# दमे की जकड़न से परेशान लोगों को राहत दिला सकता है बकरी का दूध, डॉक्टर ने दी तीन महीने पीने की सलाह

> कोडरमा में जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. प्रभात कुमार ने सांस के मरीजों को सुबह-शाम गर्म बकरी का दूध पीने का सुझाव दिया है, साथ ही नियमित दवाएं जारी रखने की हिदायत दी है.

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-10-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/dame-ki-jakarana-se-pareshana-logon-ko-rahata-dila-sakata-hai-bakari-ka-dudha-doktara-ne-di-tina-mahine-pine-ki-salaha-40907 · **Language:** Hindi
**Tags:** अस्थमा, बकरी का दूध, कोडरमा, आयुष, डॉ प्रभात कुमार, घरेलू नुस्खे, श्वसन स्वास्थ्य

सांस की पुरानी बीमारी यानी दमे की तकलीफ झेल रहे लोगों के लिए खान-पान से जुड़ा एक पारंपरिक उपाय काफी मददगार साबित हो सकता है. कोडरमा जिले के आयुष चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. प्रभात कुमार ने फेफड़ों की सेहत सुधारने के लिए रोजमर्रा के आहार में बकरी का दूध शामिल करने की सलाह दी है. इस घरेलू नुस्खे को नियमित तौर पर अपनाने से श्वसन मार्ग की परेशानियों में उल्लेखनीय आराम मिल सकता है, क्योंकि ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में यह प्राकृतिक विकल्प बहुत सरलता से मिल जाता है.

## सेवन का सही नियम और समय सीमा
अस्थमा से जूझ रहे लोगों के लिए इसके इस्तेमाल का तरीका समझाते हुए डॉ. प्रभात कुमार ने कहा कि मरीजों को सुबह और शाम दोनों समय एक-एक कप बकरी का दूध गर्म करके पीना चाहिए. उन्होंने इस उपाय को करीब 90 दिनों तक लगातार जारी रखने की हिदायत दी है, ताकि श्वसन प्रणाली को इसका पूरा लाभ मिल सके. नियमित दिनचर्या बनाकर गर्म दूध पीने से फेफड़ों में जमाव कम होने लगता है और सांस लेना आसान महसूस होता है.

## चल रही अंग्रेजी दवाएं और इनहेलर बंद न करें
आयुष चिकित्सा पदाधिकारी ने मरीजों को खास सतर्कता बरतने को कहा है कि यदि उनका पहले से कोई एलोपैथिक इलाज या इनहेलर चल रहा है, तो उसे अपनी मर्जी से बिल्कुल न रोकें. डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाओं को नियमित रूप से लेते रहना जरूरी है. घरेलू नुस्खे केवल अतिरिक्त सहयोग के लिए होते हैं, इसलिए मुख्य चिकित्सा परामर्श की अनदेखी करना सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है.

## श्वसन नली की सूजन घटाने और कफ रोकने में मददगार
अस्थमा वस्तुतः सांस की नलियों से जुड़ी एक लंबे समय तक चलने वाली समस्या है, जिसके कारण मरीज को सांस लेने में भारी दिक्कत, सीने में जकड़न, लगातार खांसी और सांस फूलने जैसी जटिलताओं का सामना करना पड़ता है. डॉ. प्रभात कुमार के मुताबिक, बकरी का दूध फेफड़ों के भीतर कफ को अधिक मात्रा में बनने से रोकता है और सांस की नलियों में आई सूजन को धीरे-धीरे कम करता है. इसके अलावा यह बेहद सुपाच्य होता है, जिससे मरीज के पाचन तंत्र पर कोई अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता. साथ ही मरीजों को बाहरी धूल, धुएं और प्रदूषण से खुद को बचाकर रखने की भी सलाह दी गई है.

## इसका आप पर असर
दमे और सांस की पुरानी दिक्कतों से जूझ रहे लोगों के लिए यह खबर एक सुलभ और सुरक्षित घरेलू उपाय की व्यावहारिक जानकारी देती है.

