# 18 साल भौतिक विज्ञान पढ़ाने के बाद 60 की उम्र में कशिश ने शुरू किया आभूषणों का कारोबार, हर दिन आ रहे 10 ऑर्डर

> रांची की 60 वर्षीय कशिश ने अठारह वर्ष तक स्कूल में फिजिक्स पढ़ाने के बाद इस्तीफा देकर आभूषण डिजाइनिंग का काम शुरू किया, जिसे अब पूरे देश से रोजाना दस ऑर्डर मिल रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-09-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/18-sala-bhautika-vijnana-parhane-ke-bada-60-ki-umra-men-kashish-ne-shuru-kiya-abhushanon-ka-karobara-hara-dina-a-rahe-10-rdara-37605 · **Language:** Hindi
**Tags:** कशिश रांची, ज्वेलरी डिजाइनर, महिला उद्यमी, रांची समाचार, टेंपल ज्वेलरी, दुबई गोल्ड डिजाइन

झारखंड की राजधानी रांची की रहने वाली 60 साल की कशिश ने अपने जीवन के साठवें पड़ाव पर एक बिल्कुल नई और साहसिक शुरुआत की है। पिछले वर्ष तक वह एक स्कूल में शिक्षिका थीं, जहाँ उन्होंने लगातार 18 वर्षों तक छात्र-छात्राओं को भौतिक विज्ञान पढ़ाया। इस लंबी शैक्षणिक सेवा के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला किया। उनका कहना था कि उन्हें परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियाँ संभालने के साथ-साथ खुद का कुछ स्वतंत्र काम शुरू करना था। आभूषणों के प्रति उनका लगाव बचपन से था, इसलिए उन्होंने अपनी रुचि को ही अपना नया पेशा बनाने का निर्णय लिया।

## दुबई शैली से लेकर पारंपरिक भारतीय आभूषणों का संगम
कशिश मुख्य रूप से दुबई की प्रसिद्ध सोने की आभूषण शैलियों से प्रेरित होकर नए पैटर्न तैयार करती हैं और फिर कुशल कारीगरों की सहायता से उन्हें अंतिम रूप दिलवाती हैं। इसके अतिरिक्त, वह भारत के विभिन्न राज्यों की पारंपरिक कलाओं को भी अपने संग्रह में शामिल करती हैं। दक्षिण भारत की मशहूर मंदिर शैली वाले आभूषण और मणकों से सजी बीड स्पेशल ज्वेलरी के डिजाइन वह स्वयं तैयार करती हैं। इनमें से कई आभूषण वह अपने हाथों से तैयार करती हैं, जबकि कुछ जटिल और बारीक नक्काशी वाले काम के लिए कारीगरों की मदद ली जाती है। व्यवसाय शुरू होने के चंद महीनों के भीतर ही ग्राहकों से बहुत सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने लगी है।

## देशभर की दुर्लभ शैलियों का चयन और मौलिक प्रयोग
अपने संग्रह को विशिष्ट बनाए रखने के लिए कशिश देश के अलग-अलग कोनों की यात्रा करती हैं। विभिन्न क्षेत्रों में जाकर वह वहां की पारंपरिक और स्थानीय आभूषण शैलियों को बारीकी से देखती और चुनती हैं। यदि उन्हें लगता है कि किसी पारंपरिक पैटर्न में कुछ नयापन जोड़ा जा सकता है, तो वह उसमें अपनी मौलिक सोच मिलाकर अनूठे आभूषण तैयार करवाती हैं। उनके संग्रह में दक्षिण भारत की मंदिर डिजाइन वाली ज्वेलरी को खरीदार सबसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

