# जमशेदपुर के डायमंड गोल चक्कर पर मिल रहा है अमृतसर जैसा स्वाद, मात्र साठ रुपये में भर जाएगा पेट

> जमशेदपुर के डायमंड गोल चक्कर के पास एक अनूठा पंजाबी लंच सेटअप चल रहा है, जहां केवल साठ रुपये में घर जैसा स्वादिष्ट भोजन मिलता है।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-09-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/authentic-amritsari-flavor-in-jamshedpur-enjoy-a-full-meal-for-sixty-rupees-near-diamond-chakar-29351 · **Language:** Hindi
**Tags:** जमशेदपुर लंच, पंजाबी खाना, डायमंड गोल चक्कर, राजमा चावल, अमृतसरी स्वाद, रघुवीर जी लंच

जमशेदपुर में काम के सिलसिले में रह रहे लोगों और बेहतरीन खान-पान के शौकीनों के लिए शहर में एक नया ठिकाना बेहद लोकप्रिय हो रहा है। यदि आप दोपहर के समय कुछ ऐसा खाना चाहते हैं जो स्वाद में लाजवाब होने के साथ-साथ आपके दिल को सुकून दे और घर के खाने की याद दिला दे, तो डायमंड गोल चक्कर के पास लगने वाला यह लंगर स्टाइल पंजाबी लंच आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। यहाँ रोजाना सुबह ग्यारह बजे से लेकर शाम चार बजे तक गर्मागर्म और स्वादिष्ट भोजन परोसा जाता है। इस छोटे से फूड सेटअप को रघुवीर जी द्वारा चलाया जाता है, जहाँ परोसी जाने वाली हर एक डिश में अमृतसर के पारंपरिक और असली जायके की एक अलग ही झलक साफ दिखाई देती है। इस लंच की सबसे बड़ी खासियत इसकी शुद्धता है, जो बिल्कुल घर के बने खाने जैसी अनुभूति कराती है। हालांकि, आपको इस बात का भी विशेष ध्यान रखना होगा कि यदि तय समय से पहले ही सारा स्टॉक बिक जाता है, तो आपको बिना खाए ही वापस लौटना पड़ सकता है।

## क्या-क्या मिलता है खाने में और क्या है खासियत
इस लंच की थाली में कई तरह के पारंपरिक व्यंजन शामिल किए जाते हैं, जो खाने के शौकीनों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। मेनू में मुख्य रूप से पिंडी छोले, स्वादिष्ट राजमा, कढ़ी पकौड़ा, गरमागरम चावल और ताजी रोटियां परोसी जाती हैं। खाने के इस स्वाद को और अधिक चटपटा और शानदार बनाने के लिए इसके साथ तीखा अचार और प्याज भी परोसा जाता है। मसालेदार पिंडी छोले, उबले चावल के साथ राजमा और स्वाद से भरपूर कढ़ी पकौड़े का संयोजन लोगों के दिलों में उतर रहा है। लंगर की शैली में परोसा जाने वाला यह भोजन विशेष रूप से उन युवाओं और कामकाजी लोगों के लिए एक बड़ा आकर्षण बन चुका है जो अपने घरों और परिवारों से कोसों दूर रहकर नौकरी या अन्य व्यावसायिक कार्यों में व्यस्त रहते हैं।

## रघुवीर जी की संघर्ष से भरी दिलचस्प कहानी
इस शानदार पंजाबी लंच के पीछे की दास्तान भी बेहद प्रेरणादायक और संघर्ष से भरी हुई है। इसके संचालक रघुवीर जी ने इस मुकाम तक पहुंचने से पहले जीवन में लंबा संघर्ष किया है। उन्होंने लगभग बीस वर्षों तक एक निजी कंपनी में नौकरी की थी। इसके बाद उन्होंने कुछ वर्षों तक गाड़ियां चलाने का कार्य भी किया और उस दौरान अच्छी कमाई भी हासिल की, लेकिन उनके मन में हमेशा एक कसक बनी रही। उन्हें भीतर से यह महसूस होता था कि उन्हें वह आत्मिक संतुष्टि नहीं मिल रही है जिसकी तलाश उन्हें असल जिंदगी में थी। इसी गहरी सोच और अपने सपनों को पूरा करने के दृढ़ संकल्प के साथ उन्होंने लीक से हटकर कुछ अलग करने का बड़ा फैसला लिया। उन्होंने अपनी एक छोटी सी पिकअप वैन खरीदी और उसमें अपने हाथों से तैयार किए गए लजीज पंजाबी व्यंजनों को लादकर शहर के लोगों तक सीधे पहुंचाना शुरू कर दिया।

