# जम्मू-कश्मीर में वक्फ बोर्ड के नए फरमान से गरमाया मामला, दरगाहों पर तहरी बांटने और पक्षियों को दाना डालने को लेकर मचा बवाल

> जम्मू-कश्मीर में वक्फ बोर्ड की तरफ से धार्मिक स्थलों पर तहरी बांटने और पक्षियों को दाना खिलाने पर रोक लगाने के फैसले के बाद कड़ा विरोध शुरू हो गया है। हालांकि बाद में स्पष्ट किया गया कि यह पाबंदी परिसर के बाहर तय जगहों पर लागू होगी, लेकिन तब तक इस कदम को लेकर घाटी में सियासी और सामाजिक बहस छिड़ चुकी है।

**Type:** article · **Category:** जम्मू-कश्मीर · **Published:** 2026-09-14 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jammu-kashmir/waqf-board-order-banning-tehri-distribution-and-feeding-birds-in-kashmir-sparks-fresh-controversy-32296 · **Language:** Hindi
**Tags:** जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड, तहरी विवाद, दरख्शां अंद्राबी, कश्मीर दरगाह, धार्मिक परंपरा

जम्मू-कश्मीर के धार्मिक गलियारों में उस वक्त भारी हलचल मच गई, जब वक्फ बोर्ड ने सूफी दरगाहों और मजारों के अंदर तहरी बांटने के साथ-साथ परिंदों को दाना डालने पर पाबंदी लगा दी। इस ताज़ा फैसले के सामने आते ही पूरी वादी में नाराजगी की लहर दौड़ गई और स्थानीय नागरिकों, श्रद्धालुओं तथा राजनीतिक दलों के नुमाइंदों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। विरोध करने वालों का कहना है कि कश्मीर की सदियों पुरानी रिवायतों और आध्यात्मिक मान्यताओं पर इस तरह का अंकुश लगाना जनभावनाओं को सीधे तौर पर आहत करने जैसा है।

 

## सोशल मीडिया पर वायरल टिप्पणी से भड़का विवाद

इस पूरे प्रकरण की शुरुआत तब हुई जब जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की चेयरपर्सन डॉक्टर दरख्शां अंद्राबी का एक बयान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से फैल गया। इस टिप्पणी में दरगाह परिसर के भीतर तहरी और नज़र-ओ-नियाज़ के वितरण के साथ पक्षियों को दाना डालने पर रोक का जिक्र था। जैसे ही यह बात आम जनता तक पहुंची, लोगों में तीखा रोष फैल गया। आम लोगों और परंपराओं से जुड़े वर्गाें का तर्क था कि दरगाहों पर अन्न का प्रसाद चढ़ाना और मूक जीवों को भोजन कराना उनकी गहरी आस्था और पीढ़ियों पुरानी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है, जिसे मनमाने तरीके से रोका नहीं जा सकता.

 

## वक्फ बोर्ड की ओर से आया सफाईनामा

बढ़ते विरोध और जनआक्रोश को भांपते हुए वक्फ बोर्ड की चेयरपर्सन डॉक्टर दरख्शां अंद्राबी ने स्थिति को स्पष्ट किया। उन्होंने साफ किया कि तहरी के वितरण पर कोई मुकम्मल प्रतिबंध नहीं लगाया गया है, बल्कि यह रोक केवल दरगाह के अंदरूनी परिसर में इसे लाने और बांटने पर है। उनके मुताबिक, श्रद्धालु पहले की तरह नजर-ओ-नियाज और तहरी ला सकते हैं, बशर्ते वे इन सामग्रियों को दरगाह परिसर के बाहर निर्धारित शेड और चिन्हित स्थानों पर ही वितरित करें। अधिकारियों का तर्क है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य किसी भी धार्मिक कर्मकांड में बाधा डालना नहीं, बल्कि पवित्र स्थलों की स्वच्छता और सुव्यवस्था को कायम रखना है.

 

## सदियों पुरानी रिवायतों से जुड़ी है जनता की आस्था

घाटी के आम लोगों और नियमित रूप से दरगाहों पर आने वाले भक्तों का मानना है कि ये रस्में केवल परंपरा नहीं बल्कि उनके विश्वास का आधार हैं। संकट या मुश्किल घड़ी में तहरी का वितरण करना और परिंदों को दाना डालना लोगों के मानसिक सुकून का बड़ा जरिया रहा है। भक्तों का कहना है कि वे पीढ़ियों से इस संस्कृति का निर्वहन करते आ रहे हैं और अपनी सामर्थ्य के अनुसार चढ़ावा लेकर आते हैं। इस स्पष्टीकरण के बाद भी यह सवाल कायम है कि धार्मिक स्थलों पर व्यवस्था बनाए रखने और लोगों की आस्था का सम्मान करने के बीच संतुलन कैसे बैठाया जाए.

