# देवघर के किसानों को फूलों की खेती पर मिलेगी 100 प्रतिशत सब्सिडी, राष्ट्रीय बागवानी मिशन से कमाई का नया रास्ता

> देवघर में राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत फूलों की खेती करने वाले किसानों को पूरा खर्च सरकारी अनुदान के रूप में मिलेगा। बाबा बैद्यनाथ धाम में सालभर रहने वाली फूलों की भारी मांग को देखते हुए उद्यान विभाग ने यह पहल की है।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-10-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/deoghar-ke-kisanon-ko-phulon-ki-kheti-para-milegi-100-pratishata-sabsidi-national-horticulture-mission-se-kamai-ka-naya-rasta-42608 · **Language:** Hindi
**Tags:** देवघर, फूलों की खेती, राष्ट्रीय बागवानी मिशन, कृषि सब्सिडी, झारखंड किसान, फ्लोरीकल्चर

पारंपरिक अनाज की फसलों पर निर्भर रहने वाले किसानों के लिए खेती की बढ़ती लागत और अनिश्चित मुनाफा लंबे समय से एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों में महीनों की कड़ी मेहनत और भारी लागत लगाने के बाद भी कई बार किसानों को उनकी उपज का वाजिब दाम नहीं मिल पाता। इस स्थिति को बदलने के लिए अब फसल विविधीकरण यानी बागवानी और फ्लोरीकल्चर को एक टिकाऊ समाधान के रूप में देखा जा रहा है। सीमित जोत वाले किसान भी अपनी छोटी जमीन पर फूलों की पैदावार कर बेहतर आर्थिक लाभ हासिल कर सकते हैं। झारखंड के देवघर जिले में यह पहल खासतौर पर कारगर साबित हो रही है, जहां धार्मिक महत्व के कारण फूलों की भारी खपत हर दिन बनी रहती है।

## धार्मिक महत्व के कारण देवघर में फूलों की भारी खपत
देवघर को प्रसिद्ध तीर्थस्थल बाबा बैद्यनाथ की पावन नगरी के रूप में जाना जाता है। यहां स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन और विशेष पूजा-अर्चना के लिए पूरे देश से रोजाना हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। धार्मिक अनुष्ठानों और दैनिक पूजा में फूलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है, जिसके चलते स्थानीय बाजार में फूलों की मांग कभी कम नहीं होती। श्रद्धालुओं की जरूरतों के कारण विशेष रूप से गेंदा फूल की खपत सबसे अधिक देखी जाती है।

पूजा-पाठ के अलावा वैवाहिक समारोहों, सामाजिक और धार्मिक उत्सवों, पार्टियों और मंडप सजावट के कार्यों में भी सुगंधित और सजावटी फूलों की सतत आवश्यकता रहती है। गेंदा के साथ-साथ गुलाब, रजनीगंधा, जरबेरा और अन्य किस्म के फूलों का कारोबार भी यहां काफी तेजी से बढ़ रहा है। स्थानीय स्तर पर ऐसी मजबूत खपत मौजूद होने के कारण किसानों को अपनी कटी हुई फसल बेचने के लिए दूर की मंडियों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, बल्कि गृह जिले में ही उन्हें तुरंत खरीदार और उचित मूल्य मिल जाता है।

## राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत शत-प्रतिशत सरकारी मदद
इस बड़े बाजार अवसर को किसानों की आमदनी में बदलने के लिए सरकार राष्ट्रीय बागवानी मिशन के माध्यम से फ्लोरीकल्चर को बढ़ावा दे रही है। देवघर प्रखंड के प्रखंड कृषि पदाधिकारी शशांक शेखर के अनुसार, उद्यान विभाग की ओर से किसानों को फूलों की खेती शुरू करने के लिए 100 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। इस व्यवस्था के अंतर्गत किसान को फूलों की खेती के लिए अपनी जेब से शुरुआती निवेश या जरूरी लागत वहन नहीं करनी पड़ती, क्योंकि निर्धारित योजना के तहत संपूर्ण अनिवार्य खर्च विभाग स्वयं उठाता है।

