# देवघर के जसीडीह सीएचसी ने बदला इलाज का तरीका, पर्ची और पुरानी फाइलों के झंझट से मिली राहत

> देवघर के जसीडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ने संपूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल कर दिया है, जिससे मरीजों को भारी फाइलों और कागजी पर्चियों से मुक्ति मिली है।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-09-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/deoghar-ke-jasidih-chc-ne-badala-ilaja-ka-tarika-parchi-aura-purani-phailon-ke-jhnjhata-se-mili-rahata-31459 · **Language:** Hindi
**Tags:** जसीडीह सीएचसी, देवघर स्वास्थ्य सेवा, डिजिटल अस्पताल, सी-डैक एचएमआईएस, आभा आईडी, झारखंड स्वास्थ्य मिशन, स्कैन एंड शेयर

झारखंड के देवघर जिले में स्थित जसीडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की पारंपरिक तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है। इस अस्पताल में जब कोई मरीज परामर्श या उपचार के लिए पहुंचता है, तो केवल शारीरिक जांच ही नहीं होती, बल्कि उसकी बीमारी, जांच परिणाम और दवाओं से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी उसी पल डिजिटल माध्यम में दर्ज कर ली जाती है। पहले जहां सरकारी अस्पतालों में मरीजों को पंजीकरण कराने, कागजी पर्ची सुरक्षित रखने और पुरानी जांच फाइलों को हर बार साथ लेकर चलने की भारी जद्दोजहद करनी पड़ती थी, वहीं अब आधुनिक सूचना तकनीक ने इस पूरी प्रक्रिया को बेहद सरल और सुगम बना दिया है। अस्पताल प्रबंधन ने डिजिटल व्यवस्था को महज औपचारिकता या दिखावे के लिए लागू नहीं किया है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विभिन्न विभागों और प्रणालियों को आपस में जोड़कर एक एकीकृत व्यवस्था तैयार की है। यही वजह है कि जसीडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की यह तकनीकी पहल पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।

## सी-डैक एचएमआईएस से जुड़ा अस्पताल का समूचा ढांचा
जसीडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को दी जाने वाली प्रत्येक सेवा को तकनीकी रूप से संचालित करने पर विशेष जोर दिया गया है। अस्पताल के प्रशासनिक तंत्र के अनुसार, यहां सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग यानी सी-डैक के हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (HMIS) के तहत उपलब्ध तमाम डिजिटल सुविधाओं का सुनियोजित इस्तेमाल हो रहा है। मरीज जैसे ही अस्पताल के मुख्य द्वार से भीतर प्रवेश करता है, उसके आरंभिक पंजीकरण से लेकर डॉक्टर के परामर्श, पैथोलॉजी जांच, दवा वितरण और अन्य जरूरी चिकित्सकीय प्रक्रियाओं का डेटा सीधे ऑनलाइन पोर्टल पर तैयार होता है। इस आधुनिक प्रणाली के लागू होने से अस्पताल के दैनिक कामकाज में कागज और फाइलों पर निर्भरता लगभग समाप्त हो गई है। इसके साथ ही अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों और क्लिनिकल स्टाफ के लिए भी मरीजों के मेडिकल इतिहास को सुरक्षित सहेजना और जरूरत पड़ने पर तुरंत खोजना बेहद आसान हो गया है।

## स्वास्थ्यकर्मियों का विशेष प्रशिक्षण और तकनीकी समन्वय
जसीडीह सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विश्वनाथ चौधरी ने बताया कि अस्पताल को पूरी तरह डिजिटल बनाने का प्राथमिक उद्देश्य केवल कंप्यूटर स्क्रीन लगाना या सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करना नहीं था। उनका कहना है कि सबसे बड़ी व्यावहारिक चुनौती यह थी कि क्लिनिकल सेवाओं के प्रत्येक स्तर पर कार्यरत कर्मचारी इस डिजिटल सिस्टम को सहजता से और सही ढंग से संचालित कर सकें। इसी चुनौती से निपटने के लिए अस्पताल के सभी स्वास्थ्यकर्मियों, ऑपरेटरों और नर्सिंग स्टाफ को चरणबद्ध तरीके से विशेष तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया। रोजमर्रा के काम के दौरान आने वाली सॉफ्टवेयर से जुड़ी दिक्कतों और तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए विशेषज्ञों की नियमित मदद ली गई। इसी सुनियोजित प्रयास का परिणाम है कि आज ओपीडी रजिस्ट्रेशन काउंटर से लेकर जांच प्रयोगशाला और फार्मेसी वितरण खिड़की तक की तमाम अहम औपचारिकताएं बिना किसी रुकावट के डिजिटल माध्यम से पूरी हो रही हैं।

