# बोकारो का अनोखा प्राकृतिक जलस्रोत, गर्मियों में देता है फ्रिज जैसा ठंडा और सर्दियों में गर्म पानी

> झारखंड के बोकारो जिले के बेरमो प्रखंड के आंगवली गांव में एक रहस्यमयी जलस्रोत है, जिससे साल के बारह महीने लगातार पानी बहता है। मौसम के हिसाब से इस पानी का तापमान बदलता रहता है, जो ग्रामीणों के बीच कौतूहल का विषय है।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-09-28 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/bokaro-ka-anokha-prakritika-jalasrota-garmiyon-men-deta-hai-phrija-jaisa-thnda-aura-sardiyon-men-garma-pani-39872 · **Language:** Hindi
**Tags:** बोकारो न्यूज, झारखंड जलस्रोत, आंगवली गांव, प्राकृतिक झरना, बेरमो बोकारो

झारखंड के बोकारो जिले के बेरमो प्रखंड के अंतर्गत आने वाले आंगवली गांव में प्रकृति का एक ऐसा अनूठा चमत्कार देखने को मिलता है, जो हर किसी को हैरान कर देता है। गांव के बीचों-बीच स्थित यह प्राकृतिक जलस्रोत स्थानीय निवासियों के बीच लंबे समय से चर्चा और कौतूहल का मुख्य केंद्र बना हुआ है। इस जलस्रोत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां से साल के 12 महीने लगातार पानी का प्रवाह होता रहता है और यह कभी नहीं सूखता। इसके अलावा, मौसम में होने वाले बदलावों का सीधा असर इस पानी के तापमान पर भी देखने को मिलता है, जिससे यह स्थानीय लोगों के लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं है।

सर्दियों के दिनों में इस जलस्रोत से निकलने वाला पानी हल्का गर्म महसूस होता है, जो ठंड के मौसम में काफी राहत देता है। वहीं दूसरी ओर, जब गर्मी का मौसम अपने चरम पर होता है और चिलचिलाती धूप पड़ती है, तब यही पानी बिल्कुल फ्रिज की तरह ठंडा हो जाता है। गांव में पेयजल की अन्य आधुनिक और वैकल्पिक सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद, स्थानीय लोग आज भी पीने के लिए इसी प्राकृतिक स्रोत के पानी को प्राथमिकता देते हैं। ग्रामीणों का ऐसा मानना और अनुभव है कि इस प्राकृतिक जल का स्वाद सामान्य नलों या बोरिंग के पानी से काफी अलग और बेहतर है। यही मुख्य वजह है कि आज भी गांव के तमाम लोग रोजाना यहां बर्तन लेकर पहुंचते हैं और पीने के लिए पानी भरकर अपने घरों को ले जाते हैं।

गांव के पुराने बाशिंदे कुलदीप रजवार और अर्जुन नायक बताते हैं कि यह जलस्रोत बहुत प्राचीन है और उन्होंने अपने बचपन के दिनों से लेकर आज तक इस स्थान से पानी को लगातार बहते हुए देखा है। उनके अनुसार, गुजरते वक्त के साथ भले ही आंगवली गांव की सूरत काफी बदल गई हो और आधुनिकता ने पांव पसार लिए हों, लेकिन इस ऐतिहासिक जलस्रोत के बहने की रफ्तार और उसकी निरंतरता पर कभी कोई फर्क नहीं पड़ा। यह बिना रुके और बिना थके लगातार अपनी धारा बहा रहा है, जो इसे इलाके का एक बेहद खास और विशिष्ट स्थान बनाता है.

क्षेत्रीय स्तर पर इस अनोखे जलस्रोत को अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है, जिनमें मुख्य रूप से 'जरक का पानी' और 'डायन गड़ा' जैसे नाम शामिल हैं। इस जलस्रोत के साथ एक दिलचस्प स्थानीय लोककथा भी गहराई से जुड़ी हुई है, जिसे गांव के बुजुर्ग अपनी आने वाली पीढ़ियों को बरसों से सुनाते आ रहे हैं। ग्रामीणों के बीच प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में इस पूरे इलाके में किसी कथित डायन को लेकर काफी डर और दहशत का माहौल हुआ करता था। इस लोककथा में यह विवरण मिलता है कि बाद में एक राजा की मदद से उस कथित शक्ति का अंत किया गया था और उसके तुरंत बाद इसी विशेष स्थान से पानी की धारा फूट पड़ी थी। हालांकि, स्थानीय प्रशासन या इतिहासकारों की तरफ से इस कहानी की कभी कोई आधिकारिक या ऐतिहासिक पुष्टि नहीं की गई है और इसे केवल जनमानस में व्याप्त एक अंधविश्वास या किंवदंती माना जाता है।

