देवघर बैद्यनाथ धाम से 10 किमी दूर लालची पेड़ा भंडार पर हर दिन खप रहा 2.5 क्विंटल खोवा, दूरदराज से खिंचे चले आ रहे श्रद्धालु देवघर में बाबा बैद्यनाथ मंदिर से लगभग 10 किलोमीटर दूर जसीडीह-चकाई मोड़ स्थित लालची पेड़ा दुकान श्रद्धालुओं की नई पसंद बन गई है, जहां 400 रुपये किलो की दर से रोजाना ढाई क्विंटल खोवे के पेड़े बिक रहे हैं। झारखंड के देवघर में स्थित प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा बैद्यनाथ धाम में दर्शन और जलार्पण के लिए पूरे देश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। बाबानगरी आने वाले भक्तों की यात्रा यहां के पारंपरिक प्रसाद के बिना अधूरी मानी जाती है। पूजा-अर्चना संपन्न करने के बाद श्रद्धालु अपने घरों और संबंधियों के लिए देवघर का मशहूर पेड़ा जरूर खरीदते हैं। लंबे समय से मुख्य मंदिर परिसर के चारों तरफ पेड़े का बड़ा बाजार मौजूद रहा है, जिसे आम बोलचाल में पेड़ा गली कहा जाता है। हालांकि हाल के वर्षों में श्रद्धालुओं की प्राथमिकताओं और खरीद के तरीकों में एक नया चलन देखने को मिल रहा है। मुख्य मंदिर के ठीक पास मौजूद कतारबद्ध दुकानों को छोड़कर कई भक्त अब शहर से लगभग 10 किलोमीटर दूर जसीडीह-चकाई मोड़ का रुख कर रहे हैं, जहां स्थित लालची पेड़ा दुकान तेजी से अपनी विशिष्ट पहचान बना रही है। गुणवत्ता की तलाश में मंदिर से 10 किलोमीटर का सफर आमतौर पर तीर्थस्थलों पर दर्शनार्थी मंदिर के निकटतम काउंटरों से ही प्रसाद सामग्री जुटाना पसंद करते हैं, ताकि अतिरिक्त आवागमन से बचा जा सके। लेकिन देवघर में कई नियमित आगंतुक अब बेहतर स्वाद और प्रामाणिक गुणवत्ता की खातिर 10 किलोमीटर का फासला तय करने से भी नहीं हिचक रहे हैं। जसीडीह-चकाई मोड़ के पास स्थित इस दुकान पर पहुंचने वाले ग्राहक केवल स्थानीय स्तर पर उपभोग के लिए मिठाई नहीं लेते, बल्कि झारखंड से बाहर अन्य राज्यों में रहने वाले अपने मित्रों, परिजनों और पड़ोसियों के लिए भी भारी मात्रा में पेड़े पैक करवाते हैं। दूरदराज से आने वाले तीर्थयात्रियों के बीच इस प्रतिष्ठान की विश्वसनीयता लगातार बढ़ रही है। इसी दुकान पर पेड़ा खरीदने पहुंचे प्रवीन कुमार झा ने अपने अनुभव साझा किए। मूल रूप से बिहार के भागलपुर के रहने वाले प्रवीन कुमार झा वर्तमान में कटक में फौजी के तौर पर पदस्थापित हैं। वे बीते कई वर्षों से लगातार पूजा करने के लिए बाबाधाम आ रहे हैं और उनके लिए दर्शन के उपरांत पेड़ा ले जाना यात्रा का अनिवार्य हिस्सा रहा है। उनका कहना है कि उन्होंने पूर्व में देवघर के कई अलग-अलग प्रतिष्ठानों से पेड़ा खरीदा था, परंतु कई जगह श्रद्धा के नाम पर धोखा मिला और गुणवत्ता संतोषजनक नहीं पाई गई। मिठाइयों में मिलावट और खराब स्वाद से मिले कड़वे अनुभवों के बाद उन्होंने पिछले वर्ष से इसी दुकान से पेड़ा खरीदना शुरू किया। प्रवीन कुमार झा इस बार भी मुख्य मंदिर क्षेत्र से खास तौर पर टोटो आरक्षित करके पेड़ा लेने जसीडीह-चकाई मोड़ पहुंचे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल अपने निजी उपभोग के लिए यह मिठाई नहीं ले जा रहे हैं, बल्कि कटक में स्थित उनकी बटालियन, पड़ोस और परिचित मंडली में भी देवघर के प्रामाणिक पेड़े की खासी मांग रहती है, इसलिए वे उन सभी के लिए यहीं से मिठाई पैक करवाकर ले जाते हैं। जमुई से देवघर तक का कारोबारी सफर इस दुकान के संचालक दिनेश यादव हैं, जिनका मूल निवास स्थान बिहार के जमुई जिले में है। देवघर आने से पहले वे अपने गृह जिले जमुई में ही पेड़ा बनाने