अपनी लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर चुनावी घोषणापत्र और विशेष दर्जे के वादों से पीछे हटने का खुला आरोप लगाया। जम्मू और कश्मीर की राजनीति में बड़ा मोड़ सामने आया है, जहाँ श्रीनगर लोकसभा क्षेत्र से सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता के साथ-साथ संसद सदस्यता छोड़ने का ऐलान कर दिया है। बडगाम स्थित ज़हरा पार्क में अपने पिता की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित एक विशाल जनसभा में समर्थकों को संबोधित करते हुए उन्होंने यह कड़ा राजनीतिक कदम उठाया। बडगाम से तीन बार विधायक रह चुके इस वरिष्ठ नेता ने पार्टी नेतृत्व और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की मौजूदा कार्यशैली पर सीधा मोर्चा खोल दिया है। चुनावी घोषणापत्र और अनुच्छेद 370 पर गंभीर आरोप जनसभा में बोलते हुए आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर 2024 के विधानसभा चुनाव में जनता से किए गए वादों से मुकरने का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट रूप से अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35A का उल्लेख किया और कहा कि मौजूदा नेतृत्व ने भारतीय जनता पार्टी के सामने समर्पण कर दिया है। अपने इस कठोर फैसले को सही ठहराते हुए उन्होंने जनसमूह से कहा कि यह मार्ग बेहद कठिन है, मगर वे इस दायित्व को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं क्योंकि उनके अनुसार मौजूदा परिस्थितियों में यही एकमात्र उचित रास्ता बचा था। बैनरों के जरिए सिद्धांतों की राजनीति का संदेश इस सभा से पूर्व रुहुल्लाह मेहदी के निवास स्थान से लेकर ज़हरा पार्क रैली स्थल तक कई बड़े बैनर लगाए गए थे, जो उनके राजनीतिक रुख को सीधे बयां कर रहे थे। इन पोस्टरों पर प्रमुखता से लिखा गया था कि चुनावी वादे सत्ता की कुर्सियों से कहीं अधिक बड़े होते हैं। इसके साथ ही चरित्र और सिद्धांतों की राजनीति को प्राथमिकता देने वाले नारे भी प्रदर्शित किए गए थे, जिनका सीधा लक्ष्य नेशनल कॉन्फ्रेंस के शीर्ष नेतृत्व की नीतियां थीं। सत्ता की कुर्सी और नेतृत्व पर तीखा हमला उमर अब्दुल्ला पर कड़ा प्रहार करते हुए रुहुल्लाह मेहदी ने कहा कि जिन नेताओं ने मतदाताओं के कदमों में अपनी पगड़ियां रखकर चुनावी जीत हासिल की, उन्हें इस सभा में आकर देखना चाहिए कि आवाम का सच्चा आदर क्या होता है। उन्होंने टिप्पणी की कि हुकूमत के पद पर अधिकार तो हो सकता है, लेकिन जनता के दिलों में उसके प्रति कोई वास्तविक मान-सम्मान नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि उनका सिर केवल सर्वशक्तिमान के समक्ष झुकता है और वे कभी किसी अन्य सत्ता के आगे नहीं झुकेंगे। उन्होंने आगे जोड़ा कि जिस पद पर सत्ताधारी बैठे हैं, वह दोनों पक्षों के लिए पीड़ा की वजह बन चुकी है। जहाँ लोग पद खोने पर विलाप करते हैं, वहीं वे स्वयं इस पद का त्याग करके आत्मसंतोष महसूस कर रहे हैं। आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी का राजनीतिक सफर आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने चुनावी राजनीति में अपनी शुरुआत वर्ष 2002 में की थी, जब वे बडगाम विधानसभा क्षेत्र से पहली बार चुनकर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद वे लगातार तीन बार इसी क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए। वर्ष 2009 से लेकर 2014 के दौरान वे उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। इसके बाद वर्ष 2024 के आम चुनावों में उन्होंने श्रीनगर संसदीय सीट से विजय प्राप्त कर पहली बार लोकसभा में प्रवेश किया था, जिससे अब उन्होंने त्यागपत्र दे दिया