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  "type": "article",
  "title": "देवघर के हुलास महतो ने झींगा खेती से बदली किस्मत, 10 हजार लगाकर कमाए 50 हजार",
  "summary": "झारखंड के देवघर जिले के किसान हुलास महतो ने एक एकड़ जमीन पर झींगा की खेती कर शानदार मुनाफा कमाया है। वह खुद 35 किलोमीटर दूर तक जाकर इसे बेचते हैं और बच्चों को पढ़ा रहे हैं।",
  "content": "देवघर जिले में कृषि के क्षेत्र में पारंपरिक फसलों के अलावा अब किसान नए और उन्नत तरीकों से भी अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं। आमतौर पर खेतों में धान, गेहूं और मौसमी सब्जियां उगाने की परंपरा रही है, लेकिन कुछ किसान लीक से हटकर अपनी मेहनत के बल पर परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। देवघर प्रखंड के अंतर्गत आने वाले ग्वालबदिया गांव निवासी हुलास महतो ऐसे ही मेहनतकश किसानों की श्रेणी में आते हैं, जिनकी पूरी आजीविका खेती के दम पर ही चल रही है। उनके परिवार में खेती का यह सिलसिला कई दशकों से चला आ रहा है और वह इस पुश्तैनी काम को आगे बढ़ाने वाली तीसरी पीढ़ी के रूप में सक्रिय हैं।\n\nएक एकड़ में झींगा की खेती और कड़ी मेहनत\nहुलास महतो वर्तमान में एक एकड़ जमीन पर बड़े पैमाने पर झींगा की खेती कर रहे हैं। फसल तैयार होने के बाद वह खुद इसकी कटाई करते हैं और इसे बेचने के लिए दूर-दराज के इलाकों में जाते हैं। अपने उत्पादन की सही कीमत पाने के लिए उन्हें अपने निवास स्थान से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। इसके बाद वह गांवों में घर-घर जाकर या फेरी लगाकर ग्राहकों तक सीधे झींगा पहुंचाते हैं। खेती के इस काम में केवल फसल उगाना ही शामिल नहीं है, बल्कि उसके विपणन और परिवहन की जिम्मेदारी भी वह खुद ही निभाते हैं, ताकि मुनाफा सीधा उनके पास आ सके।\n\nलागत से पांच गुना तक की बंपर कमाई\nखेती की इस अनूठी और लाभकारी योजना के बारे में बात करते हुए हुलास महतो बताते हैं कि इस पूरे उद्यम में उनकी लागत मात्र 10 हजार रुपये आई थी। इसके मुकाबले उन्होंने अब तक करीब 50 हजार रुपये की शुद्ध कमाई कर ली है। पिछले करीब 20 साल से कृषि कार्यों से जुड़े होने के कारण उन्हें मौसम के मिजाज और बाजार की नब्ज की अच्छी समझ है। वह साल के अलग-अलग समय पर विभिन्न प्रकार की सब्जियों का उत्पादन भी करते हैं और उन्हें स्थानीय बाजारों या गांवों में बेचकर अपने परिवार का खर्च उठाते हैं।\n\nपारंपरिक खेती और परिवार की जिम्मेदारी\nहुलास महतो के परिवार में उनकी आजीविका का एकमात्र साधन खेती ही है। उनके दो बेटे हैं जो वर्तमान में अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं। किसान का साफ तौर पर कहना है कि खेती से होने वाली इसी आय के जरिए वह अपने दोनों बच्चों की शिक्षा का खर्च उठा रहे हैं। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों को संभालना और बच्चों के भविष्य को संवारने का सपना ही उन्हें हर दिन कड़ी मेहनत करने की प्रेरणा देता है। खेती में भले ही मौसम की अनिश्चितता और बाजार की चुनौतियां बनी रहती हैं, लेकिन उनका हौसला कभी कमजोर नहीं पड़ता।\n\nइसका आप पर असर\nयह खबर खेती-किसानी से जुड़े लोगों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए प्रेरणादायक है कि कम लागत में भी बेहतर मुनाफा कमाया जा सकता है।\n\n• भारत में: ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को पारंपरिक फसलों के अलावा झींगा और मछली पालन जैसे विकल्पों पर ध्यान देने की प्रेरणा मिलती है।\n• देवघर में: स्थानीय किसानों को कम जमीन और कम लागत में व्यावसायिक खेती अपनाकर अपनी आय बढ़ाने का प्रत्यक्ष उदाहरण मिलता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nपारंपरिक खेती के साथ नई तकनीकों और विकल्पों को अपनाना ग्रामीण इलाकों में आय बढ़ाने का मुख्य कारण बन रहा है।\n\n• पारंपरिक अनुभव: पिछले 20 वर्षों से खेती से जुड़े होने के कारण किसान को मौसम और बाजार की मांग का गहरा अनुभव है।\n• सीधी बिक्री: बिचौलियों से बचने के लिए खुद गांवों में जाकर उत्पाद बेचने से मुनाफा सीधे किसान की जेब में आता है।\n• कम लागत: एक एकड़ भूमि पर सीमित निवेश के साथ अधिक मूल्य वाली फसल तैयार करना आर्थिक सफलता का आधार बनता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. हुलास महतो कहां के रहने वाले हैं?\nवह देवघर प्रखंड के ग्वालबदिया गांव के रहने वाले हैं।\n\n2. वह कितनी जमीन पर खेती कर रहे हैं?\nवह वर्तमान में एक एकड़ जमीन पर झींगा की खेती कर रहे हैं।\n\n3. झींगा बेचने के लिए उन्हें कितनी दूर जाना पड़ता है?\nउन्हें अपने गांव से करीब 35 किलोमीटर दूर तक जाकर गांवों में झींगा बेचना पड़ता है।\n\n4. इस खेती में उनकी कितनी लागत आई और कितनी कमाई हुई?\nइस खेती में उनकी लागत करीब 10 हजार रुपये थी और उन्होंने 50 हजार रुपये की कमाई की है।\n\n5. वह कितने वर्षों से खेती कर रहे हैं?\nवह पिछले करीब 20 साल से खेती-किसानी के काम से जुड़े हुए हैं।\n\nप्रेरणा और सबक\nहुलास महतो की यह यात्रा उन लोगों के लिए एक बेहतरीन उदाहरण है जो सीमित संसाधनों में भी सफलता की इबारत लिखना चाहते हैं।\n\n• सीमित संसाधन: मात्र 10 हजार रुपये की छोटी सी लागत से बड़े मुनाफे की शुरुआत की जा सकती है।\n• कड़ी मेहनत: उत्पादन से लेकर बाजार तक खुद जिम्मेदारी उठाने से बिचौलियों का मार्जिन खत्म होता है।\n• शिक्षा को प्राथमिकता: खेती से होने वाली आय का उपयोग बच्चों के भविष्य और पढ़ाई पर खर्च करना प्रेरणा देता है।\n• पुश्तैनी काम का सम्मान: अपनी पारिवारिक परंपरा को आधुनिक समय में भी पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ाया जा सकता है।",
  "url": "https://trendkia.com/jharkhand/deoghar-ke-hulas-mahto-ne-jhinga-kheti-se-badli-kismat-48579",
  "category": "झारखंड",
  "publishedAt": "2026-10-17",
  "tags": [
    "देवघर",
    "झींगा खेती",
    "कृषि",
    "झारखंड किसान",
    "सफलता की कहानी"
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  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
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