देवघर के किसानों को सलाह, सितंबर में नर्सरी की एक चूक से बर्बाद हो सकती है सब्जियों की पूरी फसल देवघर में सर्दी की सब्जियों के लिए किसान नर्सरी तैयार करने में जुटे हैं, लेकिन कृषि विशेषज्ञ वकील यादव की मानें तो सही तकनीक न अपनाने पर महंगे हाइब्रिड बीज भी बेकार जा सकते हैं। झारखंड के देवघर जिले में किसान अभी से ठंड के मौसम की सब्जियों की तैयारी में जुट गए हैं। कुछ ही हफ्तों में तापमान गिरना शुरू होगा और बाजार में टमाटर, फूलगोभी, पत्तागोभी और मिर्च जैसी सब्जियों की मांग तेजी से बढ़ेगी। सर्दी के इस सीजन में सही समय पर अच्छी नर्सरी तैयार करने वाले किसान ही बेहतर उत्पादन और ज्यादा मुनाफा कमा पाते हैं, और इसके लिए सितंबर का महीना सबसे अहम माना जाता है, क्योंकि इसी दौरान पौध तैयार करने का काम शुरू होता है जो अगले कुछ हफ्तों में खेत तक पहुंचनी है। महंगे हाइब्रिड बीज खरीदने के बाद भी क्यों बिगड़ जाता है खेल देवघर में कई किसान इन दिनों नर्सरी तैयार करने में लगे हैं, लेकिन एक आम गलती अक्सर उनकी पूरी मेहनत और पैसा दोनों बर्बाद कर देती है। किसान बाजार से महंगे और अच्छी क्वालिटी वाले हाइब्रिड बीज तो खरीद लेते हैं, मगर नर्सरी तैयार करने के सही तरीके को नजरअंदाज कर देते हैं। नतीजा यह होता है कि कई बीज अंकुरित ही नहीं हो पाते, जबकि कुछ पौधे शुरुआती अवस्था में ही गलकर बर्बाद हो जाते हैं। इससे किसानों को दोहरा झटका लगता है, एक तरफ बीज पर खर्च की गई रकम बेकार चली जाती है और दूसरी तरफ आगे चलकर फसल की पैदावार पर भी सीधा असर पड़ता है। कई बार तो किसानों को यह अंदाजा भी नहीं होता कि नुकसान की असली वजह बीज नहीं बल्कि नर्सरी की तैयारी में हुई चूक है। कृषि विशेषज्ञ बोले, पहले नर्सरी को मजबूत बनाएं देवघर के कृषि विशेषज्ञ वकील यादव का कहना है कि सब्जियों की खेती से अच्छी कमाई का पूरा गणित नर्सरी की गुणवत्ता पर टिका होता है। स्वस्थ और मजबूत पौधा ही आगे चलकर बेहतर फसल और ज्यादा उत्पादन दे सकता है। उनके मुताबिक किसान अक्सर सिर्फ बीज की कीमत और किस्म पर ध्यान देते हैं, जबकि नर्सरी तैयार करने की प्रक्रिया को उतनी गंभीरता से नहीं लेते, और यही छोटी सी चूक बाद में बड़े नुकसान की वजह बन जाती है। उनका कहना है कि नर्सरी में तैयार पौधे जितने स्वस्थ होंगे, खेत में रोपाई के बाद उनकी बढ़वार उतनी ही तेज और मजबूत होगी। इसलिए किसानों को बीज की खरीद के साथ-साथ यह भी सीखना जरूरी है कि नर्सरी को किस तरीके से तैयार किया जाए। रेज्ड बेड और प्रो-ट्रे, नर्सरी तैयार करने के दो तरीके वकील यादव के अनुसार सब्जियों की नर्सरी मुख्य रूप से दो तरीकों से तैयार की जाती है। पहला तरीका पारंपरिक है, जिसमें खेत में उठी हुई क्यारी यानी रेज्ड बेड बनाकर उसमें बीज बोए जाते हैं। दूसरा और अपेक्षाकृत नया तरीका प्रो-ट्रे में नर्सरी तैयार करने का है, जिसे उन्होंने किसानों के लिए ज्यादा फायदेमंद बताया। प्रो-ट्रे की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह