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  "title": "ब्रश के एक घुमाव से निखरती है लकड़ी और पत्थरों की कारीगरी, जमशेदपुर के राजा पोद्दार ने दर्जनों परिवारों को दिया सहारा",
  "summary": "जमशेदपुर के कलाकार राजा पोद्दार सिंगल स्ट्रोक पेंटिंग से लकड़ी और चिकने पत्थरों पर सजावटी उत्पाद तैयार कर रहे हैं, जिससे करीब 12 अन्य कारीगरों को भी नियमित आजीविका मिल रही है।",
  "content": "हस्तकला और रचनात्मकता के संगम से न केवल सांस्कृतिक पहचान को नई दिशा दी जा सकती है, बल्कि आत्मनिर्भरता का मजबूत मंच भी तैयार किया जा सकता है। जमशेदपुर के निवासी राजा पोद्दार ने इसी सोच को हकीकत में तब्दील कर दिखाया है। वे लकड़ी और कुदरती पत्थरों पर ऐसी महीन कारीगरी करते हैं जो पहली ही नजर में मन मोह लेती है। उनके काम की सबसे बड़ी खासियत ब्रश की वह खास तकनीक है, जिसमें बिना दोबारा हाथ घुमाए, एक ही झटके में पूरी आकृति उभरकर सामने आ जाती है।\n\nलकड़ी के दैनिक उपयोग और सजावटी सामान को नया रूप\nराजा पोद्दार साधारण लकड़ी के टुकड़ों से घर को सजाने वाले और रोजमर्रा के काम आने वाले कई अनूठे उत्पाद बनाते हैं। उनके संग्रह में पारंपरिक सिंदूर की कंघी, चाय-नाश्ते के लिए सजावटी कप ट्रे और आकर्षक नक्काशीदार वुडन लैंप प्रमुखता से शामिल हैं। इन सभी कृतियों में प्राचीन लोक कला की सादगी और आधुनिक इंटीरियर डिजाइनिंग की जरूरतों का बेहतरीन तालमेल दिखता है। पारंपरिक स्वरूप में नयापन होने के कारण लोग अपने ड्राइंग रूम और लिविंग स्पेस को सजाने के लिए इनके बनाए सामान को काफी पसंद कर रहे हैं।\n\nसमुद्र तट के साधारण पत्थरों पर रंगीन आकृतियों का जादू\nकारीगरी का यह दायरा सिर्फ लकड़ी के सांचों तक ही सीमित नहीं है। समुद्र किनारे से मिलने वाले गोल और चिकने पत्थरों को भी राजा पोद्दार अपनी कला से एक नया जीवन देते हैं। इन पत्थरों की स्वाभाविक बनावट पर जब ब्रश का एक सधा हुआ स्ट्रोक पड़ता है, तो वे बेहद सुंदर पेपर वेट और टेबल डेकोर के नमूनों में बदल जाते हैं। जिस पत्थर को आम तौर पर लोग अनदेखा कर देते हैं, उस पर प्राकृतिक रंगों और सधे हुए हाथों की कलाकारी उसे एक कीमती कलाकृति का दर्जा दिला देती है।\n\nसाधना और अभ्यास से साधी गई सिंगल स्ट्रोक तकनीक\nपेंटिंग की दुनिया में सिंगल स्ट्रोक विधा बेहद कठिन मानी जाती है। इसमें ब्रश को बार-बार चलाने या गलतियों को सुधारने की कोई गुंजाइश नहीं होती। एक ही बार में सटीक दबाव और सही कोण के साथ पूरे फूल, पत्ती या डिजाइन को पूरा करना होता है। इसके लिए निरंतर अभ्यास, एकाग्रता और हाथों की गजब की सफाई की दरकार होती है। राजा पोद्दार ने वर्षों के पसीने से इस तकनीक पर महारत हासिल की है और अब वे लगातार नए-नए प्रयोगों के जरिए अपने उत्पादों का दायरा बढ़ा रहे हैं।\n\nसामूहिक आजीविका का जरिया बने करीब 12 कारीगर\nइस कला यात्रा का सबसे प्रेरक पहलू यह है कि राजा पोद्दार की सफलता की परिधि केवल उन तक सीमित नहीं है। उनके इस उपक्रम से करीब 12 स्थानीय कारीगर जुड़े हुए हैं, जो नियमित रूप से काम कर अपने परिवारों का पालन-पोषण कर रहे हैं। राजा का स्पष्ट मानना है कि यदि हम अपनी पुरानी और पारंपरिक विधाओं को आज के बाजार की पसंद और मॉडर्न टच के साथ पेश करें, तो स्थानीय स्तर पर आजीविका के असीमित अवसर पैदा किए जा सकते हैं। मशीनी दौर की आपाधापी के बीच हाथ की यह सधी हुई कारीगरी आज स्वावलंबन की जीवंत मिसाल बन चुकी है।\n\nइसका आप पर असर\nपारंपरिक हस्तशिल्प और कला से जुड़कर स्थानीय कारीगरों के लिए आजीविका के नए रास्ते खुलते हैं।\n\n• भारत में: हाथ से बनी कलाकृतियों को मॉडर्न डिजाइन देकर स्वरोजगार की असीम संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं। युवा कारीगर पारंपरिक हुनर को आधुनिक बाजार की मांग से जोड़कर अपना व्यवसाय खड़ा कर सकते हैं।\n• जमशेदपुर में: स्थानीय संसाधनों जैसे लकड़ी और पत्थरों के सदुपयोग से इलाके के 12 परिवारों को सम्मानजनक काम मिला है। आसपास के कारीगरों को अपने ही शहर में आजीविका जुटाने का व्यावहारिक मॉडल मिलता है।