है। इसका आप पर असर श्रीनगर के सांसद का इस्तीफा जम्मू और कश्मीर की संसदीय राजनीति और क्षेत्रीय समीकरणों को सीधे प्रभावित करता है। • भारत में: संसद के निचले सदन में विपक्षी प्रतिनिधित्व की एक सीट रिक्त होगी और भविष्य में उपचुनाव की स्थिति बनेगी। राष्ट्रीय स्तर पर क्षेत्रीय दलों के चुनावी घोषणापत्रों की जवाबदेही पर राजनीतिक बहस तेज होगी। • जम्मू और कश्मीर में: सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर वैचारिक असंतोष खुलकर सामने आने से स्थानीय सरकार पर चुनावी वादे पूरे करने का दबाव बढ़ेगा। श्रीनगर और बडगाम के मतदाताओं के लिए उनके प्रतिनिधि की गैर-मौजूदगी स्थानीय प्रशासनिक मुद्दों की पैरवी को प्रभावित करेगी। • मतदाताओं के लिए: चुनावी वादों और विशेष दर्जे जैसे मुद्दों पर राजनीतिक दलों की जवाबदेही तय करने का अवसर सामने आएगा। जनता को अपने स्थानीय प्रतिनिधियों से चुनावी घोषणापत्र के क्रियान्वयन को लेकर सवाल पूछने का मंच मिलेगा। • आगामी रणनीति: केंद्र शासित प्रदेश के राजनीतिक मंच पर नए धड़ों या स्वतंत्र आंदोलनों के उभरने की संभावना बढ़ जाएगी। विभिन्न राजनीतिक दलों को घाटी के भीतर अपने संगठनात्मक आधार की दोबारा समीक्षा करनी पड़ेगी। ऐसा क्यों हुआ यह इस्तीफा चुनावी घोषणापत्र के क्रियान्वयन और विशेष दर्जे के मुद्दों पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ उपजे गहरे वैचारिक मतभेदों का परिणाम है। • सीधा कारण: सांसद रुहुल्लाह मेहदी ने आरोप लगाया कि 2024 के घोषणापत्र के अनुसार अनुच्छेद 370 और 35A पर पार्टी नेतृत्व का रुख कमजोर पड़ चुका है। नेतृत्व द्वारा केंद्र सरकार के सामने झुकने के आरोपों के बाद उन्होंने पार्टी और संसद दोनों पद छोड़ने का फैसला किया। • पृष्ठभूमि और तनाव: बडगाम रैली के दौरान सार्वजनिक किए गए बयानों से स्पष्ट हुआ कि सत्ता के लिए किए जा रहे समझौतों को लेकर लंबे समय से आंतरिक असंतोष पनप रहा था। सड़क किनारे लगाए गए बैनरों ने साफ कर दिया कि यह मतभेद अचानक नहीं बल्कि सोची-समझी रणनीति के तहत सार्वजनिक हुआ। • आगे क्या होगा: लोकसभा सचिवालय द्वारा इस्तीफे की औपचारिक समीक्षा के बाद श्रीनगर सीट के लिए भविष्य के चुनावी विकल्पों पर निर्णय लिया जाएगा। इसके साथ ही प्रांतीय राजनीति में नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर अन्य असंतुष्ट आवाजों की प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। सवाल-जवाब 1. आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने किन पदों से इस्तीफा दिया है? उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी की सदस्यता और श्रीनगर लोकसभा सीट की सांसदी दोनों से इस्तीफा दे दिया है। 2. इस्तीफे की घोषणा किस स्थान पर की गई? यह घोषणा बडगाम के ज़हरा पार्क में उनके पिता की पुण्यतिथि पर आयोजित एक जनसभा के दौरान की गई। 3. रुहुल्लाह मेहदी ने पार्टी नेतृत्व पर क्या आरोप लगाए? उन्होंने पार्टी और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर 2024 के चुनावी वादों को पूरा न करने और अनुच्छेद 370 पर भाजपा के सामने घुटने टेकने का आरोप लगाया। 4. आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी का राजनीतिक इतिहास क्या रहा है? वे बडगाम से 2002 से तीन बार विधायक रहे, 2009 से 2014 तक उमर अब्दुल्ला सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे और 2024 में पहली बार सांसद चुने गए थे। https://trendkia.com/jammu-kashmir/national-conference-chhorakara-aga-syed-ruhullah-mehdi-ne-snsada-sadasyata-chhori-chunavi-vadon-para-uthae-savala-55761 TrendKia — Har trend, sabse pehle.