चावल के भूसे और दर्रे से घर पर बनेगा कम खर्च वाला पशु आहार, पूनम सोरेन ने बताया अनुपात दूध देने वाली गायों और भैंसों के लिए दर्रा, चावल का भूसा, दलहन का छिलका और मिनरल मिक्सचर मिलाकर घर पर संतुलित आहार बनाया जा सकता है. पशु चिकित्सक पूनम सोरेन के अनुसार, यह मिश्रण दूध की मात्रा और गाढ़ेपन में सुधार में मदद कर सकता है, लेकिन मात्रा पशु की स्थिति के अनुसार तय करनी और इसे धीरे-धीरे शुरू करना चाहिए. महंगे बाजार दाने पर आने वाला मासिक खर्च घटाने के लिए गाय और भैंस के पशुपालक घर पर उपलब्ध सामग्री से संतुलित आहार तैयार कर सकते हैं. देवघर कृषि विज्ञान केंद्र की प्रमुख सह पशु चिकित्सक डॉ. पूनम सोरेन ने दर्रे और चावल के भूसे के साथ दलहन का छिलका तथा मिनरल मिक्सचर मिलाने का तरीका बताया है. इससे दाने की लागत घटाने के साथ दुधारू पशु को जरूरी पोषण देने पर भी ध्यान दिया जा सकेगा. महंगे तैयार दाने पर निर्भरता घटेगी बाजार से महंगा दाना और पशु आहार खरीदने पर पशुपालकों का हर महीने काफी खर्च होता है. घर पर पहले से उपलब्ध चीजों का इस्तेमाल करके यह बोझ कम किया जा सकता है, लेकिन मिश्रण में सिर्फ सस्ती सामग्री भरना पर्याप्त नहीं है. पशु की जरूरत के अनुसार अलग-अलग घटकों को सही मात्रा में जोड़ना जरूरी है. पूनम सोरेन ने जो मिश्रण बताया है, उसे गाय और भैंस, दोनों दुधारू पशुओं के लिए घरेलू आहार के रूप में तैयार किया जा सकता है. सामग्री और उनका अनुपात इस फॉर्मूले में चावल का भूसा करीब 25 प्रतिशत और दर्रा 10 प्रतिशत रखा जाए. मिनरल मिक्सचर की मात्रा करीब 20 प्रतिशत रखने के साथ दलहन का छिलका उचित मात्रा में लिया जाए. दलहन के छिलके के लिए अलग से कोई प्रतिशत मात्रा तय नहीं की गई है, इसलिए उसे बताए गए अनुपातों के अनुसार ही मिलाना है. जरूरत के अनुसार सेंधा नमक भी डाला जा सकता है. • चावल का भूसा: मिश्रण का करीब 25 प्रतिशत हिस्सा. • दर्रा: मिश्रण में 10 प्रतिशत. • मिनरल मिक्सचर: करीब 20 प्रतिशत. • दलहन का छिलका: उचित मात्रा में. सभी घटकों को अच्छी तरह मिलाने के बाद ही आहार गाय या भैंस को दिया जाए. हालांकि ऊपर दिए गए अनुपात को हर पशु पर बिना बदले लागू नहीं करना चाहिए. आहार की कुल मात्रा तय करते समय पशु का स्वास्थ्य और दूध देने की क्षमता देखने के साथ उसकी उम्र व वजन भी ध्यान में रखना होगा. दूध की मात्रा और गाढ़ेपन पर असर इस आहार का मकसद पशु का पेट भरना ही नहीं है. दुधारू पशु को पर्याप्त पोषण मिलने से उसके स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर असर दिख सकता है. पूनम सोरेन के अनुसार, संतुलित आहार से दूध उत्पादन बढ़ने में मदद मिल सकती है. इसके अलावा दूध अधिक गाढ़ा हो सकता है, जिसे उसकी गुणवत्ता में सुधार के रूप में देखा जा सकता है. इसलिए केवल हरा चारा या भूसा देकर संतुलन पूरा मान लेना उचित नहीं है. पशु की जरूरत के अनुसार ही आहार का मिश्रण तैयार करना चाहिए. नया आहार धीरे-धीरे शुरू करें पशुपालकों के लिए सबसे जरूरी सावधानी यह है कि किसी नए आहार को शुरू में ही अधिक मात्रा में न दिया जाए. मात्रा थोड़ी-थोड़ी बढ़ाई जानी चाहिए. इस बीच दूध उत्पादन और पशु के स्वास्थ्य पर नजर रखनी चाहिए. ऐसा करने से परिवर्तन का असर देखा जा सकता है और पशु को नए मिश्रण से धीरे-धीरे परिचित कराया जा सकता है. नए आहार के साथ-साथ साफ पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराना भी जरूरी है. हरा और सूखा चारा भी जरूरी घर पर तैयार मिश्रण चारे की बुनियादी जरूरत को खत्म नहीं करता. पशु को पर्याप्त साफ पानी, हरा चारा और सूखा चारा देना जरूरी है. ये तीनों हिस्से दैनिक देखभाल का आधार हैं और संतुलित आहार पशु की पोषण जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है. किन स्थितियों में सलाह लेनी चाहिए यदि पशु को पहले से कोई बीमारी है, या वह गर्भवती है, या वह बहुत अधिक दूध देता है, तो मात्रा और घटकों का मिश्रण तय करते समय पशु चिकित्सक या पशु पोषण विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है. इन तीनों स्थितियों में विशेषज्ञ सलाह की सिफारिश की गई है. सही मात्रा और संतुलन के साथ घर पर