\n• कला प्रेमियों के लिए: मशीनी सामान के मुकाबले घरों की साज-सज्जा के लिए अनूठी और प्रामाणिक हस्तकला उपलब्ध होती है। खरीदार स्थानीय कारीगरों की कलाकृतियां खरीदकर सीधे ग्रामीण और अर्ध-शहरी परिवारों को आर्थिक संबल दे सकते हैं।\n• सीखने के इच्छुक लोगों के लिए: सिंगल स्ट्रोक जैसी दुर्लभ पेंटिंग विधाएं अभ्यास के दम पर स्वरोजगार का जरिया बन सकती हैं। बिना भारी पूंजी के केवल ब्रश और प्राकृतिक सामग्रियों से उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nपारंपरिक विधाओं को आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप ढालकर रोजगार पैदा करने के उद्देश्य से यह पहल आगे बढ़ी है।\n\n• सीधे तौर पर प्रेरणा: राजा पोद्दार ने सिंगल स्ट्रोक पेंटिंग की अपनी महारत को केवल शौक तक सीमित न रखकर व्यावसायिक रूप देने का फैसला किया। उन्होंने समझा कि लकड़ी और पत्थर जैसी सुलभ सामग्रियों को कलात्मक रूप देकर बाजार में उतारा जा सकता है।\n• बाजार की बदलती पसंद: आज के समय में लोग प्लास्टिक और मशीनी सजावट के बजाय पर्यावरण-अनुकूल और हाथ से बनी कलाकृतियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसी रुझान को देखते हुए पारंपरिक सिंदूर कंघी और लैंप को आधुनिक टच के साथ तैयार किया गया।\n• सामूहिक सहयोग का दायरा: अकेले काम करने के बजाय राजा ने अपने साथ अन्य कारीगरों को जोड़ा ताकि उत्पादन बढ़ सके। इस संगठित प्रयास से काम की गुणवत्ता बनी रही और कई परिवारों को नियमित काम मिलने लगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. राजा पोद्दार कौन हैं और वे कहां के रहने वाले हैं?\nराजा पोद्दार एक कुशल कलाकार हैं जो झारखंड के जमशेदपुर के रहने वाले हैं।\n\n2. राजा पोद्दार किस प्रकार की पेंटिंग विधा के लिए जाने जाते हैं?\nवे सिंगल स्ट्रोक पेंटिंग विधा के लिए जाने जाते हैं, जिसमें ब्रश के एक ही फेर में पूरी डिजाइन तैयार हो जाती है।\n\n3. वे लकड़ी से किस तरह के उत्पाद तैयार करते हैं?\nवे लकड़ी से सिंदूर की कंघी, कप ट्रे और वुडन लैंप जैसे पारंपरिक व सजावटी उत्पाद बनाते हैं।\n\n4. पत्थरों पर पेंटिंग के लिए वे किस तरह के पत्थर इस्तेमाल करते हैं?\nवे समुद्र किनारे मिलने वाले चिकने पत्थरों का उपयोग करते हैं और उन्हें सजाकर पेपर वेट आदि डेकोरेटिव आइटम बनाते हैं।\n\n5. इस कला से कितने परिवारों को आजीविका मिल रही है?\nराजा पोद्दार के साथ करीब 12 कारीगर काम करते हैं, जिससे उनके परिवारों को नियमित रोजगार मिल रहा है।\n\n6. राजा पोद्दार के अनुसार नए रोजगार के अवसर कैसे पैदा किए जा सकते हैं?\nउनका मानना है कि यदि पारंपरिक कला को आधुनिक डिजाइन के साथ जोड़ा जाए तो रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं।\n\nप्रेरणा और सबक\nराजा पोद्दार का सफर साबित करता है कि पारंपरिक कला और आधुनिक सोच का मेल बड़ी सफलता दिला सकता है।\n\n• हुनर को साधना: सिंगल स्ट्रोक जैसी जटिल कला में निपुणता हासिल करने के लिए निरंतर और अथक अभ्यास जरूरी है। धैर्य और लगन से साधी गई विधा कभी व्यर्थ नहीं जाती।\n• साधारण में असाधारण देखना: समुद्र किनारे पड़े साधारण पत्थरों को खूबसूरत कलाकृतियों में बदलकर उन्होंने दिखाया कि दृष्टि सही हो तो कुछ भी मूल्यवान बन सकता है। रचनात्मकता उपलब्ध संसाधनों में ही नया रास्ता तलाश लेती है।\n• परंपरा और आधुनिकता का संगम: प्राचीन कला को नई पीढ़ी की जरूरतों के अनुसार ढालना ही उसके जीवित रहने की कुंजी है। उत्पादों में आधुनिक टच देकर उन्होंने अपनी कला को व्यावसायिक रूप से सफल बनाया।\n• साथियों को आगे बढ़ाना: सच्ची सफलता वही है जो दूसरों के जीवन में भी रोशनी लाए। खुद आगे बढ़ते हुए 12 कारीगरों के घरों को रोशन करना सामूहिक विकास का बेहतरीन उदाहरण है।",
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  "category": "झारखंड",
  "publishedAt": "2026-10-03",
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    "जमशेदपुर",
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