भौगोलिक दृष्टिकोण से भी इस जलस्रोत की स्थिति काफी अनोखी है। गांव की एक अन्य स्थानीय निवासी काली रजवार बताती हैं कि यह जलस्रोत आंगवली गांव के सबसे ऊंचे हिस्से पर स्थित है, जबकि इसके आस-पास के भूभाग में कोई अन्य बड़ा जलस्तर या जलस्रोत मौजूद नहीं है। ऊंचाई पर होने के बावजूद पानी का इस तरह लगातार निकलना लोगों की जिज्ञासा को और अधिक बढ़ा देता है। भीषण गर्मी के मौसम में जब चारों तरफ त्राहिमाम मचा होता है, तब इस ऊंचाई पर स्थित स्रोत से मिलने वाला शीतल जल ग्रामीणों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं होता है।

आज के समय में यह प्राकृतिक जलस्रोत केवल पानी की जरूरतों को पूरा करने का माध्यम भर नहीं रह गया है, बल्कि यह आंगवली गांव की एक अनूठी और विशिष्ट पहचान बन चुका है। बारह महीने लगातार पानी का बहना और मौसम के हिसाब से इसके तापमान का बदलना इस जगह को हमेशा चर्चा में बनाए रखता है। दूर-दूर से आने वाले लोग भी इस रहस्यमयी जलस्रोत को देखने और इसके पानी का अनुभव करने के लिए उत्सुक रहते हैं, जिससे यह बोकारो जिले का एक महत्वपूर्ण लोक-बिंदु बन गया है।

## इसका आप पर असर
यह प्राकृतिक जलस्रोत स्थानीय निवासियों की दैनिक जीवनशैली और पेयजल आवश्यकताओं को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।

- **बोकारो में:** आंगवली गांव और उसके आस-पास के ग्रामीण पीने के पानी के लिए पूरी तरह इसी प्राकृतिक स्रोत पर निर्भर हैं, जिससे उन्हें गर्मियों में ठंडा और सर्दियों में गर्म पानी बिना किसी बिजली के खर्च के मिलता है।
- **भारत में:** देश के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में मौजूद ऐसे पारंपरिक और प्राकृतिक जलस्रोत ग्रामीण जल सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा उदाहरण पेश करते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
वैज्ञानिक और भौगोलिक दृष्टिकोण से भूमिगत जल स्रोतों का तापमान भू-गर्भीय परतों और गहराई के कारण मौसम के साथ अलग अनुभव होता है।

- **भूगर्भीय स्थिति:** जलस्रोत जमीन के काफी भीतर से आते हैं, जहां का तापमान बाहरी मौसम के मुकाबले साल भर स्थिर रहता है, जिससे सर्दियों में पानी गर्म और गर्मियों में ठंडा प्रतीत होता है।
- **स्थानीय मान्यताएं:** इस स्थान से जुड़ी पुरानी लोककथाएं और किंवदंतियां पीढ़ियों से चली आ रही हैं, जो इस भौगोलिकीय घटना को स्थानीय संस्कृति से जोड़ती हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. यह अनोखा जलस्रोत कहाँ स्थित है?
यह जलस्रोत झारखंड के बोकारो जिले के बेरमो प्रखंड के आंगवली गांव में स्थित है।

### 2. इस जलस्रोत की मुख्य विशेषता क्या है?
इस जलस्रोत से साल के 12 महीने लगातार पानी बहता है और मौसम के अनुसार इसका तापमान बदलता रहता है।

### 3. सर्दियों और गर्मियों में पानी का तापमान कैसा रहता है?
सर्दियों के दौरान इस जलस्रोत का पानी गर्म महसूस होता है, जबकि गर्मियों में यह फ्रिज की तरह ठंडा रहता है।

### 4. ग्रामीण इस पानी का उपयोग किस लिए करते हैं?
गांव के लोग पीने के पानी के लिए इसी प्राकृतिक स्रोत का उपयोग करना पसंद करते हैं।

### 5. इस जलस्रोत को किन अन्य स्थानीय नामों से जाना जाता है?
स्थानीय स्तर पर इसे 'जरक का पानी' और 'डायन गड़ा' के नाम से भी पुकारा जाता है।

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