## हर महिला की पसंद को एक छत के नीचे लाने का प्रयास
कशिश का मानना है कि आभूषणों के प्रति महिलाओं का आकर्षण स्वाभाविक और गहरा होता है। किसी के पास पहले से चाहे पचास आभूषण ही क्यों न मौजूद हों, जब भी कोई बाहर निकलती हैं तो सुंदर डिजाइनों की ओर खिंची चली जाती हैं। इसी सोच के तहत उन्होंने तय किया कि देश और विदेश के चुनिंदा आभूषणों को एक ही मंच पर उपलब्ध कराया जाए। दुबई की पारंपरिक सोने की ज्वेलरी में जाली डिजाइन, झालर डिजाइन और मास्क गोल्ड ज्वेलरी जैसी विविधताएं शामिल हैं, जिन्हें आम तौर पर लोग केवल वीडियो रील्स में ही देख पाते हैं। कशिश ने इन सभी डिजाइनों को ग्राहकों के लिए वास्तविक रूप में उपलब्ध कराया है।

## कक्षा के ब्लैकबोर्ड से पैन इंडिया डिलीवरी तक का सफर
अध्यापन कार्य से अलग होने के बाद जीवन की इस दूसरी पारी का कशिश पूरा आनंद ले रही हैं। उनका कहना है कि उन्होंने स्कूल में कई वर्षों तक बच्चों को भौतिक विज्ञान पूरी लगन से सिखाया, लेकिन अब अपने उस पुराने शौक को जीने का वक्त था जिसे वह बरसों से दिल में संजोए बैठी थीं। इंटरनेट के जरिए उनका काम तेजी से लोगों तक पहुंच रहा है और रोजाना औसतन 10 आभूषणों के ऑनलाइन ऑर्डर मिल रहे हैं। रांची में बैठकर वह पूरे भारत में अपने इन आभूषणों की डिलीवरी कर रही हैं।

## इसका आप पर असर
यह समाचार दिखाता है कि उम्र या लंबे पेशेवर करियर के बाद भी नए सिरे से हुनर आधारित व्यवसाय शुरू कर सफलता पाई जा सकती है।

- **कैरियर में बदलाव:** सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच रहे पेशेवर अपने शौक को व्यावसायिक रूप देकर दूसरा करियर चुन सकते हैं। इसके लिए किसी औपचारिक आयु सीमा या पिछली डिग्री की बाध्यता नहीं होती।
- **आभूषण खरीदारों के लिए:** ग्राहकों को दक्षिण भारतीय मंदिर शैली और दुबई शैली के चुनिंदा आभूषण सीधे ऑनलाइन उपलब्ध हो रहे हैं। खरीदार सोशल मीडिया पर दिखने वाले अनूठे डिजाइनों को सीधे ऑर्डर कर घर मंगा सकते हैं।
- **स्थानीय कारीगरों को रोजगार:** स्वतंत्र डिजाइनरों के आने से पारंपरिक कारीगरों को नियमित काम और बेहतर आय के अवसर मिलते हैं। जटिल आभूषण निर्माण में इन दस्तकारों की मांग बढ़ती है।
- **लघु उद्योग की प्रेरणा:** घरेलू स्तर पर ई-कॉमर्स और पैन इंडिया डिलीवरी सेवाओं का उपयोग कर कोई भी व्यक्ति अपने शहर से देशव्यापी ग्राहक जोड़ सकता है। इससे बड़े शुरुआती निवेश के बिना कारोबार खड़ा किया जा सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
कशिश ने 18 वर्षों के सुरक्षित अध्यापन करियर को छोड़कर आभूषण डिजाइनिंग का क्षेत्र चुना, क्योंकि वह परिवार को समय देने के साथ अपनी स्वतंत्र पहचान बनाना चाहती थीं।