- **दवाओं के साथ संतुलन:** यदि आप इनहेलर या कोई अंग्रेजी दवा ले रहे हैं, तो उसे बिना डॉक्टर की अनुमति के कतई बंद न करें. यह उपाय केवल एक सहायक आहार की तरह काम करता है, जिसे मुख्य इलाज के साथ ही जारी रखना चाहिए.
- **उपयोग का समय और नियम:** राहत पाने के लिए सुबह और शाम एक-एक कप हल्का गर्म बकरी का दूध 90 दिनों तक लगातार पीने का नियम बनाएं. समय पर और सही मात्रा में लेने से ही फेफड़ों में कफ का जमाव कम करने में मदद मिलेगी.
- **बचाव और सतर्कता:** इस घरेलू नुस्खे को अपनाने के साथ-साथ धूल, धुएं और दूषित हवा से अपने फेफड़ों को बचाकर रखें. प्रदूषण भरे माहौल में निकलते समय सुरक्षात्मक उपाय अपनाने से बार-बार सांस फूलने की नौबत नहीं आएगी.
- **पाचन पर कोई बोझ नहीं:** सुपाच्य होने के कारण कमजोर पाचन वाले मरीज भी इसे आसानी से अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या में जोड़ सकते हैं. इससे पेट की समस्या पैदा किए बिना श्वसन नलियों की सूजन कम करने में आसानी होती है.

## ऐसा क्यों हुआ
अस्थमा के मरीजों के लिए यह सलाह सांस की नलियों की दीर्घकालिक प्रकृति और कफ की समस्या को कम करने के उद्देश्य से दी गई है.

- **श्वसन नली की पुरानी सूजन:** दमा सांस की नलियों में सूजन और जकड़न पैदा करता है, जिससे हवा का प्रवाह बाधित होता है और मरीज को सांस खींचने में परेशानी होती है. बकरी के दूध के प्राकृतिक गुण इस आंतरिक सूजन को शांत करने में सहायक माने जाते हैं.
- **कफ का अत्यधिक निर्माण:** फेफड़ों में अतिरिक्त बलगम बनने से नलियां अवरुद्ध हो जाती हैं, जिससे खांसी और सीने में भारीपन बढ़ जाता है. यह नुस्खा फेफड़ों के अंदर कफ बनने की गति को नियंत्रित करने के लिए सुझाया गया है.
- **हल्का और सुपाच्य विकल्प:** भारी खाद्य पदार्थ शरीर और पाचन क्रिया पर दबाव डालते हैं, जबकि बकरी का दूध बहुत हल्का होता है और आसानी से पच जाता है. यही वजह है कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इसे लंबे समय से इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती रही है.

## सवाल-जवाब

### 1. दमे के मरीजों को बकरी का दूध किस तरह पीना चाहिए?
मरीजों को सुबह और शाम दोनों समय एक-एक कप बकरी का दूध हल्का गर्म करके पीने की सलाह दी गई है.

### 2. इस घरेलू नुस्खे को कितने दिनों तक जारी रखना जरूरी है?
डॉ. प्रभात कुमार के अनुसार, बेहतर और स्थायी राहत के लिए इसे करीब 90 दिनों तक नियमित रूप से पीना चाहिए.

### 3. क्या बकरी का दूध शुरू करने पर इनहेलर या पुरानी दवाएं छोड़ सकते हैं?
बिल्कुल नहीं, डॉक्टर द्वारा निर्धारित अंग्रेजी दवाएं और इनहेलर बिना चिकित्सीय परामर्श के कभी बंद नहीं करने चाहिए.

### 4. फेफड़ों के लिए बकरी का दूध किस तरह फायदेमंद है?
यह फेफड़ों में कफ बनने से रोकता है, सांस की नली की सूजन कम करता है और आसानी से पच जाता है.

### 5. दूध पीने के अलावा मरीजों को किन चीजों से परहेज करना चाहिए?
मरीजों को धूल, धुएं और बाहरी वायु प्रदूषण से पूरी तरह बचने की कोशिश करनी चाहिए.

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