पोर्टेबल होती है, यानी जरूरत पड़ने पर इसे एक जगह से दूसरी जगह आसानी से खिसकाया जा सकता है। अगर लगातार तेज बारिश हो रही हो और पौधों के भीगकर खराब होने का डर हो, तो किसान प्रो-ट्रे को झटपट किसी छांव वाली या सुरक्षित जगह पर रख सकते हैं, जिससे नाजुक पौधे बारिश और अन्य नुकसान से बचे रहते हैं। पारंपरिक क्यारी में यह सुविधा नहीं मिलती, क्योंकि एक बार बीज बो देने के बाद पूरी क्यारी को मौसम की मार से बचाना आसान नहीं होता। जड़ों को कम नुकसान, इसलिए तेज होती है ग्रोथ रेज्ड बेड में तैयार पौधों के साथ एक दिक्कत यह रहती है कि रोपाई के वक्त जड़ों को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती है। पौधों को क्यारी से बाहर निकालते समय जड़ टूट सकती है या मिट्टी से अलग होने पर पौधे को झटका लग सकता है, जिसका सीधा असर उसकी सेहत और आगे की ग्रोथ पर पड़ता है। इसके मुकाबले प्रो-ट्रे में तैयार पौधों को मिट्टी समेत आसानी से बाहर निकाला जा सकता है, इसलिए जड़ें ज्यादातर सुरक्षित बनी रहती हैं। यही वजह है कि खेत में रोपाई के तुरंत बाद ऐसे पौधे जल्दी संभल जाते हैं, नई मिट्टी में जल्दी जड़ पकड़ लेते हैं और उनकी ग्रोथ भी रेज्ड बेड के पौधों के मुकाबले काफी बेहतर देखी जाती है। इससे फसल जल्दी तैयार होने की संभावना भी बढ़ जाती है। किसानों के लिए जरूरी सलाह कृषि विशेषज्ञ के मुताबिक अगर किसान ठंड के मौसम की सब्जियों से अच्छी कमाई करना चाहते हैं, तो उन्हें शुरुआत नर्सरी से ही सही तरीके से करनी होगी। मजबूत जड़ और स्वस्थ पौधा ही आगे चलकर अच्छी फलन की नींव बनते हैं। इसलिए सलाह दी जा रही है कि सितंबर में नर्सरी तैयार करते वक्त जल्दबाजी या लापरवाही से बचें और जहां संभव हो, प्रो-ट्रे विधि अपनाएं। थोड़ी सी सतर्कता और सही तकनीक अपनाकर किसान कमजोर पौधों की वजह से होने वाले नुकसान से बच सकते हैं और ठंड के सीजन में सब्जियों की बेहतर पैदावार के साथ-साथ अच्छा मुनाफा भी कमा सकते हैं। महंगे बीज खरीदना भर काफी नहीं है, असली फर्क नर्सरी की देखभाल और सही तकनीक चुनने से ही पड़ता है। इसका आप पर असर यह सलाह सीधे तौर पर उन किसानों की जेब पर असर डालती है जो ठंड के मौसम में सब्जियों की खेती से कमाई करते हैं। • भारत में: टमाटर, फूलगोभी, पत्तागोभी और मिर्च जैसी सब्जियां उगाने वाले किसानों को सितंबर में ही नर्सरी पर ध्यान देना होगा। समय पर सही तरीका न अपनाने से बीज पर किया गया खर्च बेकार जा सकता है और आगे चलकर उत्पादन भी घट सकता है। • देवघर, झारखंड में: यहां के किसान अभी नर्सरी तैयार करने में जुटे हैं, जिन्हें प्रो-ट्रे विधि अपनाने से बारिश और जड़ों को होने वाले नुकसान से बचाव में मदद मिल सकती है, जिससे स्थानीय फसल सुरक्षित रहने की संभावना बढ़ती है। • बीज पर होने वाला खर्च: महंगे हाइब्रिड बीज खरीदने वाले किसानों को नर्सरी की गलत तकनीक से सीधा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है, क्योंकि कई बीज अंकुरित ही नहीं हो