- **व्यक्तिगत रुचि और बदलाव की इच्छा:** कशिश की आभूषणों में बचपन से गहरी रुचि थी और वह काफी समय से खुद का कुछ नया काम शुरू करना चाहती थीं। पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते उन्होंने स्कूल की नौकरी छोड़कर इस व्यवसाय पर पूरा ध्यान केंद्रित किया।
- **बाजार में अनूठे डिजाइनों की मांग:** अधिकांश ग्राहक सोशल मीडिया रील्स पर दुबई शैली और दक्षिण भारतीय पारंपरिक मंदिर आभूषण देखते तो थे, लेकिन वे आसानी से सुलभ नहीं थे। कशिश ने इस अंतर को समझा और विभिन्न क्षेत्रों से चुनकर ऐसे डिजाइन उपलब्ध कराए।
- **डिजिटल और लॉजिस्टिक्स की सुगमता:** इंटरनेट के बढ़ते प्रभाव और पूरे देश में पार्सल वितरण की सुविधाओं ने स्थानीय स्तर से राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचना आसान बना दिया। इसी तकनीकी सुविधा के कारण उनका यह प्रयोग कुछ ही महीनों में सफल हो गया।

## सवाल-जवाब

### 1. कशिश कौन हैं और उन्होंने अपना नया काम कब शुरू किया?
कशिश रांची की रहने वाली 60 वर्षीय पूर्व भौतिक विज्ञान शिक्षिका हैं, जिन्होंने 18 साल स्कूल में पढ़ाने के बाद पिछले साल इस्तीफा देकर आभूषण डिजाइनिंग का काम शुरू किया।

### 2. कशिश किस तरह के आभूषण डिजाइन करती हैं?
वह मुख्य रूप से दुबई की सोने की आभूषण शैलियों, दक्षिण भारत की मंदिर डिजाइन ज्वेलरी और बीड स्पेशल ज्वेलरी डिजाइन करती हैं।

### 3. वह आभूषणों के नए डिजाइन कहां से जुटाती हैं?
वह भारत के विभिन्न हिस्सों की यात्रा करती हैं, वहां की स्थानीय खास शैलियों को चुनती हैं और जरूरत पड़ने पर अपनी अनूठी सोच जोड़कर कारीगरों से तैयार करवाती हैं।

### 4. कशिश के आभूषणों के कारोबार को रोजाना कितने ऑर्डर मिल रहे हैं?
उन्हें रोजाना ऑनलाइन माध्यम से औसतन 10 आभूषणों के ऑर्डर मिल रहे हैं, जिनकी आपूर्ति वह पूरे भारत में कर रही हैं।

### 5. उन्होंने 18 साल बाद शिक्षिका का पद क्यों छोड़ा?
उन्होंने अपने बच्चों और परिवार को समय देने तथा आभूषणों के प्रति अपनी पुरानी रुचि को पूर्णकालिक व्यवसाय में बदलने के लिए नौकरी छोड़ी।

## प्रेरणा और सबक
60 वर्ष की आयु में स्थापित करियर को छोड़कर नए क्षेत्र में उतरने वाली कशिश का यह सफर बताता है कि लगन के आगे उम्र की सीमाएं बेअसर हो जाती हैं।

- **उम्र केवल एक संख्या है:** 60 वर्ष की उम्र में 18 साल की जमी-जमाई नौकरी छोड़कर नया काम शुरू करने का फैसला यह साबित करता है कि सपने पूरे करने का कोई तय समय नहीं होता।
- **शौक को हुनर और कारोबार में बदलें:** जिस काम में आपकी स्वाभाविक रुचि हो, उसे सही योजना के साथ आजमाने से संतोष और आर्थिक लाभ दोनों मिलते हैं।
- **सीखने और तलाशने का जज्बा:** देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर स्थानीय परंपराओं को देखना और उन्हें अपनी शैली में ढालना निरंतर सीखते रहने के महत्व को दर्शाता है।
- **शुरुआती बाधाओं से न डरें:** किसी नए क्षेत्र का पूर्व व्यावसायिक अनुभव न होने पर भी यदि काम में मौलिकता हो, तो कुछ ही महीनों में ग्राहक और पहचान दोनों मिलने लगते हैं।

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