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  "type": "article",
  "title": "बोकारो की आभा भारती ने पति के निधन के बाद शुरू किया सफर, अब तक 3000 महिलाओं को सिखाई ड्राइविंग",
  "summary": "बोकारो की आभा भारती ने साल 2011 में महज एक गाड़ी से महिला मोटर ट्रेनिंग सेंटर की शुरुआत की थी। पति के निधन के बाद आई मुश्किलों से जूझते हुए उन्होंने अब तक तीन हजार से ज्यादा महिलाओं को कार चलाने में आत्मनिर्भर बनाया है।",
  "content": "महिला मोटर ट्रेनिंग सेंटर की संचालिका आभा भारती ने एक विशेष बातचीत में साझा किया कि उन्होंने वर्ष 2011 में केवल एक वाहन के साथ इस प्रशिक्षण केंद्र की नींव रखी थी। सफर की शुरुआत बिल्कुल भी सरल नहीं थी, किंतु समय के साथ महिलाओं का विश्वास लगातार मजबूत होता चला गया। परिणाम यह रहा कि आज उनके संस्थान के पास कुल तीन गाड़ियां और दो महिला प्रशिक्षक उपलब्ध हैं। इन वाहनों के माध्यम से बोकारो के विभिन्न इलाकों में महिलाओं को ड्राइविंग का हुनर सिखाया जाता है।\n\nसंघर्ष से भरा जीवन और केंद्र की प्रेरणा\nआभा भारती के लिए यह पूरा सफर चुनौतियों और संघर्षों से पूरी तरह घिरा रहा है। वर्ष 2003 में उनके पति का निधन हो गया था, जिसके बाद घर-परिवार और बच्चों की तमाम जिम्मेदारियों का पूरा बोझ उनके कंधों पर आ गया। इसी दौर में उन्हें फार्मास्यूटिकल क्षेत्र से जुड़े कार्यों के सिलसिले में अक्सर वाहन की आवश्यकता महसूस होती थी। हालांकि, खुद कार चलाना न आने के कारण उन्हें तमाम तरह की कठिनाइयों और दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।\n\nविचार से लेकर सफलता तक का सफर\nइसी व्यक्तिगत अनुभव ने उनके भीतर एक नई सोच को जन्म दिया कि यदि महिलाओं को व्यवस्थित तरीके से वाहन चलाना सिखाया जाए, तो वे अपनी दैनिक आवश्यकताओं के लिए किसी अन्य व्यक्ति पर निर्भर नहीं रहेंगी। इसी दृढ़ संकल्प के साथ उन्होंने महिलाओं को कार चलाना सिखाने का बीड़ा उठाया और आज वह कुल तीन हजार महिलाओं को प्रशिक्षित कर चुकी हैं।\n\nप्रशिक्षण की कार्यप्रणाली और चौदह दिन का पाठ्यक्रम\nआभा भारती के मोटर ट्रेनिंग सेंटर में महिलाओं को कुल चौदह दिनों का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम कराया जाता है। इस अवधि में उन्हें वाहन के बुनियादी संचालन से लेकर सड़क पर पूरी सुरक्षा के साथ गाड़ी चलाने के सभी तौर-तरीके सिखाए जाते हैं। महिला प्रशिक्षकों द्वारा मुख्य सड़कों पर व्यावहारिक अभ्यास यानी प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी दिलवाई जाती है और कोर्स पूरा होने के बाद प्रमाण पत्र भी प्रदान किया जाता है।\n\nभविष्य का लक्ष्य और महिलाओं की प्रतिक्रिया\nआभा भारती का आगामी उद्देश्य बोकारो की अधिक से अधिक महिलाओं को आर्थिक और व्यावहारिक रूप से स्वावलंबी बनाना है। वह चाहती हैं कि महिलाएं अपनी आवाजाही और जरूरतों के लिए किसी पर आश्रित न रहें, बल्कि खुद गाड़ी चलाना सीखकर अपनी शर्तों पर सफर करने में सक्षम बनें। वहीं, सेंटर में प्रशिक्षण ले रही राजूल शैली ने बताया कि यहां ट्रेनर ड्राइविंग की छोटी से छोटी बारीकियों को बहुत बेहतरीन ढंग से समझाती हैं। शुरुआत में मुख्य मार्ग पर गाड़ी चलाने को लेकर मन में भय रहता है, मगर निरंतर अभ्यास से आत्मविश्वास स्वतः बढ़ने लगता है.