# बिना तेल के नमक में भुनकर बनता जमशेदपुर का यह भुजा, सिर्फ 20 रुपये में 100 ग्राम

> जमशेदपुर के काशीडीह चौक इलाके में दस अनाजों से बना एक हल्का भुजा शाम के नाश्ते का नया पसंदीदा बन गया है, जिसे बिना तेल के सिर्फ गर्म नमक में भूनकर तैयार किया जाता है।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-09-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/bina-tela-ke-namaka-men-bhunakara-banata-jamshedpur-ka-yaha-bhuja-sirpha-20-rupaye-men-100-grama-28433 · **Language:** Hindi
**Tags:** जमशेदपुर, काशीडीह चौक, चूड़ा भुजा, स्ट्रीट फूड, झारखंड न्यूज़, बिना तेल नाश्ता

जमशेदपुर के काशीडीह चौक इलाके में शाम होते ही एक खास तरह का भुजा बिकने का ठेला ग्राहकों से घिर जाता है। यह आम भुजा नहीं बल्कि दस अलग-अलग अनाजों को मिलाकर तैयार किया गया मिश्रण है, जो हल्का भी है और स्वाद में भी अलग।

## दस अनाजों का अनोखा मेल
इस भुजा को खास बनाती है इसमें डाली जाने वाली सामग्री। चूड़ा, बादाम, चना, कॉर्न फ्लेक्स, स्वीट कॉर्न और चावल का चूड़ा जैसी करीब दस चीजें इसमें मिलाई जाती हैं। हर निवाले में अलग बनावट और स्वाद मिलता है, जो इसे बाजार में मिलने वाले सामान्य भुजा से अलग खड़ा करता है।

## तेल नहीं, गर्म नमक से भुनाई
ठेला लगाने वाले सोनू कुमार गुप्ता के मुताबिक, इसे बनाने की तरकीब सीधी लेकिन दिलचस्प है। पहले कड़ाही में नमक को खूब गर्म किया जाता है, उसके बाद उसी तपते नमक में चूड़ा और बाकी सामग्री डालकर भूनी जाती है। सोनू कुमार गुप्ता के मुताबिक, गर्म नमक में भूनने से तेल की जरूरत ही खत्म हो जाती है, यही वजह है कि भुजा कुरकुरा तो रहता है लेकिन उसमें चिकनाई नहीं आती।

## चाय के साथ हल्के नाश्ते का विकल्प
शाम को चाय के साथ कुछ खाने का मन हो तो अक्सर लोग समोसे या पकौड़े की तरफ भागते हैं, लेकिन जिन्हें तला-भुना पसंद नहीं, उनके लिए यह भुजा राहत जैसा है। चना और बादाम इसमें प्रोटीन जोड़ते हैं, जबकि कॉर्न फ्लेक्स और स्वीट कॉर्न कुरकुरापन और मिठास का हल्का टच देते हैं। यही वजह है कि इसे एक संतुलित शाम के नाश्ते के तौर पर देखा जाने लगा है।

## जेब पर हल्का, स्वाद में भारी
दाम की बात करें तो यह भुजा 200 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिकता है। ज्यादातर ग्राहक एक बार में 100 ग्राम खरीदते हैं, जिसकी कीमत महज 20 रुपये पड़ती है। इतने कम दाम में एक अलग तरह का पौष्टिक नाश्ता मिल जाना ही इसे स्थानीय लोगों के बीच पसंदीदा बना रहा है।

ग्राहक आसिम पात्रा का कहना है कि इस भुजा की पहचान सिर्फ इसके स्वाद से नहीं बल्कि इसे बनाने के तरीके और उसमें शामिल विविध सामग्री से भी बनती है। उनके मुताबिक, यही बात इसे रोज मिलने वाले समोसे-पकौड़े जैसे नाश्तों से अलग बनाती है। काशीडीह चौक के आसपास रहने वाले लोगों के लिए अब शाम की चाय के साथ यह भुजा एक नई और चर्चित पसंद बनता जा रहा है।

## इसका आप पर असर
चाय के साथ हल्का, बिना तेल वाला नाश्ता चाहने वालों के लिए यह एक किफायती और आसानी से मिलने वाला विकल्प है।

- **भारत में:** देशभर में बढ़ते सेहत के प्रति रुझान के बीच बिना तेल में भुने स्नैक्स की मांग बढ़ रही है, ऐसे स्थानीय प्रयोग शहर-दर-शहर नए विकल्प खड़े कर सकते हैं। इससे छोटे स्ट्रीट वेंडरों को भी नए आइडिया अपनाने का मौका मिलता है।
- **जमशेदपुर में:** काशीडीह चौक के आसपास रहने वालों को अब शाम की चाय के साथ समोसे-पकौड़े के अलावा एक हल्का और सस्ता विकल्प मिल गया है। महज 20 रुपये में 100 ग्राम भुजा मिलने से यह हर आय वर्ग के लिए सुलभ बना हुआ है।
- **जेब पर असर:** 200 रुपये प्रति किलो की दर होने के बावजूद छोटी मात्रा में खरीदारी की सुविधा इसे रोजाना के नाश्ते के लिए किफायती बनाती है। ग्राहक जरूरत भर की मात्रा खरीदकर पैसे और खाना दोनों बचा सकते हैं।
- **सेहत पर असर:** चना और बादाम से मिलने वाला प्रोटीन और तेल न होने से घटी चिकनाई, दोनों मिलकर इसे रोज के तले-भुने नाश्तों से बेहतर विकल्प बनाते हैं। जो लोग वजन या दिल की सेहत को लेकर सतर्क हैं, वे इसे आजमा सकते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. यह भुजा कहां मिलता है?
यह जमशेदपुर के काशीडीह चौक इलाके के पास एक ठेले पर मिलता है।

### 2. इसे बनाने में कौन-कौन सी सामग्री इस्तेमाल होती है?
इसमें चूड़ा, बादाम, चना, कॉर्न फ्लेक्स, स्वीट कॉर्न और चावल के चूड़े जैसी करीब दस चीजें मिलाई जाती हैं।

### 3. इसे तेल में तला जाता है?
नहीं, इसे तेल की जगह पहले खूब गर्म किए गए नमक की मदद से भूना जाता है।

### 4. इसकी कीमत कितनी है?
यह 200 रुपये प्रति किलो बिकता है, और ज्यादातर लोग 20 रुपये में 100 ग्राम खरीदते हैं।

### 5. इसे कौन बेचता है?
ठेले पर इसे सोनू कुमार गुप्ता बेचते हैं।

### 6. ग्राहकों को यह भुजा क्यों पसंद आ रहा है?
ग्राहक आसिम पात्रा के मुताबिक इसकी बनाने की खास तरकीब और इसमें शामिल विविध सामग्री इसे रोज के समोसे-पकौड़े से अलग बनाती है।

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