देवघर में बिना ऑपरेशन के बची फंसी गैस से बेहाल गाय की जान, डॉक्टर ने ट्यूब डालकर दूर की इमरजेंसी देवघर में कई दिनों से बिना खाए-पिए फूले पेट से परेशान गाय को प्रांतीय पशु चिकित्सालय लाया गया, जहाँ सीनियर पशु चिकित्सक डॉ. सुनील तिवारी ने बिना ऑपरेशन के ट्यूब के जरिए पेट की गैस निकालकर जान बचाई। देवघर स्थित कोठिया गाँव के किसान कामेश्वर यादव की एक दुधारू गाय कई दिनों से खाना-पीना पूरी तरह छोड़ चुकी थी और उसका पेट लगातार फूलता जा रहा था। जब मवेशी की हालत बिगड़ने लगी और वह बेहाल हो गई, तब उसे देवघर के प्रांतीय पशु चिकित्सालय ले जाया गया। वहां तैनात सीनियर पशु चिकित्सक डॉ. सुनील तिवारी ने बिना किसी बड़े ऑपरेशन के एक विशेष ट्यूब प्रक्रिया के जरिए गाय के पेट से फंसी हुई गैस और जमा कचरा बाहर निकाल दिया, जिससे पशु की जान बच सकी। गाय के पेट की बनावट और इमरजेंसी की स्थिति वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. सुनील तिवारी ने बताया कि गाय जैसे जुगाली करने वाले मवेशियों के पेट की संरचना बेहद जटिल होती है, जो अलग-अलग हिस्सों में बंटी रहती है। इसमें सबसे पहला और बड़ा हिस्सा रुमेन कहलाता है। पशु जो भी चारा या भोजन खाता है, वह सबसे पहले इसी रुमेन में जाकर जमा होता है और पाचन की शुरुआती प्रक्रिया यहीं से शुरू होती है। जब रुमेन में भारी मात्रा में गैस बनने लगती है या फिर कोई अवांछित सामग्री वहां फंस जाती है, जिसे मवेशी स्वाभाविक तरीके से बाहर नहीं निकाल पाता, तो पेट में अत्यधिक दबाव बनने लगता है। पशु चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को एक अति गंभीर इमरजेंसी माना जाता है। पेट में अत्यधिक हवा भरने के कारण मवेशी छटपटाने लगता है, उसका खाना-पीना एकदम बंद हो जाता है और समय पर उपचार न मिलने पर उसकी जान पर बन आती है। मुंह के रास्ते पाइप डालकर ऐसे दूर किया गया दबाव कोठिया के किसान की गाय का परीक्षण करने के बाद डॉक्टरों ने पारंपरिक शल्य चिकित्सा या बड़े ऑपरेशन के बजाय नलिका विधि से इलाज करने का निर्णय लिया। इस प्रक्रिया के तहत मवेशी के मुंह के जरिए एक विशेष चिकित्सा पाइप को धीरे-धीरे पेट यानी रुमेन तक पहुंचाया गया। पाइप के पेट के अंदर पहुंचते ही वहां फंसी हुई अत्यधिक गैस और रुकावट पैदा करने वाला कचरा बाहर निकलने लगा। जैसे-जैसे रुमेन के भीतर जमा गैस बाहर निकली, पेट का अंदरूनी दबाव तेजी से कम होने लगा। दबाव हटते ही बेहाल दिख रही गाय को तत्काल राहत मिली और उसकी स्थिति स्थिर होने लगी। इस आपातकालीन इलाज के जरिए बिना किसी चीर-फाड़ के मवेशी की गंभीर समस्या को दूर कर दिया गया। आसपास मौजूद लोग इस अनोखी और त्वरित इलाज प्रक्रिया को देखकर चकित रह गए। देरी होने पर सांस लेने में आती है दिक्कत पशु चिकित्सकों का कहना है कि अगर पेट फूलने यानी अफरा की स्थिति में तुरंत इलाज न मिले, तो यह बेहद घातक साबित हो सकता है। रुमेन में अत्यधिक गैस और दबाव बढ़ने से पेट का आकार काफी फैल जाता है। यह फैला हुआ पेट आसपास के अन्य आंतरिक अंगों, विशेषकर फेफड़ों और मध्यपट पर भारी दबाव डालता है। फेफड़ों पर दबाव पड़ने के कारण पशु को सांस लेने में भारी कठिनाई होने लगती है और उसका दम घुटने का खतरा पैदा हो जाता है। यही कारण है कि मवेशी के पेट में सूजन या फैलाव दिखते ही तुरंत डॉक्टरी सलाह ली जानी चाहिए। किसी भी पशुपालक को इसे मामूली समस्या मानकर समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। बरसात के मौसम में चारे और कचरे का खतरा डॉ. सुनील तिवारी के अनुसार, बारिश के दिनों में पशुओं में पेट फूलने और गैस बनने की शिकायतें काफी बढ़ जाती हैं। मानसून के दौरान हरा चारा अक्सर गीला, नमीयुक्त या सड़ने की कगार पर होता है। ऐसा दूषित या अत्यधिक नमी वाला चारा खाने से पेट में तेजी से फर्मेंटेशन यानी किण्वन होता है, जिससे रुमेन में भारी मात्रा में गैस का निर्माण होता है। इसके अलावा, खुले में चरने वाले मवेशी अक्सर कचरे के ढेर से