## आभा आईडी से मिला बार-बार आने वाले मरीजों को फायदा
अस्पताल की इस तकनीकी क्रांति का सीधा और सकारात्मक प्रभाव मरीजों की सुविधा पर दिखाई दे रहा है। विशेष रूप से वे मरीज जो किसी पुरानी बीमारी या नियमित जांच के सिलसिले में बार-बार अस्पताल आते हैं, उन्हें अब भारी-भरकम मेडिकल फाइलें या पुराने पर्चे संभालकर घूमने की आवश्यकता नहीं रह गई है। चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. सिंकी सिन्हा के अनुसार, यदि किसी मरीज का रिकॉर्ड आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत उसकी आभा (ABHA) आईडी से जुड़ा हुआ है, तो डॉक्टर को उसकी पिछली क्लिनिकल हिस्ट्री देखने में अत्यधिक सहूलियत होती है। जब डॉक्टर अपने कंप्यूटर स्क्रीन पर मरीज की पुरानी जानकारी खोलते हैं, तो उन्हें यह स्पष्ट समझ आ जाता है कि मरीज पूर्व में किस लक्षण या परेशानी को लेकर आया था, कौन सी पैथोलॉजिकल जांचें कराई गई थीं और पहले किस फार्मूले की दवाओं से उपचार शुरू हुआ था। इससे इलाज की निरंतरता बनी रहती है और गलत दवा या अनावश्यक दोहराव का जोखिम भी खत्म हो जाता है।

## स्कैन एंड शेयर सुविधा में हासिल हुआ सौ फीसदी का आंकड़ा
ओपीडी काउंटरों पर लगने वाली लंबी कतारों को समाप्त करने के लिए अस्पताल में राष्ट्रीय स्तर की स्कैन एंड शेयर प्रणाली को पूरी तत्परता से लागू किया गया है। जसीडीह सीएचसी प्रबंधन के अनुसार, इस केंद्र पर आने वाले मरीजों के पंजीकरण में स्कैन एंड शेयर तकनीक का इस्तेमाल 100 प्रतिशत तक दर्ज किया जा रहा है। आमतौर पर सरकारी अस्पतालों में पर्ची बनवाने और सामान्य विवरण दर्ज कराने में मरीजों का घंटों समय बर्बाद हो जाता था, लेकिन यहां त्वरित क्यूआर कोड स्कैनिंग के माध्यम से मरीज का पंजीकरण चंद पलों में पूरा हो जाता है। अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जसीडीह सीएचसी को पेपरलेस और पूरी तरह डिजिटल बनाने का यह लक्ष्य रातों-रात हासिल नहीं हुआ। स्वास्थ्यकर्मियों को मॉड्यूलर आधार पर सॉफ्टवेयर के विभिन्न टूल्स से परिचित कराया गया, व्यावहारिक कठिनाइयों की पहचान कर उनमें निरंतर सुधार किए गए और अब यह प्रणाली अस्पताल के दैनिक कार्यकलाप का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। इसी निरंतर प्रयास के चलते जसीडीह सीएचसी न सिर्फ देवघर जिले में बल्कि पूरे राज्य के प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य ढांचे के लिए डिजिटल बदलाव का एक अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरा है।

## इसका आप पर असर
इस डिजिटल पहल से मरीजों को पर्ची बनवाने के लिए घंटों लाइन में खड़े रहने और पुरानी मेडिकल फाइलें ढोने की परेशानी से तुरंत मुक्ति मिलती है।