 

## प्रशासनिक सुधार बनाम पारंपरिक स्वतंत्रता की बहस

पीडीपी नेता इकबाल ट्रंबू ने इस पाबंदी पर कड़ा एवारज जताते हुए कहा कि सदियों पुरानी प्रथाओं को यूं अचानक प्रतिबंधित करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि साफ-सफाई और बेहतर मैनेजमेंट के जरिए व्यवस्था सुधारी जा सकती है, न कि परंपराओं को रोककर। उन्होंने मिसाल देते हुए कहा कि दुनिया भर के पवित्र स्थलों पर ऐसी परंपराएं देखी जाती हैं और मक्का-मदीना जैसे मुकद्दस स्थानों पर भी पक्षियों को दाना डालने की छूट रहती है। उनके अनुसार, अधिकारियों को प्रतिबंध लगाने के बजाय इन प्रथाओं को कायदे से संचालित करने पर जोर देना चाहिए।

 

## व्यापार मंडल और स्थानीय लोगों का पक्ष

चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रेसिडेंट तारिक ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वक्फ चेयरपर्सन के बयानों को शायद गलत संदर्भ में समझ लिया गया है और उनका इरादा गंदगी फैलाने की अनुमति देना नहीं था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि श्रद्धालुओं को तहरी या छिलके वाले चावल बांटने की पूरी अनुमति मिलनी चाहिए, बशर्ते स्वच्छता के नियमों का कड़ाई से पालन हो। पक्षियों को दाना खिलाने को एक धार्मिक फर्ज बताते हुए उन्होंने कहा कि इस नेक काम को कोई ताकत नहीं रोक सकती, हालांकि उन्होंने यह भी सलाह दी कि इस प्रक्रिया में स्वच्छता का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।

## इसका आप पर असर
वक्फ बोर्ड के इस आदेश और उससे जुड़े घटनाक्रम का सीधा असर धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय कारोबारियों पर पड़ सकता है।

- **भारत में:** देश भर के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर बोर्डों द्वारा लागू किए जाने वाले स्वच्छता नियमों और पारंपरिक गतिविधियों के बीच संतुलन पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है, जिससे प्रशासनिक नीतियों पर असर पड़ सकता है।

- **जम्मू-कश्मीर में:** घाटी की तमाम दरगाहों पर आने वाले भक्तों को अब प्रसाद वितरण और पक्षियों को दाना डालने के लिए परिसर के बाहर तय की गई जगहों का ही इस्तेमाल करना होगा।

- **स्थानीय व्यवस्था:** दरगाहों के आसपास प्रसाद और सामग्री बेचने वाले छोटे दुकानदारों और विक्रेताओं के व्यापारिक तौर-तरीकों पर इन नए नियमों का सीधा प्रभाव पड़ सकता है।

- **धार्मिक भावनाएं:** सदियों पुरानी मान्यताओं से जुड़े लोग अपनी परंपराओं के निर्वहन को लेकर प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के पालन को लेकर अधिक सतर्क हो गए हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह पूरा विवाद धार्मिक स्थलों की आंतरिक स्वच्छता बनाए रखने और सदियों पुरानी परंपराओं के बीच उपजे मतभेद के कारण सामने आया। वक्फ बोर्ड ने परिसर के भीतर स्वच्छता और अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया था, जिसके बाद सार्वजनिक प्रतिक्रिया और राजनीतिक बहस शुरू हो गई।

- **स्वच्छता और प्रबंधन:** वक्फ बोर्ड का मुख्य उद्देश्य दरगाह परिसरों के भीतर बिखराव को रोकना और बेहतर साफ-सफाई की व्यवस्था कायम करना था।

- **संचार का अंतराल:** चेयरपर्सन के शुरुआती बयानों में प्रतिबंध के दायरे को लेकर स्पष्टता की कमी के कारण लोगों में यह भ्रम फैला कि परंपरा पर पूरी रोक लग गई है।

- **सार्वजनिक प्रतिक्रिया:** भोजन बांटने और परिंदों को दाना खिलाने जैसी गहरी आस्था से जुड़ी प्रथाओं पर रोक की आशंका ने समुदाय और राजनीतिक नेताओं को मुखर होने पर मजबूर कर दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. जम्मू-कश्मीर में यह नया विवाद किस फैसले को लेकर शुरू हुआ?
यह विवाद वक्फ बोर्ड द्वारा धार्मिक स्थलों के अंदर तहरी बांटने और पक्षियों को दाना डालने पर रोक लगाने के फैसले के बाद शुरू हुआ।

### 2. वक्फ बोर्ड की चेयरपर्सन का क्या नाम है?
जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की चेयरपर्सन डॉक्टर दरख्शां अंद्राबी हैं।

### 3. बाद में वक्फ बोर्ड की तरफ से क्या स्पष्टीकरण दिया गया?
स्पष्टीकरण में कहा गया कि तहरी पर पूरी पाबंदी नहीं है, बल्कि इसे केवल दरगाह परिसर के बाहर तय शेड और जगहों पर ही बांटा जा सकता है।

### 4. इस फैसले पर राजनीतिक नेताओं की क्या प्रतिक्रिया थी?
पीडीपी नेता इकबाल ट्रंबू समेत कई नेताओं ने सदियों पुरानी परंपराओं को रोकने का विरोध करते हुए कहा कि इसके बजाय बेहतर सफाई प्रबंधन होना चाहिए।

### 5. चैंबर ऑफ कॉमर्स ने इस मामले पर क्या कहा?
चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रेसिडेंट तारिक ने कहा कि चेयरपर्सन के बयान को गलत रूप में पेश किया गया था और भक्तों को स्वच्छता का ध्यान रखते हुए प्रसाद बांटने की अनुमति मिलनी चाहिए।

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