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  "type": "article",
  "title": "CID की छापेमारी के कुछ ही घंटों बाद JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते का इस्तीफा, ब्लैकलिस्टेड कंपनी और OMR घोटाले ने बढ़ाईं मुश्किलें",
  "summary": "14वीं सिविल सेवा परीक्षा में ओएमआर घोटाले और जेपीएससी मुख्यालय पर सीआईडी की छापेमारी के बीच आयोग के अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया है। यह विवाद एक ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को परीक्षा का ठेका सौंपने के खुलासे के बाद और गहरा गया है।",
  "content": "झारखंड के प्रशासनिक महकमे में एक बार फिर भूचाल आ गया है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के चेयरमैन एल. खियांग्ते ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया है। उनका यह कदम कोई सामान्य प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह एक बड़े और गहरे विवाद का सीधा नतीजा है। खियांग्ते ने अपना इस्तीफा ई-मेल के माध्यम से सीधे राजभवन को भेजा, जहां राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने इसे बिना किसी देरी के स्वीकार कर लिया। यह इस्तीफा एक ऐसे वक्त में आया है जब आयोग 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (PT) में हुई भारी गड़बड़ियों के संगीन आरोपों से जूझ रहा है। इस अचानक हुए घटनाक्रम ने राज्य के राजनीतिक और नौकरशाही हलकों में भारी खलबली मचा दी है, क्योंकि यह झारखंड के सबसे प्रतिष्ठित भर्ती संस्थान की साख पर एक और बड़ा दाग है।\n\nसीआईडी की छापेमारी ने बढ़ाया दबाव\nइस हाई-प्रोफाइल इस्तीफे की पटकथा उस बड़ी पुलिसिया कार्रवाई के दौरान लिखी गई, जिसने JPSC मुख्यालय को पूरी तरह हिलाकर रख दिया। खियांग्ते के राजभवन को ई-मेल भेजने से महज कुछ घंटे पहले, CID और रांची पुलिस की एक संयुक्त टीम ने आयोग के दफ्तर पर जोरदार छापेमारी की थी। यह कोई मामूली जांच नहीं थी, बल्कि कई घंटों तक चलने वाला एक सघन तलाशी अभियान था। जांच दल ने पूरे मुख्यालय को अपने नियंत्रण में ले लिया और परीक्षा से जुड़े तमाम गोपनीय ठिकानों की बारीकी से जांच की।\n\nपुलिस और CID की टीम ने इस मैराथन कार्रवाई के दौरान सबूतों का बड़ा जखीरा अपने कब्जे में लिया। अधिकारियों ने कई बेहद संवेदनशील दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड्स और कंप्यूटर की हार्ड डिस्क जब्त कर लीं। इसके अलावा, विवादों में घिरी मेरिट लिस्ट और परीक्षा के आयोजन से जुड़े तमाम इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी फोरेंसिक जांच के लिए सील कर दिया गया। जांच एजेंसी केवल दस्तावेज जब्त करने तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने JPSC के उन कई कर्मचारियों से भी कड़ी पूछताछ की, जो परीक्षा संचालन प्रक्रिया का अहम हिस्सा थे। मुख्यालय में हुई इस सख्त पूछताछ और पुलिस के कड़े एक्शन ने ही चेयरमैन को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया।\n\nछात्रों का आक्रोश और ओएमआर घोटाले का सच\nइस पूरे बखेड़े की जड़ 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (PT) है। जैसे ही इस परीक्षा के नतीजे घोषित किए गए, पूरे राज्य में प्रतियोगी छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। उम्मीदवारों ने नतीजों में बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप लगाया। उनका सीधा दावा था कि OMR शीट के साथ व्यापक रूप से छेड़छाड़ की गई है और मेरिट लिस्ट तैयार करने में भारी मनमानी हुई है। छात्रों का यह असंतोष जल्द ही सड़कों पर बड़े विरोध-प्रदर्शनों में बदल गया। हजारों की संख्या में छात्रों ने जब लगातार दबाव बनाया, तो मुख्यमंत्री को मजबूरन दखल देना पड़ा और उन्होंने छात्रों की मांग पर इस पूरे परीक्षा घोटाले की जांच सीधे CID को सौंप दी।