- **भारत में:** आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और सी-डैक एचएमआईएस जैसी प्रणालियां देश भर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए मॉडल बन रही हैं। नागरिक अपनी आभा आईडी का इस्तेमाल करके किसी भी डिजिटल सरकारी अस्पताल में तुरंत पंजीकरण करवा सकते हैं।
- **देवघर में:** जसीडीह सीएचसी आने वाले स्थानीय मरीजों को अब रजिस्ट्रेशन के लिए मात्र अपने मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन करना होगा। इससे डॉक्टर को मरीज की पूरी पुरानी बीमारी और इलाज का इतिहास कंप्यूटर पर ही मिल जाएगा।
- **दवा और जांच की सुविधा:** लैब जांच की रिपोर्ट और डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाएं सीधे सिस्टम में दर्ज होती हैं। इसके चलते मरीज को बार-बार अलग-अलग काउंटरों पर कागजी पर्चे लेकर भटकना नहीं पड़ता।
- **समय की बचत:** पंजीकरण और रिकॉर्ड जांच में लगने वाला समय घटकर कुछ सेकंड रह गया है। नतीजतन, ओपीडी में मरीजों का इंतजार समय काफी घट गया है।

## ऐसा क्यों हुआ
जसीडीह सीएचसी में यह बड़ा बदलाव सरकारी अस्पतालों में पर्चियों के गुम होने, लंबी कतारों और पिछली मेडिकल हिस्ट्री न मिलने जैसी व्यावहारिक परेशानियों को खत्म करने के लिए किया गया। अस्पताल प्रबंधन ने तकनीक को अपनाकर स्वास्थ्य सेवाओं को पारदर्शी और सुगम बनाने का फैसला किया।

- **कागजी निर्भरता समाप्त करना:** सरकारी अस्पतालों में कागजी पर्चियां अक्सर खो जाती थीं या खराब हो जाती थीं, जिससे डॉक्टर को पिछली बीमारी की जानकारी नहीं मिल पाती थी। सी-डैक एचएमआईएस को लागू करके इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला गया।
- **प्रशासनिक समन्वय और प्रशिक्षण:** अस्पताल प्रशासन ने कर्मचारियों को केवल सॉफ्टवेयर सौंपने के बजाय तकनीकी विशेषज्ञों के जरिए गहन प्रशिक्षण दिलवाया। इससे स्वास्थ्यकर्मियों के भीतर तकनीक को लेकर झिझक खत्म हुई और त्रुटियों में कमी आई।
- **डिजिटल इंडिया और आभा का क्रियान्वयन:** राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की 'स्कैन एंड शेयर' और आभा आईडी नीति ने मरीजों का त्वरित पंजीकरण संभव बनाया। अस्पताल ने इसे 100 प्रतिशत तक लागू कर मरीजों का समय बचाया।

## सवाल-जवाब

### 1. जसीडीह सीएचसी में कौन सा डिजिटल सॉफ्टवेयर इस्तेमाल किया जा रहा है?
जसीडीह सीएचसी में सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग द्वारा विकसित सी-डैक एचएमआईएस (HMIS) सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा है।

### 2. इस डिजिटल व्यवस्था से मरीजों को क्या मुख्य लाभ हो रहा है?
मरीजों को बार-बार कागजी पर्ची या पुरानी जांच रिपोर्ट लेकर अस्पताल नहीं आना पड़ता और उनका सारा रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध रहता है।

### 3. अस्पताल में स्कैन एंड शेयर का कितना प्रतिशत उपयोग हो रहा है?
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार जसीडीह सीएचसी में स्कैन एंड शेयर पंजीकरण का 100 प्रतिशत उपयोग दर्ज किया जा रहा है।

### 4. आभा आईडी से डॉक्टरों को इलाज में कैसे मदद मिलती है?
डॉक्टर मरीज की आभा आईडी से जुड़ी पुरानी बीमारियों, पूर्व जांचों और पहले चली दवाओं की पूरी हिस्ट्री तुरंत कंप्यूटर पर देख सकते हैं।

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