\n\nइसका आप पर असर\nयह पहल बोकारो की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और परिवहन के मामले में किसी पर भी निर्भर न रहने की दिशा में एक बड़ा व्यावहारिक कदम है।\n\n• भारत में: देश भर में महिलाओं के नेतृत्व वाले ऐसे स्थानीय प्रयास महिलाओं में गतिशीलता और व्यावसायिक कौशल को बढ़ावा देते हैं।\n• बोकारो में: स्थानीय महिलाओं और गृहिणियों को बेहद कम समय में पेशेवर ड्राइविंग सीखने और सुरक्षित यात्रा करने का सीधा अवसर मिल रहा है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nइस पहल की पृष्ठभूमि व्यक्तिगत संघर्ष और दैनिक जीवन की वास्तविक जरूरतों से जुड़ी हुई है।\n\n• व्यक्तिगत कठिनाई: वर्ष 2003 में पति के निधन के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी आभा भारती पर आ गई और फार्मास्यूटिकल कार्य के दौरान गाड़ी न चलाना एक बड़ी बाधा साबित हुआ।\n• निर्भरता खत्म करने की सोच: व्यक्तिगत समस्याओं से उपजे अनुभव ने ही यह प्रेरणा दी कि यदि अन्य महिलाओं को प्रशिक्षित किया जाए, तो वे कभी असहाय महसूस नहीं करेंगी।\n• विश्वास का विस्तार: वर्ष 2011 में एक गाड़ी से शुरू हुआ यह सफर लगातार बढ़ते महिला भरोसे और सकारात्मक परिणामों के कारण आज विस्तार ले चुका है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. आभा भारती ने मोटर ट्रेनिंग सेंटर की शुरुआत कब की थी?\nआभा भारती ने वर्ष 2011 में एक गाड़ी के साथ अपने मोटर ट्रेनिंग सेंटर की शुरुआत की थी।\n\n2. इस सेंटर में अब तक कितनी महिलाओं को ट्रेनिंग दी जा चुकी है?\nइस सेंटर के जरिए अब तक कुल 3,000 महिलाओं को कार चलाने की ट्रेनिंग दी जा चुकी है।\n\n3. ड्राइविंग ट्रेनिंग का कुल पाठ्यक्रम कितने दिनों का होता है?\nइस सेंटर में महिलाओं को 14 दिनों की विशेष ड्राइविंग ट्रेनिंग दी जाती है।\n\n4. वर्तमान में सेंटर के पास कितने वाहन और ट्रेनर हैं?\nवर्तमान में सेंटर के पास कुल तीन गाड़ियां और दो महिला ट्रेनर उपलब्ध हैं।\n\nप्रेरणा और सबक\nआभा भारती का यह सफर संघर्षों के बीच सफलता हासिल करने की एक मिसाल पेश करता है।\n\n• व्यक्तिगत संकट को अवसर बनाएं: जीवन में आने वाली अचानक आपदाओं और कठिनाइयों को अपनी कमजोरी बनाने के बजाय उन्हें एक नई दिशा की प्रेरणा बनाएं।\n• आत्मनिर्भरता पर दें जोर: महिलाओं को आर्थिक और व्यावहारिक रूप से मजबूत बनाना समाज में उनकी स्थिति को पूरी तरह बदल सकता है।\n• निरंतर अभ्यास से बढ़ता है आत्मविश्वास: किसी भी नए कौशल को सीखने में शुरुआती डर स्वाभाविक है, जिसे केवल नियमित और निरंतर अभ्यास से ही दूर किया जा सकता है।",
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  "category": "झारखंड",
  "publishedAt": "2026-09-10",
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