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  "type": "article",
  "title": "शंकराचार्य मंदिर मार्ग पर मजार के जीर्णोद्धार पर गरमाई सियासत, उठे गंभीर सवाल",
  "summary": "शंकराचार्य मंदिर के रास्ते पर स्थित एक मजार के नवीनीकरण को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा और लोक जनशक्ति पार्टी ने इस पर सवाल उठाए हैं, जबकि ग्रैंड मुफ्ती ने इसे ऐतिहासिक स्थल बताया है।",
  "content": "जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर के प्रसिद्ध शंकराचार्य मंदिर तक जाने वाले मार्ग पर स्थित एक मजार और कब्रिस्तान के जीर्णोद्धार को लेकर राजनीतिक और धार्मिक हलकों में बहस छिड़ गई है। डल झील के करीब जबरवान पहाड़ियों में स्थित इस स्थल के नवीनीकरण के लिए प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों पर कई पक्षों ने आपत्ति जताई है, जबकि स्थानीय धार्मिक नेताओं ने इसका समर्थन किया है।\n\nविवाद की मुख्य वजह\nयह पूरा मामला शंकराचार्य मंदिर से करीब 3 किलोमीटर पहले सड़क के किनारे स्थित 'सैय्यद उस्मान साहिब' की मजार से जुड़ा है। प्रशासन ने इस जंगली क्षेत्र में स्थित कब्रिस्तान और मजार के विकास व नवीनीकरण कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ठेका दे दिया था। इस जगह पर कई कब्रें और एक बड़ी मजार बनी हुई है, जिसके पास पहले एक साइनबोर्ड भी लगाया गया था। हालांकि, बढ़ते विवाद के बाद उस बोर्ड से नाम हटा दिया गया और फिलहाल राजस्व विभाग को मामला सौंपे जाने के कारण काम रोक दिया गया है।\n\nकश्मीरी पंडितों और भाजपा की आपत्ति\nकश्मीरी पंडित संगठनों ने सबसे पहले इस निर्माण कार्य के खिलाफ आवाज उठाई। उनका तर्क है कि यह ढांचा नया है और पहले यहां ऐसा कोई स्थान मौजूद नहीं था। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी की स्थानीय इकाई ने भी इस प्रोजेक्ट के लिए 44.37 लाख रुपये की राशि मंजूर किए जाने पर नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार से तीखे सवाल पूछे। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह कोई प्राचीन स्थल नहीं है और वहां दिखने वाली कब्रें हाल ही में बनाई गई हैं।\n\nभाजपा और अन्य नेताओं के आरोप\nभाजपा प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस का पुराना इतिहास ऐसे मामलों में संदिग्ध रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने पहले भी शंकराचार्य पहाड़ी को 'तख्त-ए-सुलेमान' और हरि पर्वत को 'कोह-ए-मरान' जैसे नामों से पुकारा है। प्रशासन को यह स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए कि इस निर्माण का उद्देश्य क्या है, इसे किसने मंजूरी दी और इसके लिए किसने प्रस्ताव रखा। लोक जनशक्ति पार्टी के नेता संजय सराफ ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि वह पिछले तीन दशकों से इस रास्ते से आ-जा रहे हैं, लेकिन हाल ही में उन्हें इस कथित जियारत के बारे में पता चला। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां क्रेट रखकर और उस पर कपड़ा डालकर उसे नया रूप देने की कोशिश की जा रही है, जबकि यदि कोई पुराना रिकॉर्ड है तो वह पारदर्शी तरीके से सामने आना चाहिए।