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  "title": "यूपीआई शुल्क पर उमर अब्दुल्ला ने किया केंद्र का समर्थन, राहुल गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच छिड़ी तीखी बहस",
  "summary": "जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने के केंद्र सरकार के फैसले का समर्थन किया है। साथ ही, इस मुद्दे पर राहुल गांधी के हमलों के बाद केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।",
  "content": "यूपीआई लेनदेन पर संभावित शुल्क को लेकर देश की राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्ष के विरोध के बीच जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को इस मामले में केंद्र सरकार का खुलकर साथ दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे को मेंटेन रखना और सुचारू रूप से चलाना एक खर्चीला काम है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने यह भी हिदायत दी कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि खुदरा और आम ग्राहकों को किसी भी तरह की आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े और उनके हितों की पूरी सुरक्षा हो।\n\n \n\nबुनियादी ढांचे के रख-रखाव पर खर्च\n\nमुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस बात पर जोर दिया कि देश की डिजिटल पेमेंट व्यवस्था को चलाने के लिए भारी भरकम राशि खर्च होती है। उन्होंने कहा कि यह अवसंरचना मुफ्त में तैयार नहीं होती और इसे बनाए रखना बेहद महंगा सौदा है। उनका यह भी मानना है कि जब कोई सेवा बिना किसी लागत के मिलती है, तो लोग अक्सर उसकी अहमियत नहीं समझ पाते। उन्होंने कहा कि यह शुल्क हर नागरिक पर नहीं थोपा जा रहा है। आम आदमी जब एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे ट्रांसफर करता है, तब कोई चार्ज नहीं लगता है। एक तय सीमा से नीचे लेन-देन करने वाले साधारण ग्राहकों को भी इस दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है।\n\n \n\nव्यापारियों और कंपनियों पर असर\n\nडिजिटल भुगतान प्रणाली के संचालन को लेकर आगे बोलते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अगर बड़ी कंपनियों से किसी प्रकार का शुल्क वसूला भी जाता है, तो इसमें उन्हें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि ये कंपनियां यूपीआई प्लेटफॉर्म के जरिए पहले से ही भारी मुनाफा कमा रही हैं। दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार को घेरा था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने झुकने का गंभीर आरोप लगाया था। उन्होंने मांग की थी कि सरकार को तुरंत इस फैसले को वापस लेना चाहिए और रीढ़ सीधी रखनी चाहिए।\n\n \n\nज्योतिरादित्य सिंधिया का तीखा पलटवार\n\nराहुल गांधी के इन आरोपों का कड़ा जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि कांग्रेस नेता को हर बात में अमेरिका का साया दिखाई देता है और वे कभी भी देश के विकास या राष्ट्र निर्माण की सकारात्मक बात नहीं करते। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि प्रस्तावित शुल्क आम जनता के लिए नहीं है, बल्कि यह केवल बड़े व्यापारियों पर लागू होगा। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि यह नियम सिर्फ उन मर्चेंट्स पर लागू होगा जिनका मासिक यूपीआई लेनदेन एक लाख रुपये से अधिक है, और ऐसे कारोबारी कुल व्यापारियों का केवल चार प्रतिशत हिस्सा हैं। यह पूरा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है, जहां इस पर कानूनी पहलुओं से विचार किया जा रहा है।\n\nइसका आप पर असर\nयूपीआई लेनदेन पर संभावित शुल्क और नियमों का सीधा असर देश के आम नागरिकों, खुदरा दुकानदारों और बड़े व्यापारियों की जेब पर पड़ सकता है।\n\n• भारत में: आम लोगों के लिए एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने की सुविधा और तय सीमा के भीतर के रोजमर्रा के भुगतान पहले की तरह मुफ्त बने रहेंगे। हालांकि, एक लाख रुपये से अधिक मासिक कारोबार करने वाले बड़े व्यापारियों पर शुल्क का असर पड़ सकता है।\n\n• जम्मू-कश्मीर में: राज्य के उपभोक्ताओं और छोटे दुकानदारों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे तय सीमा के नियमों का पालन करें ताकि किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ से बचा जा सके।\n\nऐसा क्यों हुआ\nडिजिटल पेमेंट के बुनियादी ढांचे को चलाने में आने वाली भारी लागत और राजनीतिक बयानबाजी के कारण यह विषय राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बन गया है।\n\n• रखरखाव की लागत: यूपीआई जैसी विशाल तकनीकी व्यवस्था को सुचारू और सुरक्षित रूप से चलाने के लिए भारी मात्रा में वित्तीय संसाधन और तकनीकी निवेश की आवश्यकता होती है।\n\n• व्यापारिक मुनाफा: इस बात पर बहस जारी है कि भारी मुनाफा कमाने वाली बड़ी कंपनियों और अधिक लेनदेन करने वाले मर्चेंट्स को इस लागत का वहन करना चाहिए या नहीं।\n\n• राजनीतिक प्रतिक्रिया: विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों और अंतरराष्ट्रीय संदर्भों के बाद सरकार और मंत्रियों को इस नीति के वास्तविक आंकड़ों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना पड़ा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. यूपीआई शुल्क के मुद्दे पर किस राजनेता ने केंद्र सरकार का समर्थन किया है?\nजम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने यूपीआई लेनदेन पर शुल्क के मामले में केंद्र सरकार का समर्थन किया है।\n\n2. उमर अब्दुल्ला के अनुसार यूपीआई शुल्क क्यों जरूरी है?\nउन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे को बनाए रखना और चलाना बहुत महंगा है और इस व्यवस्था को चलाने में भारी खर्च आता है।\n\n3. किन लोगों को यूपीआई लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं देना होगा?\nएक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने और तय सीमा से कम लेनदेन करने वाले आम ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।\n\n4. राहुल गांधी ने इस मामले में केंद्र सरकार पर क्या आरोप लगाया था?\nराहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने झुकने के बजाय इस फैसले को वापस लेना चाहिए।\n\n5. ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राहुल गांधी के आरोपों का क्या जवाब दिया?\nज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि राहुल गांधी को हर जगह अमेरिका का भूत नजर आता है और वे कभी राष्ट्र निर्माण की बात नहीं करते।\n\n6. यह शुल्क किन व्यापारियों पर लागू होगा?\nयह शुल्क केवल उन व्यापारियों पर लागू होगा जिनका महीने का यूपीआई लेनदेन एक लाख रुपये से अधिक है।\n\n7. कुल व्यापारियों में से कितने प्रतिशत पर यह शुल्क लगेगा?\nऐसे व्यापारी कुल संख्या का मात्र चार प्रतिशत हैं।\n\n8. यह मामला अब कहां पहुंच गया है?\nयूपीआई शुल्क से जुड़ा यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।",
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  "category": "जम्मू-कश्मीर",
  "publishedAt": "2026-09-16",
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