रक्षाबंधन के पावन पर्व पर 57 दिवसीय अमरनाथ यात्रा का समापन, शंकराचार्य मंदिर और पवित्र गुफा में उमड़े श्रद्धालु रक्षाबंधन के अवसर पर सावन की अंतिम महापूजा के साथ 57 दिनों तक चली अमरनाथ यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। इस दौरान पवित्र गुफा और श्रीनगर के प्रसिद्ध शंकराचार्य मंदिर में भगवान शिव के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ा। कश्मीर घाटी में धार्मिक उत्साह और आध्यात्मिक आस्था के वातावरण के बीच इस वर्ष की पवित्र अमरनाथ यात्रा रक्षाबंधन के पावन पर्व पर सफलतापूर्वक संपन्न हो गई है। सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर तड़के सूर्योदय के समय अमरनाथ गुफा में स्थापित बाबा बर्फानी की अंतिम विशेष महापूजा आयोजित की गई। इस पावन अवसर पर पूरी प्राकृतिक गुफा परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रचंड उत्साह के साथ हर हर महादेव और बम बम भोले के जयकारे लगाए। इन भक्तिमय उद्घोषों के साथ 57 दिनों तक चलने वाली इस प्रसिद्ध वार्षिक तीर्थयात्रा का आधिकारिक और धार्मिक समापन हुआ, जिसमें देश भर से लाखों श्रद्धालुओं ने सम्मिलित होकर पुण्य लाभ प्राप्त किया। बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंचे 4.80 लाख श्रद्धालु इस वर्ष आयोजित 57 दिवसीय अमरनाथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा और आस्था का अनूठा उदाहरण देखने को मिला। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, इस पूरे यात्रा सत्र के दौरान कुल 4.80 लाख (चार लाख अस्सी हजार) तीर्थयात्रियों ने अमरनाथ की पवित्र गुफा में पहुंचकर प्राकृतिक हिम शिवलिंग के दर्शन किए। कठिन पहाड़ी मार्गों, दुर्गम रास्तों और बदलती मौसमी परिस्थितियों के बावजूद भक्तों के साहस और जुनून में कोई कमी नहीं आई। स्थानीय नागरिकों, सेवा समितियों और सुरक्षा बलों के आपसी समन्वय से इस लंबी तीर्थयात्रा को पूरी तरह शांतिपूर्ण, सुगम और व्यवस्थित ढंग से पूरा कराया गया। श्रीनगर के शंकराचार्य मंदिर में 5 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई अमरनाथ यात्रा के समापन के पावन अवसर पर संपूर्ण कश्मीर क्षेत्र के छोटे-बड़े शिव मंदिरों में तड़के से ही भक्तों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। सबसे विशाल धार्मिक समागम श्रीनगर के प्रसिद्ध और ऐतिहासिक शंकराचार्य मंदिर में देखने को मिला, जहां भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए हजारों लोग सुबह-सुबह ही पहुंच गए। मंदिर प्रांगण और पहाड़ी के निचले हिस्सों में श्रद्धालुओं की कई किलोमीटर लंबी कतारें लगी दिखाई दीं। अत्यधिक भीड़ और वाहनों के आवागमन पर नियंत्रण के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग पांच किलोमीटर की कठिन पहाड़ी चढ़ाई पैदल ही तय की। भक्तों के इस अपार उत्साह, भक्ति भावना और भारी जमावड़े को देखते हुए स्थानीय प्रशासन तथा पुलिस विभाग द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। श्रद्धालुओं ने अत्यंत अनुशासित तरीके से कतारबद्ध होकर भगवान शिव के दर्शन किए और रक्षाबंधन के दिन अपनी पूजा संपन्न की। सावन के प्रथम दिन से आरंभ होने वाली छड़ी पूजा की परंपरा अमरनाथ यात्रा का संपूर्ण आयोजन और इसका धार्मिक समापन प्राचीन छड़ी पूजा की परंपरा से गहराई से जुड़ा हुआ है। पौराणिक और सनातनी मान्यताओं के अनुसार, सावन महीने के पहले दिन इस पवित्र अनुष्ठान का शुभारंभ होता है। देश के विभिन्न हिस्सों से आए साधु-संत, संन्यासी और महंत पहलगाम में स्थित पावन लिद्दर नदी के तट पर एकत्र होते हैं और पवित्र छड़ी की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। तत्पश्चात, इस पवित्र छड़ी को धार्मिक ध्वजों से सुसज्जित करके पारंपरिक पहलगाम-चंदनवाड़ी मार्ग से अमरनाथ गुफा की ओर प्रस्थान कराया जाता है। रक्षाबंधन के पावन दिन अमरनाथ गुफा में सूर्योदय के समय होने वाली महापूजा के साथ ही छड़ी