# नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता आगा रूहुल्लाह के इस्तीफे पर समर्थन जताने दूल्हा पहुंचा बडगाम, किश्तवाड़ से 300 किमी दूर आकर टाली अपनी शादी

> किश्तवाड़ के अबरार अहमद ने सीनियर नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी के इस्तीफे की रैली में शामिल होने के लिए 3 नवंबर को तय अपनी शादी आगे बढ़ा दी और 300 किमी सफर तय कर बडगाम पहुंचे।

**Type:** article · **Category:** जम्मू-कश्मीर · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jammu-kashmir/national-conference-neta-aga-ruhullah-ke-istife-par-samarthan-jatane-dulha-pahuncha-budgam-kishtwar-se-300-km-door-aakar-tali-apni-55757 · **Language:** Hindi
**Tags:** आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, बडगाम, किश्तवाड़, अबरार अहमद, जम्मू कश्मीर राजनीति, चेनाब वैली

जम्मू-कश्मीर की सियासत में नेताओं के प्रति समर्थकों के गहरे जुड़ाव की कई तस्वीरें सामने आती हैं, लेकिन किश्तवाड़ के एक नौजवान ने अपने नेता के समर्थन में एक अनूठा फैसला लिया। सीनियर नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी द्वारा अपने पद से इस्तीफे के औपचारिक ऐलान के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में शरीक होने के लिए एक दूल्हे ने अपनी तय शादी टाल दी। अबरार अहमद नाम के इस युवक ने परिवार के सबसे बड़े निजी जश्न के बजाय अपने पसंदीदा नेता की जनसभा को पहली प्राथमिकता दी।

## 3 नवंबर को तय थी बारात, चेनाब घाटी से बडगाम पहुंचे अबरार
अबरार अहमद का विवाह 3 नवंबर को होना निश्चित हुआ था। इसी तारीख को आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने अपने पद से आधिकारिक रूप से अलग होने की घोषणा करने के लिए एक सभा रखी थी। संयोगवश यह दिन रूहुल्लाह के पिता की पुण्यतिथि का भी था। विवाह समारोह में शामिल होने के बजाय अबरार ने तारीख को आगे बढ़ाने का फैसला किया। इसके बाद वह चेनाब घाटी के किश्तवाड़ इलाके से लगभग 300 किलोमीटर की लंबी दूरी नापकर सीधे बडगाम में आयोजन स्थल पर पहुंचे।

## रूहुल्लाह को अन्य नेताओं से अलग बताया
बडगाम में सभा के दौरान अबरार अहमद ने खुलकर अपनी बात रखी और बताया कि वह रूहुल्लाह को जम्मू-कश्मीर के बाकी सियासी चेहरों से बेहद जुदा क्यों मानते हैं। अबरार के अनुसार रूहुल्लाह कुर्सी या सत्ता के मोह के मुकाबले अपने सिद्धांतों और कथनी को ऊपर रखते हैं। नौजवान ने कहा, 
> "वह पावर से ज्यादा अपनी बातों को महत्व देते हैं। वह अपनी बातों पर खरे उतरते हैं। इसीलिए उन्होंने इस्तीफा दिया।"

## शादी टल सकती थी पर रैली नहीं
अबरार ने साफ शब्दों में स्पष्ट किया कि उनके व्यक्तिगत जीवन के बड़े फैसले पर इस राजनीतिक घटनाक्रम की अहमियत भारी पड़ी। उनके मुताबिक उनके लिए इस ऐतिहासिक सभा में मौजूद रहना निकाह की रस्म पूरी करने से कहीं अधिक जरूरी बन गया था। उन्होंने कहा, 
> "रैली टाली नहीं जा सकती थी, इसलिए मैंने अपनी शादी टाल दी।"
 किश्तवाड़ से बडगाम तक की इस यात्रा और फैसले ने आयोजन में मौजूद तमाम लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

## इसका आप पर असर
यह घटना दिखाती है कि जम्मू-कश्मीर की क्षेत्रीय राजनीति में व्यक्तिगत जुड़ाव और नेताओं के फैसलों का स्थानीय समर्थकों पर कितना गहरा असर पड़ता है।

