निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन: झारखंड हाईकोर्ट ने निरस्त की सी. ओरांव की उम्रकैद, अंग्रेजी में बयान दर्ज करना पड़ा भारी झारखंड हाईकोर्ट ने हत्या के एक मामले में उम्रकैद काट रहे सी. ओरांव को बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि आरोपी से अंग्रेजी में पूछताछ की गई थी, जिसे वह बिल्कुल नहीं समझता था। झारखंड हाईकोर्ट ने हत्या के मुकदमे में बड़ा फैसला सुनाते हुए निचली अदालत द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा को रद्द कर दिया है। अदालत ने आरोपी सी. ओरांव को सभी आरोपों से बरी करते हुए स्पष्ट किया कि जिस व्यक्ति को अंग्रेजी भाषा का ज्ञान ही नहीं था, उससे उसी भाषा में सवाल पूछना और बयान दर्ज करना उसके निष्पक्ष बचाव के संवैधानिक अधिकार का हनन है। संवैधानिक अधिकारों का हनन और हाईकोर्ट की टिप्पणी न्यायमूर्ति आनंद सेन और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने सी. ओरांव की आपराधिक याचिका पर विचार करते हुए यह फैसला सुनाया। उच्च न्यायालय ने माना कि जब आरोपी उस भाषा को समझने में पूरी तरह असमर्थ था जिसमें उससे पूछताछ की जा रही थी, तब इस प्रकार दर्ज किए गए बयान केवल एक दिखावा मात्र रह जाते हैं। भारतीय संविधान के तहत प्रत्येक नागरिक को निष्पक्ष सुनवाई और अपना पक्ष सही ढंग से रखने का मौलिक अधिकार प्राप्त है। ऐसे में आरोपी की भाषा समझे बिना दर्ज किए गए उत्तर उसके बचाव के अधिकार को गंभीर नुकसान पहुँचाते हैं। 2009 का हत्या मामला और निचली अदालत का फैसला मामले के तथ्यों के अनुसार, सी. ओरांव पर 26 फरवरी 2009 को परमेश्वरी देवी की हत्या करने का आरोप लगा था। अभियोजन पक्ष का दावा था कि जमीन पर कब्जे को लेकर हुए आपसी विवाद के बाद आरोपी ने परमेश्वरी देवी को कुएं में डुबोकर मार डाला था। इस मामले की सुनवाई करते हुए रांची की निचली अदालत ने 25 अप्रैल 2018 को सी. ओरांव को हत्या का दोषी ठहराया था और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही अदालत ने उस पर 20 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया था। इस फैसले से व्यथित होकर आरोपी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जांच और बयान दर्ज करने की प्रक्रिया पर उठे सवाल उच्च न्यायालय में अपील पर सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि जांच अधिकारियों और अभियोजन पक्ष ने आरोपी से सारे सवाल अंग्रेजी भाषा में पूछे थे। रिकॉर्ड की पड़ताल से पता चला कि निचली अदालत ने भी उसके बयानों को अंग्रेजी में ही लिपिबद्ध किया था। इसके बाद अनपढ़ या अंग्रेजी से अनजान आरोपी से उन कागजातों पर अंगूठे का निशान ले लिया गया था। खंडपीठ ने इस पूरी प्रक्रिया पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह तरीका कानूनी मानदंडों के अनुकूल नहीं है और इससे आरोपी को अपनी बात सही तरीके से रखने का अवसर नहीं मिला। नतीजतन, उच्च न्यायालय ने दोषसिद्धि के आदेश को खारिज करते हुए आरोपी को तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया। इसका आप पर असर यह फैसला कानूनी प्रक्रिया और आरोपी व्यक्तियों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा के मामले में एक बड़ा नज़ीर प्रस्तुत करता है। • भारत में: देश भर की अदालतों और पुलिस प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि आरोपी से पूछताछ उसकी अपनी भाषा में हो। इससे भाषाई अज्ञानता के कारण किसी नागरिक को गलत सजा मिलने का जोखिम कम होता है। • झारखंड में: राज्य की निचली अदालतों में बयान दर्ज करने के तौर-तरीकों में पारदर्शिता आएगी। पुलिस अधिकारियों को क्षेत्रीय या स्थानीय भाषाओं में प्रक्रिया पूरी करने के सख्त निर्देश लागू करने पड़ेंगे। ऐसा क्यों हुआ झारखंड हाईकोर्ट ने सी. ओरांव को इसलिए बरी किया क्योंकि उसकी गिरफ्तारी और ट्रायल के दौरान कानूनी प्रक्रियाओं का सही पालन नहीं हुआ था। • भाषा की समझ न होना: आरोपी से अंग्रेजी में सवाल पूछे गए और उसके जवाब भी उसी भाषा में दर्ज किए गए, जबकि वह अंग्रेजी नहीं समझता था। • संवैधानिक अधिकार का हनन: भारत का संविधान हर आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई और अपना पक्ष सही तरीके से रखने की गारंटी देता है, जो इस मामले में प्रभावित हुआ। • अंगूठे का निशान लेना: समझ में न आने वाली भाषा के बयानों पर आरोपी से अंगूठे का निशान लगवाना केवल एक औपचारिक दिखावा माना गया। सवाल-जवाब 1. झारखंड हाईकोर्ट ने सी. ओरांव को किस आधार पर बरी किया? अदालत ने बरी किया क्योंकि आरोपी से अंग्रेजी में पूछताछ की गई थी और बयान भी उसी भाषा में दर्ज किए गए थे, जिसे वह समझता नहीं था। 2. निचली अदालत ने सी. ओरांव को क्या सजा सुनाई थी? रांची की निचली अदालत ने 25 अप्रैल 2018 को सी. ओरांव को उम्रकैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। 3. यह मामला किस घटना से जुड़ा हुआ था? यह मामला 26 फरवरी 2009 को जमीन विवाद में परमेश्वरी देवी की कुएं में डुबोकर हत्या करने के आरोप से जुड़ा था। 4. इस याचिका पर किन जजों की पीठ ने फैसला सुनाया? इस याचिका पर न्यायमूर्ति आनंद सेन और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने फैसला सुनाया। https://trendkia.com/jharkhand/bhasha-ki-badha-bani-nishpaksha-sunavai-men-rora-jharkhand-high-court-ne-c-oraon-ko-umrakaida-se-kiya-bari-52684 TrendKia — Har trend, sabse pehle.