बची हुई बासी रोटियों से ऐसे बनाएं रांची की प्रसिद्ध स्वादिष्ट पगला रोटी रात या सुबह की बची रोटियों को फेंकने के बजाय दूध, घी और चीनी की मदद से रांची की पारंपरिक और पौष्टिक पगला रोटी बनाई जा सकती है। घरों में अक्सर रात या सुबह के भोजन के बाद दो, तीन या चार रोटियां बच जाती हैं। ज्यादातर लोग समझ नहीं पाते कि इन बासी रोटियों का क्या उपयोग किया जाए। झारखंड की राजधानी रांची में स्थानीय लोग इन बची रोटियों से एक बेहद खास और लोकप्रिय पारंपरिक व्यंजन तैयार करते हैं, जिसे पगला रोटी कहा जाता है। इसे दूध, घी और चीनी के मिश्रण के साथ चूल्हे पर पकाया जाता है। पकाने की अनूठी विधि और लाजवाब स्वाद के कारण कई घरों में लोग सुबह के नाश्ते के तौर पर इसका आनंद लेते हैं। तैयारी और छौंक लगाने का तरीका रांची की एक गृहिणी उषा के अनुसार, इस व्यंजन को तैयार करने की विधि बेहद सरल है। सबसे पहले रात या सुबह की बची हुई दो से चार रोटियां लेकर उन्हें हाथों से छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर अलग रख लें। इसके बाद गैस पर एक कड़ाही गर्म करें और उसमें थोड़ा सा देसी घी डालें। जब घी अच्छी तरह गर्म हो जाए, तब उसमें चुटकी भर जीरा डालें और उसे तब तक चटकने दें जब तक कि वह पूरी तरह पक न जाए। जीरा पक जाने के बाद कड़ाही में तोड़ी हुई रोटियों के टुकड़े डालें और उन्हें धीमी आंच पर हल्का सुनहरा होने तक भून लें। दूध पकाने और चीनी मिलाने की विधि रोटियों को हल्का फ्राई करने के बाद उसमें दूध मिलाने की बारी आती है। कड़ाही में इतना दूध डालें कि रोटी के सारे टुकड़े उसमें अच्छी तरह डूब जाएं। इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि दूध बहुत ज्यादा गाढ़ा न हो, इसलिए दूध में थोड़ा सा पानी मिलाकर ही कड़ाही में डालें। जब दूध में अच्छी तरह उबाल आ जाए, तब उसमें एक चम्मच चीनी मिलाएं और मिश्रण को दोबारा खौलने दें। जो लोग इसका स्वाद और अधिक बढ़ाना चाहते हैं, वे इसमें थोड़ी सी ताजी मलाई भी डाल सकते हैं। मलाई डालना पूरी तरह ऐच्छिक है, यदि मलाई उपलब्ध न हो तो भी इसके मूल स्वाद पर कोई फर्क नहीं पड़ता। परोसने का तरीका और इसके पौष्टिक फायदे दूध और चीनी के साथ मिश्रण को धीमी आंच पर लगभग 10 से 15 मिनट तक पकने दें ताकि रोटियां नरम होकर दूध को पूरी तरह सोख लें। इसके बाद गैस बंद कर दें और कड़ाही को चूल्हे से नीचे उतार लें। अब इस गरमा-गरम पगला रोटी को कटोरी में निकालकर परोसें। उषा बताती हैं कि यह व्यंजन न केवल खाने में बेहद स्वादिष्ट लगता है, बल्कि दूध और रोटी का यह मेल पोषण से भी भरपूर होता है। इससे बची हुई रोटी की बर्बादी रोकी जा सकती है। रांची में स्थानीय लोग इसकी इतनी मांग करते हैं कि कई बार घरों में जानबूझकर दो-तीन अतिरिक्त रोटियां बना ली जाती हैं ताकि अगली सुबह नाश्ते में यह खास