पूजा का भी विधिवत समापन होता है। ऐतिहासिक और पारंपरिक रूप से अमरनाथ यात्रा का आरंभ छड़ी पूजा के प्रथम अनुष्ठान से माना जाता है और इसका आधिकारिक अंत अमरनाथ गुफा में आयोजित अंतिम महापूजा के साथ होता है। कश्मीर में रक्षाबंधन पर भाइयों और बहनों का पावन संबंध अमरनाथ यात्रा के समापन के साथ-साथ पूरे कश्मीर में रक्षाबंधन का त्योहार अत्यंत उमंग और भाईचारे के माहौल में मनाया गया। बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर पवित्र रक्षासूत्र बांधकर उनकी लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और जीवन में सफलता के लिए भगवान से प्रार्थना की। बदले में, भाइयों ने अपनी बहनों को जीवन भर सुरक्षा देने, उनका सम्मान करने और हर विकट स्थिति में उनके साथ खड़े रहने का वचन दिया। धार्मिक आस्था, भक्ति और पारिवारिक रिश्तों के इस पावन संगम ने पूरे वातावरण को आनंदमय बना दिया। इसका आप पर असर अमरनाथ यात्रा के समापन और रक्षाबंधन पर्व का श्रद्धालुओं एवं स्थानीय व्यवस्थाओं पर सीधा असर पड़ता है। • भारत में (तीर्थयात्री): 57 दिनों से जारी अमरनाथ यात्रा का औपचारिक समापन हो गया है, जिससे अब नए जत्थों का पंजीकरण और प्रस्थान बंद रहेगा। अगले वर्ष की यात्रा शुरू होने तक श्रद्धालु दर्शन के लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन नहीं कर सकेंगे। • जम्मू और कश्मीर में (सुरक्षा एवं यातायात): तीर्थयात्रा समाप्त होने के बाद घाटी में लागू विशेष यातायात प्रतिबंध और राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुरक्षा बलों की आवाजाही में ढील दी जाएगी। इससे स्थानीय यात्रियों और व्यापारियों के लिए सड़क मार्ग से परिवहन अधिक सुगम हो जाएगा। • श्रीनगर एवं पहलगाम में (पर्यटन एवं स्थानीय व्यवसाय): यात्रा मार्ग और मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बाद अब धार्मिक पर्यटन का सीजन समाप्त हो रहा है। स्थानीय दुकानदारों, टेंट चालकों और पोनी-पालकों की व्यावसायिक गतिविधियां अब सामान्य पर्यटन पर निर्भर रहेंगी। • पूरे देश में (सांस्कृतिक परंपराएं): रक्षाबंधन पर अमरनाथ गुफा में छड़ी पूजा के समापन ने सनातन परंपरा के एक महत्वपूर्ण चक्र को पूरा किया है। इससे देश भर के श्रद्धालुओं को अगले साल के लिए अपनी धार्मिक योजनाओं को अंतिम रूप देने का समय मिलेगा। सवाल-जवाब 1. इस वर्ष अमरनाथ यात्रा कितने दिनों तक चली और इसका समापन कब हुआ? इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा कुल 57 दिनों तक चली और रक्षाबंधन के त्योहार के दिन पवित्र गुफा में अंतिम महापूजा के साथ इसका समापन हुआ। 2. इस साल कुल कितने श्रद्धालुओं ने अमरनाथ गुफा में दर्शन किए? इस वर्ष 57 दिवसीय तीर्थयात्रा के दौरान कुल 4.80 लाख (4,80,000) श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन और पूजा-अर्चना की। 3. रक्षाबंधन पर कश्मीर के किस मंदिर में भक्तों की सबसे भारी भीड़ देखी गई? रक्षाबंधन पर श्रीनगर स्थित ऐतिहासिक शंकराचार्य मंदिर में भगवान शिव के दर्शन के लिए भक्तों की सबसे बड़ी भीड़ उमड़ी, जहां लोगों ने 5 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई भी तय की। 4. अमरनाथ यात्रा से जुड़ी छड़ी पूजा की परंपरा क्या है? छड़ी पूजा सावन के पहले दिन पहलगाम में लिद्दर नदी के किनारे शुरू होती है। साधु-संत पवित्र छड़ी के साथ पहलगाम-चंदनवाड़ी मार्ग से होते हुए रक्षाबंधन पर अमरनाथ गुफा पहुंचते हैं। 5. अमरनाथ यात्रा के अंतिम दिन पवित्र गुफा में पूजा किस समय हुई? रक्षाबंधन के दिन तड़के सूर्योदय के समय अमरनाथ गुफा में बाबा बर्फानी की अंतिम महापूजा शुरू हुई, जहां श्रद्धालुओं ने हर हर महादेव और बम बम भोले के जयकारे लगाए। https://trendkia.com/jammu-kashmir/raksha-bandhan-ke-pavana-parva-para-57-divasiya-amarnath-yatra-ka-samapana-shankaracharya-mndira-aura-pavitra-gupha-men-umare-shra-23706 TrendKia — Har trend, sabse pehle.