पाते। • फसल के समय पर असर: कमजोर पौधों की रोपाई से फसल की बढ़वार धीमी हो सकती है, जिससे बाजार में सब्जी पहुंचाने में देरी हो सकती है और सही समय पर अच्छे दाम मिलने का मौका छूट सकता है। ऐसा क्यों हुआ पौधों के खराब होने के पीछे बीज की क्वालिटी नहीं, बल्कि नर्सरी तैयार करने का गलत तरीका मुख्य वजह बताई गई है। • गलत तकनीक: किसान महंगे हाइब्रिड बीज खरीदने के बाद नर्सरी तैयार करने के सही तरीके पर ध्यान नहीं देते, जिससे कई बीज अंकुरित होने से पहले ही खराब हो जाते हैं। • जड़ों को नुकसान: रेज्ड बेड यानी परंपरागत क्यारी में तैयार पौधों को रोपाई के समय क्यारी से निकालने पर जड़ें टूट सकती हैं या मिट्टी से अलग होने पर पौधे को झटका लगता है। • मौसम का असर: लगातार बारिश होने पर खुली क्यारी में तैयार नाजुक पौधे भीगकर सड़ सकते हैं, क्योंकि उन्हें आसानी से किसी सुरक्षित जगह ले जाना संभव नहीं होता। • जानकारी की कमी: कई किसान बीज की कीमत और किस्म पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन नर्सरी प्रबंधन की बारीकियों की जानकारी न होने से यही गलती बार-बार दोहराते रहते हैं। सवाल-जवाब 1. नर्सरी तैयार करने के लिए सबसे अहम महीना कौन सा माना जाता है? कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक सितंबर का महीना ठंड के मौसम की सब्जियों की नर्सरी तैयार करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। 2. किसान अक्सर कौन सी गलती कर बैठते हैं? महंगे हाइब्रिड बीज खरीदने के बावजूद कई किसान नर्सरी तैयार करने के सही तरीके पर ध्यान नहीं देते, जिससे बीज अंकुरित नहीं होते या पौधे शुरुआती अवस्था में ही गलकर खराब हो जाते हैं। 3. सब्जियों की नर्सरी किन तरीकों से तैयार की जा सकती है? मुख्य रूप से दो तरीकों से, रेज्ड बेड यानी उठी हुई क्यारी में और प्रो-ट्रे में। 4. प्रो-ट्रे नर्सरी का सबसे बड़ा फायदा क्या है? प्रो-ट्रे पोर्टेबल होती है, जिसे तेज बारिश या खराब मौसम में आसानी से सुरक्षित या छायादार जगह पर रखा जा सकता है। 5. रेज्ड बेड नर्सरी में क्या दिक्कत आती है? रोपाई के समय पौधों को क्यारी से निकालने पर जड़ें टूट सकती हैं या पौधे को झटका लग सकता है, जिससे उनकी सेहत प्रभावित होती है। 6. प्रो-ट्रे में तैयार पौधे रोपाई के बाद कैसा प्रदर्शन करते हैं? इन पौधों को मिट्टी समेत निकाला जाता है, इसलिए जड़ों को कम नुकसान होता है और खेत में रोपाई के बाद इनकी ग्रोथ तेज और बेहतर होती है। 7. यह सलाह किसने दी है? देवघर के कृषि विशेषज्ञ वकील यादव ने यह जानकारी दी है। 8. ठंड के मौसम में मुख्य रूप से कौन सी सब्जियां उगाई जाती हैं? टमाटर, फूलगोभी, पत्तागोभी और मिर्च जैसी सब्जियां ठंड के मौसम में किसानों के लिए अच्छी कमाई का जरिया बनती हैं। https://trendkia.com/jharkhand/deoghar-ke-kisanon-ko-salaha-sitnbara-men-narsari-ki-eka-chuka-se-barbada-ho-sakati-hai-sabjiyon-ki-puri-phasala-29511 TrendKia — Har trend, sabse pehle.