\n\nब्लैकलिस्टेड कंपनी को ठेका देने पर उठे सवाल\nCID की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, एक ऐसा चौंकाने वाला तथ्य सामने आया जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। JPSC ने इतनी महत्वपूर्ण सिविल सेवा परीक्षा के आयोजन का जिम्मा TDPL नामक एक निजी एजेंसी को सौंप दिया था। सबसे बड़ी लापरवाही यह थी कि यह वही TDPL एजेंसी है जिसे झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) पहले ही अपने यहां से ब्लैकलिस्ट कर चुका था। एक दागी और प्रतिबंधित कंपनी को राज्य की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा का ठेका कैसे और किसके इशारे पर दे दिया गया, यही सवाल अब जांच के मुख्य केंद्र में है। एजेंसियां इस फैसले के पीछे छिपे भ्रष्टाचार की गहराई से पड़ताल कर रही हैं।\n\nएल. खियांग्ते का प्रशासनिक सफर\nएल. खियांग्ते कोई साधारण अधिकारी नहीं रहे हैं, बल्कि उनका प्रशासनिक कद बेहद ऊंचा रहा है। मिजोरम के एक आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लालबिआकतलुआंगा खियांग्ते का जन्म 26 अक्टूबर 1964 को हुआ था। इतिहास में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने प्रतिष्ठित परीक्षा पास की और 1988 बैच के आईएएस (IAS) अधिकारी बने। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत AGMUT कैडर से की थी, लेकिन 2008 में अंतर-कैडर प्रतिनियुक्ति के तहत वे झारखंड कैडर में आ गए। उनके पास अविभाजित बिहार के दौर का भी लंबा अनुभव था, जब उन्होंने बक्सर जिले के DM के तौर पर काम किया था।\n\nअपने लंबे करियर में खियांग्ते ने सरकार के लगभग हर अहम विभाग की जिम्मेदारी संभाली। वे राज्य में अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, परीक्षा नियंत्रक, उप विकास आयुक्त और आदिवासी कल्याण आयुक्त जैसे शीर्ष पदों पर तैनात रहे। इसके अलावा उन्होंने प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान (ATI) के महानिदेशक के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। उनकी प्रशासनिक क्षमता का ही नतीजा था कि 6 दिसंबर 2023 को उन्हें झारखंड का मुख्य सचिव बनाया गया। 31 अक्टूबर 2024 को रिटायर होने के बाद, राज्य सरकार ने उनके अनुभव को देखते हुए मार्च 2025 में उन्हें JPSC का चेयरमैन नियुक्त कर दिया था।\n\nअन्य भर्तियों पर भी गहराया संकट\nमार्च 2025 में कमान संभालने के बाद से ही उनके कार्यकाल में एक के बाद एक कई परीक्षाएं विवादों के घेरे में आ गईं। 14वीं PT परीक्षा का विवाद तो सबसे बड़ा था ही, इसके अलावा अन्य कई महत्वपूर्ण भर्तियां भी संदेह के घेरे में हैं। मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति और सहायक लोक अभियोजक (APP) जैसी अहम भर्तियों में भी अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे हैं, जिससे आयोग की साख पूरी तरह मिट्टी में मिल गई है।\n\nघोटालों का पुराना इतिहास\nJPSC के लिए विवाद कोई नई बात नहीं है। देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी CBI पहले से ही आयोग की 11 बड़ी भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधली की सघन जांच कर रही है। इनमें पहली और दूसरी JPSC सिविल सेवा परीक्षा के बहुचर्चित घोटाले भी शामिल हैं। CBI कई मामलों में आयोग के अधिकारियों और उम्मीदवारों के खिलाफ चार्जशीट तक दाखिल कर चुकी है और ये मामले अभी अदालतों में चल रहे हैं। इसके अलावा राज्य का भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) भी आयोग में फैले भ्रष्टाचार की जांच कर रहा है। CID ने इस ताजा मामले में FIR दर्ज करके कई जगहों पर छापेमारी की है और कुछ गिरफ्तारियां भी की हैं।