# उमर अब्दुल्ला ने बागी विधायकों के सामने रखी इस्तीफे की पेशकश, फारूक अब्दुल्ला ने किया भावुक भाषण

> जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बागी विधायकों के साथ हुई बैठक में इस्तीफे की पेशकश की, जिसे विधायकों और पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने खारिज कर दिया।

**Type:** article · **Category:** जम्मू-कश्मीर · **Published:** 2026-11-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jammu-kashmir/umar-abdullah-ne-baagi-vidhayakon-ke-samane-rakhi-istiphe-ki-peshakasha-57645 · **Language:** Hindi
**Tags:** उमर अब्दुल्ला, फारूक अब्दुल्ला, नेशनल कॉन्फ्रेंस, जम्मू-कश्मीर, गुपकार बैठक, बागी विधायक

श्रीनगर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के असंतुष्ट विधायकों ने पार्टी आलाकमान के साथ एक अहम बैठक में हिस्सा लिया। इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के साथ-साथ पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला भी मौजूद रहे। बैठक की शुरुआत में हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए जब मुख्यमंत्री खड़े हुए और वहां से जाने का प्रयास किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन पर भारी दबाव है और वे अपना पद छोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हालांकि, बैठक में मौजूद बागी विधायकों ने उनकी इस पेशकश को सिरे से खारिज कर दिया। विधायकों ने कहा कि वे मुख्यमंत्री का इस्तीफा नहीं चाहते, बल्कि उनकी मांग है कि सरकार उनके मुद्दों का समाधान करे।

 

## गुपकार आवास पर चली दो घंटे की लंबी बैठक

गुपकार स्थित आवास पर दो घंटे तक चली इस बैठक के दौरान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने नाराज विधायकों को केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे के भीतर सरकार चलाने की कठिनाइयों से अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें उन तमाम चुनौतियों की पूरी जानकारी है जिनका सामना उनकी सरकार को करना पड़ रहा है, इसके बावजूद विधायकों ने अपनी शिकायतों को सार्वजनिक मंच पर रखा। बैठक की कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री के अचानक इस्तीफे की पेशकश करने से वहां मौजूद सभी विधायक असमंजस में पड़ गए और वे बैकफुट पर आ गए। विधायकों ने तुरंत स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सरकार गिराना या पार्टी को विभाजित करना कतई नहीं था।

 

## फारूक अब्दुल्ला का भावुक संबोधन और सहमति

परिस्थिति को संभालते हुए पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने एक भावुक भाषण दिया और उमर अब्दुल्ला से साफ शब्दों में कहा कि उन्हें पद छोड़ने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने उमर को सलाह दी कि वे विधायकों की उचित और जायज मांगों पर ध्यान दें। बैठक के तुरंत बाद, फारूक अब्दुल्ला ने बागी विधायकों के साथ मीडिया के सामने आकर यह बयान दिया कि विधायकों की मांगें पूरी तरह से जायज थीं, लेकिन पार्टी के भीतर किसी भी प्रकार की फूट या आंतरिक कलह का अस्तित्व नहीं है। विधायकों ने भी इस बात पर जोर दिया कि वे नेतृत्व में किसी भी तरह का बदलाव नहीं चाहते हैं। उनकी चिंताएं केवल कुछ चुनिंदा मुद्दों को लेकर थीं जिन्हें बातचीत के जरिए सुलझाया जाना आवश्यक था।

 

## कंसल्टेटिव कमेटी और मैनिफेस्टो कमेटी के गठन पर बनी रजामंदी

बागी विधायकों ने मुख्यमंत्री की इस्तीफे की पेशकश को ठुकराते हुए कुछ व्यावहारिक और संगठनात्मक सुझाव सामने रखे। बैठक में यह सहमति बनी कि प्रत्येक मंत्री के कामकाज पर नजर रखने के लिए एक कंसल्टेटिव कमेटी का गठन किया जाएगा। इसके अलावा, पार्टी के चुनावी वादों के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए एक मैनिफेस्टो कमेटी भी बनाई जाएगी। पार्टी लीडरशिप ने सभी विधायकों को यह कड़ा भरोसा भी दिलाया कि ठीक एक साल के भीतर कैबिनेट एडजस्टमेंट का पूरा रिव्यू किया जाएगा। इन ठोस आश्वासनों के बाद विधायकों ने अपनी नाराजगी खत्म की और सरकार के साथ मिलकर काम करने की सहमति जताई।

