बोकारो की रजनी ने आंवला कैंडी से संवारी किस्मत, मां के नाम को ब्रांड बनाकर खड़ा किया कारोबार बोकारो की रजनी शर्मा ने नौकरी छोड़कर आंवला कैंडी और बेल कैंडी का बिजनेस शुरू किया। तीन साल के कड़े संघर्ष और मां के आशीर्वाद से उन्होंने अपनी एक खास पहचान बनाई है। झारखंड के बोकारो जिले की रहने वाली रजनी शर्मा ने अपनी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर एक सफल कारोबारी के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई है। पिछले तीन वर्षों से वह आंवला कैंडी और अन्य डिहाइड्रेटेड उत्पादों के निर्माण से जुड़ा यह व्यवसाय बेहद सफलता के साथ चला रही हैं। इस मुकाम तक पहुंचने की उनकी यह प्रेरणादायक यात्रा इस बात का प्रमाण है कि लगन हो तो कोई भी व्यक्ति सीमित संसाधनों के साथ भी अपने सपनों को पंख दे सकता है। हैदराबाद की नौकरी से बिजनेस तक का सफर रजनी के मन में अपना खुद का व्यवसाय खड़ा करने का विचार तब आया जब वह हैदराबाद में कॉर्पोरेट नौकरी कर रही थीं। उन्होंने वर्ष 2004 में अपनी एमबीए की शिक्षा पूरी की थी, जिसके बाद उन्होंने सिप्ला और बजाज आलियांज जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में अपनी सेवाएं दीं। शादी के बाद उन्हें हैदराबाद के अलावा अमेरिका में भी रहकर नौकरी करने का अनुभव मिला। हालांकि कॉर्पोरेट करियर में सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन उनका झुकाव हमेशा से अपने खुद के उद्यम की ओर ही था। वर्ष 2019 में भारत वापसी और नए काम की शुरुआत जब वह वर्ष 2019 में वापस भारत लौटीं, तो उन्होंने अपने इस बिजनेस के सपने को जमीन पर उतारने के लिए गंभीर प्रयास शुरू कर दिए। वह एक व्यावसायिक पृष्ठभूमि वाले परिवार से ताल्लुक रखती हैं, जिसने उन्हें हमेशा से ही व्यापार की बारीकियों को समझने में मदद की। इसी पारिवारिक पृष्ठभूमि और खुद कुछ अलग करने की चाहत ने उन्हें डिहाइड्रेटेड फलों के क्षेत्र में उतरने के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में उन्होंने आंवला कैंडी के साथ-साथ बेल कैंडी और आम पापड़ जैसे स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद तैयार करने का काम शुरू किया। मां को समर्पित किया अपना ब्रांड और लोगो रजनी अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपनी मां इंदु देवी शर्मा को देती हैं। उनका मानना है कि उनकी मां का आशीर्वाद और हर कदम पर मिला अटूट समर्थन ही उनकी इस सफलता की सबसे बड़ी ताकत रहा है। अपनी मां के प्रति इसी अगाध सम्मान और कृतज्ञता को दर्शाने के लिए उन्होंने अपने ब्रांड के लोगो में अपनी मां की तस्वीर को प्रमुखता से शामिल किया है। उनके लिए यह केवल एक व्यावसायिक उपक्रम नहीं है, बल्कि मां के त्याग और आशीर्वाद के प्रति आभार व्यक्त करने का एक अनूठा माध्यम भी है। मौसम की चुनौतियां और भविष्य की योजनाएं इस कारोबार में आगे बढ़ते हुए उन्हें कई बार मौसम से जुड़ी अनिश्चितताओं का भी सामना करना पड़ा है। चूंकि यह पूरा काम मौसमी फलों और सब्जियों पर आधारित है, इसलिए अत्यधिक गर्मी और अनियमित बारिश जैसी मौसमी स्थितियां सीधे तौर पर कच्चे माल की उपलब्धता और बाजार को प्रभावित करती हैं। इस तरह के उतार-चढ़ाव के कारण उत्पादन को व्यवस्थित रखना और योजनाएं बनाना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसके बावजूद वह इन बाधाओं से पार पाते हुए अपने काम को लगातार आगे बढ़ा रही हैं और आने वाले समय में अपने उत्पादों की पहुंच को देश के कोने-कोने तक विस्तार देना चाहती हैं। इसका आप पर असर यह सफलता की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो नौकरी छोड़कर अपना खुद का छोटा उद्यम शुरू करना चाहते