# बोकारो में मक्के की पैदावार बचाने के उपाय, अजय तिर्की ने बताए कीट और रोगों से सुरक्षा के तरीके

> मानसून के अंत में मक्के की फसल पर डाउनी मिल्ड्यू, पत्तियों का झुलसा रोग, तना छेदक और फॉल आर्मीवर्म का खतरा बढ़ जाता है। कृषि विशेषज्ञ अजय तिर्की ने इन बीमारियों के लक्षण और सही दवाओं के छिड़काव की विस्तृत जानकारी दी है।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-08-29 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/bokaro-men-makke-ki-paidavara-bachane-ke-upaya-ajay-tirkey-ne-batae-kita-aura-rogon-se-suraksha-ke-tarike-23977 · **Language:** Hindi
**Tags:** मक्का की खेती, कीट नियंत्रण, बोकारो, फॉल आर्मीवर्म, कृषि सलाह, फसल रोग

मानसून के अंतिम चरण के साथ ही खेतों में मक्के की फसल तेजी से बढ़ती है और पौधों पर भुट्टे बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इस अहम चरण में मौसम में बदलाव के कारण फसलों पर विभिन्न प्रकार की फफूंदजनित बीमारियों और नुकसानदायक कीटों का हमला बढ़ने लगता है। अगर सही समय पर ध्यान न दिया जाए, तो इससे फसल की कुल पैदावार और अनाज की गुणवत्ता पर बेहद बुरा असर पड़ता है। बोकारो में तैनात कृषि एक्सपर्ट और प्रखंड तकनीकी प्रबंधक अजय तिर्की ने किसानों को इन बीमारियों के शुरुआती लक्षणों को पहचानने और समय पर रासायनिक व जैविक दवाओं के छिड़काव की विस्तृत सलाह दी है।

## डाउनी मिल्ड्यू बीमारी के लक्षण और रोकथाम
मक्के की खेती में डाउनी मिल्ड्यू रोग एक गंभीर समस्या के रूप में सामने आता है। कृषि विशेषज्ञ अजय तिर्की के मुताबिक, यह बीमारी आमतौर पर बीज अंकुरित होने और पौधे बाहर निकलने के लगभग दो से तीन सप्ताह के भीतर दिखाई देने लगती है। इस रोग का असर होते ही पौधों की पत्तियों पर लंबी धारियां बनने लगती हैं और पौधे की स्वाभाविक वृद्धि पूरी तरह रुक जाती है।

इस बीमारी से बचाव के लिए सही मात्रा में दवा का छिड़काव करना बेहद जरूरी है। किसान प्रति लीटर पानी में 1.5 ग्राम रिडोमिल एमजेड मिलाकर घोल तैयार कर सकते हैं। फसल पर इस घोल का छिड़काव करने से बीमारी के फैलाव को रोका जा सकता है। खेत की स्थिति और जरूरत के अनुसार लगभग दो बार इस दवा का छिड़काव करने से पौधों को सुरक्षित रखा जा सकता है।

## पत्तियों का झुलसा रोग और बचाव की तकनीक
मक्के की फसल को झुलसा रोग से भी भारी नुकसान पहुंचता है। इस बीमारी में पत्तियों पर लंबे और नाव के आकार के भूरे रंग के धब्बे उभरे दिखाई देते हैं। शुरुआत में यह निचले पत्तों पर दिखता है, लेकिन धीरे-धीरे यह ऊपर की पत्तियों तक फैल जाता है। संक्रमण ज्यादा बढ़ने पर पूरा पौधा सूखकर नष्ट हो सकता है।

इस रोग के नियंत्रण के लिए जिनेब या फिर जिंक मैंगनीज कार्बोनेट का सही मात्रा में छिड़काव करने की सलाह दी जाती है। जो किसान जैविक माध्यम अपनाना चाहते हैं, वे नीम के काढ़े का उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए प्रति पंप पानी में लगभग 250 मिलीलीटर नीम का काढ़ा मिलाकर फसल पर अच्छी तरह छिड़काव किया जा सकता है, जिससे पत्तियां सुरक्षित रहती हैं।

## फफूंदजनित रोगों की पहचान और सही खुराक
मक्के के पौधों में फफूंद के कारण होने वाले अन्य रोगों में पत्तियों पर सिलवटें पड़ने लगती हैं और भूरे धब्बे दिखाई देते हैं। इन धब्बों के किनारे पर हल्के पीले रंग की परत बन जाती है और समय बीतने के साथ पत्तियां सूखने लगती हैं। शुरुआती अवस्था में ही लक्षणों की पहचान कर लेने से बड़े नुकसान से बचा जा सकता है।

फफूंद के लक्षण नजर आते ही 0.2 प्रतिशत की दर से यानी प्रति लीटर पानी में 2 ग्राम मैन्कोजेब मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। पहली बार छिड़काव करने के बाद खेत की जरूरत के अनुसार लगभग 10 दिन के अंतराल पर एक या दो बार और छिड़काव किया जा सकता है। इससे फफूंद का संक्रमण पूरी तरह नियंत्रित हो जाता है।