 

## कैबिनेट विस्तार के बाद भड़का था असंतोष

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में चल रहे इस घटनाक्रम की पृष्ठभूमि पिछले महीने हुए घटनाक्रम से जुड़ी है। 27 अक्टूबर को उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में चार नए मंत्रियों को शामिल किया गया था, जिसके तुरंत बाद सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर असंतोष के स्वर उठने लगे थे। कैबिनेट के इस विस्तार के बाद पार्टी के कई वरिष्ठ विधायकों ने इस फैसले की खुलकर आलोचना की थी। अपनी नाराजगी जताने के लिए इन असंतुष्ट नेताओं ने कई दौर की गुप्त और खुली बैठकें की थीं, जिसके परिणामस्वरूप अंततः गुपकार में यह उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई, जहां गतिरोध को समाप्त करने का रास्ता निकाला गया।

## इसका आप पर असर
यह राजनीतिक घटनाक्रम जम्मू-कश्मीर में प्रशासनिक स्थिरता और शासन की गतिशीलता को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।

    - **राष्ट्रीय स्तर पर:** **यह घटना दिखाती है कि केंद्र शासित प्रदेशों में गठबंधन और क्षेत्रीय दलों के भीतर आंतरिक प्रबंधन कितना जटिल होता है।** राष्ट्रीय दल इस तरह के घटनाक्रमों पर नजर रखते हैं क्योंकि यह क्षेत्रीय मोर्चों पर राजनीतिक स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।
- **जम्मू-कश्मीर में:** **सरकार के भीतर समन्वय समितियों के गठन से विकास कार्यों और चुनावी वादों पर सीधा असर पड़ेगा।** आम नागरिकों और स्थानीय निवासियों को उम्मीद है कि इन आंतरिक वार्ताओं के बाद प्रशासनिक सुस्ती दूर होगी और क्षेत्रीय विकास में तेजी आएगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह राजनीतिक संकट अचानक तब पैदा हुआ जब प्रशासनिक चुनौतियों और हालिया फैसलों के खिलाफ पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया।

    - **मंत्रिमंडल विस्तार:** **27 अक्टूबर को हुए कैबिनेट विस्तार में चार नए मंत्रियों को शामिल किए जाने के बाद पार्टी में विरोध शुरू हुआ।** इस फैसले के बाद वरिष्ठ विधायकों ने अपनी अनदेखी का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई थी।
- **प्रशासनिक दबाव:** **केंद्र शासित प्रदेश के कठिन ढांचे में सरकार चलाने की चुनौतियों ने नेतृत्व पर मानसिक दबाव बढ़ाया।** मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने संवादहीनता और सार्वजनिक बयानों के बीच अपनी असमर्थता जाहिर करते हुए इस्तीफे की पेशकश की थी।

## सवाल-जवाब

### 1. बैठक का आयोजन कहां किया गया था?
यह बैठक श्रीनगर के गुपकार स्थित आवास पर आयोजित की गई थी।

### 2. बैठक में किस बात पर असंतोष जताया गया था?
हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार और प्रशासनिक चुनौतियों को लेकर बागी विधायकों में असंतोष था।

### 3. क्या उमर अब्दुल्ला ने इस्तीफा दे दिया है?
नहीं, उन्होंने इस्तीफे की पेशकश की थी जिसे विधायकों और फारूक अब्दुल्ला ने खारिज कर दिया।

### 4. असंतुष्ट विधायकों की कौन सी मांगें मानी गईं?
हर मंत्री के लिए कंसल्टेटिव कमेटी और चुनावी वादों पर नजर रखने के लिए एक मैनिफेस्टो कमेटी बनाने पर सहमति बनी।

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