{
  "type": "article",
  "title": "यूपीआई ट्रांजैक्शन फीस विवाद पर उमर अब्दुल्ला का रुख, केंद्र के फैसले का किया समर्थन",
  "summary": "जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने के केंद्र सरकार के कदम का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को चलाने में भारी खर्च आता है, लेकिन आम नागरिकों को इसके बोझ से बचाना जरूरी है।",
  "content": "जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने यूपीआई के जरिए होने वाले लेन-देन पर संभावित शुल्क को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्र सरकार के रुख का समर्थन किया है। मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के वृहद डिजिटल भुगतान तंत्र का रखरखाव और संचालन करना खर्चीला होता है, जिसके लिए वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता पड़ती है।\n\nशुल्क के दायरे और श्रेणियों की स्थिति\nइस विषय पर विस्तार से बताते हुए उमर अब्दुल्ला ने साफ किया कि यह वित्तीय प्रभार हर नागरिक पर लागू नहीं होने जा रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को यानी पीटूपी माध्यम से भेजी जाने वाली राशि पर किसी प्रकार का शुल्क नहीं वसूला जाएगा। इसके अतिरिक्त, सामान्य उपयोगकर्ताओं को भी तब तक कोई अतिरिक्त राशि नहीं चुकानी होगी जब तक उनका लेन-देन निर्धारित सीमा के भीतर रहता है।\n\nबुनियादी ढांचे की लागत और कंपनियों की भूमिका\nमुख्यमंत्री ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी लागत का जिक्र करते हुए कहा कि जब नागरिकों को कोई सुविधा पूरी तरह निशुल्क मिलती है, तो कई बार उसकी वास्तविक लागत का अनुमान लगाना कठिन होता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस प्रणाली के माध्यम से बड़ी कंपनियां पर्याप्त लाभ अर्जित करती हैं, इसलिए यदि उन पर कुछ शुल्क लगाया जाता है तो इसमें कोई अनुचित बात नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि केंद्रीय प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि देश के आम उपभोक्ताओं की जेब पर इसका प्रतिकूल असर न पड़े।\n\nनया नियम और एमडीआर का दायरा\nगौरतलब है कि केंद्र सरकार ने आगामी 15 अक्टूबर 2026 से दो हजार रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट लेन-देन पर अधिकतम शून्य दशमलव चार फीसदी एमडीआर लागू करने का निर्णय लिया है। यह व्यवस्था सीधे तौर पर सामान्य उपभोक्ताओं पर नहीं डाली जाएगी और आम ग्राहकों के लिए व्यक्तिगत लेनदेन पहले की तरह पूरी तरह निःशुल्क बने रहेंगे।\n\nराजनीतिक प्रतिक्रियाएं और मंत्रालय का स्पष्टीकरण\nइस नीतिगत निर्णय के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में विपक्ष ने सरकार के खिलाफ आवाज उठाई है और इस कदम पर सवाल खड़े किए हैं। इन तमाम प्रतिक्रियाओं के बीच वित्त मंत्रालय ने स्थिति को पूरी तरह साफ करते हुए बयान दिया है कि देश में डिजिटल भुगतान से जुड़े सभी नीतिगत फैसले पूरी तरह स्वतंत्र रूप से लिए जाते हैं। मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि एमडीआर लागू करने का यह निर्णय किसी भी बाहरी या विदेशी दबाव के प्रभाव में नहीं लिया गया है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य इस विशाल डिजिटल भुगतान तंत्र को आर्थिक रूप से दीर्घकालिक और मजबूत बनाना है।\n\nइसका आप पर असर\nयूपीआई लेनदेन से जुड़े नियमों और शुल्क प्रावधानों का सीधा असर देश के डिजिटल उपयोगकर्ताओं और व्यापारियों पर पड़ता है।\n\n• भारत में: देश भर के आम उपयोगकर्ताओं के लिए एक-दूसरे को पैसे भेजने यानी पीटूपी लेनदेन पूरी तरह निःशुल्क बने रहेंगे। दो हजार रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट भुगतानों पर शून्य दशमलव चार फीसदी तक का एमडीआर लागू होने से सामान्य ग्राहकों की दैनिक डिजिटल आदतें प्रभावित नहीं होंगी क्योंकि यह शुल्क सीधे उन पर नहीं डाला जाएगा।\n• जम्मू-कश्मीर में: राज्य के नागरिकों और स्थानीय कारोबारियों को भी राष्ट्रीय डिजिटल भुगतान ढांचे के नए नियमों के तहत ही डिजिटल लेनदेन करना होगा। मुख्यमंत्री के बयानों से स्पष्ट है कि डिजिटल सेवाओं की लागत और कंपनियों के मुनाफे के बीच संतुलन बनाने की दिशा में स्थानीय स्तर पर भी वित्तीय जागरूकता बढ़ेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nडिजिटल भुगतान प्रणाली पर शुल्क लगाने और एमडीआर तय करने के पीछे का मुख्य उद्देश्य इस विशाल बुनियादी ढांचे को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और टिकाऊ बनाना है।\n\n• परिचालन लागत का दबाव: यूपीआई जैसे व्यापक नेटवर्क को निरंतर संचालित करने, सर्वर सुचारू रखने और सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने में भारी वित्तीय संसाधन खर्च होते हैं।\n• कंपनियों की व्यावसायिक आय: इस माध्यम से बड़ी तकनीकी और वित्तीय कंपनियां पर्याप्त मुनाफा कमाती हैं, जिसके कारण सरकार इस प्रणाली के रख-रखाव में उनकी भागीदारी सुनिश्चित कर रही है।\n• स्वतंत्र नीतिगत निर्णय: वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ये बदलाव किसी विदेशी दबाव के कारण नहीं बल्कि देश के डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम को दीर्घकालिक मजबूती देने के लिए किए गए हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. उमर अब्दुल्ला ने यूपीआई शुल्क विवाद पर क्या कहा है?\nजम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार का समर्थन करते हुए कहा है कि डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को चलाना खर्चीला होता है।\n\n2. क्या आम नागरिकों को एक-दूसरे को पैसे भेजने पर कोई शुल्क देना होगा?\nनहीं, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने पर किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा।\n\n3. एमडीआर किस प्रकार के लेनदेन पर लागू होगा?\nकेंद्र सरकार ने 15 अक्टूबर 2026 से दो हजार रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर अधिकतम शून्य दशमलव चार फीसदी एमडीआर लागू करने का फैसला किया है।\n\n4. क्या यह शुल्क सीधे आम उपभोक्ताओं से वसूला जाएगा?\nनहीं, यह शुल्क सीधे आम उपभोक्ता से नहीं लिया जाएगा और सामान्य ग्राहकों के लिए व्यक्तिगत लेनदेन शुल्क मुक्त रहेंगे।\n\n5. वित्त मंत्रालय ने इस फैसले को लेकर क्या स्पष्टीकरण दिया है?\nवित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यूपीआई नीतियां स्वतंत्र रूप से तय होती हैं और यह फैसला किसी विदेशी दबाव में नहीं लिया गया है।",
  "url": "https://trendkia.com/jammu-kashmir/upi-transaction-fees-par-omar-abdullah-ka-rukh-centre-ke-faisle-ka-kiya-samarthan-32776",
  "category": "जम्मू-कश्मीर",
  "publishedAt": "2026-09-16",
  "tags": [
    "उमर अब्दुल्ला",
    "यूपीआई शुल्क",
    "डिजिटल पेमेंट",
    "केंद्र सरकार",
    "वित्त मंत्रालय",
    "एमडीआर"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}