## महज दो घंटे में बिक जाता है सारा खाना
शुरुआती दिनों के कड़े संघर्ष के बाद धीरे-धीरे लोगों को उनके बनाए गए भोजन का अनोखा स्वाद पसंद आने लगा। आज स्थिति यह है कि डायमंड गोल चक्कर के पास दोपहर के वक्त उनके ठेले और वैन के आसपास खाने वालों की भारी भीड़ जमा हो जाती है। रघुवीर जी बताते हैं कि कई बार उनका पूरा खाना इतनी तेजी से बिकता है कि महज दो घंटे के भीतर ही बर्तन खाली हो जाते हैं। यानी सुबह ग्यारह बजे शुरू होने वाला यह लंच कई बार दोपहर एक बजे तक ही पूरी तरह से बिक कर समाप्त हो जाता है। इससे इस बात का साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि शहर के लोगों के बीच इस लंगर स्टाइल पंजाबी खाने की कितनी जबरदस्त मांग और लोकप्रियता बनी हुई है।

## ग्राहकों को क्या आता है पसंद
यहाँ दोपहर के वक्त राजमा-चावल का लुत्फ उठाने पहुँचे रोहन ने बताया कि इस खाने का स्वाद उन्हें पूरी तरह से उनके घर के बने भोजन की याद दिलाता है। उनका कहना है कि नौकरीपेशा होने के कारण तमाम लोग अपने घरों से दूर दूसरे शहरों में निवास करते हैं और ऐसे में उन्हें माँ के हाथ के बने खाने की बहुत कमी खलती है। इस प्रकार का भोजन उन्हें न केवल मानसिक सुकून देता है बल्कि घर की पुरानी यादों को ताजा कर देता है। विशेष तौर पर यहाँ के राजमा-चावल और कढ़ी पकौड़े ने उनका दिल जीत लिया है। उनका मानना है कि यह भोजन केवल स्वाद के मामले में ही बेहतरीन नहीं है, बल्कि यह एक आम इंसान का पेट भी पूरी तरह और संतोषजनक तरीके से भर देता है।

## मेहनत और लगन का बेहतरीन उदाहरण
डायमंड गोल चक्कर के पास मिलने वाला यह पंजाबी भोजन आज महज दो वक्त की रोटी बेचने का जरिया मात्र नहीं रह गया है, बल्कि यह रघुवीर जी की कड़ी मेहनत, अटूट लगन और अपने मनपसंद काम को चुनने के साहस की एक जीवंत मिसाल बन चुका है। नौकरी और ड्राइविंग की दुनिया को पीछे छोड़कर उन्होंने अपनी एक छोटी सी पिकअप वैन के सहारे इस सफर की जो शुरुआत की थी, आज उसी का परिणाम है कि लोग उनके हाथ के बने पंजाबी जायके का इंतजार करते हैं। यदि आप भी अमृतसर की प्रसिद्ध शैली वाले लंगर स्टाइल पंजाबी भोजन का स्वाद चखना चाहते हैं, तो आप भी दोपहर ग्यारह बजे से चार बजे के बीच डायमंड गोल चक्कर के पास पहुँचकर इस लंच का भरपूर आनंद उठा सकते हैं।

## इसका आप पर असर
यह लंच उन लोगों के लिए बेहद फायदेमंद है जो कम कीमत में घर जैसा पौष्टिक भोजन करना चाहते हैं।

- **भारत में:** देशभर के कामकाजी युवाओं को इस तरह के स्थानीय और किफायती खान-पान के विकल्पों से कम खर्च में स्वस्थ भोजन मिल जाता है।
- **जमशेदपुर में:** डायमंड गोल चक्कर के आसपास रहने वाले या नौकरीपेशा लोग मात्र साठ रुपये में भरपेट और शुद्ध पंजाबी भोजन का लाभ उठा सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह अनूठा फूड सेटअप पारंपरिक जायके की मांग और एक व्यक्ति की आत्म-संतुष्टि की तलाश से शुरू हुआ।

- **प्रेरणा का स्रोत:** पारंपरिक नौकरी और ड्राइविंग से असंतोष मिलने के बाद संचालक ने खुद का काम शुरू करने का निर्णय लिया।
- **लोकप्रियता का कारण:** खाने में घर जैसी शुद्धता और अमृतसर का असली स्वाद होना लोगों को आकर्षित करता है।
- **तेजी से बिक्री:** उचित मूल्य और सीमित मात्रा के कारण खाना अक्सर तय समय से पहले ही खत्म हो जाता है।

## सवाल-जवाब

### 1. यह पंजाबी लंच कहाँ मिलता है?
यह लंच जमशेदपुर में डायमंड गोल चक्कर के पास लगाया जाता है।

### 2. इस खाने की कीमत कितनी है?
यहाँ मात्र साठ रुपये में भरपेट भोजन मिल जाता है।

### 3. यह सेटअप किस समय खुला रहता है?
यह लंच रोजाना दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक उपलब्ध रहता है।

### 4. इस लंच सेटअप का संचालन कौन करता है?
इस छोटे से सेटअप का संचालन रघुवीर जी द्वारा किया जाता है।

### 5. खाने में मुख्य रूप से क्या-क्या मिलता है?
इसमें पिंडी छोले, राजमा, कढ़ी पकोड़ा, चावल और रोटी परोसी जाती है।

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