\n\nधार्मिक गुरुओं और स्थानीय लोगों का पक्ष\nदूसरी तरफ, कश्मीर के ग्रैंड मुफ्ती नासिर-उल-इस्लाम ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि यह कब्रिस्तान और मजारें बेहद पुरानी हैं। उन्होंने बताया कि वहां सैयद असदुल्लाह बुखारी और सैयद उस्मान साहब की कब्रें हैं, जो हजरत मीर सैयद अली हमदानी के साथी थे। मुफ्ती ने कहा कि इस मामले का शंकराचार्य या वन भूमि से कोई लेना-देना नहीं है और इस ऐतिहासिक धरोहर के जीर्णोद्धार के काम में बाधा डालने से लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं।\n\nइसका आप पर असर\nइस विवाद का असर स्थानीय प्रशासन, धार्मिक सौहार्द और क्षेत्र की विकास परियोजनाओं पर पड़ सकता है।\n\n• भारत में: यह मामला देश भर में धार्मिक स्थलों और ऐतिहासिक ढांचों के रखरखाव से जुड़ी संवेदनशील बहसों को हवा दे सकता है। इससे संवेदनशील क्षेत्रों में विकास कार्यों के दौरान अधिक प्रशासनिक सावधानी बरती जाएगी।\n• श्रीनगर में: स्थानीय नागरिकों और धार्मिक समूहों के बीच तनाव की स्थिति बन सकती है, जिससे प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने पड़ सकते हैं। राजस्व विभाग की जांच के बाद ही इस निर्माण कार्य पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह विवाद प्रशासन द्वारा एक धार्मिक स्थल के नवीनीकरण के लिए बजट मंजूर किए जाने और उसके ऐतिहासिक अस्तित्व को लेकर विरोधी दावों के कारण पैदा हुआ है।\n\n• प्रशासनिक टेंडर प्रक्रिया: जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा शंकराचार्य मंदिर मार्ग पर स्थित इस कब्रिस्तान और मजार के जीर्णोद्धार के लिए 44.37 लाख रुपये का टेंडर जारी करने के बाद यह मामला प्रकाश में आया।\n• ऐतिहासिक दावों में विरोधाभास: भाजपा और कश्मीरी पंडित समूहों का दावा है कि यह ढांचा नया है और हाल ही में बनाया गया है, जबकि ग्रैंड मुफ्ती और स्थानीय मुसलमानों का कहना है कि यह जगह दशकों पुरानी है और यहाँ ऐतिहासिक कब्रें मौजूद हैं।\n• राजनीतिक और सांप्रदायिक संवेदनशीलता: संवेदनशील भौगोलिक स्थिति और धार्मिक स्थलों के पास होने के कारण इस तरह के निर्माण कार्यों पर राजनीतिक दलों की कड़ी नजर रहती है, जिससे तुरंत विरोध प्रदर्शन शुरू हो जाते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. यह विवाद किस जगह से जुड़ा है?\nयह विवाद श्रीनगर में डल झील के पास जबरवान पहाड़ियों में शंकराचार्य मंदिर जाने वाले रास्ते पर स्थित एक मजार से जुड़ा है।\n\n2. इस नवीनीकरण परियोजना के लिए कितनी राशि स्वीकृत की गई थी?\nइस परियोजना के लिए 44.37 लाख रुपये की राशि मंजूर की गई थी।\n\n3. किन राजनीतिक दलों ने इस पर सवाल उठाए हैं?\nभारतीय जनता पार्टी और लोक जनशक्ति पार्टी ने इस निर्माण कार्य और फंड आवंटन पर सवाल उठाए हैं।\n\n4. ग्रैंड मुफ्ती नासिर-उल-इस्लाम का इस बारे में क्या कहना है?\nग्रैंड मुफ्ती का कहना है कि यह मजार पुरानी है और वहां सैयद असदुल्लाह बुखारी और सैयद उस्मान साहब की कब्रें मौजूद हैं।\n\n5. फिलहाल इस मामले में क्या कार्रवाई की गई है?\nमामला राजस्व विभाग को सौंपे जाने के कारण फिलहाल वहां कोई निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है।",
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  "category": "जम्मू-कश्मीर",
  "publishedAt": "2026-10-29",
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