# टाटा स्टील की नौकरी के बाद गार्डनिंग, अटल बिहारी मोहंती ने घर को बनाया शानदार मिनी गार्डन

> जमशेदपुर में टाटा स्टील के कर्मचारी अटल बिहारी मोहंती ने अपनी कड़ी मेहनत और पौधों के प्रति प्रेम से अपने घर को एक खूबसूरत मिनी गार्डन में तब्दील कर दिया है। वह ऑफिस की लंबी शिफ्ट के बाद रोजाना घंटों अपने इस बगीचे की देखभाल करते हैं।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-10-16 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/balancing-tata-steel-shift-and-gardening-atanu-bihari-mohanty-transforms-home-into-mini-garden-48073 · **Language:** Hindi
**Tags:** अटल बिहारी मोहंती, जमशेदपुर न्यूज, टाटा स्टील, मिनी गार्डन, बागवानी, झारखंड समाचार

जमशेदपुर के रहने वाले अटल बिहारी मोहंती ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और अनूठे शौक के दम पर अपने घर को एक बेहद आकर्षक और जीवंत मिनी गार्डन में बदल दिया है। आम तौर पर लोगों का यह मानना होता है कि व्यस्त दिनचर्या के बीच किसी भी रचनात्मक काम के लिए समय निकालना बेहद कठिन होता है, लेकिन अटल बिहारी मोहंती ने इस धारणा को पूरी तरह से गलत साबित कर दिया है। वह अपनी इस अनूठी पहल से आसपास के लोगों के लिए एक बड़ी मिसाल बन चुके हैं, और उनके घर के सामने से गुजरने वाला हर शख्स इस सुंदर नजारे को देखने के लिए कुछ पल के लिए जरूर रुक जाता है।

## टाटा स्टील की व्यस्त ड्यूटी के बाद बागवानी
अटल बिहारी मोहंती टाटा स्टील में अपनी सेवाएं देते हैं और कंपनी में रोजाना करीब 8 से 9 घंटे की कड़ी मेहनत वाली ड्यूटी पूरी करते हैं। इतनी लंबी और थका देने वाली शिफ्ट के बाद भी वह आराम करने के बजाय हर दिन कम से कम 3 से 4 घंटे अपने घर के बाहर और आसपास फैले बगीचे की सेवा में बिताते हैं। समय के प्रबंधन का उनका यह तरीका वाकई हैरान करने वाला है, क्योंकि वह अपनी नौकरी और अपने इस प्राकृतिक शौक के बीच बहुत ही बेहतरीन तालमेल बनाए हुए हैं।

## सैकड़ों पौधे और आकर्षक प्रकाश व्यवस्था
उनके इस अद्भुत बगीचे में 300 से अधिक विभिन्न प्रकार के पौधे और गमले सजे हुए हैं। इस विशाल संग्रह में मनमोहक फूलों वाले पौधों से लेकर कई तरह के सुंदर शो प्लांट्स भी शामिल हैं, जो देखने वाले का मन मोह लेते हैं। इसके अलावा, उन्होंने अपने पूरे घर को खूबसूरत और आकर्षक लाइटिंग से सजाया हुआ है, जो पूरे साल इसकी शोभा में चार चांद लगाती है। जैसे ही शाम ढलती है, इस कृत्रिम रोशनी और प्राकृतिक हरियाली का अनूठा मेल पूरे घर को एक जादुई और मनमोहक रूप प्रदान कर देता है।

## खुद तैयार करते हैं मिट्टी और खाद
अटल बिहारी मोहंती की बागवानी सिर्फ पौधे लाकर रख देने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह इसके हर पहलू में खुद पूरी तल्लीनता से शामिल रहते हैं। पौधों के लिए सही उपजाऊ मिट्टी तैयार करने से लेकर प्राकृतिक खाद बनाने तक का सारा काम वह अपने हाथों से ही करते हैं। उनकी यह मेहनत और पौधों के प्रति उनका समर्पण ही है कि उनके घर के सामने का यह छोटा सा हिस्सा अब एक घने और सुंदर बगीचे का रूप ले चुका है, जिसकी देखभाल में वह किसी भी तरह की कोताही नहीं बरतते हैं।