बनाया गया आहार पशु पोषण और दूध उत्पादन में सुधार का उपयोगी तरीका हो सकता है, लेकिन मात्रा हमेशा पशु की स्थिति के अनुसार ही रखी जानी चाहिए. इसका आप पर असर सबसे बड़ा असर पशु आहार पर मासिक खर्च और दैनिक पोषण पर पड़ेगा. • भारत में: गाय और भैंस पालने वाले पशुपालक घरेलू सामग्री से संतुलित आहार बना सकते हैं. इससे बाजार के महंगे दाने पर खर्च घटाने और पशु पोषण पर ध्यान देने की गुंजाइश बनेगी. • देवघर में: स्थानीय पशुपालक पूनम सोरेन के बताए मिश्रण में चावल का भूसा, दर्रा, मिनरल मिक्सचर और दलहन का छिलका होगा. मात्रा उम्र, वजन, दूध देने की क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार तय होगी. • बदलाव का तरीका: नया आहार अधिक मात्रा में अचानक शुरू नहीं करना चाहिए. मिश्रण धीरे-धीरे बढ़ाते हुए स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर नजर रखनी चाहिए. • विशेष स्थितियां: बीमार, गर्भवती या बहुत अधिक दूध देने वाले पशु के लिए पशु चिकित्सक या पशु पोषण विशेषज्ञ से सलाह जरूरी है. साफ पानी, हरा चारा और सूखा चारा भी पर्याप्त मात्रा में देना होगा. ऐसा क्यों हुआ यह सलाह सीधे तौर पर बाजार के महंगे दाने और दुधारू पशु की पोषण जरूरत से जुड़ी है. केवल हरा चारा या भूसा देने के बजाय पशु की जरूरत के अनुसार संतुलित आहार देने की सलाह इसलिए दी गई है. मिश्रण की मात्रा भी हर पशु की स्थिति के हिसाब से तय होनी चाहिए. • मासिक खर्च: बाजार से महंगा दाना और पशु आहार खरीदने पर हर महीने काफी राशि खर्च होती है. घर पर मिलने वाली चीजों का उपयोग इस बोझ को घटाने का तरीका बताता है. • पोषण का संतुलन: आहार का उद्देश्य केवल पेट भरना नहीं, बल्कि जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराना है. दर्रा, चावल का भूसा, दलहन का छिलका और मिनरल मिक्सचर मिलाकर यह संतुलन बनाने की कोशिश की जाती है. • हर पशु की अलग जरूरत: उम्र, वजन, दूध देने की क्षमता और स्वास्थ्य से मात्रा तय होती है. इसलिए एक ही मात्रा हर गाय या भैंस के लिए लागू नहीं मानी जाती. • बदलाव को समय देना: नया आहार अचानक अधिक मात्रा में शुरू करने की सलाह नहीं दी गई है. मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाते हुए स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर नजर रखनी चाहिए. सवाल-जवाब 1. घर पर तैयार आहार में कौन सी सामग्री डालनी है? दर्रे और चावल के भूसे के साथ दलहन का छिलका तथा मिनरल मिक्सचर मिलाया जाए. जरूरत के अनुसार सेंधा नमक भी डाला जा सकता है. 2. चावल के भूसे, दर्रे और मिनरल मिक्सचर का अनुपात क्या रखा जाए? चावल का भूसा करीब 25 प्रतिशत, दर्रा 10 प्रतिशत और मिनरल मिक्सचर करीब 20 प्रतिशत रखा जा सकता है. 3. दलहन के छिलके की मात्रा कितनी हो? दलहन का छिलका उचित मात्रा में लेना है. इसके लिए अलग से कोई प्रतिशत मात्रा तय नहीं की गई है. 4. क्या हर गाय और भैंस को आहार की एक जैसी मात्रा दी जाए? नहीं. आहार की मात्रा तय करते समय पशु की उम्र, वजन, स्वास्थ्य और दूध देने की क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए. 5. क्या नया आहार सीधे अधिक मात्रा में शुरू किया जा सकता है? नया आहार अधिक मात्रा में अचानक शुरू नहीं करना चाहिए. मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाते हुए पशु के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर नजर रखनी चाहिए. 6. क्या इस मिश्रण के अलावा और क्या देना जरूरी है? पशु को पर्याप्त साफ पानी, हरा चारा और सूखा चारा देना जरूरी है. 7. संतुलित आहार से दूध पर क्या असर हो सकता है? संतुलित आहार दूध की मात्रा बढ़ाने में मदद कर सकता है. दूध के गाढ़ेपन यानी गुणवत्ता में भी सुधार हो सकता है. 8. किन पशुओं के मामले में विशेषज्ञ सलाह लेनी चाहिए? बीमार, गर्भवती या बहुत अधिक दूध देने वाले पशु के लिए पशु चिकित्सक या पशु पोषण विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए. https://trendkia.com/jharkhand/chavala-ke-bhuse-aura-darre-se-ghara-para-banega-kama-kharcha-vala-pashu-ahara-poonam-soren-ne-bataya-anupata-32614 TrendKia — Har trend, sabse pehle.