और बेचने का कार्य करते थे। जमुई में काम करने के दौरान उनके एक परिचित ने सुझाव दिया कि देवघर एक प्रमुख तीर्थ केंद्र है जहां लाखों श्रद्धालु हर महीने आते हैं, इसलिए यदि वे देवघर में पेड़े का कारोबार स्थापित करें तो उन्हें विशाल बाजार और बेहतर व्यावसायिक अवसर मिल सकते हैं। इस परामर्श को स्वीकार करते हुए दिनेश यादव ने मुख्य शहर की भीड़भाड़ से दूर जसीडीह-चकाई मोड़ के समीप अपनी पेड़े की दुकान की नींव रखी। प्रारंभिक दौर के बाद धीरे-धीरे दुकान पर ग्राहकों का आना बढ़ता चला गया। गुणवत्ता और स्वाद के दम पर बने भरोसे के कारण अब यहां प्रतिदिन व्यापक स्तर पर ताजे पेड़े का निर्माण किया जाता है। दिनेश यादव के अनुसार, प्रतिष्ठान में दैनिक आधार पर लगभग दो से ढाई क्विंटल खोवा की खपत होती है, जिससे पेड़ा तैयार किया जाता है। इतने बड़े पैमाने पर कच्चे माल का उपयोग बताता है कि शहर से बाहर होने के बावजूद यहां की बिक्री कितनी सघन है। अन्य राज्यों के खरीदारों की आवाजाही और तय दर दिनेश यादव की दुकान पर केवल देवघर नगर या आसपास के ग्रामीण इलाकों के बाशिंदे ही नहीं पहुंचते, बल्कि अंतरराज्यीय खरीदारों का तांता लगा रहता है। झारखंड के विभिन्न जिलों के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा से आने वाले तीर्थयात्री भी बड़ी तादाद में यहां रुककर खरीदारी करते हैं। अगर आर्थिक पहलू की बात की जाए, तो इस दुकान पर पेड़े का खुदरा मूल्य 400 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित है। स्थिर दर और निरंतर निगरानी में तैयार होने वाला उत्पाद ग्राहकों को बार-बार यहां खींच लाता है। बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा करने वाले किसी भी श्रद्धालु के लिए पेड़ा मात्र एक साधारण मिष्ठान्न नहीं है, बल्कि यह बाबानगरी की पावन स्मृतियों और धार्मिक आस्था का जीवंत प्रतीक है। यही कारण है कि पूजा अनुष्ठान की पूर्णता के बाद घर लौटते वक्त हर कोई पेड़े का डिब्बा साथ ले जाना चाहता है। पारंपरिक पेड़ा गली के वर्चस्व के बीच मुख्य नगरीय सीमा से दूर हाईवे मार्ग पर स्थित दुकान का यह विस्तार दर्शाता है कि देवघर का पारंपरिक पेड़ा उद्योग अब मंदिर के संकरे गलियारों से निकलकर बाहरी राजमार्गों पर भी अपनी मजबूत पैठ बना चुका है। इसका आप पर असर देवघर आने वाले तीर्थयात्रियों और स्थानीय मिठाई प्रेमियों के लिए शुद्ध प्रसाद की आसान उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है। • देवघर और झारखंड में: मंदिर से 10 किमी दूर जसीडीह-चकाई मोड़ पर एक भरोसेमंद विकल्प मिलने से मुख्य शहर के जाम में फंसे बिना हाईवे पर ही शुद्ध पेड़ा खरीदना आसान हो गया है। श्रद्धालु 400 रुपये प्रति किलो की दर से तय दाम में ताजा खोवे की मिठाई प्राप्त कर सकते हैं। • अन्य राज्यों के भक्तों के लिए: बिहार, बंगाल और ओडिशा से निजी वाहनों या ट्रेनों से लौटने वाले यात्रियों के लिए जसीडीह मोड़ सुविधाजनक ठहराव बन गया है। वे मिलावट की आशंका के बिना अपने गृह नगरों के लिए प्रामाणिक पेड़ा ले जा सकते हैं। • पारंपरिक बाजार पर असर: मंदिर के पास स्थित पारंपरिक पेड़ा गली के दुकानदारों को भी प्रतिस्पर्धा के चलते अपनी गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना होगा। खरीदार अब दूरी के बजाय शुद्धता और स्वाद को प्राथमिकता दे रहे हैं। • स्थानीय रोजगार: प्रतिदिन 2 से 2.5 क्विंटल खोवे की नियमित खपत से दुग्ध उत्पादकों और मिठाई कारीगरों को बड़ा बाजार मिल रहा है। इससे