इस सरकारी सहायता का लाभ उठाने के लिए प्राथमिक शर्त यह है कि आवेदक किसान के पास अपनी निजी कृषि भूमि होनी चाहिए। जिन काश्तकारों के पास उपयुक्त जमीन उपलब्ध है और वे पारंपरिक खेती के ढर्रे से बाहर निकलकर अपनी पारिवारिक आय को बढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए यह व्यवस्था एक सुरक्षित वित्तीय संबल प्रदान करती है।

## आवेदन की प्रक्रिया और जरूरी कागजी दस्तावेज
योजना में शामिल होकर अनुदान का लाभ लेने के इच्छुक किसानों को एक तय प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरना होता है। आवेदन पत्र के साथ किसान को अपना आधार कार्ड और सक्रिय मोबाइल नंबर संलग्न करना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त भूमि के स्वामित्व को प्रमाणित करने के लिए जमीन का रकबा, खाता संख्या और खसरा से संबंधित राजस्व विवरण स्पष्ट रूप से दर्ज करना होता है।

आवेदन प्रपत्र भरने के बाद उस पर स्थानीय जनप्रतिनिधि अथवा प्रखंड कृषि पदाधिकारी या बीटीएम जैसे सक्षम सरकारी अधिकारियों के हस्ताक्षर और सत्यापन कराए जाते हैं। औपचारिक सत्यापन पूरा होने के उपरांत यह आवेदन उद्यान विभाग के कार्यालय में जमा कर दिया जाता है। विभाग के अधिकारी भूमि दस्तावेजों और मौके की जांच प्रक्रिया पूरी करते हैं, जिसके बाद चयनित लाभार्थी किसान के खेत में योजना के प्रावधानों के अनुसार फूलों की खेती शुरू कराई जाती है।

## ग्रामीण युवाओं और काश्तकारों के लिए स्थानीय आजीविका
यह पहल केवल खेती के तरीके को बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी आजीविका तैयार करने का एक सशक्त जरिया बन रही है। बाबा मंदिर की उपस्थिति से देवघर में फूलों की बारहमासी मांग पहले से ही सुनिश्चित है, जिससे किसानों के सामने विपणन का जोखिम लगभग समाप्त हो जाता है। शत-प्रतिशत सब्सिडी मिलने से किसानों पर कर्ज या आर्थिक नुकसान का डर नहीं रहता। ऐसे में जिले के युवाओं और काश्तकारों के लिए यह योजना पलायन रोके रखने और अपने ही गांव-जिले में सम्मानजनक आमदनी जुटाने का एक अत्यंत व्यावहारिक माध्यम बनकर उभर रही है।

## इसका आप पर असर
देवघर में फूलों की खेती पर मिलने वाली शत-प्रतिशत सरकारी सब्सिडी से किसानों को बिना पूंजी लगाए नकदी फसल उगाने और हर दिन नकद आमदनी हासिल करने का सीधा अवसर मिलेगा।