\n\nछात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़\nझारखंड के लाखों युवाओं के लिए JPSC केवल एक सरकारी आयोग नहीं है, बल्कि यह उनके सुनहरे भविष्य और सरकारी सेवा में जाने की सबसे बड़ी उम्मीद है। सुदूर गांवों, कस्बों और आदिवासी इलाकों से आने वाले गरीब और मध्यम वर्गीय छात्र सालों तक अपना घर-परिवार छोड़कर रांची जैसे शहरों में रहते हैं। वे छोटे-छोटे कमरों में रहकर दिन-रात इन कठिन परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। लेकिन हर बार जब JPSC की परीक्षाओं में OMR शीट में धांधली की खबरें आती हैं, तो उनकी वर्षों की कड़ी मेहनत पर पानी फिर जाता है। ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को ठेका देने जैसी घोर प्रशासनिक खामियां यह साबित करती हैं कि सिस्टम में बैठे लोग इन होनहार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने से जरा भी नहीं हिचकते।\n\nपारदर्शिता बहाल करने की चुनौती\nएल. खियांग्ते का अचानक इस्तीफा देना प्रशासन के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। एक पूर्व मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी का इस तरह विवादों में घिरकर पद छोड़ना यह दर्शाता है कि आयोग की जड़ें कितनी खोखली हो चुकी हैं। अब राज्य सरकार और मुख्यमंत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती JPSC में दोबारा छात्रों का विश्वास बहाल करने की है। सरकार या राजभवन ने इस इस्तीफे की वजहों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन छात्रों की नजरें अब अदालत और जांच एजेंसियों के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या इस महाभ्रष्ट तंत्र की पूरी तरह से सफाई हो पाएगी या नहीं।\n\nइसका आप पर असर\n• झारखंड के युवाओं के लिए: जेपीएससी की सिविल सेवा और अन्य भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को अब नई तारीखों और परीक्षा प्रक्रिया में सुधार का लंबा इंतजार करना होगा।\n• प्रशासनिक स्तर पर: सीआईडी, सीबीआई और एसीबी के सक्रिय होने से आने वाले दिनों में और भी कई बड़े अधिकारियों पर गाज गिर सकती है, जिससे सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता आने की उम्मीद है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. एल. खियांग्ते ने JPSC के अध्यक्ष पद से इस्तीफा क्यों दिया?\n14वीं सिविल सेवा परीक्षा में हुई धांधली के आरोपों और JPSC मुख्यालय पर CID की छापेमारी के फौरन बाद उन्होंने अपना इस्तीफा दे दिया।\n\n2. JPSC परीक्षा से जुड़ा मुख्य विवाद क्या है?\nछात्रों का आरोप है कि 14वीं प्रारंभिक परीक्षा की OMR शीट और मेरिट लिस्ट में भारी गड़बड़ी की गई है।\n\n3. परीक्षा आयोजित करने वाली कौन सी कंपनी जांच के घेरे में है?\nJPSC ने परीक्षा कराने का ठेका TDPL नामक उस एजेंसी को दे दिया था, जिसे पहले ही झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ब्लैकलिस्ट कर चुका था।\n\n4. JPSC के मामलों की जांच कौन सी एजेंसियां कर रही हैं?\nवर्तमान में CID के अलावा, CBI और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) भी आयोग के पुराने और नए भर्ती घोटालों की गहराई से जांच कर रहे हैं।",
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  "category": "झारखंड",
  "publishedAt": "2026-07-23",
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    "एल खियांग्ते",
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    "संतोष कुमार गंगवार"
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