स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। ऐसा क्यों हुआ मंदिर क्षेत्र से 10 किलोमीटर दूर स्थित दुकान पर भारी मांग पैदा होने के पीछे गुणवत्ता की कमी और सुविधाजनक मार्ग दोनों मुख्य कारक रहे हैं। • पारंपरिक दुकानों में गुणवत्ता का अभाव: कई नियमित श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर के आसपास पेड़े की गुणवत्ता में गिरावट और मिलावट की शिकायत महसूस की। इसी अविश्वास के कारण खरीदारों ने प्रामाणिक खोवे से मिठाई तैयार करने वाले बाहरी विकल्पों की खोज शुरू की। • व्यावसायिक रणनीति और स्थान चयन: संचालक दिनेश यादव ने जमुई छोड़कर देवघर आने और जसीडीह-चकाई मोड़ जैसे प्रमुख पारगमन स्थल पर दुकान खोलने का सही फैसला लिया। यह चौराहा विभिन्न राज्यों से आने-जाने वाले वाहनों के लिए सीधा और सुगम पड़ाव साबित हुआ। • मुंहजबानी प्रचार और विश्वास: फौजी प्रवीन कुमार झा जैसे संतुष्ट ग्राहकों ने गुणवत्ता पर भरोसा जताया और अपने सहकर्मियों के लिए भी यहीं से खरीदारी की। ऐसे नियमित ग्राहकों के जरिए दूसरे राज्यों तक दुकान की साख फैलती चली गई। सवाल-जवाब 1. लालची पेड़ा दुकान बाबा बैद्यनाथ मंदिर से कितनी दूरी पर स्थित है? यह दुकान देवघर में बाबा बैद्यनाथ मंदिर से लगभग 10 किलोमीटर दूर जसीडीह-चकाई मोड़ के पास स्थित है। 2. दुकान में रोजाना कितने खोवे से पेड़ा बनाया जाता है? संचालक दिनेश यादव के अनुसार, दुकान पर प्रतिदिन करीब दो से ढाई क्विंटल खोवे से पेड़ा तैयार किया जाता है। 3. इस दुकान पर पेड़े की प्रति किलो कीमत क्या है? दुकान पर पेड़े का मूल्य 400 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित है। 4. दुकान के संचालक दिनेश यादव मूल रूप से कहां के रहने वाले हैं? दिनेश यादव मूल रूप से बिहार के जमुई जिले के रहने वाले हैं और पहले वहीं पेड़ा बेचने का काम करते थे। 5. कटक में पदस्थापित फौजी प्रवीन कुमार झा यहां पेड़ा लेने क्यों पहुंचे? उन्होंने मंदिर के पास गुणवत्ता में धोखा मिलने के बाद इस दुकान से खरीदारी शुरू की और वे अपने पड़ोसियों व परिचितों के लिए भी टोटो बुक करके पेड़ा लेने आए। 6. किन-किन राज्यों से आने वाले लोग इस दुकान से पेड़ा खरीदते हैं? झारखंड के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा समेत अन्य राज्यों से आने वाले श्रद्धालु यहां से पेड़ा खरीदते हैं। प्रेरणा और सबक जमुई से आकर देवघर की बाहरी सीमा पर सफल कारोबार खड़ा करने वाले दिनेश यादव का सफर उद्यमिता के लिए प्रेरणादायक है। • स्थान बदलने का साहसिक निर्णय: अपने गृह जिले जमुई के सीमित दायरे से बाहर निकलकर देवघर जैसे बड़े धार्मिक पर्यटन बाजार में कदम रखना कारोबारी दूरदर्शिता को दर्शाता है। सही परामर्श पर तुरंत अमल करना सफलता का मार्ग खोलता है। • भीड़ से अलग अपनी राह बनाना: मंदिर के ठीक पास मौजूद पेड़ा गली की अंधी होड़ में शामिल होने के बजाय 10 किमी दूर हाईवे पर दुकान स्थापित की। यदि उत्पाद उत्कृष्ट हो, तो ग्राहक दूरी तय करके भी आपके पास पहुंचेंगे। • गुणवत्ता को ही विज्ञापन बनाना: प्रतिदिन 2.5 क्विंटल खोवे की खपत किसी प्रचार के बिना केवल उत्पाद की शुद्धता और विश्वास के बल पर हासिल की गई। ग्राहकों का भरोसा ही किसी व्यवसाय की सबसे स्थायी पूंजी होती है। https://trendkia.com/jharkhand/deoghar-baidyanath-dham-se-10-kimi-dura-lalchi-peda-bhandara-para-hara-dina-khapa-raha-2-5-kvintala-khova-duradaraja-se-khinche-ch-41745 TrendKia — Har trend, sabse pehle.