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  "title": "सीमा पार आतंकी साजिश पर NIA का कड़ा एक्शन, जम्मू-कश्मीर में 10 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी",
  "summary": "राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर के पांच जिलों में 10 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई सीमा पार से रची जा रही आतंकी साजिश के सिलसिले में डिजिटल और भौतिक साक्ष्य जुटाने के लिए की गई है।",
  "content": "श्रीनगर में केंद्रीय जांच एजेंसी ने एक बड़े अभियान के तहत सीमा पार से रची जा रही आतंकी साजिश के मामलों में तलाशी ली है। इस कार्रवाई के दायरे में कई जिले आए हैं, जहां सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने मिलकर सुराग तलाशने का काम किया है। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य इस नेटवर्क से जुड़े डिजिटल, दस्तावेजी और अन्य भौतिक साक्ष्यों को अपने कब्जे में लेना है। इसके साथ ही, इस पूरी साजिश के पीछे काम कर रहे स्थानीय मददगारों की भूमिका को भी बारीकी से परखा जा रहा है।\n\nकिन जिलों में की गई छापेमारी\nराष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अपनी इस कार्रवाई के तहत कुल पांच जिलों को अपनी सूची में शामिल किया था। इनमें श्रीनगर, कुपवाड़ा, अनंतनाग, पुलवामा और बडगाम जिले पूरी तरह से शामिल हैं। इन सभी जगहों पर एक साथ दबिश दी गई ताकि संदिग्ध ठिकानों से जुड़े अहम दस्तावेज और अन्य सामग्रियां हाथ लग सकें। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के लोकल सपोर्ट नेटवर्क पर लगाम कसना सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी है।\n\nएफआईआर और मामले की पृष्ठभूमि\nयह पूरा कानूनी शिकंजा श्रीनगर के जकूरा पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर संख्या 0024/2026 के आधार पर कसा गया है। इसी मामले को आगे बढ़ाते हुए एनआईए ने अपनी औपचारिक प्राथमिकी संख्या आरसी-02/2026/एनआईए/जेएमयू के तौर पर दोबारा दर्ज की थी। इस मामले में कड़े कानूनों के तहत कार्रवाई की जा रही है, जिसमें गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम की धारा 23, शस्त्र अधिनियम की धारा 7 और 25, तथा विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 4 शामिल हैं।\n\nलश्कर-ए-तैयबा से जुड़े ओजीडब्ल्यू की गिरफ्तारी\nइस पूरे मामले की जड़ें 31 मार्च, 2026 की देर रात हुई एक घटना से जुड़ी हैं। उस रात एक नाका पॉइंट पर चेकिंग के दौरान प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक ओवर ग्राउंड वर्कर को दबोचा गया था। सुरक्षा बलों ने उसके पास से एक हैंड ग्रेनेड के अलावा जिंदा कारतूस भी बरामद किए थे। इसी गिरफ्तारी के बाद से इस पूरी आतंकी साजिश की परतें एक-एक करके खुलने लगीं और जांच का दायरा लगातार बढ़ता चला गया।\n\nपाकिस्तान स्थित हैंडलर्स की भूमिका\nअब तक की जांच में यह बात प्रमुखता से सामने आई है कि पाकिस्तान में बैठे आतंकी हैंडलर स्थानीय सहयोगियों के साथ मिलकर नापाक मंसूबों को अंजाम दे रहे थे। इन स्थानीय चेहरों का इस्तेमाल मुख्य रूप से बातचीत करने, साजो-सामान मुहैया कराने, आतंकवादियों की आवाजाही को सुगम बनाने और उन्हें छिपाने के लिए किया जा रहा था। इसके अलावा उन्हें सुरक्षित ठिकाने देने, रेकी करने और अन्य प्रकार की सहायता पहुंचाने के काम में भी इनका इस्तेमाल हो रहा था।\n\nफंडिंग और हथियारों के स्रोतों की जांच\nजांच एजेंसी इस पूरे आतंकी तंत्र के दायरे को पूरी तरह से बेनकाब करने के लिए कई मोर्चों पर काम कर रही है। इसमें पैसों के लेन-देन के स्रोतों, बातचीत के डिजिटल तरीकों, आरोपियों के आने-जाने के रास्तों और हथियारों तथा विस्फोटकों की सप्लाई चेन की गहराई से पड़ताल की जा रही है। एजेंसी का कहना है कि रेड के दौरान कई नए साक्ष्य हाथ लगे हैं, जिनका मिलान पहले से एकत्र किए गए डेटा के साथ किया जा रहा है।\n\nजमात-ए-इस्लामी और अन्य हालिया कार्रवाई\nइस बड़ी कार्रवाई से कुछ समय पहले ही यह जानकारी भी सामने आई थी कि जम्मू-कश्मीर में जमात-ए-इस्लामी को दोबारा सक्रिय करने की कोशिशें की जा रही हैं, जिसके चलते पहले भी कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ रेड डाली गई थीं। इसके अलावा, हाल ही में बारामूला जिले में भी आतंकी नेटवर्क से जुड़े विभिन्न आरोपियों की जमीनों को कुर्क करने जैसी सख्त कार्रवाई को अंजाम दिया गया था।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: देश भर में सीमा सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ चल रही केंद्रीय जांचों के तहत सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी की जा रही है।\n\nजम्मू-कश्मीर में: श्रीनगर, कुपवाड़ा, अनंतनाग, पुलवामा और बडगाम जिलों में रहने वाले आम नागरिकों के लिए सुरक्षा जांच और तलाशी अभियानों के चलते आवाजाही के दौरान सख्ती का सामना करना पड़ सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. एनआईए ने जम्मू-कश्मीर में कुल कितने ठिकानों पर छापेमारी की?\nराष्ट्रीय जांच एजेंसी ने सीमा पार आतंकी साजिश के मामले में जम्मू-कश्मीर के पांच जिलों में कुल 10 जगहों पर छापेमारी की।\n\n2. यह छापेमारी किन-किन जिलों में की गई है?\nयह तलाशी अभियान श्रीनगर, कुपवाड़ा, अनंतनाग, पुलवामा और बडगाम जिलों में चलाया गया है।\n\n3. यह पूरा मामला सबसे पहले कहां और कब सामने आया था?\nयह मामला 31 मार्च, 2026 की देर रात एक नाका पॉइंट पर लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े ओजीडब्ल्यू की गिरफ्तारी के बाद शुरू हुआ था, जिसकी एफआईआर श्रीनगर के जकूरा पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी।\n\n4. इस मामले में किन प्रतिबंधित संगठनों का नाम आया है?\nइस मामले की जांच के दौरान प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और ओवर ग्राउंड वर्कर्स के नेटवर्क का नाम सामने आया है।",
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  "category": "जम्मू-कश्मीर",
  "publishedAt": "2026-08-22",
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    "राष्ट्रीय जांच एजेंसी",
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