हैं। • झारखंड में: स्थानीय स्तर पर कृषि और फलों आधारित प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। • कम पूंजी: व्यवसाय शुरू करने के लिए हमेशा भारी-भरकम निवेश की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि सही योजना और मेहनत मायने रखती है। • घरेलू बाजार: इस तरह के छोटे ब्रांड देश के भीतर स्थानीय उत्पादों की मांग और आपूर्ति को संतुलित करने में मदद करते हैं। • मौसम का प्रभाव: मौसमी फलों पर आधारित व्यवसायों में कच्चे माल की उपलब्धता और जलवायु परिवर्तन के जोखिम का हमेशा ध्यान रखना पड़ता है। ऐसा क्यों हुआ यह व्यवसाय इस बात का उदाहरण है कि कैसे पारंपरिक खाद्य उत्पादों और फलों के प्रसंस्करण के जरिए आत्मनिर्भर बना जा सकता है। कॉर्पोरेट क्षेत्र में लंबा अनुभव रखने के बाद पारिवारिक पृष्ठभूमि और पैतृक प्रेरणा ने उन्हें यह कदम उठाने के लिए प्रेरित किया। • पारिवारिक पृष्ठभूमि: कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखने के कारण व्यापारिक सूझबूझ और जोखिम उठाने की क्षमता उन्हें विरासत में मिली। • विदेश और देश का अनुभव: हैदराबाद और अमेरिका जैसे स्थानों पर काम करने के दौरान कॉर्पोरेट प्रबंधन की जो सीख मिली, उसने व्यवसाय को व्यवस्थित करने में सहायता की। • बाजार की मांग: स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के बीच आंवला और बेल जैसे डिहाइड्रेटेड उत्पादों की लगातार बढ़ती मांग ने इस दिशा में काम करने का अवसर दिया। सवाल-जवाब 1. रजनी शर्मा ने अपना बिजनेस कितने साल पहले शुरू किया था? रजनी शर्मा पिछले 3 वर्षों से इस कारोबार को सफलतापूर्वक चला रही हैं। 2. व्यवसाय शुरू करने का विचार उनके मन में कहां आया था? व्यवसाय शुरू करने का विचार उनके मन में हैदराबाद में नौकरी के दौरान आया था। 3. उन्होंने अपनी एमबीए की पढ़ाई कब पूरी की थी? उन्होंने वर्ष 2004 में अपनी एमबीए की पढ़ाई पूरी की थी। 4. भारत लौटने से पहले उन्होंने किन कंपनियों में काम किया था? भारत लौटने से पहले उन्होंने सिप्ला और बजाज आलियांज जैसी कंपनियों में काम किया था और अमेरिका में भी नौकरी की थी। 5. वह अपने कारोबार के तहत मुख्य रूप से क्या तैयार करती हैं? वह मुख्य रूप से आंवला कैंडी, बेल कैंडी और आम पापड़ जैसे डिहाइड्रेटेड फल उत्पाद तैयार करती हैं। 6. वह अपनी सफलता का श्रेय किसे देती हैं? वह अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां इंदु देवी शर्मा को देती हैं। 7. उन्होंने अपने ब्रांड के लोगो में किसकी तस्वीर को जगह दी है? उन्होंने अपने ब्रांड के लोगो में अपनी मां की तस्वीर को जगह दी है। 8. इस कारोबार में मुख्य रूप से किस तरह की चुनौतियां आती हैं? अत्यधिक गर्मी और अनियमित बारिश जैसी मौसमी परिस्थितियां फलों की उपलब्धता को प्रभावित करती हैं, जिससे उत्पादन में चुनौतियां आती हैं। प्रेरणा और सबक रजनी शर्मा की यह सफलता दर्शाती है कि मजबूत इच्छाशक्ति और स्पष्ट विजन के साथ कोई भी व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में मुकाम हासिल कर सकता है। • छोटे स्तर से शुरुआत: व्यवसाय को स्थापित करने के लिए बड़े फंड की नहीं, बल्कि सही दिशा में छोटे कदमों की जरूरत होती है। • पारिवारिक सहयोग: अपनों का समर्थन और आशीर्वाद कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने की सबसे बड़ी ऊर्जा बनता है। • संकल्प और मेहनत: मौसम या संसाधनों की कमी जैसी बाधाएं आने के बावजूद निरंतर प्रयास जारी रखना सफलता की कुंजी है। https://trendkia.com/jharkhand/bokaro-ki-rajni-ne-amla-candy-se-snvari-kismata-man-ke-nama-ko-branda-banakara-khara-kiya-karobara-50558 TrendKia — Har trend, sabse pehle.