व्यंजन बनाया जा सके। इसका आप पर असर यह पारंपरिक व्यंजन बची हुई रोटियों की बर्बादी रोककर घर के बजट और पोषण दोनों को बेहतर बनाने में मदद करता है। • भारत में: घरों में रात की बची रोटियों को फेंकने के बजाय यह एक सस्ता और पौष्टिक नाश्ता विकल्प प्रदान करता है। इससे भोजन की बर्बादी कम होती है और रसोई के बजट में बचत होती है। • रांची में: स्थानीय खानपान संस्कृति से जुड़ा यह पारंपरिक स्वाद नई पीढ़ी के बीच लोकप्रिय हो रहा है। शहर के लोग सुबह के नाश्ते में इसे झटपट तैयार होने वाले पौष्टिक विकल्प के रूप में अपना रहे हैं। • खानपान और पोषण: दूध और साबुत गेहूं की रोटी का यह मेल बच्चों और बुजुर्गों के लिए पचने में आसान और ऊर्जा देने वाला भोजन बनता है। इसमें घी और दूध होने के कारण यह शरीर को जरूरी पोषक तत्व देता है। • रसोई प्रबंधन: यह तरीका गृहिणियों को बचे हुए भोजन के पुनर्चक्रण का सरल और व्यावहारिक उपाय सिखाता है। इसे केवल 10 से 15 मिनट में बिना किसी अतिरिक्त फैंसी सामग्री के बनाया जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ रात की बची रोटियों को दोबारा खाने योग्य और स्वादिष्ट बनाने की घरेलू आवश्यकता से इस अनूठी रेसिपी का जन्म हुआ। स्थानीय संस्कृति में भोजन की बर्बादी रोकने के पारंपरिक तरीकों ने इसे घर-घर में लोकप्रिय बना दिया। • घरेलू आवश्यकता: भारतीय घरों में अक्सर रात को अतिरिक्त रोटियां बच जाती हैं जो सुबह तक सूख जाती हैं। दूध और घी में पकाकर उन्हें नरम और मीठे नाश्ते में बदलना सबसे व्यावहारिक उपाय साबित हुआ। • सरल सामग्री का मेल: घरों में दूध, घी, जीरा और चीनी हमेशा उपलब्ध रहते हैं। बिना किसी विशेष तैयारी के इन बुनियादी सामग्रियों से एक नया व्यंजन तैयार करना बेहद आसान हो गया। • पसंदीदा स्वाद और परंपरा: मीठे और नमकीन के हल्के संतुलन ने इसे बच्चों और बड़ों दोनों के बीच पसंदीदा बना दिया। समय के साथ यह रांची के स्थानीय घरों की नाश्ता परंपरा का एक नियमित हिस्सा बन गया। सवाल-जवाब 1. पगला रोटी क्या है? यह रांची का एक लोकप्रिय घरेलू व्यंजन है जिसे बची हुई रोटियों को दूध, घी, जीरा और चीनी के साथ पकाकर तैयार किया जाता है। 2. पगला रोटी बनाने में कितना समय लगता है? इस व्यंजन को चूल्हे पर पकाने में लगभग 10 से 15 मिनट का समय लगता है। 3. दूध डालते समय किस बात का ध्यान रखना चाहिए? दूध बहुत ज्यादा गाढ़ा नहीं होना चाहिए और उसमें थोड़ा पानी मिलाकर डालना चाहिए ताकि रोटियां अच्छी तरह डूब सकें। 4. क्या इस रेसिपी में मलाई डालना अनिवार्य है? नहीं, मलाई डालना पूरी तरह ऐच्छिक है और इसके बिना भी यह व्यंजन स्वादिष्ट बनता है। https://trendkia.com/jharkhand/bachi-hui-basi-rotiyon-se-aise-banaen-ranchi-ki-prasiddha-svadishta-pagla-roti-38248 TrendKia — Har trend, sabse pehle.