- **देवघर में:** स्थानीय किसानों को अपनी जेब से खर्च किए बिना सरकारी खर्च पर गेंदा, गुलाब और रजनीगंधा उगाने की सुविधा मिलेगी। मंदिर में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के कारण वे अपनी उपज सीधे स्थानीय बाजार में बेचकर हर महीने पक्की कमाई कर सकेंगे।
- **झारखंड और अन्य क्षेत्रों में:** पारंपरिक धान-गेहूं उगाने वाले काश्तकार कम जमीन में बागवानी फसलों का मॉडल अपनाकर फसल विविधीकरण की ओर बढ़ सकते हैं। इससे मौसम की मार और अनाज के उतार-चढ़ाव वाले दामों पर उनकी आर्थिक निर्भरता काफी कम होगी।
- **आवेदन करने वाले किसानों के लिए:** योजना का लाभ पाने के लिए किसान के पास अपनी जमीन और खसरा-खतौनी के वैध कागजात होने आवश्यक हैं। योग्य किसान अपने आधार कार्ड और ब्लॉक अधिकारियों के हस्ताक्षर के साथ उद्यान विभाग में तुरंत आवेदन जमा कर सकते हैं।
- **ग्रामीण युवाओं के लिए:** कृषि क्षेत्र में अपना काम शुरू करने के इच्छुक युवाओं को बिना किसी कर्ज के स्वरोजगार स्थापित करने का मौका मिलेगा। वे फूलों के उत्पादन से लेकर स्थानीय माला-फूल आपूर्ति और सजावट के कारोबार में अपनी भागीदारी बढ़ा सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
पारंपरिक अनाज की खेती में बढ़ती लागत और घटते मुनाफे को देखते हुए सरकार ने किसानों को फसल विविधीकरण से जोड़ने के लिए यह कदम उठाया है। देवघर में स्थित प्रसिद्ध तीर्थस्थल के कारण फूलों की भारी स्थानीय मांग मौजूद है, जिसे भुनाने के लिए यह वित्तीय सहायता दी जा रही है।

- **पारंपरिक फसलों में कम लाभ:** धान और गेहूं की खेती में अत्यधिक मेहनत और खाद-बीज की लागत के बावजूद किसानों को पर्याप्त आर्थिक मुनाफा नहीं मिल पा रहा था। नकदी फसलों के अभाव में छोटे किसानों की आमदनी लगातार सीमित बनी हुई थी।
- **देवघर का विशाल धार्मिक बाजार:** द्वादश ज्योतिर्लिंग होने की वजह से देवघर के बाबा मंदिर में सालभर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। पूजा-पाठ, उत्सवों और वैवाहिक आयोजनों में गेंदा और अन्य फूलों की निरंतर खपत होने के कारण स्थानीय स्तर पर तैयार बाजार उपलब्ध है।
- **सरकारी प्रोत्साहन और वित्तीय संबल:** किसानों को शुरुआती लागत और जोखिम से बचाने के लिए राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत 100 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान किया गया। इससे बिना आर्थिक बोझ के किसान आधुनिक बागवानी अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. देवघर में फूलों की खेती पर कितनी सरकारी सब्सिडी मिल रही है?
राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत उद्यान विभाग द्वारा किसानों को फूलों की खेती के लिए 100 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है।

### 2. इस योजना का लाभ लेने के लिए मुख्य पात्रता क्या है?
योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक किसान के पास अपनी निजी कृषि योग्य जमीन होना अनिवार्य है।

### 3. देवघर में किन फूलों की मांग सबसे ज्यादा रहती है?
बाबा बैद्यनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना के कारण गेंदा फूल की मांग सर्वाधिक रहती है, जबकि शादी और आयोजनों के लिए गुलाब, रजनीगंधा और जरबेरा की भी अच्छी मांग है।

### 4. आवेदन के लिए किन जरूरी दस्तावेजों की आवश्यकता होगी?
किसानों को आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और अपनी जमीन का रकबा, खाता व खसरा विवरण आवेदन पत्र के साथ देना होगा।

### 5. आवेदन पत्र पर किन अधिकारियों के हस्ताक्षर आवश्यक हैं?
आवेदन पर स्थानीय जनप्रतिनिधि अथवा प्रखंड कृषि पदाधिकारी या बीटीएम जैसे सक्षम सरकारी अधिकारी के हस्ताक्षर कराने होते हैं।

### 6. आवेदन सत्यापन के बाद आगे की प्रक्रिया क्या होती है?
हस्ताक्षरित आवेदन उद्यान विभाग में जमा होता है, जहां जमीन और दस्तावेजों की जांच पूरी करने के बाद विभाग की देखरेख में फूलों की खेती कराई जाती है।

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