प्लास्टिक, पॉलीथीन या अन्य पचने में कठिन वस्तुएं निगल लेते हैं। यह प्लास्टिक पेट में जाकर रुमेन के रास्ते को अवरुद्ध कर देता है, जिससे गैस और अपचित भोजन बाहर नहीं निकल पाता। इसलिए पशुपालकों को बरसात के दिनों में विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए और मवेशियों को केवल साफ-सुथरा, सूखा और स्वच्छ दाना-पानी ही देना चाहिए। पशुपालकों के लिए जरूरी सावधानियां और हिदायत पशु स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने मवेशी पालकों को सलाह दी है कि वे अपने मवेशियों के दैनिक व्यवहार पर लगातार नजर रखें। यदि कोई गाय या भैंस अचानक दाना या चारा खाना बंद कर दे, उसका पेट सामान्य आकार से अधिक फूला हुआ दिखे, वह बहुत अधिक बेचैनी दिखाए या फिर बार-बार उठे और बैठे, तो इसे बीमारी का स्पष्ट संकेत मानना चाहिए। डॉक्टरों ने पशुपालकों को कड़ा निर्देश दिया है कि वे घर पर खुद से किसी भी तरह की पाइप, छड़ी या घरेलू उपकरण को मवेशी के पेट में डालने का प्रयास बिल्कुल न करें। ऐसा अनाड़ी प्रयास पशु की अन्नप्रणाली या पेट को फाड़ सकता है, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो सकती है। ऐसी आपात स्थिति पैदा होने पर तुरंत योग्य पशु चिकित्सक से ही संपर्क करना चाहिए। इसका आप पर असर यह समाचार भारत भर के पशुपालकों और किसानों के लिए मवेशियों की स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर बेहद महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है। • भारत में: मानसूनी मौसम के दौरान खराब या गीले चारे से पशुओं में अफरा और रुमेन गैस बनने का जोखिम काफी बढ़ जाता है। सही समय पर पशु चिकित्सक की मदद लेने से मवेशी की जान बचाई जा सकती है और पशुपालकों को बड़े आर्थिक नुकसान से राहत मिलती है। • देवघर में: स्थानीय प्रांतीय पशु चिकित्सालय में त्वरित इलाज की सुविधा उपलब्ध होने से किसान बिना महंगे ऑपरेशन के अपने मवेशियों का आपातकालीन उपचार करा सकते हैं। कोठिया और आसपास के पशुपालक अब पशुओं में पेट फूलने के लक्षण दिखते ही तुरंत चिकित्सा केंद्र से संपर्क कर सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ गाय का पेट अत्यधिक फूलने और स्थिति बिगड़ने के पीछे शारीरिक बनावट और मानसूनी खान-पान से जुड़े मुख्य कारण रहे हैं। • रुमेन में गैस की फंसावट: मवेशी का पहला पेट यानी रुमेन भोजन जमा करने का स्थान होता है, जहाँ रुकावट या अत्यधिक फर्मेंटेशन से गैस बाहर नहीं निकल पाती और पेट गुब्बारे की तरह फूलने लगता है। • बरसात में खराब चारे का सेवन: मानसून में गीला, नमीयुक्त या सड़ा हुआ हरा चारा खाने से पेट के अंदर तेजी से गैस बनती है, जिससे अफरा की स्थिति पैदा होती है। • कचरा और प्लास्टिक निगलना: खुले में चरने वाले मवेशी अक्सर प्लास्टिक या कचरा निगल लेते हैं, जो रुमेन के निकासी रास्ते को बंद कर देता है और इमरजेंसी पैदा कर देता है। सवाल-जवाब 1. देवघर में गाय के पेट फूलने का क्या कारण था? गाय के पहले पेट यानी रुमेन में अत्यधिक गैस और पचने में कठिन सामग्री फंस जाने के कारण उसका पेट फूल गया था। 2. डॉक्टर ने गाय का इलाज किस तरीके से किया? सीनियर पशु चिकित्सक डॉ. सुनील तिवारी ने बिना ऑपरेशन के गाय के मुंह के जरिए पेट तक ट्यूब डालकर फंसी गैस और कचरा बाहर निकाला। 3. बरसात के मौसम में मवेशियों में अफरा क्यों बढ़ता है? बरसात में गीला, नमीयुक्त चारा जल्दी सड़ने लगता है और प्लास्टिक कचरा निगलने से पेट में गैस व रुकावट पैदा होती है। 4. पशुपालकों को पेट फूलने पर क्या सावधानी बरतनी चाहिए? पशुपालकों को तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए और खुद घर पर पेट में पाइप या उपकरण डालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। https://trendkia.com/jharkhand/deoghar-men-bina-pareshana-ke-bachi-phnsi-gaisa-se-behala-gaya-ki-jana-doktara-ne-tyuba-dalakara-dura-ki-imarajensi-31168 TrendKia — Har trend, sabse pehle.