पुलवामा में भारतीय मजदूर संघ ने खोला दफ्तर, कश्मीर घाटी में आरएसएस से जुड़े संगठन की पहली स्थायी उपस्थिति हिंसा और आतंकवाद के लिए चर्चित रहे पुलवामा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े भारतीय मजदूर संघ ने अपना नया कार्यालय शुरू कर दिया है। आर्टिकल 370 हटने के बाद घाटी में किसी संघ से जुड़े संगठन की यह पहली सार्वजनिक और स्थायी मौजूदगी है। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस की पहली एंट्री दर्ज की गई है। कभी आतंकवाद, हिंसा और पत्थरबाजी के लिए दुनिया भर में कुख्यात रहे पुलवामा जिले के बारसू गांव में आरएसएस से जुड़े भारतीय मजदूर संघ यानी बीएमएस ने अपना आधिकारिक कार्यालय स्थापित किया है। यह नया दफ्तर उसी लेथपोरा इलाके से महज पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जहां साल 2019 में एक भीषण फिदायीन हमले में देश के 40 सुरक्षा बल के जवान शहीद हो गए थे। जबरदस्त बदलाव की कहानी बयां करता यह एक मंजिला कार्यालय जबरवान की पहाड़ियों के नीचे एक शांत और छोटे से गांव में बनाया गया है, जिसे अतीत में अशांति का प्रमुख गढ़ माना जाता था। इस नई इमारत में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, जिसके तहत परिसर में सुरक्षा कैमरे लगाए गए हैं और बाहर भारी पुलिस बल को तैनात किया गया है। सुरक्षा व्यवस्था और कार्यालय का स्वरूप इस नवनिर्मित एक मंजिला इमारत के कुछ कमरे अब घाटी में आ रहे बड़े सामाजिक और राजनीतिक बदलावों के मूक गवाह के तौर पर खड़े हैं। इस कार्यालय पर कोई भी बड़ा साइनबोर्ड या किसी तरह का झंडा नहीं लगाया गया है, बल्कि केवल एक छोटा सा बोर्ड टंगा हुआ है जिस पर साधारण शब्दों में 'ऑफिस' लिखा गया है। सुरक्षा की दृष्टि से स्थानीय पुलिस के जवानों को बाहर मुस्तैद रखा गया है। यह नया डिविजनल कार्यालय कश्मीर घाटी के भीतर आरएसएस की विचारधारा से जुड़े किसी भी संगठन की पहली सार्वजनिक, दृश्यमान और स्थायी उपस्थिति को दर्शाता है। साल 2020 में आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से कश्मीर में लंबे समय तक बेहद शांत तरीके से काम करने वाले संगठन भारतीय मजदूर संघ के लिए यह बेहद सोच-समझकर और सादगी के साथ उठाया गया एक बड़ा कदम माना जा रहा है। संगठन का मुख्य उद्देश्य और कार्यशैली भारतीय मजदूर संघ मुख्य रूप से देश भर के मेहनतकश मजदूरों के अधिकारों, उनके कानूनी हकों और सामाजिक सम्मान के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होकर काम करता है। पुलवामा जैसे संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाके में इस तरह के कार्यालय का खुलना और स्थानीय लोगों का इससे जुड़ना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब लोग इसे किसी भी तरह की दलगत राजनीति या धर्म से ऊपर उठकर केवल मजदूरों के कल्याण और भलाई से जुड़ा मामला मान रहे हैं। संगठन की भविष्य की योजनाओं में कामगारों को उनके तमाम कानूनी अधिकार दिलाना और राष्ट्र निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना शामिल है। शुरुआत में समाज के भीतर कुछ गलतफहमियां और भ्रांतियां जरूर थीं, जिनका संगठन को सामना करना पड़ा, लेकिन धीरे-धीरे जब लोग इसके साथ जुड़ते गए, तो उन्हें साफ हो गया कि इसका एकमात्र उद्देश्य राष्ट्र का विकास करना है। पुलवामा को कार्यालय के लिए चुनने के खास कारण इस संवेदनशील इलाके को चुनने के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण रहे हैं। पहला कारण यह है कि साल 2019 में आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से पूरे क्षेत्र के हालात में अभूतपूर्व सुधार आया है। पहले जहां आए दिन हड़तालें और पत्थरबाजी की घटनाएं आम थीं, वहीं अब का युवा अपनी पढ़ाई और उज्ज्वल करियर की तरफ ध्यान केंद्रित कर रहा है। दूसरा बड़ा कारण यह है कि संगठन से जुड़ी अधिकांश मजदूर यूनियनें दक्षिण कश्मीर में स्थित हैं, और भौगोलिक रूप से बीच में होने के कारण पुलवामा से उत्तर और दक्षिण दोनों कश्मीर के मजदूरों के लिए यहां आसानी से पहुंचना मुमकिन हो गया है। आज इस संगठन के साथ 20 से अधिक पंजीकृत लेबर यूनियनें और हजारों की संख्या में सदस्य जुड़ चुके हैं, जो बिना किसी धार्मिक या राजनीतिक भेदभाव के केवल श्रमिकों की सेवा में जुटे हैं। इसका आप पर असर इस घटनाक्रम का स्थानीय श्रमिकों और आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर दूरगामी और सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। • भारत में: देश भर के संगठित और असंगठित क्षेत्रों के श्रमिकों को अपने कानूनी अधिकारों के प्रति अधिक जागरूकता और मजबूत मंच मिलने की संभावना है। इससे विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान में तेजी आएगी। • पुलवामा में: स्थानीय युवाओं और मजदूरों को अब अपनी शिकायतों को उठाने तथा रोजगार संबंधी सहायता प्राप्त करने के लिए एक औपचारिक और स्थायी मंच मिल गया है। इससे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों और सकारात्मक बदलावों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। ऐसा क्यों हुआ पुलवामा में इस कार्यालय के खुलने के पीछे सुरक्षा व्यवस्था में सुधार और भौगोलिक अनुकूलता जैसे अहम कारक रहे हैं। • कानून व्यवस्था में बदलाव: वर्ष 2019 में आर्टिकल 370 हटने के बाद से कश्मीर घाटी के सुरक्षा हालातों में आए बड़े सुधार ने ऐसी संस्थाओं के लिए जमीन पर सार्वजनिक उपस्थिति दर्ज कराना संभव बनाया है। • रणनीतिक स्थिति: पुलवामा की भौगोलिक स्थिति उत्तर और दक्षिण कश्मीर के बीच होने के कारण अधिकांश संबद्ध यूनियनों के लिए केंद्र बिंदु का काम करती है। • बढ़ता विश्वास: स्थानीय श्रमिकों और कर्मचारियों का संगठन की कार्यशैली पर धीरे-धीरे भरोसा बढ़ा है, जिससे वहां नई यूनियनों और सदस्यों का जुड़ना आसान हो गया है। सवाल-जवाब 1. पुलवामा में किस संगठन ने अपना नया कार्यालय खोला है? राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े भारतीय मजदूर संघ ने पुलवामा के बारसू गांव में अपना नया कार्यालय खोला है। 2. यह नया कार्यालय कहां स्थित है? यह कार्यालय पुलवामा में लेथपोरा के पास जबरवान पहाड़ियों के नीचे बारसू गांव में स्थित है। 3. इस कार्यालय को स्थापित करने का मुख्य उद्देश्य क्या है? इसका मुख्य उद्देश्य देश भर के मजदूरों के अधिकारों, सम्मान और कानूनी हक के लिए काम करना तथा उनका विकास सुनिश्चित करना है। 4. पुलवामा को ही इस कार्यालय के लिए क्यों चुना गया? सुरक्षा हालातों में सुधार और अधिकांश संबद्ध यूनियनों के दक्षिण कश्मीर में होने के कारण पुलवामा को केंद्रीय स्थान के रूप में चुना गया। 5. वर्तमान में इस संगठन से कितनी यूनियनें जुड़ी हुई हैं? इस क्षेत्र में भारतीय मजदूर संघ से जुड़ी 20 से अधिक रजिस्टर्ड लेबर यूनियनें और हजारों सदस्य काम कर रहे हैं। https://trendkia.com/jammu-kashmir/pulwama-mein-bharatiya-mazdoor-sangh-ne-khola-daftar-kashmir-valley-mein-rss-se-jude-sangathan-ki-pehli-sthai-upsthiti-50627 TrendKia — Har trend, sabse pehle.