- **राजनीतिक संदेश:** क्षेत्रीय सियासत में नेताओं के सिद्धांतों पर जनता और युवा समर्थकों की कड़ी नजर रहती है। ऐसे फैसले दर्शाते हैं कि मतदाता पार्टी अनुशासन से ऊपर व्यक्तिगत साख को तवज्जो देते हैं।
- **पारिवारिक और सामाजिक स्तर पर:** शादी जैसे बड़े निजी आयोजन को अचानक टालना परिवारों के लिए नई तारीखें तय करने की चुनौती खड़ी करता है। यह शादी से जुड़े रिश्तेदारों और स्थानीय मेहमानों के पूरे कार्यक्रम को फिर से निर्धारित करने का कारण बनता है।
- **जम्मू और कश्मीर क्षेत्र में:** चेनाब घाटी और कश्मीर घाटी के बीच दूरियों के बावजूद राजनीतिक एकजुटता साफ नजर आती है। किश्तवाड़ से बडगाम तक का यह सफर दोनों क्षेत्रों के बीच सियासी जुड़ाव को रेखांकित करता है।
- **युवा समर्थकों के लिए:** यह वाकया दर्शाता है कि घाटी के युवा राजनीतिक बदलावों में केवल मूकदर्शक नहीं हैं। वे अपनी प्राथमिकताएं तय करके बड़े सार्वजनिक संदेश देने में संकोच नहीं करते।

## ऐसा क्यों हुआ
सीनियर नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी के इस्तीफे की घोषणा के मौके पर यह अप्रत्याशित कदम देखने को मिला। समर्थक ने नेता के सिद्धांतों के प्रति अपनी गहरी निष्ठा दिखाने के लिए यह फैसला लिया।

- **इस्तीफे की आधिकारिक घोषणा:** आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने 3 नवंबर को अपने पद से हटने का औपचारिक ऐलान किया था। इस खास दिन उनके पिता की पुण्यतिथि भी थी, जिसके चलते सभा का आयोजन बडगाम में तय किया गया।
- **नेता की विश्वसनीयता का प्रभाव:** समर्थक अबरार अहमद के अनुसार रूहुल्लाह सत्ता या कुर्सी के बजाय अपनी बात और सिद्धांतों को ज्यादा अहमियत देते हैं। नेता का यह रवैया उन्हें जम्मू-कश्मीर के अन्य राजनेताओं से अलग बनाता है, जिससे प्रेरित होकर समर्थक ने रैली को चुना।
- **तारीखों का टकराव:** शादी का दिन और इस्तीफे की सभा दोनों 3 नवंबर को ही तय थीं। चूंकि सभा की तारीख बदली नहीं जा सकती थी, इसलिए युवक ने अपनी शादी आगे बढ़ाने का विकल्प चुना।

## सवाल-जवाब

### 1. अबरार अहमद ने अपनी शादी क्यों टाल दी?
अबरार ने सीनियर नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी के इस्तीफे की रैली में शामिल होने के लिए अपनी शादी आगे बढ़ा दी।

### 2. शादी किस तारीख को होनी तय थी?
अबरार की शादी 3 नवंबर को होनी थी, जिस दिन रूहुल्लाह ने अपने पद से इस्तीफे की आधिकारिक घोषणा की।

### 3. अबरार अहमद रैली में पहुंचने के लिए कहां से आए थे?
अबरार किश्तवाड़ से करीब 300 किलोमीटर का सफर तय करके बडगाम पहुंचे थे।

### 4. 3 नवंबर की तारीख आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी के लिए और क्यों खास थी?
3 नवंबर को उनके पिता की पुण्यतिथि भी थी।

### 5. अबरार के अनुसार रूहुल्लाह दूसरे नेताओं से अलग क्यों हैं?
अबरार ने कहा कि रूहुल्लाह सत्ता से ज्यादा अपनी बातों को महत्व देते हैं और अपनी बातों पर खरे उतरते हैं।

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