## तना छेदक कीट का हमला और उपचार
बीमारियों के अलावा कीट भी मक्के की पैदावार को भारी क्षति पहुंचाते हैं, जिनमें तना छेदक सबसे प्रमुख है। यह कीट पौधे के तने के भीतर छेद करके अंदरूनी हिस्से को खाने लगता है। शुरुआती चरण में कीट का हमला होने से पौधे कमजोर पड़ जाते हैं और उनमें लगने वाले भुट्टे बहुत छोटे रह जाते हैं। तेज हवा चलने पर कमजोर तने टूटकर गिर जाते हैं।

तना छेदक के प्रबंधन के लिए अंकुरण के लगभग दो सप्ताह बाद फिप्रोनिल 0.3 जी या कारटाप हाइड्रोक्लोराइड 4 जी का प्रयोग पौधे के ऊपरी चक्र में करना चाहिए। इसके अलावा, आवश्यकता पड़ने पर कारटाप या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल का निर्धारित मात्रा में छिड़काव करके भी फसल को बचाया जा सकता है।

## फॉल आर्मीवर्म का प्रकोप और जैविक नियंत्रण
मक्के की फसल के लिए फॉल आर्मीवर्म को सबसे विनाशकारी कीट माना जाता है। यह कीट अपने जीवनकाल में बहुत बड़ी संख्या में अंडे देता है। इसके शुरुआती लार्वा हल्के हरे, गुलाबी या भूरे रंग के होते हैं। यह कीट पत्तियों के किनारों और निचली सतह को काटने के साथ-साथ भुट्टों के अंदर घुसकर भी नुकसान पहुंचाता है।

लार्वा लगभग 14 से 18 दिनों में विकसित होकर वयस्क कीट बन जाते हैं और फिर से नए अंडे देकर पूरी फसल में तबाही मचा सकते हैं। इसके नियंत्रण के लिए ट्राइकोडर्मा का इस्तेमाल और फेरोमोन ट्रैप लगाना बेहद फायदेमंद साबित होता है। फेरोमोन ट्रैप उड़ने वाले वयस्क कीटों को अपनी ओर आकर्षित करके फंसा लेता है, जिससे उनके प्रजनन और अंडे देने की दर में भारी कमी आती है।

## इसका आप पर असर
मानसून के अंत में मक्के की फसल पर कीट और रोगों के प्रकोप से पैदावार और किसानों की आमदनी प्रभावित हो सकती है।

- **भारत में:** मक्का उत्पादक किसानों के लिए सही समय पर दवा और सुरक्षात्मक तकनीकें अपनाना बेहद जरूरी है। सही नियंत्रण से फसल की बर्बादी रुकती है और मंडियों में मक्के की गुणवत्ता व बेहतर दाम मिलते हैं।
- **बोकारो में:** बोकारो और झारखंड के किसान कृषि विभाग की सलाह मानकर तुरंत खेतों की निगरानी शुरू कर सकते हैं। लक्षण दिखते ही रिडोमिल एमजेड या मैन्कोजेब का छिड़काव करके फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है।
- **कीट प्रबंधन:** फॉल आर्मीवर्म और तना छेदक के लिए फेरोमोन ट्रैप और फिप्रोनिल 0.3 जी का उपयोग करें। इससे कीटनाशकों का बेवजह खर्च घटता है और भुट्टों का विकास सुरक्षित रहता है।
- **जैविक विकल्प:** नीम के काढ़े और ट्राइकोडर्मा के प्रयोग से रासायनिक लागत में कमी आती है। किसान घर पर तैयार नीम घोल से पत्तियों के झुलसा रोग का सस्ता और प्रभावी इलाज कर सकते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. डाउनी मिल्ड्यू बीमारी के क्या लक्षण हैं और इसकी रोकथाम कैसे करें?
बीज अंकुरण के 2 से 3 सप्ताह बाद पत्तियों पर धारियां बनने लगती हैं और पौधे का विकास रुक जाता है। इसके नियंत्रण के लिए प्रति लीटर पानी में 1.5 ग्राम रिडोमिल एमजेड मिलाकर छिड़काव करें।

### 2. मक्के की पत्तियों में झुलसा रोग होने पर नीम का काढ़ा कैसे इस्तेमाल करें?
पत्तियों पर नाव के आकार के भूरे धब्बे दिखने पर प्रति पंप पानी में लगभग 250 मिलीलीटर नीम का काढ़ा मिलाकर फसल पर अच्छी तरह छिड़काव किया जा सकता है।

### 3. फफूंद जनित रोगों के लिए मैन्कोजेब की कितनी मात्रा और अंतराल सही है?
फफूंद के लक्षण दिखने पर 0.2 प्रतिशत यानी 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से मैन्कोजेब का छिड़काव करें और जरूरत पड़ने पर 10 दिन के अंतराल पर दोबारा छिड़काव करें।

### 4. तना छेदक कीट से फसल का बचाव कैसे किया जाए?
अंकुरण के 2 सप्ताह बाद ऊपरी चक्र में फिप्रोनिल 0.3 जी या कारटाप हाइड्रोक्लोराइड 4 जी डालें। आवश्यकता पड़ने पर कारटाप या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल का छिड़काव करें।

### 5. फॉल आर्मीवर्म के लार्वा कितने दिनों में वयस्क बनते हैं और इसे कैसे रोकें?
लार्वा 14 से 18 दिनों में वयस्क बन जाते हैं। इसके जैविक नियंत्रण के लिए ट्राइकोडर्मा और वयस्क कीटों को पकड़ने के लिए फेरोमोन ट्रैप का उपयोग करें।

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