## फलदार पेड़ों और यात्राओं की यादें
इस मिनी गार्डन की खूबी सिर्फ सजावटी पौधे ही नहीं हैं, बल्कि यहां कई प्रकार के उपयोगी फलदार पेड़ भी लहलहा रहे हैं। उनके इस बगीचे में सुपारी, आम, नारियल, बेल और अमरूद जैसे पेड़ भी अपनी मजबूत जड़ें जमा चुके हैं। सीमित जगह का ऐसा बेहतरीन इस्तेमाल शायद ही कहीं और देखने को मिले, जहां हर एक पौधे को करीने से जगह दी गई हो। इसके अलावा, अटल बिहारी मोहंती जब भी कभी किसी नई जगह की यात्रा पर जाते हैं, तो वहां से दो-तीन नए पौधे अपने साथ जरूर लेकर आते हैं। इस प्रकार उनके बगीचे में लगे कई पौधे उनकी अनगिनत यात्राओं की खूबसूरत यादों से भी जुड़े हुए हैं।

## सुकून का कोना और बैठने की विशेष व्यवस्था
बागवानी के इस सुंदर सफर को और ज्यादा खास बनाने के लिए उन्होंने अपने घर के बाहर एक बहुत ही आरामदायक सीटिंग एरिया भी तैयार किया है। इस शांत और हरियाली से भरपूर कोने में शाम के समय करीब 5 से 7 लोग एक साथ आराम से बैठ सकते हैं। प्रकृति की इस गोद में बैठकर चाय और कॉफी की चुस्कियां लेना तथा दोस्तों या परिवार के साथ अपने अनुभव साझा करना इस जगह को और भी जीवंत बना देता है। भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच यह कोना उन्हें और उनके पास आने वाले हर व्यक्ति को मानसिक सुकून का अहसास कराता है।

## सक्रिय जीवनशैली और खालीपन से दूरी
अपनी जीवनशैली के बारे में बात करते हुए अटल बिहारी मोहंती बताते हैं कि उन्हें अपने 24 घंटों का हर पल व्यस्त रखना बेहद पसंद है, क्योंकि खाली बैठना उनकी आदत में शुमार नहीं है। उनका यह मानना है कि लंबे समय तक निष्क्रिय या सुस्त बैठे रहने से शरीर की ऊर्जा कम होती है और सुस्ती घर कर जाती है। यही मुख्य कारण है कि वह अपने इस प्यारे बगीचे से बेहद गहरा लगाव रखते हैं और दिनभर की थकान के बावजूद इसके लिए वक्त निकाल ही लेते हैं। उनकी यह प्रेरक जीवन यात्रा यह साबित करती है कि इंसान अगर अपने समय का सदुपयोग करना सीख ले और अपने किसी भी शौक के प्रति समर्पित रहे, तो वह अपने आसपास के छोटे से दायरे को भी एक खूबसूरत और खुशहाल दुनिया में बदल सकता है।

## सवाल-जवाब

### 1. अटल बिहारी मोहंती कहां के रहने वाले हैं?
अटल बिहारी मोहंती जमशेदपुर के रहने वाले हैं।

### 2. वह कौन सी कंपनी में काम करते हैं?
वह टाटा स्टील में अपनी सेवाएं देते हैं।

### 3. उनके बगीचे में कुल कितने पौधे हैं?
उन्होंने अपने घर के आसपास 300 से अधिक पौधे और गमले लगाए हैं।

### 4. वह बगीचे की देखभाल के लिए प्रतिदिन कितना समय निकालते हैं?
वह अपनी ड्यूटी के बाद रोजाना 3 से 4 घंटे बगीचे की देखभाल में बिताते हैं।

### 5. उनके बगीचे में कौन-कौन से फलदार पेड़ लगे हैं?
उनके बगीचे में सुपारी, आम, नारियल, बेल और अमरूद जैसे फलदार पेड़ लगे हुए हैं।

## प्रेरणा और सबक
अटल बिहारी मोहंती की यह अनूठी कहानी हर उस व्यक्ति के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो समय की कमी का रोना रोता है। उनके इस सफर से कई महत्वपूर्ण सबक सीखे जा सकते हैं:

- **समय का सदुपयोग:** व्यस्त दिनचर्या और लंबी नौकरी के बावजूद अपने पसंद के कामों के लिए समय निकाला जा सकता है, बशर्ते इच्छाशक्ति मजबूत हो।
- **शौक के प्रति समर्पण:** किसी भी काम को सिर्फ ऊपरी तौर पर करने के बजाय उसमें पूरी मेहनत और व्यक्तिगत रुचि दिखाना सफलता की कुंजी है।
- **सीमित जगह का इस्तेमाल:** कम जगह या छोटे संसाधनों के होने के बावजूद सही योजना बनाकर बेहतरीन और खूबसूरत परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
- **सक्रिय जीवनशैली:** खाली बैठने या सुस्त रहने के बजाय किसी रचनात्मक गतिविधि में खुद को व्यस्त रखकर मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहा जा सकता है।

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